Saturday, July 18, 2026
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जिसे गणित में मिले थे सिर्फ 51 अंक उसी ने रचा इतिहास; पवन ने अंतरिक्ष में भारत को दिया नया आयाम, असफल युवाओं के लिए बना मिसाल

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International Desk: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब Skyroot Aerospace द्वारा विकसित विक्रम-I रॉकेट ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट है, जिसने देश के निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। इस सफलता के केंद्र में हैं पवन कुमार चंदाना-एक IITian, पूर्व ISRO वैज्ञानिक और अब सफल उद्यमी। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, क्योंकि कभी गणित में सिर्फ 51 अंक पाने वाले छात्र ने आज भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई दी है।हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े पवन बचपन से मशीनों और तकनीक को समझने में रुचि रखते थे। शुरुआत में गणित उनका मजबूत विषय नहीं था, लेकिन जिज्ञासा और लगातार मेहनत ने धीरे-धीरे विज्ञान और गणित को उनकी ताकत बना दिया।

 

करीब दो दशक पहले उन्होंने IIT खड़गपुर की प्रवेश परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की। इंजीनियरिंग के बाद उनका सपना अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने का था, जिसके चलते उन्हें ISRO में सीधे कैंपस से भर्ती मिली। ISRO में उन्होंने GSLV Mk III जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम किया और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में छह वर्षों तक रॉकेट डिजाइन और विकास का अनुभव हासिल किया। इसी दौरान उनके मन में विचार आया कि क्या भारत में निजी क्षेत्र भी विश्वस्तरीय रॉकेट बना सकता है।इसी सोच के साथ 2018 में उन्होंने साथी ISRO इंजीनियर नागा भारथ डाका के साथ Skyroot Aerospace की स्थापना की। शुरुआती दिनों में फंडिंग और भरोसा जुटाना बड़ी चुनौती थी, लेकिन कंपनी ने धीरे-धीरे भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली।

राजनाथ सिंह का पाकिस्तान को दोटूक संदेश, बोले- आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ नारा नहीं, हमारी नीति है

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नेशनल डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि देश में ही रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आए जबरदस्त उछाल के दम पर, भारत तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक सुरक्षा साझेदार के तौर पर उभर रहा है और हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सिंह ने कहा कि नयी दिल्ली ने आतंकवाद पर अपना नजरिया पूरी दुनिया के सामने साफ तौर पर रखा है और साथ ही कहा कि ”आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने का नजरिया हमारे लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई की एक नीति है।

पूरी दुनिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत की ताकत देखी 
उन्होंने कहा, ”हम आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ उसकी दहलीज पर ही नहीं, बल्कि उसके घर में घुसकर भी कार्रवाई करेंगे। पूरी दुनिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह देखा था।” रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में बने रक्षा उत्पादों का निर्यात लगभग 100 देशों को किया जा रहा है और देश के रक्षा उत्पादन का कुल मूल्य सालाना लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार बन रहा भारत 
उन्होंने कहा, ”आज भारत न केवल अपने लिए रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार भी बन रहा है। हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक, भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।” रक्षा मंत्री ने कहा कि देश 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, ”अगर कोई देश हथियारों, गोला-बारूद, नौवहन प्रणाली, मिसाइलों, रडार और ड्रोन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता भी सीमित हो जाती है। हम इसे पूरी तरह से बदलने के पक्के इरादे के साथ काम कर रहे हैं।

रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना सरकार का बड़ा कदम 
सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता भारत के उद्योगों में भरोसे का सबूत है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत करने की दिशा में मोदी सरकार ने जो ”सबसे बड़ा कदम” उठाया है, वह रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, ”रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने का हमारा नजरिया भारत की क्षमताओं पर भरोसा करने वाला है। लेकिन पिछली सरकारों का नजरिया भारत की क्षमता और काबिलियत को लेकर कुछ हद तक शक वाला था। शायद उन्हें भारत की क्षमताओं पर उतना भरोसा नहीं था, जितना हमारी सरकार को है।

मां करती है घरों में झाड़ू-पोछा, बेटी ने क्रैक कर डाला NEET, ऑटो चालक के बेटे ने भी लहराया परचम; गरीबी नहीं रोक सकी हौसलों की उड़ान

