Wednesday, February 18, 2026
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दीपावली पर प्रदेश के बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थियों को बड़ा उपहार, BTC के बराबर मान्यता, NIOS से कर सकेंगे ब्रिज कोर्स

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लखनऊ: योगी आदित्यनाथ सरकार ने दीपावली पर प्रदेश के बीएड डिग्री धारकों को बड़ा उपहार दिया है।

सरकार ने बीएड डिग्री धारकों के हित में बड़ा फैसला लिया है। पीडीपीईटी कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया एक नंवबर से शुरू की जा रही है। यह मामला वर्ष 2005 से लंबित था। उस समय B.Ed अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती में शामिल नहीं किया गया था, जिससे हजारों उम्मीदवार वर्षों तक पात्रता को लेकर संघर्ष करते रहे। सरकार के इस निर्णय से अब उन्हें न्याय और अवसर दोनों मिलने जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने बीएड डिग्री वालों के लिए Professional Development Programme for Elementary Teachers (PDPET) कोर्स को मंजूरी दे दी है। इस ब्रिज कोर्स को पूरा करने के बाद बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थियों को बीटीसी के बराबर मान्यता मिल जाएगी। इससे वह प्राइमरी कक्षाओं यानी कक्षा एक से 5 तक के छात्रों को पढ़ाने के लिए भी पात्र हो जाएंगे।

छह महीने के ब्रिज कोर्स PDPET काे NIOS कर सकता है संचालित

असल में प्राथमिक शिक्षकों के लिए व्यावसायिक विकास कार्यक्रम( Professional Development Programme for Elementary Teachers) छह महीने का ब्रिज कोर्स है। इस कोर्स का संचालन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल (NIOS) करता है। असल में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए इस ब्रिज कोर्स को तैयार किया गया है, जिसमें मुख्य तौर पर बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थियों को प्राइमरी कक्षाओं के टीचिंग मैथर्ड के बारे में बताया जाता है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है। यानी यूपी में इस ब्रिज कोर्स को करने वाले बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थी प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के पात्र होंगे।

एक से शुरू हो रही आवेदन प्रक्रिया

NIOS छह महीने के ब्रिज कोर्स PDEPT के लिए आवेदन प्रक्रिया आयोजित करता है। अगले सत्र में दाखिला के लिए एक नंवबर से आवेदन किया जा सकता है। आवेदन NIOS की आधिकारिक वेबसाइट dledbr.nios.ac.in पर जाकर किया जा सकता है। छह महीने का यह ब्रिज कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध है। कोर्स में दाखिला लेने के बाद ट्रेनिंग दिसंबर 2025 से मई 2026 तक चलेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बीएड डिग्री को प्राइमरी कक्षाओं के लिए माना था अपात्र

सुप्रीम कोर्ट ने बीते वर्ष एक अहम आदेश में बीएड डिग्री को प्राइमरी कक्षाओं यानी कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए अपात्र माना था। शीर्ष कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बीएड डिग्री धारी प्राइमरी कक्षाओं यानी कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को नहीं पढ़ा सकेंगे। प्राइमरी कक्षाओं को बीटीसी-डीएलएड वाले ही पढ़ा सकेंगे। इससे बड़ी संख्या में बीएड डिग्रीधारी प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने के लिए अपात्र हो गए थे।

AI Monitoring of Animals: उत्तर प्रदेश में वन्यजीवाें की निगरानी एआइ से कराने की तैयारी

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लखनऊ : प्रदेश सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष नियंत्रित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का सहारा लेने जा रही है। जंगल से आबादी की तरफ आने वाले रास्तों में थर्मल सेंसर युक्त कैमरे लगाने की योजना है।

इन कैमरे की जद में जानवरों के आते ही मोबाइल फोन पर संदेश जारी हो जाएगा। जंगल से बाहर की तरफ वन्यजीव के आते ही अलर्ट जारी होने से सुरक्षा प्रबंधन में आसानी हो जाएगी। इससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।

