Monday, July 20, 2026
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बिहार में 18 जिलों के पासपोर्ट और डाकघरों को उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

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पटना। बिहार में पटना स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, जीपीओ और मनेर पासपोर्ट कार्यालय सहित प्रदेश के करीब डेढ़ दर्जन जिलों के डाकघरों और पासपोर्ट सेंटरों को आरडीएक्स और साइनाइड गैस बम से उड़ाने की धमकी मिली है।

यह धमकी एक ईमेल के जरिए भेजी गई, जिसके बाद पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीमों और बम निरोधक दस्ते ने संबंधित स्थानों पर सर्च आपरेशन चलाया।

हालांकि, गहन जांच के बाद कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय पटना को प्राप्त हुए इस धमकी भरे ईमेल में एक विशेष समय सीमा का उल्लेख किया गया था।

मेल में लिखा था कि दोपहर 1:15 बजे तीन साइनाइड गैस आरडीएक्स बमों के जरिए इन दफ्तरों को उड़ा दिया जाएगा। इसके साथ ही मेल के विषय में एक अभिनेत्री द्वारा धार्मिक टिप्पणी किए जाने का हवाला देते हुए सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई थी और एक खास वर्ग के लोगों को वहां से हट जाने की बात कही गई थी।

यह ईमेल पटना के अलावा गया, वैशाली, बक्सर, बेतिया, मोतिहारी, औरंगाबाद, नवादा, नालंदा, समस्तीपुर, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, बेगूसराय, सहरसा और सुपौल जैसे जिलों के कार्यालयों को लक्षित करके भेजा गया था।

खोजी कुत्तों और सुरक्षा उपकरणों से हुई जांच

पटना के सिटी एसपी वेस्ट संकेत कुमार स्वयं पुलिस बल के साथ मनेर पासपोर्ट कार्यालय और डाकघर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि एहतियात के तौर पर तुरंत खोजी कुत्तों और सुरक्षा उपकरणों की मदद से चप्पा-चप्पा छाना गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह किसी शरारती तत्व की हरकत लग रही है। पुलिस और साइबर सेल की टीमें ईमेल के आईपी एड्रेस और इसे भेजने वाले का सुराग लगाने में जुट गई हैं। इस पूरी कार्रवाई के दौरान राहत की बात यह रही कि किसी भी कार्यालय में कामकाज बाधित नहीं हुआ और सभी सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं।

डाक विभाग ने जारी किया अलर्ट, सतर्कता बरतने के निर्देश

दूसरी ओर, डाक विभाग ने भी इस धमकी को लेकर अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। डाक विभाग के सहायक निदेशक राजीव कुमार द्वारा एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है।

विभाग का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह मामला एक अफवाह या होक्स प्रतीत होता है, लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

इसके मद्देनजर बिहार सर्किल के सभी वरिष्ठ अधिकारियों, मंडल प्रमुखों और संबंधित पोस्टमास्टरों को चौबीसों घंटे आवश्यक सतर्कता बरतने तथा तय सुरक्षा मानकों के अनुसार तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

‘हो गया रिटायरमेंट? कटवाली नाक’, Rohit Sharma के शतक के बाद पूर्व क्रिकेटर ने आलोचकों पर जमकर निकाली भड़ास

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नई दिल्‍ली। रोहित शर्मा के लॉर्ड्स में शतक के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्‍मद कैफ ने ‘हिटमैन’ के आलोचकों पर तंज कसा है। भारत और इंग्‍लैंड के बीच दूसरे वनडे के बाद खबर आई थी कि रोहित शर्मा के लिए लॉर्ड्स वनडे आखिरी साबित हो सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि प्रबंधन अब रोहित से आगे बढ़ना चाहता है और भारतीय बल्‍लेबाज को इसकी सूचना दी जा चुकी है। शुरुआती दो वनडे में फ्लॉप होने के बाद रोहित शर्मा दबाव में भी थे। हालांकि, रोहित ने शतक जड़कर संन्‍यास की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया।

कैफ ने लिए मजे

भारतीय टीम के पूर्व बल्‍लेबाज मोहम्‍मद कैफ ने अपने इंस्‍टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्‍होंने कहा, ‘हो गया रिटायरमेंट? कटवाली नाक। रोहित शर्मा का रिटायरमेंट वो खुद तय करेगा। उसका हक बनता है। इतना हिंदुस्‍तान के लिए उसने काम किया है। वो अपनी मर्जी से जाएगा। अब समझ लो इतना दबाव है कि भैया हो गया आप जाओ, रिटायरमेंट लो। उस दबाव में लॉर्ड्स में उनके बल्‍ले से शतक आया इस मैच में।’