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लखनऊ/गोरखपुर : लखनऊ में घर-घर जाकर घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली महिला की बेटी और गोरखपुर के एक ऑटो रिक्शा चालक के बेटे ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं। दोनों छात्रों की सफलता अब हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

पिता को खोने के दर्द ने नीलू को बनाया डॉक्टर
गोमती नगर इलाके के एक गांव में रहने वाली नीलू ने आठवीं कक्षा में इलाज के अभाव में अपने पिता को खो दिया था। परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं था कि उनका इलाज करा सके। इसी घटना ने नीलू के जीवन की दिशा बदल दी।

नीलू ने कहा, “मेरे पिता की मौत इसलिए हुई क्योंकि हम इलाज का खर्च नहीं उठा सके। उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि डॉक्टर बनूंगी, ताकि किसी और परिवार को गरीबी की वजह से अपना प्रियजन न खोना पड़े।”

94% अंक और NEET में सफलता
नीलू ने ‘प्रेरणा बालिका स्कूल’ से पढ़ाई की, जिसे ‘स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन (SHEF)’ संचालित करता है। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए उसे छात्रवृत्ति मिली। इस वर्ष उसने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए और साथ ही नीट परीक्षा भी पास कर ली। उसे आगे की मेडिकल शिक्षा और कार्डियोलॉजिस्ट बनने के सपने को पूरा करने के लिए स्कॉलरशिप भी मिली है, जिसके तहत उसकी पढ़ाई और अन्य खर्च वहन किए जाएंगे।

मां ने समाज के दबाव के बावजूद नहीं रुकने दी पढ़ाई
नीलू की मां अस्पताल में अटेंडेंट होने के साथ-साथ घर-घर जाकर घरेलू सहायिका का काम करती हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। रिश्तेदारों और समाज के लोगों ने उन्हें बेटियों की पढ़ाई छुड़ाकर शादी कराने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने सभी दबावों को नजरअंदाज करते हुए बेटियों की शिक्षा जारी रखी। नीलू ने कहा, “मेरे शिक्षकों ने मुझे विश्वास दिलाया कि शिक्षा जिंदगी बदल सकती है। मेरी सफलता मेरे परिवार और स्कूल के लिए सबसे बड़ा उपहार है।”

शिक्षकों ने बताया मेहनत का परिणाम
‘स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन’ की संस्थापक और सीईओ उर्वशी साहनी ने कहा कि नीलू की सफलता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कठिन मेहनत का परिणाम है। वहीं, स्कूल की प्रधानाचार्य मीनाक्षी बहादुर ने उसे बेहद मेहनती छात्रा बताया।

ऑटो चालक के बेटे विशाल ने चौथे प्रयास में पाई मंजिल
गोरखपुर के ऑटो रिक्शा चालक संतोष तिवारी के बेटे विशाल तिवारी ने भी आर्थिक संघर्षों के बावजूद नीट परीक्षा में सफलता हासिल की। चौथे प्रयास में उसने 720 में से 605 अंक प्राप्त किए। विशाल ने 2022 में 12वीं पास करने के बाद बिना कोचिंग के मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की, क्योंकि परिवार कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकता था।

शादी, जिम्मेदारियां और फिर भी नहीं छोड़ा सपना
तैयारी के दौरान विशाल की शादी हो गई और बाद में वह एक बेटे का पिता भी बना। इसके बावजूद उसने डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा। आखिरकार 2024 में उसके पिता ने उधार लेकर उसे कोचिंग में दाखिला दिलाया। विशाल ने कोचिंग के साथ देर रात तक लाइब्रेरी में पढ़ाई की और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च भी उठाया। विशाल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और पत्नी के सहयोग को देते हुए कहा, “डॉक्टर बनने के बाद मैं सबसे पहले अपने पिता के लिए एक कार खरीदना चाहता हूं।”

महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा: अशोक गहलोत

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नेशनल डेस्कः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।

उन्होंने एक बयान में कहा कि वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल भारतीय लोकतंत्र पर गंभीर धब्बा है। गहलोत ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय जब अन्ना हजारे ने आंदोलन किया था, तब सरकार ने उनसे संवाद का रास्ता अपनाया था और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख स्वयं उनसे बातचीत करने गए थे।