वन विभाग उन संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर रहा है, जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं अधिक होती हैं। इन कैमरों को इन्हीं स्थानों पर लगाया जाएगा। प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इसका मुख्य कारण जंगलों का लगातार कम होना और वन्यजीवों का बढ़ना है।

बाघ व तेंदुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बाघों की संख्या 173 थी जबकि 2022 की गणना में इनकी संख्या 222 हो गई है। इसी प्रकार तेंदुओं की संख्या 2019 में 415 थी वह भी 2022 में बढ़कर 870 हो गई है। वर्तमान में इनकी संख्या एक हजार से अधिक का अनुमान है। जंगल में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण तेंदुए जंगल के बाहरी हिस्सों में खासकर बस्तियों के आस-पास रहने लगे हैं। भेड़िए भी अपना आतंक फैलाए हुए हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की इन घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सरकार आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने जा रही है। समय से पहले चेतावनी के लिए एआइ युक्त थर्मल कैमरे लगाए जाएंगे। यह रात में या फिर घने कोहरे में भी जानवरों की गर्मी पहचान लेते हैं। हाथी, बाघ, तेंदुआ व भेड़िया गांव की ओर बढ़ेगा तो कैमरा अलार्म या मोबाइल नोटिफिकेशन भेज देगा। इससे वन विभाग व स्थानीय लोग समय रहते सचेत हो जाएंगे। वन विभाग ने प्रभावित गांवों में बाघ मित्र बनाए हैं, इनके पास भी अलर्ट भेजकर गांव वालों को सावधान किया जाएगा।

कैमरे लगातार लाइव वीडियो या थर्मल इमेज भेजते रहते हैं। इससे वन्यजीवों की गतिविधि, दिशा और समूह के आकार का पता चल जाता है। शिकार और अवैध गतिविधियों की भी इससे रोकथाम हो सकेगी। थर्मल कैमरे यह भी दिखाते हैं कि कौन-से मार्गों से जानवर बस्तियों की ओर आते हैं। इस डाटा से कारिडोर की बाड़बंदी, सोलर फेंसिंग या अलार्म सिस्टम की योजना भी भविष्य में बनाई जा सकती है।

तमिलनाडु में एआइ निगरानी से बची हाथियों की जान

तमिलनाडु के उच्च जोखिम वाले पलक्कड़-कोयंबटूर रेलवे खंड पर एआइ निगरानी प्रणाली के कारण ही अब तक एक भी हाथी की ट्रेन हादसे में मौत नहीं हुई है। लगभग एक वर्ष में तीन हजार से अधिक हाथियों को सुरक्षित रेल लाइन पार कराया गया है। जैसे ही कोई हाथी पटरी से 100 फीट के भीतर आता है, ट्रेन चालक को तत्काल चेतावनी भेजी जाती है। एआइ निगरानी से पहले यहां अक्सर हाथियों के ट्रेन हादसे हो जाते थे।

करीब एक करोड़ आता है एक टावर पर खर्च

एआइ आधारित कैमरों से निगरानी के लिए एक टावर पर करीब एक करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसमें तीन से चार अलग-अलग कैमरे एक टावर पर लगाए जाते हैं। इन कैमरों की रेंज दो से तीन किलोमीटर के करीब रहती है। पहले चरण में कितने टावर जरूरी हैं इसके लिए स्थान चिह्नित किया जा रहा है।

प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष

वित्तीय वर्ष                 मृत्यु     घायल
2021-22                29      81
2022-23                57      114
2023-24                84      173
2024-25                60      221
2025-26                39       78 (आठ अक्टूबर तक)

ड्रोन आधारित ट्रेंकुलाइजर

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा. अरुण कुमार सक्सेना ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं हर हाल में रोकना प्रदेश सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है। एआइ आधारित निगरानी के लिए पिछले दिनों दो कंपनियों ने प्रस्तुतीकरण दिया था। इनसे और विस्तृत प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है। ड्रोन आधारित ट्रेंकुलाइजर के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके जरिए दूर से ही वन्यजीवों को बेहोश किया जा सकेगा।

खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर सिपाही को धमकाया, विरोध करने पर देने लगा गाली

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लखनऊ। नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी के आरोपित अबू साद ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताक एसीपी चौक कार्यालय के हेड पेशी राधे श्याम सिंह को फोन किया। मुकदमे की जानकारी मांगने का प्रयास किया। विरोध पर धमकाते हुए गाली देने लगा। पेशी हेड की तहरीर पर अबू साद के खिलाफ चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसीपी चौक कार्यालय में हेड पेशी पर सिपाही तैनात राधेश्याम सिंह ने बताया कि सात अक्टूबर को रात पौने नौ बजे मोबाइल पर फोन आया। उसने बताया कि मुंबई क्राइम ब्रांच का अफसर आशुतोष शर्मा बोल रहा है। उसने शालू वर्मा नाम की महिला का नाम लेते हुए उसके मुकदमे के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की।

जब उससे कहा कि इस संबंध में विभाग के अफसरों से बात करें। इस पर वह गाली-गलौज कर धमकी देने लगा और फोन काट दिया। पेशी हेड के मुताबिक शालू वर्मा उन्नाव जनपद के अरसइंदा गुजौली की रहने वाली हैं।

उन्होंने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप लगाते हुए अबू साद के खिलाफ ठाकुरगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अबू साद आजमगढ़ के मुबारकपुर का रहने वाला है। पहले मामले की जांच ठाकुरगंज थाने से रवींद्र कुमार द्वारा की गई थी। उसकी रिपोर्ट एसीपी कार्यालय आई थी।

पेशी हेड के मुताबिक उन्होंने साक्ष्य के संबंध में बयान दर्ज कराने के लिए दो अक्टूबर को अबू साद को फोन किया था। इसके पूर्व भी पूर्व दारोगा रवींद्र कुमार, मुख्य आरक्षी अरुण कुमार, दारोगा अमर सिंह ने मामले की विवेचना की तो उनसे भी अबू साद ने गाली-गलौज कर अभद्रता की थी। इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय के मुताबिक मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।

लखनऊ में लिव-इन में रहने वाली युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनों ने की जांच की मांग

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लखनऊ। ठाकुरगंज के दौलतगंज में लिव-इन में रहने वाली 20 वर्षीय युवती इलहाम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव असलम मंजिल स्थित फ्लैट में बेड पर पड़ा मिला। सूचना पर पहुंचे परिवारजन ने जांच की मांग की है। पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने की बात कह रही है।

मृतका के मामा असद ने बताया कि कौशांबी के कोखराज स्थित राला गांव निवासी इलहाम कुछ दिनों से दौलतगंज में असलम मंजिल के फ्लैट में सीतापुर के सिधौली निवासी युवक के साथ रहती थी। मंगलवार को युवक ने असद की बड़ी बहन शैला को फोन कर बताया कि इलहाम ने आत्महत्या कर ली है।

शैला ने असद को मौके पर भेजा तो इलहाम का शव बेड पर पड़ा था। असद के मुताबिक, इलहाम के गले पर कसाव के निशान थे और शरीर पर भी खरोच थी।

उन्होंने आत्महत्या की बात से इंकार करते हुए जांच की मांग की है। ठाकुरगंज इंस्पेक्टर ओमवीर सिंह ने बताया कि मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

टेलीकॉम कंपनी में एक साथ करते थे काम

असद ने बताया कि दोनों ठाकुरगंज इलाके में एक निजी टेलीकॉम कंपनी में साथ ही काम करते थे। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी। कुछ दिन बाद दोनों साथ रहने लगा।

नकली दवा कारोबारियों पर मुकदमों के लिए नहीं मिले शासकीय अधिवक्ता

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लखनऊ: प्रदेश में नकली दवा कारोबारियों पर कार्रवाई के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) में शासकीय अधिवक्ता की तैनाती नहीं की गई है। इसके चलते जिलों में नकली दवा का कारोबार या निर्माण करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई के लिए कोर्ट में प्रभावी पैरवी नहीं हो पा रही है।

