Monday, February 23, 2026
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कलयुगी बेटियों ने पिता को क्यों उतारा मौत के घाट? पुलिस के सामने कबूला जुर्म

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मुजफ्फरनगर: जिले के भोपा इलाके में सोमवार को एक दलित व्यक्ति का शव उसके घर से बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में उसकी दो बेटियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि मोरना गांव में रामप्रसाद (55) का शव उसके घर से बरामद किया गया। उसके गले पर चोट के निशान पाए गए हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण क्षेत्र) आदित्य बंसल ने कहा कि पुलिस ने रामप्रसाद की बेटी कोमल (32) और एक अन्य 16 वर्षीय बेटी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल धारदार हथियार और कोमल के खून के धब्बे वाले कपड़े भी बरामद किए हैं।

बंसल ने बताया, ”दोनों आरोपियों ने अपराध को स्वीकार किया कि उन्होंने कई तरह की पाबंदियां लगाने और बात-बात पर टोकने के कारण तंग आकर अपने पिता को मार डाला।” पुलिस अधिकारी के अनुसार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि रविवार रात भी पिता के साथ दोनों का विवाद हुआ और जब वह सोने चले गए तभी उन्होंने रामप्रसाद की हत्या कर दी।

डच राजनीति में नए युग की शुरुआत: नीदरलैंड को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री ! रॉब जेटन ने ली शपथ

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International Desk:  नीदरलैंड में नई गठबंधन सरकार ने आधिकारिक रूप से शपथ ग्रहण कर ली है। देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में Rob Jetten ने पदभार संभाला। यह नई सरकार कई दलों के गठबंधन से बनी है और राजनीतिक स्थिरता तथा सहमति की नई शुरुआत का संकेत देती है। पिछले कुछ वर्षों में डच संसद में गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान देखने को मिली थी, जिससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।प्रधानमंत्री जेटन ने संकेत दिया है कि उनकी प्राथमिकता संसद में सहयोग और सहमति का माहौल बनाना होगा। वे देश के भीतर राजनीतिक संतुलन स्थापित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीदरलैंड की मजबूत भूमिका बहाल करना चाहते हैं।

 

नई सरकार का लक्ष्य यूरोपीय संघ में नीदरलैंड की प्रभावशाली भूमिका को फिर से स्थापित करना है। जेटन ने कहा है कि वे यूरोपीय सहयोग को मजबूत करने के लिए अपने समकक्ष नेताओं से जल्द बातचीत करेंगे।सरकार ने स्पष्ट किया है कि रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन को डच समर्थन जारी रहेगा। यह समर्थन राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग के रूप में बना रहेगा। नई कैबिनेट में विभिन्न गठबंधन दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। विदेश नीति, रक्षा और वित्त जैसे अहम मंत्रालयों में अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का संतुलित तरीके से सामना किया जा सके।

कौन हैं रॉब जेटन?
रॉब जेटन  डेमोक्रेट्स 66 (D66) पार्टी से जुड़े हैं और पहले जलवायु व ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं। यूरोपीय सहयोग, हरित नीतियों और सहमति की राजनीति उनके प्रमुख एजेंडा हैं। वे यूक्रेन समर्थन और मजबूत EU भूमिका के पक्षधर हैं। Rob Jetten नीदरलैंड के एक प्रमुख उदारवादी नेता हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई। रॉब जेटन का जन्म 1987 में हुआ। उन्होंने सार्वजनिक प्रशासन (Public Administration) की पढ़ाई की और छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे।  रॉब जेटन के नेतृत्व में गठित यह सरकार डच राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है। युवा नेतृत्व, यूरोपीय सहयोग पर जोर और वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय रुख इन सबके जरिए नीदरलैंड आने वाले वर्षों में अपनी अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा।

‘एपस्टीन फाइल्स में आपका नाम सामने आना शर्म की बात’, राहुल गांधी ने Video जारी कर पीएम पर साधा निशाना

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नेशनल डेस्कः कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री, उनके कुछ मंत्रियों और उनके करीबी मित्रों के नाम एपस्टीन फाइल्स में सामने आए हैं। उन्होंने इसे “शर्म की बात” बताया।