गहलोत ने कहा, ”इसके विपरीत, आज की सरकार का रवैया बिल्कुल अलग है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे किसान आंदोलन का मामला हो, महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन का या अपने अधिकारों की मांग कर रहे पूर्व सैनिकों का, केंद्र सरकार ने हर बार विरोध करने वालों के साथ दमनात्मक रवैया अपनाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ”लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संवैधानिक विरोध नागरिकों का अधिकार होता है, लेकिन इस सरकार के दौर में उसके लिए भी जगह लगातार सिमटती जा रही है।

लोकतंत्र में संवाद होता है, जबकि तानाशाही में बल प्रयोग किया जाता है।” गहलोत ने कहा, ”आज सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल न केवल पूरी तरह अस्वीकार्य है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा भी है। पूरी दुनिया देख रही है कि महात्मा गांधी के देश भारत में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।” उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को शनिवार को अनशन के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।

महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा: अशोक गहलोत

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नेशनल डेस्कः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।

उन्होंने एक बयान में कहा कि वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल भारतीय लोकतंत्र पर गंभीर धब्बा है। गहलोत ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय जब अन्ना हजारे ने आंदोलन किया था, तब सरकार ने उनसे संवाद का रास्ता अपनाया था और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख स्वयं उनसे बातचीत करने गए थे।

गहलोत ने कहा, ”इसके विपरीत, आज की सरकार का रवैया बिल्कुल अलग है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे किसान आंदोलन का मामला हो, महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन का या अपने अधिकारों की मांग कर रहे पूर्व सैनिकों का, केंद्र सरकार ने हर बार विरोध करने वालों के साथ दमनात्मक रवैया अपनाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ”लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संवैधानिक विरोध नागरिकों का अधिकार होता है, लेकिन इस सरकार के दौर में उसके लिए भी जगह लगातार सिमटती जा रही है।

लोकतंत्र में संवाद होता है, जबकि तानाशाही में बल प्रयोग किया जाता है।” गहलोत ने कहा, ”आज सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल न केवल पूरी तरह अस्वीकार्य है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा भी है। पूरी दुनिया देख रही है कि महात्मा गांधी के देश भारत में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।” उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को शनिवार को अनशन के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।

UP: कूरियर बन गया नकली दवाओं का सबसे बड़ा हथियार, लखनऊ में बढ़ता जानलेवा खतरा; इन दवाओं की हो रही नकल

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राजधानी में नकली दवाओं की तस्करी का बड़ा माध्यम कूरियर सेवा बन गई है। जांच में सामने आया कि दर्द, बुखार और एंटीबायोटिक जैसी अधिक मांग वाली दवाओं की नकली खेप दूसरे राज्यों से लाई जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसी दवाएं मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग राजधानी में नकली दवाओं के नेटवर्क को तोड़ नहीं पा रहा। इसकी बड़ी वजह ये है कि राजधानी में नकली दवाओं की ज्यादातर आपूर्ति कूरियर के जरिये पहुंच रही है। जिले के अंदर और आसपास के जिलों में माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए ही वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है।

अधिकारी भी मानते हैं कि दवा की दुकानों तक पहुंचने के बाद नकली-असली की पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता है। नकली दवाओं को पकड़ने के लिए गोपनीय सूचनाओं पर आश्रित रहना पड़ता है। बृहस्पतिवार रात विभिन्न ब्रांड की नकली दवाओं की बरामदगी ने फिर से सवाल खड़े किए हैं कि आखिर इन दवाओं के निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है।

पिछले तीन वर्ष में कई बार कार्रवाई के बाद भी नकली दवाओं के धंधे पर पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी है। पुलिस और एफएसडीए के अधिकारी भी मानते हैं कि जब तक नकली दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति पर नकेल नहीं कसेगी, तब तक इस धंधे को रोक पाना मुश्किल है। 

दूसरे राज्यों से आ रहीं नकली दवाएं

एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश ने बताया कि पकड़ी गई नकली दवाओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से हो रही है। विभाग एक-एक कड़ी जोड़कर उन फर्मों पर नकेल कसने की तैयारी में है, जो नकली दवाओं के कारोबार में लिप्त हैं। ब्रजेश के अनुसार, नकली दवाओं की खेप कूरियर के जरिये लखनऊ पहुंच रही है जिसे आसपास के जिलों में खपाया जा रहा है।