रोहित की उम्‍दा पारी

बता दें कि रोहित शर्मा ने इंग्‍लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में 110 गेंदों में 138 रन की पारी खेली। उन्‍होंने अपनी शतकीय पारी के दौरान 17 चौके और पांच छक्‍के जमाए। भारतीय टीम हालांकि, इंग्‍लैंड द्वारा मिले 388 रन के लक्ष्‍य का पीछा करने में असफल रही और 27 रन से मैच व सीरीज गंवा बैठी।

रोहित का साथ दो

बहरहाल, कैफ ने वीडियो में यह भी कहा कि रोहित पर दबाव नहीं डाले व कप्‍तान और टीम प्रबंधन का समर्थन मिले, तो वो बहुत कुछ कर सकते हैं। पूर्व क्रिकेटर ने कहा, ‘अगर मान लो शुभमन गिल बतौर कप्‍तान ये बोलदे कि 2027 वर्ल्‍ड कप में रोहित भाई मुझे चाहिए। अगर मीडियो में खुल कर बोले। अगर बीसीसीआई बोले कि रोहित शर्मा पर कोई उंगली न उठाएं, हम उसके साथ खडे़ हैं। जब तक वो चाहेगा वो खेलेगा।’

उन्‍होंने आगे कहा, ‘अगर ये बयान आ जाए तो समझ लो वो क्‍या कर बैठेगा। अभी तो दबाव में है कि कोई उसके साथ खड़ा नहीं है। सब इंतजार कर रहे हैं कि भाई आउट हो और बाहर करें। उस दबाव में उनके बल्‍ले से शतक आया है। जब उसको एहसास होगा कि उसके साथ उसकी टीम खड़ी है, कप्‍तान खड़ा है, कोच खड़ा है, बीसीसीआई खड़ा है, वो भाई हिमालय पर्वत चढ़ जाएगा। जान न्‍योछावर कर देगा, ऐसा खिलाड़ी है वो। उत्‍तर मिल गया है। उम्‍मीद है कि अब यहां से आप सब शांति बनाके रखेंगे और उसको तसल्‍ली से खेलने देंगे।’

‘गैराज से चलने वाले लॉ कॉलेजों को मान्यता चिंताजनक’, सुप्रीम कोर्ट ने BCI के दोहरे रवैये पर गहरी नाराजगी जताई

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नई दिल्ली। न्याय के मंदिर में जब कानून के ज्ञाताओं की साख पर सवाल उठे, तो सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख अख्तियार करना स्वाभाविक है।

कोर्ट ने देश में लॉ कॉलेजों की गिरती गुणवत्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के दोहरे रवैये पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। इसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गैराज जैसी जगहों से चलने वाले लॉ कॉलेजों को बीसीआई द्वारा मान्यता देना बेहद चिंताजनक विषय है।

बीसीआई के दोहरे रवैये पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

यह मामला 50 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट के.आर. सुदर्शन से जुड़ा है, जिन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की है। उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित होने के कारण तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल ने वकील के रूप में उनका नामांकन रोक दिया।

जब बीसीआई के वकील ने इस मामले में ‘व्यापक चिंता’ की बात कही, तो जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ भड़क गई। पीठ ने बीसीआई के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि काउंसिल एक तरफ आपराधिक मामलों के दोषियों को नामांकन दे रही है, वहीं दूसरी तरफ लंबित मामलों वाले योग्य उम्मीदवारों का रास्ता रोक रही है।

कानून के दायरे से बाहर पाबंदी और राहत की गुहार

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि देश में गंभीर अपराधों के दोषियों तक का नामांकन हुआ है, जबकि याचिकाकर्ता पर महज एक कंपनी को सलाह देने का आरोप है।

पीठ ने माना कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24ए के तहत केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर नामांकन रोकना गैर-कानूनी है। हाईकोर्ट के पुराने निर्देशों के आधार पर बीसीआई द्वारा बनाए गए नियमों को कोर्ट ने कानून के दायरे से बाहर बताया। इस मामले की वैधानिकता अब मद्रास हाईकोर्ट की पांच जजों की बड़ी पीठ के समक्ष लंबित है।

देहरादून के राजेश मल्ल आए राष्ट्रीय सुर्खियों में, जंतर-मंतर पर अभिजीत दिपके का तुड़वाया अनशन