वीडियो में क्या बोले राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो पोस्ट किया। वीडियो के साथ कैप्शन में उन्होंने लिखा:, “मोदी जी, आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात मैं आपको बताता हूं। एपस्टीन फाइल्स में आपका, आपके मंत्री और आपके मित्र का साथ में नाम आना, ऐसे घिनौने अपराधी के साथ आपका नाम जुड़ा होना – ये शर्म की बात है। आपने अमेरिका के साथ जो व्यापार सौदा किया है, जिसमें आपने देश को बेच दिया – ये शर्म की बात है। हमारे देश का डेटा दे दिया। किसानों को खत्म कर दिया। कपड़ा उद्योग बर्बाद कर दिया – ये शर्म की बात है।”

 

अमेरिका में चल रहे मामलों का जिक्र

राहुल गांधी ने आगे लिखा कि कारोबारी Gautam Adani पर अमेरिका में चल रहे मुकदमे ने प्रधानमंत्री की “रातों की नींद उड़ा रखी है।” उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक कारोबारी का नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी और सरकार के वित्तीय ढांचे से जुड़ा है। राहुल ने आरोप लगाया कि 14 महीनों से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो अपने आप में “शर्म की बात” है।

अन्य उद्योगपतियों का भी जिक्र

राहुल गांधी ने अपने बयान में उद्योगपति Anil Ambani का भी नाम लिया। उन्होंने कहा, “मोदी जी, आप अपने मित्रों अनिल अंबानी, अदाणी और अपने लिए जो उचित समझें, वो कीजिए। मैं और कांग्रेस पार्टी के बब्बर शेर देश की रक्षा करते रहेंगे। एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।”

शरीर में पानी की कमी होने पर दिखते हैं ये बड़े लक्षण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

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नेशनल डेस्क: पानी हमारे शरीर के लिए जीवनदायी तत्व है। यह न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर के लगभग हर जरूरी काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार मानव शरीर का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। यही कारण है कि शरीर में पानी की कमी होने पर सेहत पर सीधा और गंभीर असर पड़ सकता है।

शरीर में पानी क्यों है जरूरी
पानी शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद करता है। यह पोषक तत्वों को कोशिकाओं तक पहुंचाता है और अपशिष्ट तथा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है। पाचन तंत्र को सही ढंग से चलाने, रक्त संचार को सुचारु रखने और जोड़ों को लचीला बनाए रखने में भी पानी की अहम भूमिका होती है। पर्याप्त पानी न मिलने पर शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होने लगती है।

किन कारणों से होती है पानी की कमी
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना इसका सबसे सामान्य कारण है। इसके अलावा अधिक पसीना आना, उल्टी-दस्त, बुखार, धूप में लंबे समय तक रहना या ज्यादा व्यायाम करना भी शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकता है। अधिक चाय, कॉफी या शराब का सेवन भी शरीर से तरल पदार्थ कम कर देता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन की समस्या जल्दी देखने को मिल सकती है, इसलिए इन वर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

पानी की कमी के लक्षण कैसे पहचानें
Lady Hardinge Medical College से जुड़े मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में पानी की कमी होने पर सबसे पहले तेज प्यास लगती है। मुंह, जीभ और होंठ सूखने लगते हैं। पेशाब की मात्रा कम हो जाती है और उसका रंग गहरा पीला दिखाई दे सकता है। थकान, कमजोरी, चक्कर आना और सिरदर्द भी सामान्य संकेत हैं। कई बार ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है और व्यक्ति सुस्ती महसूस करता है। त्वचा रूखी और बेजान दिखने लगती है। कुछ लोगों में दिल की धड़कन तेज हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। बच्चों में रोते समय आंसू कम आना और असामान्य सुस्ती भी डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। यदि लक्षण गंभीर हों तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

पानी की कमी से होने वाली संभावित समस्याएं
लंबे समय तक शरीर में पानी की कमी बनी रहे तो इसका असर किडनी पर पड़ सकता है। पेशाब से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं और पथरी बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा कब्ज, लो ब्लड प्रेशर और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी जैसी हालत भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए समय रहते लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।

बचाव के लिए क्या करें
डिहाइड्रेशन से बचने के लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी पीते रहना बेहतर होता है। गर्मी के मौसम में या व्यायाम के दौरान तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी जैसे पेय भी शरीर में पानी और जरूरी लवणों की पूर्ति में मदद कर सकते हैं। अत्यधिक चाय, कॉफी और शराब से परहेज करना चाहिए। संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या भी शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होती है।

NEET-PG 2025 कट-ऑफ विवाद: कम परसेंटाइल पर बवाल, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई

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नेशनल डेस्क: NEET-PG 2025 के क्वालीफाइंग परसेंटाइल में बड़ी कटौती को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। Ministry of Health and Family Welfare ने अदालत में दायर हलफनामे में कहा है कि कट-ऑफ कम करने से डॉक्टरों की क्लिनिकल दक्षता या मरीजों की सुरक्षा प्रभावित नहीं होती।

मंत्रालय के अनुसार, NEET-PG परीक्षा का मकसद न्यूनतम चिकित्सीय योग्यता तय करना नहीं है, क्योंकि यह योग्यता MBBS डिग्री और एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करने के बाद पहले ही प्रमाणित हो जाती है। NEET-PG का उद्देश्य सीमित पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटों के लिए उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट तैयार करना है।

9,621 सीटें खाली रहने के बाद लिया गया फैसला

हलफनामे में बताया गया कि राउंड-2 काउंसलिंग के बाद ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में कुल 9,621 सीटें खाली रह गईं। इनमें 5,213 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की थीं। कुल लगभग 70,000 PG सीटें उपलब्ध थीं, जबकि परीक्षा में 2,24,029 अभ्यर्थी शामिल हुए। AIQ के तहत करीब 31,742 सीटें थीं। कट-ऑफ में बदलाव 13 जनवरी 2026 को National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) की नोटिस के जरिए लागू किया गया और यह राउंड-3 काउंसलिंग से प्रभावी हुआ।

सरकार के मुख्य तर्क

  • NEET-PG स्कोर रिलेटिव परफॉर्मेंस पर आधारित होते हैं, इन्हें क्लिनिकल अयोग्यता का पैमाना नहीं माना जा सकता।
  • सभी अभ्यर्थी पहले से लाइसेंसधारी MBBS डॉक्टर हैं और स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने के पात्र हैं।
  • PG कोर्स तीन वर्ष का सुपरवाइज्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें अंत में MD/MS परीक्षा में कम से कम 50% अंक अनिवार्य हैं।
  • कट-ऑफ में कमी एक नीतिगत निर्णय है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक संसाधनों से बनी सीटों को खाली जाने से बचाना है।
  • यह फैसला निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि जनहित में लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की चिंता: क्वालिटी पर न पड़े असर

मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court of India की बेंच—जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे—ने केंद्र से पूछा कि इतनी बड़ी कटौती से PG मेडिकल शिक्षा के मानकों पर असर नहीं पड़ेगा, यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि सामान्य श्रेणी में 50वें परसेंटाइल से 7वें परसेंटाइल तक और आरक्षित वर्गों में 0 परसेंटाइल तक कटौती की गई है। कुछ श्रेणियों में नेगेटिव स्कोर (-40) तक के अभ्यर्थियों को पात्र बनाने का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि PG स्तर पर गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं पिंकी आनंद और गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच कट-ऑफ घटाना न्यायालय द्वारा तय सिद्धांतों के विपरीत है। उनका कहना है कि इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य के अधिकार और मेडिकल शिक्षा के मानकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

आगे क्या?

अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत यह तय करेगी कि कट-ऑफ में की गई कटौती को बरकरार रखा जाए या इसमें संशोधन आवश्यक है। यह फैसला न केवल हजारों अभ्यर्थियों, बल्कि देश की मेडिकल शिक्षा प्रणाली पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

फिल्म जगत ने खोया एक और स्टार, मशहूर एक्टर ने 53 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, शोक में डूबी इंडस्ट्री …..

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UP Desk : हॉलीवुड अभिनेता Eric Dane का 53 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवार की ओर से जारी बयान में बताया गया कि वह एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) जैसी गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की पुष्टि 19 फरवरी 2026 को की गई।

ALS से लंबी लड़ाई के बाद निधन
मैगज़ीन People की रिपोर्ट के अनुसार, एरिक डेन की मौत ALS से संबंधित जटिलताओं के कारण हुई। परिवार ने कहा कि अभिनेता ने अपने अंतिम क्षण पत्नी, करीबी दोस्तों और अपनी दो बेटियों-बिली और जॉर्जिया के साथ बिताए।

परिवार का भावुक बयान
परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया, “भारी मन से हम एरिक डेन के निधन की सूचना दे रहे हैं। ALS के साथ उन्होंने साहसिक लड़ाई लड़ी। वह एक समर्पित पति, स्नेही पिता और प्रेरणादायक इंसान थे। इस कठिन समय में हम प्राइवेसी की अपेक्षा करते हैं।” परिवार ने आगे बताया कि ALS के साथ अपने सफर के दौरान एरिक जागरूकता और रिसर्च के प्रबल समर्थक बन गए थे और इस बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध थे।