ज्यादा प्रचलित दवाओं की करते हैं नकल

अब तक की जांच में सामने आया है कि नकली दवा के सौदागर उन दवाओं नकल ज्यादा करते हैं जो बेहद प्रचलित हैं। जिनका सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे दर्द, सूजन, सर्दी-जुकाम, बुखार के उपचार में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा एंटीबायोटिक, एंटीएलर्जिक और विटामिन सप्लीमेंट वाली नकली दवाएं भी खूब बनाई जाती हैं। बाजार में ऐसी दवाओं की मांग ज्यादा होती है तो इनकी बिक्री बेहद आसानी से हो जाती है।

जान भी ले सकती हैं नकली दवाएं

डॉक्टरों का कहना है नकली दवाओं में उपचार के लिए आवश्यक सक्रिय तत्व नहीं होते या उसकी मात्रा मानक से बेहद कम या ज्यादा होती है। इससे बीमारी नियंत्रित होने के बजाय बढ़ सकती है। एंटीबायोटिक के मामलों में दवा के प्रतिरोध का खतरा बढ़ जाता है, जबकि गंभीर मरीजों में नकली दवा जान भी ले सकती है।

गहन जांच करने की जरूरत

लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता मयंक रस्तोगी ने बताया कि नकली दवाओं के खिलाफ एफएसडीए की टीम अच्छा काम कर रही है। लखनऊ के मेडिसिन मार्केट में टीम ने 28 दुकानों का सर्वे किया था। जांच टीम में प्रदेश भर से बुलाए गए 17-18 ड्रग इंस्पेक्टर भी शामिल थे। किसी भी दुकान से नकली दवाएं बरामद नहीं हुईं। नकली दवाओं के मामले में काफी समय से आगरा का नाम आता रहा है। वहां पर गहन जांच करने की जरूरत है।

राजधानी में नकली दवाओं की बरामदगी के मामले

अगस्त 2023 : अमीनाबाद और बस स्टेशन क्षेत्र में पुलिस व ड्रग विभाग ने छापा मारकर दो करोड़ रुपये कीमत की 65 हजार से अधिक नकली गोलियां बरामद की थीं। रोडवेज बसों के जरिये इनकी सप्लाई दूसरे जिलों में की जा रही थी।

नवंबर-दिसंबर 2023 : अमीनाबाद स्थित वीडीएस फार्मा पर छापे में नामी कंपनियों की नकली दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाएं मिलीं। जांच के दौरान आगरा, चेन्नई और पुडुचेरी तक नेटवर्क फैला मिला।

जून 2025 : काकोरी में किराना स्टोर की आड़ में चल रही अवैध फैक्टरी से करीब 1.2 करोड़ रुपये की नकली ऑक्सीटोसिन दवाएं पकड़ी गईं।

31 अगस्त-1 सितंबर 2025 : पारा क्षेत्र में एसटीएफ और औषधि विभाग ने नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी। दो करोड़ का माल बरामद।

14 फरवरी 2026 : कोडिन कफ सिरप सिंडिकेट मामले में एसटीएफ ने गिरोह के एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया।

यूपी: प्रदेश में आने वाले पांच दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी, इन जिलों के लिए जारी हुआ विशेष अलर्ट

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प्रदेश वासियों को भीषण उमस और गर्मी से राहत मिलने वाली है। प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विभाग ने प्रदेश में मानसूनी सक्रियता और बादलों की आवाजाही को देखते हुए अगले पांच दिनों तक झमाझम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इसी के तहत राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर बना एक सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र पिछले 48 घंटों में उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है। शुक्रवार को यह पश्चिम बंगाल, उससे सटे झारखंड और उत्तरी ओडिशा के पास केंद्रित है। अगले 24 घंटों के दौरान इस सिस्टम के धीरे-धीरे कमजोर होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और मानसूनी ट्रफ के दक्षिण की ओर खिसकने की संभावना है। इसी मौसमी बदलाव के कारण प्रदेश में मानसून तेजी से सक्रिय हो रहा है।

18 से 23 जुलाई तक मानसूनी बारिश में बढ़ोतरी

प्रदेश में 18 से 23 जुलाई के बीच मानसूनी बारिश में व्यापक बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। भारी बारिश के चलते अगले तीन से चार दिनों में तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट होने की संभावना है।मौसम विभाग ने भारी बारिश और ऑरेंज अलर्ट को देखते लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। विशेषकर आकाशीय बिजली चमकने के दौरान और जलभराव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।