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देहरादून। दिल्ली के जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की भूख हड़ताल समाप्त कराने वाले देहरादून के राजेश मल्ल एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं।

दिपके ने उनका हाथ पकड़कर जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया।

दून के चंद्रबनी निवासी राजेश मल्ल वही शख्स हैं, जिन्होंने अपनी बेटी रिया कुमारी थापा की आत्महत्या के बाद शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की लड़ाई को अपना मिशन बना लिया।

बेटी की मौत के बाद वह लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं।

दिल्ली में युवाओं के प्रदर्शन के दौरान राजेश की मौजूदगी खास चर्चा का विषय रही। अभिजीत दिपके का अनशन समाप्त कराने की तस्वीरें सामने आने के बाद एक बार फिर उनकी भूमिका सुर्खियों में है।

आसपा कार्यकर्ताओं को किया हाउस अरेस्ट

रुड़की। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामलों के विरोध में चल रहे धरने और संसद मार्च में शामिल होने जा रहे आजाद समाज पार्टी (आसपा) व भीम आर्मी के पदाधिकारियों को पुलिस ने रुड़की में हाउस अरेस्ट कर लिया। पुलिस रविवार देर रात 12 बजे से ही सक्रिय हो गई थी और सुबह घर से निकलते ही इन नेताओं को रोक लिया गया।

Dark Zone बनने से कैसे बच रही दिल्ली? DDA के 7 बायोडायवर्सिटी पार्क जमीन में पहुंचा रहे 1100 मिलियन गैलन पानी

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नई दिल्ली। लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण ‘डार्क ज़ोन’ की तरफ बढ़ रही देश की राजधानी के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के सात बायोडायवर्सिटी पार्क बड़े ‘रीचार्जिंग स्टेशन’ बनकर उभरे हैं।

इन पार्कों में विकसित की गईं 20 से अधिक छोटी-बड़ी झीलें और जलाशय मानसून में लगभग 1100 मिलियन गैलन वर्षा जल को जमीन के भीतर उतारने (भूजल संभरण) का माध्यम बन रहे हैं। विज्ञानियों के मुताबिक, कंक्रीट के चलते सीमेंटेड हो चुकी दिल्ली में ये पार्क उन गिने- चुने प्राकृतिक सिंक में से हैं, जहां वर्षा का पानी सीधे जमीन के भीतर पहुंच रहा है।

कंक्रीट की परत के बीच ‘रीचार्ज विंडो’

राजधानी का एक बड़ा हिस्सा निर्माण कार्यों के कारण ”वाटरप्रूफ” हो चुका है, जिससे वर्षा जल जमीन में जाने के बजाय नालों के रास्ते बह जाता है। इसी वर्षा जल को सहेजने के लिए इन पार्कों में दिल्ली की मूल अरावली और यमुना खादर की वनस्पतियों को विज्ञानी तरीके से पुनर्जीवित किया गया है।

इन स्वदेशी पेड़ों की जड़ें मिट्टी को स्पंज की तरह बनाती हैं, जिससे पानी बहने के बजाय तुरंत जमीन में समा जाता है। यहां भूजल संभरण सामान्य जल संचयन पिट्स की तुलना में कई गुना ज्यादा है, क्योंकि यहां ढलान और प्राकृतिक जल धाराओं को इस तरह मोड़ा गया है कि पार्क की एक-एक बूंद अंदर जलाशयों में जाकर ठहरे।

यूपी में 24,617 दिव्यांग बच्चों को मिलेंगे सहायक उपकरण, हर जिले में लगेगा कैंप

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लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले 24,617 विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण और यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए सभी जिलों में 176 मेजरमेंट और वितरण कैंप लगाए जाएंगे। इस पर 9.84 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इसके क्रियान्वयन के लिए राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।

जिलों में एलिम्को, कानपुर के सहयोग से पहले बच्चों का परीक्षण और मापन (मेजरमेंट) किया जाएगा। इसके बाद चिन्हित बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण और यंत्र वितरित किए जाएंगे।

18 अगस्त से चार दिसंबर तक मेजरमेंट कैंप और वितरण कैंप की अलग-अलग तिथियां निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक कैंप के लिए जिला-वार लक्ष्य भी तय कर दिए गए हैं।

