लखनऊ- यूपी में गोशालाओं से आएगी नई कृषि क्रांति, योगी सरकार गो संरक्षण को रोजगार और खेती से जोड़ेगी, IIT कानपुर की तकनीक से बनेगा ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर, गोशालाएं संरक्षण केंद्र के साथ आर्थिक ताकत बनेंगी, माइक्रो एंटरप्रेन्योरशिप मॉडल से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने की तैयारी
महायुद्ध फिलहाल टला: अरब देशों की अपील पर ट्रंप ने रोका ईरान पर हमला; लेकिन सेना अभी भी ‘अलर्ट’ पर
वॉशिंगटन: दुनिया पर मंडरा रहा महायुद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने ईरान पर कल होने वाले नियोजित सैन्य हमले को स्थगित कर दिया है। यह बड़ा फैसला मध्य पूर्व के शक्तिशाली देशों के नेताओं के अनुरोध के बाद लिया गया है।
अरब नेताओं की मध्यस्थता रंग लाई
राष्ट्रपति ट्रंप ने जानकारी दी कि कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था। इन नेताओं ने ट्रंप से हमले को रोकने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान में गंभीर बातचीत (Negotiations) चल रही है और उनकी राय में एक ऐसा समझौता हो सकता है जो अमेरिका और पूरे मध्य पूर्व के लिए स्वीकार्य होगा।
‘नो न्यूक्लियर वेपन्स’ की शर्त पर होगा समझौता
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि इस संभावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे। अरब देशों के नेताओं के प्रति सम्मान जताते हुए ट्रंप ने अपने युद्ध सचिव पेट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डेनियल केन को हमले की योजना पर फिलहाल रोक लगाने का निर्देश दिया है।
सेना को ‘मोमेंट नोटिस’ पर तैयार रहने का आदेश
हालांकि हमला टल गया है, लेकिन ट्रंप ने तेवर अभी भी सख्त रखे हैं। उन्होंने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि यदि बातचीत के जरिए कोई स्वीकार्य समाधान नहीं निकलता है, तो वे एक क्षण के नोटिस पर ईरान पर पूर्ण और बड़े पैमाने पर हमले (Large scale assault) के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
इस घटनाक्रम के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें इन वार्ताओं के नतीजों पर टिकी हैं, क्योंकि कूटनीति विफल होने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला हुआ है।
महायुद्ध फिलहाल टला: अरब देशों की अपील पर ट्रंप ने रोका ईरान पर हमला; लेकिन सेना अभी भी ‘अलर्ट’ पर
वॉशिंगटन: दुनिया पर मंडरा रहा महायुद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने ईरान पर कल होने वाले नियोजित सैन्य हमले को स्थगित कर दिया है। यह बड़ा फैसला मध्य पूर्व के शक्तिशाली देशों के नेताओं के अनुरोध के बाद लिया गया है।
अरब नेताओं की मध्यस्थता रंग लाई
राष्ट्रपति ट्रंप ने जानकारी दी कि कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था। इन नेताओं ने ट्रंप से हमले को रोकने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान में गंभीर बातचीत (Negotiations) चल रही है और उनकी राय में एक ऐसा समझौता हो सकता है जो अमेरिका और पूरे मध्य पूर्व के लिए स्वीकार्य होगा।
‘नो न्यूक्लियर वेपन्स’ की शर्त पर होगा समझौता
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि इस संभावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे। अरब देशों के नेताओं के प्रति सम्मान जताते हुए ट्रंप ने अपने युद्ध सचिव पेट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डेनियल केन को हमले की योजना पर फिलहाल रोक लगाने का निर्देश दिया है।
सेना को ‘मोमेंट नोटिस’ पर तैयार रहने का आदेश
हालांकि हमला टल गया है, लेकिन ट्रंप ने तेवर अभी भी सख्त रखे हैं। उन्होंने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि यदि बातचीत के जरिए कोई स्वीकार्य समाधान नहीं निकलता है, तो वे एक क्षण के नोटिस पर ईरान पर पूर्ण और बड़े पैमाने पर हमले (Large scale assault) के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
एलन मस्क को बड़ा झटका: OpenAI के खिलाफ मुकदमा खारिज, कोर्ट ने कहा- ‘केस करने में बहुत देर कर दी’
ओकलैंड (कैलिफोर्निया): दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क को कानूनी मोर्चे पर करारा झटका लगा है। कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत ने OpenAI और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन के खिलाफ मस्क द्वारा दायर मुकदमे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मस्क ने अपनी शिकायत दर्ज कराने में बहुत अधिक समय लगा दिया, जिससे दावे की समय-सीमा (Statute of Limitations) समाप्त हो गई।
‘चैरिटी चुराना सही नहीं’: मस्क के गंभीर आरोप
एलन मस्क, जो OpenAI के सह-संस्थापक रहे हैं, ने आरोप लगाया था कि सैम ऑल्टमैन और उनकी टीम ने मानवता के लाभ के लिए एक ‘गैर-लाभकारी’ (Non-profit) संस्था बनाने के साझा विजन के साथ धोखा किया है। मस्क का दावा था कि उन्होंने शुरुआती वर्षों में कंपनी में 38 मिलियन डॉलर का निवेश किया था, लेकिन ऑल्टमैन ने उनकी पीठ पीछे इसे पैसे कमाने वाली मशीन में बदल दिया। मस्क ने सुनवाई के दौरान जूरी से कहा, “किसी चैरिटी को चुराना ठीक नहीं है”।