इन जिलों में होगी अधिक बारिश

UP: Heavy rain warning for the next five days in the state, special alert issued for these districts

अत्यधिक भारी बारिश (ऑरेंज अलर्ट) – एटा, मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल
सामान्य से अधिक बारिश- आगरा, औरैया, फिरोजाबाद और हापुड़
सामान्य बारिश- बाराबंकी, गोंडा, कानपुर नगर, खीरी, महाराजगंज, बदायूं, बागपत, बरेली, बिजनौर, बुलंदशहर, इटावा, हमीरपुर, ललितपुर और सहारनपुर।
सामान्य से कम बारिश – लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और अयोध्या।

UP: कलंक से मुक्ति के लिए चंपत राय करेंगे ऐसा काम, रामलला की शरण में होगी विशेष साधना; पहली बार लिया फैसला

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चढ़ावा चोरी प्रकरण की एसआईटी जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने जीवन का पहला चातुर्मास अयोध्या में करने का निर्णय लिया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 25 जुलाई से शुरू होकर 21 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक चलने वाले इस चार माह के कालखंड में वह अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

रामलला की शरण में रहकर साधना, मंत्र जाप, रामचरितमानस का नियमित पाठ तथा सात्विक जीवनचर्या का पालन करेंगे। चंपत राय 23 जून से ही राम मंदिर से सटे रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में एक तरह से एकांतवास में हैं। बताया जा रहा है कि वह प्रतिदिन लगभग चार घंटे तक साधना करते हैं।

चढ़ावा चोरी के लिए रामलला से माफी मांग रहे आचार्य

श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नौ दिवसीय प्रायश्चित पूजन शुरू कराया गया है। यह अनुष्ठान गुप्त नवरात्र के अवसर पर शुरू हुआ है।  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से गुप्त नवरात्र के शुभारंभ पर 15 जुलाई को शुरू कराए गए अनुष्ठान का समापन 23 जुलाई को होगा। अनुष्ठान में भगवान श्रीराम का विशेष पूजन किया जा रहा है और उनसे वैदिक क्रियाओं के माध्यम से क्षमा मांगी जा रही है और परिसर का शुद्धिकरण कराया जाएगा।

इस विशेष अनुष्ठान में मंदिर परिसर के भीतर और आसपास कुल 70 वैदिक आचार्य शामिल होकर वैदिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर रहे हैं। प्रायश्चित पूजन राम मंदिर के गर्भगृह, यज्ञ मंडप और परकोटा के शिव मंदिर में एक साथ संपन्न कराया जा रहा है।

शुद्धिकरण और प्रायश्चित के लिए ऐसे अनुष्ठान कराए जाते हैं

अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और भगवान श्रीराम का विशेष पूजन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंदिर में किसी भी प्रकार की अशुभ या अपवित्र मानी जाने वाली घटना के बाद शुद्धिकरण और प्रायश्चित के लिए ऐसे अनुष्ठान कराए जाते हैं।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य भगवान के समक्ष क्षमा-याचना के साथ मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखना है। अनुष्ठान में शामिल आचार्य विट्ठल ने बताया कि प्रायश्चित का सबसे बड़ा अर्थ अपनी भूल को स्वीकार कर उसे दोबारा न होने देना है।

उन्होंने बताया कि अनुष्ठान सुबह नौ से 12:30 बजे और दोपहर 3:30 बजे से सात बजे तक हो रहा है। प्रायश्चित पूजन में दिल्ली, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से 10 आचार्य शामिल हैं। शेष आचार्य अन्य अनुष्ठानों में लगे हैं।

गणना में बैंक के नियमित कर्मियों की ड्यूटी लगवाने की सिफारिश

गणना प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो इसको लेकर एसआईटी ने विस्तृत जांच में कई अहम सिफारिशें की हैं। अब गणना में जो बैंक कर्मी लगाए जाएंगे वह नियमित कर्मचारी होंगे। वहीं इनकी ड्यूटी बदलती रहेगी। हर पंद्रह दिनों में इन कर्मचारियों को बदला जाएगा।