पिछले साल किया था बीमारी का खुलासा
एरिक डेन ने पिछले वर्ष सार्वजनिक रूप से खुलासा किया था कि वह ALS से पीड़ित हैं। यह बीमारी दिमाग और रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करती है, जिससे मांसपेशियों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है।

टीवी करियर से मिली वैश्विक पहचान
एरिक डेन को सबसे अधिक लोकप्रियता मेडिकल ड्रामा Grey’s Anatomy में डॉ. मार्क स्लोन के किरदार से मिली। इस रोल के बाद फैंस उन्हें ‘मैकस्टीमी’ के नाम से पहचानने लगे। ‘ग्रेज़ एनाटॉमी’ के बाद उन्होंने एक्शन-ड्रामा The Last Ship में कमांडर टॉम चैंडलर की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली। हाल के वर्षों में वह चर्चित सीरीज Euphoria में भी नजर आए।

इंडस्ट्री और फैंस में शोक
एरिक डेन के निधन की खबर से हॉलीवुड इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर फैंस और सहकर्मी कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, उनके काम और व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं।

रमजान में मस्जिद सील! भड़के LU के छात्रों ने सड़क पर पढ़ी नमाज़, वीडियो वायरल

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लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ऐतिहासिक लाल बारादरी इमारत और उसमें स्थित मस्जिद के गेट को सील कर बैरिकेडिंग कर दी। इस कदम के बाद परिसर में छात्र नेताओं और मुस्लिम छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्र और मुस्लिम नेताओं ने आरोप लगाया कि रमजान में मस्जिद को सील ठीक नहीं है।

मस्जिद बंद करने पर आक्रोश
करीब 200 साल पुरानी लाल बारादरी का निर्माण 1800 ईस्वी में नवाब नसीरुद्दीन हैदर ने कराया था। यह इमारत विश्वविद्यालय की स्थापना से भी पहले की है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पूर्व सूचना मस्जिद वाले हिस्से को बंद कर दिया, जिससे आक्रोश फैल गया।

मुस्लिम छात्रों ने बाहर पढ़ी नमाज
विरोध के दौरान बड़ी संख्या में छात्र बारादरी के सामने जुटे और नारेबाजी की। जब मस्जिद का गेट बंद मिला तो मुस्लिम छात्रों ने बाहर ही नमाज अदा की। इस दौरान एक अनोखी तस्वीर सामने आई—हिंदू छात्रों ने हाथों में हाथ डालकर नमाज पढ़ रहे छात्रों के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना लिया। परिसर में यह दृश्य सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बन गया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

प्रशासन ने सुरक्षा कराणों का दिया हवाला
प्रशासन का कहना है कि लाल बारादरी की इमारत जर्जर हो चुकी है और किसी भी समय हादसा हो सकता है। रजिस्ट्रार के मुताबिक, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां संचालित बैंक, क्लब और कैंटीन को भी खाली कराया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि एएसआई को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन जवाब न मिलने पर एहतियातन बैरिकेडिंग करनी पड़ी। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया।

मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इमरान प्रतापगढ़ी से फोन पर बातचीत कर अपनी मांगें रखीं। उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी आवाज को उचित मंच तक पहुंचाया जाएगा। फिलहाल छात्र अपनी मांग पर अड़े हैं कि मस्जिद का गेट खोला जाए। प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है, लेकिन परिसर में माहौल अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।

Big BREAKING: लखनऊ में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर डबल डेकर बस पलटी, 5 की मौत, मची- चीखपुकार

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस समय हड़कंप मच गया जब एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर गोसाईगंज इलाके में एक डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 16 यात्री घायल बताए जा रहे हैं।

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लुधियाना से दरभंगा जा रही थी बस
जानकारी के मुताबिक बस लुधियाना (पंजाब) से दरभंगा (बिहार) जा रही थी। देर रात या तड़के हुए इस हादसे के पीछे प्राथमिक रूप से ड्राइवर को नींद आ जाना वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार में चल रही बस अचानक अनियंत्रित हुई और पलट गई। हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय पुलिस और राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

चालक की लापरवाही से हादसे की आशंका 
प्रशासन ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बस चालक की लापरवाही के अलावा कोई अन्य तकनीकी कारण तो जिम्मेदार नहीं था। हादसे के बाद कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया। घटना से यात्रियों और उनके परिजनों में शोक की लहर है।