स्पेशल एजुकेटर्स (विशेष शिक्षक) और फिजियोथेरेपिस्ट को उनकी आवंटित न्याय पंचायतों के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मेजरमेंट कैंप तक लाने, उनका परीक्षण कराने व चिह्नित बच्चों को वितरण कैंप में सहायक उपकरण और यंत्र उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जरूरतमंद बच्चों को समय पर आवश्यक सहायक संसाधन उपलब्ध कराकर उनकी शिक्षा और दैनिक जीवन को अधिक सुगम बनाना है।

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PHOTOS: जंतर-मंतर से संसद तक मार्च, गोरिल्ला युद्ध की तर्ज पर चलता रहा पुलिस और प्रदर्शनकारियों में संघर्ष

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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर से संसद तक मार्च में प्रदर्शनकारी कई घंटों तक सुरक्षा बलों को छकाते रहे। इस दौरान सीजेपी नेतृत्व के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों के नेतृत्व को नकार कर आगे बढ़ते प्रदर्शनकारियों को मनाने में पुलिस को काफी मुश्किलें आई। अंतिम मोर्चे पर लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।

तब जाकर भीड़ तितर-बितर हुई। अन्यथा एक समय ऐसा लग रहा था कि लक्ष्य संसद भवन बस कुछ कदमों की दूरी पर है।
मेट्रो, बस तथा अपने वाहनों से भोर से ही प्रदर्शनकारियों का जत्था जंतर-मंतर की तरफ बढते चला आ रहा था। सुबह सात बजते-बजते पूरा आंदोलन स्थल प्रदर्शनकारियोें से भर गया था।

Local Toll Pass : NHAI ने शुरू की दो सर्विसेज, टोल प्लाजा के 20 Km के दायरे में रहने वालों को मिलेगा फायदा

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले स्थानीय निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधा शुरू की है।

अब किसी भी टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग राजमार्ग यात्रा मोबाइल एप के माध्यम से घर बैठे ही लोकल टोल पास खरीद सकेंगे। इस पास की मदद से संबंधित टोल प्लाजा से पूरे महीने असीमित बार आवाजाही की जा सकेगी।

अब तक स्थानीय पास बनवाने के लिए लोगों को संबंधित टोल प्लाजा पर स्वयं जाकर आवेदन करना पड़ता था और पात्रता साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते थे।

लोकल टोल पास से समय की होगी बचत

नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी, जिससे समय की बचत होगी और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

एनएचएआई के अनुसार, डिजिटल लोकल टोल पास की शुरुआत फिलहाल दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा से की गई है। आने वाले महीनों में इस सुविधा का विस्तार देशभर के अन्य पात्र टोल प्लाजाओं तक किया जाएगा।

कैसे करेगा काम?

नई व्यवस्था में डिजिलाकर और वाहन जैसे सरकारी डिजिटल प्लेटफार्म के साथ सहमति-आधारित एकीकरण (इंटीग्रेशन) किया गया है। इसके माध्यम से आवेदक का पता, वाहन नंबर और उससे जुड़े फास्टैग का सत्यापित विवरण स्वतः प्राप्त हो जाता है।

वहीं, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआइएस) आधारित सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आवेदक वास्तव में संबंधित टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहता है। इससे दस्तावेजों की मैनुअल जांच की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तथा सटीक बनती है।

यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए मार्गमित्र हेल्प सेंटर लांच

एनएचएआई ने यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए मार्गमित्र हेल्प सेंटर भी लांच किया है, जिसे राजमार्ग यात्रा एप में ही शामिल किया गया है।

यह एक इंटेलिजेंस डिजिटल सहायता प्लेटफार्म है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करने वाले जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, शिकायत दर्ज करा सकते हैं और विभिन्न सेवाओं से जुड़ी सहायता ले सकते हैं।

मार्गमित्र की खास बात यह है कि यात्री अपनी समस्या या सवाल भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में टाइप या बोलकर पूछ सकते हैं। यह प्लेटफार्म फास्टैग रिचार्ज, केवाईसी, रिफंड की स्थिति, वार्षिक और लोकल पास जैसी सेवाओं से संबंधित तुरंत जानकारी उपलब्ध कराता है।

यदि किसी मामले में विभागीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है तो शिकायत स्वतः संबंधित विभाग तक पहुंच जाती है। शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की प्रगति रियल टाइम में देख सकते हैं और समाधान से असंतुष्ट होने पर अपील भी दर्ज कर सकते हैं।

सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की कर सकते हैं रिपोर्ट

इसके अलावा, मार्गमित्र के माध्यम से फास्टैग ब्लैकलिस्ट स्थिति की जांच, लंबित ई-नोटिस देखना तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर खराब वाहन, अतिक्रमण या सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों की रिपोर्ट भी की जा सकती है।

एनएचएआइई ने यात्रियों से अपील की है कि वे एंड्रायड और आइओएस प्लेटफार्म पर उपलब्ध राजमार्ग यात्रा एप डाउनलोड कर इसकी डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाएं, ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा अधिक सुरक्षित, सरल और सुविधाजनक बन सके।

‘तो जारी रहेगा आंदोलन’, क्या हैं CJP की 3 मांगें, नड्डा से 10 मिनट की मुलाकात में क्या हुआ?