बैंक की तरफ से निगरानी के लिए एक अधिकारी भी तैनात होगा। एसआईटी ने इसके अलावा भी कई अहम सिफारिशें की हैं। जो जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद लागू की जाएंगी। चोरी में जो छह गणना कर्मी जेल गए हैं वह लिखापढ़ी में हाउसकीपिंग के कार्य के लिए भर्ती किए गए थे गणना की ड्यूटी उनसे ट्रस्ट के पदाधिकारी करवा रहे थे।

बिधूना/सहार पांच दिन से सर्वर व ई-पॉस मशीन ठप

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बिधूना/सहार। क्षेत्र में पिछले पांच दिन से सर्वर ठप होने और ई-पॉस मशीन में तकनीकी खराबी आने के कारण किसानों को डीएपी और यूरिया खाद नहीं मिल पा रही है। धान रोपाई और खरीफ की बोआई के सीजन में खाद वितरण बंद होने से किसान परेशान हैं।शुक्रवार को कुछ देर के लिए सर्वर चालू हुआ तो राहत की उम्मीद जगी लेकिन आधार आधारित सत्यापन और अपडेट की धीमी गति के कारण किसान को 15 से 20 मिनट का समय लग गया। इसके चलते सीमित समय में केवल 11 किसानों को ही खाद वितरित की जा सकी।

किसान रोजाना सुबह से शाम तक सहकारी समितियों व पीसीएफ केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं और घंटों इंतजार के बाद बिना खाद लिए ही खाली हाथ लौट रहे हैं। बिधूना क्षेत्र की समितियों में भी पिछले पांच दिन से सर्वर पूरी तरह डाउन है।इसके बाद दोबारा सर्वर बंद हो गया और दोपहर तक लाइन में खड़े किसान बिना खाद लिए लौट गए। समिति प्रभारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार तक सर्वर व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है, इसके बाद वितरण सुचारू किया जाएगा। उधर,

ताजपुर स्थित पीसीएफ केंद्र पर अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों में आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि केंद्र पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगा है और न ही केंद्र प्रभारी का नाम, मोबाइल नंबर या खाद वितरण से जुड़ी कोई जानकारी प्रदर्शित की गई है। कर्मचारियों के समय पर न मिलने से किसानों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि केंद्र पर स्पष्ट सूचना बोर्ड और संपर्क नंबर अंकित कराया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सहार स्थित बहुद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति में पांच दिन से पॉस मशीन बंद है। समिति पर पहुंचे किसान जय सिंह किचहिया, रामवीर, शिव कुमार शाक्य, रामनाथ, बृजेश कुमार, श्रीकांत, चंद्रपाल, संजय और विजय कुमार ने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह 10 बजे ही समिति पहुंच जाते हैं।
इस उम्मीद में शाम पांच बजे तक बैठे रहते हैं कि शायद मशीन चालू हो जाए लेकिन अंत में उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द खाद न मिली तो खरीफ की बोआई बुरी तरह प्रभावित होगी।
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वर्जन —
पॉस मशीन तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर रही है। विभागीय अधिकारियों को सूचित कर शिकायत दर्ज करा दी गई है। मशीन ठीक होते ही वितरण तत्काल शुरू कराया जाएगा। – मधु जायसवाल, सचिव सहकारी समिति, सहार

Auraiya News: बंदरों के डर से घर से निकलने में घबरा रही डेढ़ लाख की आबादी

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औरैया। मोहल्लों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक इन दिनों बंदरों का उत्पात चरम पर है।कटखने बंदर सड़कों और छतों पर आजाद घूम रहे हैं। हालात यह हैं कि 25 वार्डों की करीब डेढ़ लाख आबादी घरों में कैद रहने के लिए मजबूर है। लोग बंदरों से बचने के लिए अपने घरों में लोहे के जाल लगवा रहे हैं।
मोहल्लों में बंदरों के डर से महिलाएं छतों पर कपड़े सुखाने जाने से घबरा रही हैं। बुजुर्गों ने पार्कों में टहलना बंद कर दिया है और बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावकों के मन में डर बना रहता है। जगह-जगह बंदरों के झुंड जमा होने के कारण लोगों का गली-मोहल्लों से निकलना भी दूभर हो गया है।

जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना पांच से 10 केस बंदरों के हमले के पहुंच रहे हैं। जहां घायलों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। बंदरों को पकड़ने के लिए नगर पालिका प्रशासन व वन विभाग एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहा है। इस सब के बीच शहर वासीपरेशान हैं।