कलयुगी बेटियों ने पिता को क्यों उतारा मौत के घाट? पुलिस के सामने कबूला जुर्म

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मुजफ्फरनगर: जिले के भोपा इलाके में सोमवार को एक दलित व्यक्ति का शव उसके घर से बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में उसकी दो बेटियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि मोरना गांव में रामप्रसाद (55) का शव उसके घर से बरामद किया गया। उसके गले पर चोट के निशान पाए गए हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण क्षेत्र) आदित्य बंसल ने कहा कि पुलिस ने रामप्रसाद की बेटी कोमल (32) और एक अन्य 16 वर्षीय बेटी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल धारदार हथियार और कोमल के खून के धब्बे वाले कपड़े भी बरामद किए हैं।

बंसल ने बताया, ”दोनों आरोपियों ने अपराध को स्वीकार किया कि उन्होंने कई तरह की पाबंदियां लगाने और बात-बात पर टोकने के कारण तंग आकर अपने पिता को मार डाला।” पुलिस अधिकारी के अनुसार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि रविवार रात भी पिता के साथ दोनों का विवाद हुआ और जब वह सोने चले गए तभी उन्होंने रामप्रसाद की हत्या कर दी।

WhatsApp यूजर्स सावधान! कोई चुपचाप पढ़ रहा है आपकी चैट ? ये 4 गलतियां खोल देती हैं सारी सीक्रेट बातें… ऐसे करें सिक्योर

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UP Desk : एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के बावजूद इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर यूज़र्स की प्राइवेसी कई बार उनकी अपनी छोटी-छोटी लापरवाहियों के कारण खतरे में पड़ जाती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, हाई-टेक हैकिंग से ज्यादा रोजमर्रा की गलतियां निजी चैट, बैंक ओटीपी और संवेदनशील जानकारी के लीक होने का कारण बनती हैं।

WhatsApp Web: लॉगआउट न करना बड़ा जोखिम
ऑफिस, लैपटॉप या साइबर कैफे में WhatsApp Web का उपयोग करने के बाद लॉगआउट भूल जाना आम है। ऐसे में सिस्टम पर बाद में बैठने वाला कोई भी व्यक्ति चैट एक्सेस कर सकता है।

क्या करें:
फोन में Settings > Linked Devices पर जाकर समय-समय पर जुड़े डिवाइस की जांच करें। संदिग्ध या पुराने डिवाइस को तुरंत Logout करें।

अनलॉक फोन और ‘Chat Lock’ की अनदेखी
फोन को अनलॉक छोड़ देना या किसी को बिना निगरानी के दे देना प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है। यदि ‘Chat Lock’ फीचर सक्रिय नहीं है, तो चैट हिस्ट्री आसानी से देखी जा सकती है।

क्या करें:
संवेदनशील चैट पर लंबा प्रेस कर Chat Lock सक्षम करें, ताकि बायोमेट्रिक/पासकोड के बिना चैट न खुले।

क्लाउड बैकअप की सुरक्षा में चूक
कई यूज़र्स चैट बैकअप को Google Drive या iCloud पर रखते हैं, लेकिन जुड़े ईमेल अकाउंट की सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। ईमेल अकाउंट से छेड़छाड़ होने पर बैकअप डेटा भी जोखिम में पड़ सकता है।

क्या करें:
ईमेल अकाउंट पर Two-Step Verification (2FA) अनिवार्य रूप से ऑन रखें और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें।

लॉक स्क्रीन नोटिफिकेशन से लीक होती जानकारी
लॉक स्क्रीन पर मैसेज का पूरा प्रीव्यू दिखाई देना भी प्राइवेसी के लिए जोखिम भरा है। आसपास मौजूद व्यक्ति बिना फोन अनलॉक किए मैसेज पढ़ सकता है, जिससे ओटीपी चोरी की आशंका बढ़ जाती है।

क्या करें:
फोन की Notification Settings में जाकर Show Preview बंद करें, ताकि लॉक स्क्रीन पर केवल ऐप/सेंडर का नाम दिखे।

विशेषज्ञों की सलाह
साइबर सुरक्षा के लिए केवल एन्क्रिप्शन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। डिवाइस सुरक्षा, अकाउंट वेरिफिकेशन और प्राइवेसी सेटिंग्स की नियमित जांच जरूरी है। छोटी सावधानियां आपकी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बना सकती हैं।