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नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ आंदोलन और संसद मार्च के बीच सोमवार को सरकार के साथ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पहली औपचारिक बातचीत हुई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आंदोलनकारी संगठन के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रांका से अपने आवास पर मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर जाने पर उतारू थे, लेकिन पुलिस उन्हें संसद मार्ग पर रोकने की कोशिश कर रही थी।

नड्डा से प्रदर्शनकारियों की 10 मिनट की मुलाकात

नड्डा के जरिए सरकार की ओर से बातचीत शुरू होना अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार सरकार ने आंदोलनकारियों से सीधे संवाद की पहल की है। हालांकि सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार की ओर से नड्डा को सीजेपी के साथ बात करने को कहा गया था। सुबह 11.50 पर शुरू हुई बैठक करीब दस मिनट चली। बताया जाता है कि नड्डा ने उनसे कहा कि आप अपनी मांगे लिखित रूप में दें।

सूत्रों के अनुसार सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने वहीं दूसरे कमरे में जाकर पूरे विचार विमर्श के ज्ञापन तैयार किया और शाम को फिर से नड्डा के साथ मुलाकात में उन्होंने वह ज्ञापन सौंपा।

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4 बजे तक दिया लिखित ज्ञापन

नड्डा ने खुद भी शाम तीन बजे पोस्ट कर जानकारी दी और कहा- ‘आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया था और सुबह 11.50 से हमारी बातचीत जारी है। उनकी ओर से लगभग 4 बजे मुझे लिखित ज्ञापन दिया गया।’

यह पोस्ट इस लिहाज से विशेष था क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का संदेश भेजा गया था और सरकार तत्काल तैयार हो गई।

बाद जिसके बाद सीजेपी नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगों का लिखित ज्ञापन नड्डा को सौंपा है। उन्होंने दावा किया कि नड्डा ने भरोसा दिया कि वह इन मांगों पर सरकार के भीतर चर्चा करेंगे।

इसके लिए उन्होंने कुछ मोहलत भी मांगी है। सूत्रों के अनुसार सरकार भी आंदोलन को लेकर अंदरूनी स्तर पर विचार-विमर्श कर रही है और आगे कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

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क्या हैं CJP की तीन प्रमुख मांगे?

सीजेपी ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने और नीट पेपर लीक के साथ प्रतियोगी परीक्षा विवादों से जुड़े उन सभी छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिन्होंने आत्महत्या की है

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सीजेपी का कहना है कि युवाओं का शिक्षा व्यवस्था से भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नीट-2026 पेपर लीक, सीबीएसई 12वीं के पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी, सीयूईटी परीक्षा में देरी तथा अन्य परीक्षा संबंधी अव्यवस्थाओं ने यह संकेत दिया है कि मौजूदा व्यवस्था बड़े सुधार की मांग कर रही है। सीजेपी का दावा है कि शिक्षा मंत्रालय इन समस्याओं को रोकने और सुधार लागू करने में विफल रहा है।

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6 जून को शुरू हुआ था आंदोलन

सीजेपी के ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि आंदोलन की शुरुआत 6 जून को हुई थी और उसके बाद देश के कई शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किए गए। 20 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ, जिसमें बाद में शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर वांगचुक ने 28 जून से आमरण अनशन शुरू किया।

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लखनऊ में AISA का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा:परिवर्तन चौक से जिला कार्यालय तक विरोध; पेपर लीक के खिलाफ उठाई आवाज

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लखनऊ में सोमवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने विरोध में प्रदर्शन किया। संगठन ने परिवर्तन चौक से जिला कार्यालय तक मार्च निकालकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने की मांग उठाई। इस दौरान छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई।

दिल्ली आंदोलन के समर्थन में होगा प्रदर्शन

AISA ने बताया कि यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, छात्रों के हितों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर यह मार्च निकाला जा रहा है।