जूरी ने केवल 2 घंटे में सुनाया फैसला
तीन हफ्ते तक चले इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल में नौ सदस्यीय जूरी ने केवल दो घंटे की चर्चा के बाद मस्क के खिलाफ फैसला सुनाया। जज यवोन गोंजालेज रोजर्स ने जूरी के इस फैसले को स्वीकार करते हुए दावों को खारिज कर दिया। इस मुकदमे के दौरान सिलिकॉन वैली के दो दिग्गजों के बीच की कड़वाहट खुलकर सामने आई। मस्क चाहते थे कि ऑल्टमैन को बोर्ड से हटाया जाए और मुनाफे का पैसा चैरिटी में दिया जाए।
OpenAI का पलटवार: ‘अंगूर खट्टे हैं’
दूसरी ओर, OpenAI और सैम ऑल्टमैन ने इन आरोपों को “खट्टे अंगूर” (Sour Grapes) करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि OpenAI को हमेशा के लिए नॉन-प्रॉफिट रखने का कोई वादा कभी नहीं किया गया था। ऑल्टमैन ने गवाही देते हुए कहा कि मस्क ने यह केस इसलिए किया क्योंकि वह तेजी से बढ़ती इस एआई कंपनी पर अपना एकतरफा नियंत्रण नहीं पा सके। उन्होंने यह भी कहा कि मस्क का सार्वजनिक रूप से हमला करना उनके लिए “बेहद दर्दनाक” रहा है।
852 अरब डॉलर की बनी कंपनी
इस कानूनी लड़ाई ने दुनिया की सबसे मूल्यवान एआई कंपनी के शुरुआती दिनों पर भी रोशनी डाली। आज OpenAI की वैल्यू 852 अरब डॉलर आंकी गई है और यह इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ (IPO) की ओर बढ़ रही है। ट्रायल में यह भी खुलासा हुआ कि कंपनी के सह-संस्थापक ग्रेग ब्रोकमेन की हिस्सेदारी अब लगभग 30 अरब डॉलर की हो चुकी है।
ईद से पहले CM योगी का कड़ा रुख- ‘सड़कों पर नमाज बर्दाश्त नहीं, नियमों का पालन करें या परिणाम भुगतें’
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर नमाज अदा करने को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर अलग-अलग पालियों में धर्म से संबंधित गतिविधियां की जानी चाहिए। आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार सड़क जाम करके नमाज या किसी अन्य धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा कि सड़कें आने-जाने के लिए होती हैं, तमाशा खड़ा करने के लिए नहीं। किसी को सड़क जाम करने का अधिकार किसने दिया? लोग अपने निर्धारित धार्मिक स्थलों पर जाकर प्रार्थना करें। मुख्यमंत्री ने ईद-उल-अजहा से कुछ दिन पहले यह टिप्पणी की है, जो 28 मई को मनाई जाएगी।
‘नियम मानने होंगे, जगह कम है तो जनसंख्या पर नियंत्रण रखें’
आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय से पालियों में नमाज अदा करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर आपके घरों में सभी लोगों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, तो आपको अपनी संख्या (जनसंख्या) पर नियंत्रण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके अलावा यदि आप इस व्यवस्था में रहना चाहते हैं, तो इसके नियमों और कानूनों का पालन करना होगा। कानून का राज चलेगा। अगर नमाज पढ़ना जरूरी है तो पालियों में पढ़िए। हम आपको प्रार्थना करने से नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़कों पर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।
संवाद पहली प्राथमिकता, वरना टकराव के परिणाम भुगतने की चेतावनी
आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों पर इस तरह का व्यवधान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सड़कों पर अराजकता फैलने नहीं देंगे। यदि आप शांतिपूर्वक मानते हैं तो ठीक है। अगर नहीं मानेंगे तो हमें दूसरे कदम उठाने पड़ेंगे। हमारी प्राथमिकता संवाद करना है। यदि आप हमारी बात सुनते हैं तो बहुत अच्छा। अगर नहीं, तो टकराव के परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहिए। उन्होंने कहा कि बरेली में कुछ लोगों ने हमारी सहनशीलता की परीक्षा लेने की कोशिश की थी और उन्होंने हमारी सहनशक्ति की सीमा भी देख ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शासन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है और जाति, क्षेत्र, भाषा या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना काम किया है। उन्होंने कहा कि हमने कहा है कि राज्य की पूरी आबादी, हर एक निवासी, हमारे परिवार का हिस्सा है। हमें समग्र विकास के उद्देश्य से काम करना है।
‘चुनाव आते ही चढ़ा भाजपा पर धार्मिक रंग’- सपा का पलटवार
मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं और जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा का नजरिया धार्मिक रंग में रंग जाता है। चांद ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाने के लिए हैं, जिनमें शिक्षक अभ्यर्थियों को नौकरी न मिलना, बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं तथा किसानों की समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से कहा कि समाजवादी पार्टी तैयार है। पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) भाजपा और उसकी विभाजनकारी एवं नफरत की राजनीति का मुकाबला करने के लिए तैयार है। समाजवादी पार्टी या कोई अन्य विपक्षी दल भाजपा की नकारात्मक राजनीति को हावी नहीं होने देगा।