तत्कालीन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने पूर्व में हर जिले में एक शासकीय अधिवक्ता नामित करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन औषधि निरीक्षकों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को मुकदमों की पैरवी में पूरी राहत नहीं मिली है।

शासन ने नकली व अधोमानक दवाईयों, मिलावटी खाद्य पदार्थों के मुकदमों की प्रभावी पैरवी के लिए जिलों में शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) और अभियोजन अधिकारी नामित करने के आदेश जारी थे। कारण था कि दुकानों के लाइसेंस बनाने से लेकर दवाओं की जांच के नमूने लेने और गड़बड़ी के मामलों में आरोप पत्र बनाने का कार्य भी औषधि निरीक्षकों के जिम्मे है।

ऐसे में शासकीय अधिवक्ता और अभियोजन अधिकारियों से वाद पत्र तैयार करने और कोर्ट में पैरवी के लिए भी इनकी मदद लेनी थी। आदेश था कि मजिस्ट्रेट न्यायालय में अभियोजन अधिकारी और सत्र न्यायालय में शासकीय अभिवक्ता (फौजदारी) से मुकदमों की प्रभावी पैरवी में मदद ली जाए, लेकिन अभी भी मुकदमों की पैरवी के लिए समस्याएं बनी हुई हैं।

स्थिति यह है कि एफएसडीए ने बीते छह माह में 6100 से अधिक दवा के नमूनों की जांच की है। इनमें से 19 नकली और डेढ़ सौ से अधिक अधोमानक पाए गए हैं। इन पर मुकदमा किया गया है, लेकिन सही से पैरवी न होने के कारण सजा दिलाने में देरी हो रही है।

एफएसडीए के संयुक्त आयुक्त हरिशंकर का कहना है कि मुख्यालय में एक विधि अधिकारी की तैनाती की गई है। उनसे मुकदमों में मदद ली जाती है। जिलों से भी अधिकारी मुख्यालय से मुकदमों की पैरवी के लिए मदद लेते रहते हैं। जरूरत पर जिलाधिकारी के माध्यम से अभियोजन अधिकारी की सलाह ली जाती है।

Bijli Chori: अचानक से पहुंची बिजली विभाग की टीम और काट दिया कनेक्शन, यूपी के कई जिलों में चल रहा अभियान

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लखनऊ। बिजली चोरी कम होने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को चलाए गए अभियान में फिर बिजली चोर पकड़े गए। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देश में चलाए गए अभियान में लखनऊ के अलावा रायबरेली, अमेठी व बरेली में भी बिजली चोर पकड़े गए। इन जिलों से विजिलेंस टीम ने 61 किलोवाट की चोरी पकड़ी। सभी बिजली चोरों के कनेक्शन काट दिए गए हैं और मीटर जब्त करते हुए बिजली थानों में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया है।

अपर पुलिस अधीक्षक के मुताबिक उपभोक्ता लक्ष्मी, निवासी बड़ा भरवारा चिनहट जनपद लखनऊ द्वारा परिसर में सर्विस केबिल को मीटर से पहले काटकर चोरी की जा रही थी। यहां जांच में छह किलोवाट चोरी मिली। नवाब साहब की गली नरही में उपभोक्ता चुन्नी अपने परिसर पर पोल से डायरेक्ट केबिल जोड़कर 12 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पायी गई। रायबरेली के जगतपुर बाजार थाना जगतपुर में उपभोक्ता शिवप्रसाद गुप्ता द्वारा मीटर बाईपास करके 10 किलोवाट की चोरी की जा रही थी।अमेठी के ग्राम राजापुर कौहार थाना गौरीगंज में उपभोक्ता सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय के परिसर में छह किलोवाट चोरी मिली। ग्राम लक्ष्मी नगर देवकली चौराहा थाना गौरीगंज के उपभोक्ता मो. फारूक मीटर को बाईपास करके छह किलोवाट की चोरी करते हुए पाए गए। हरदोई में ग्राम गढ़ी चांद थाना शाहाबाद के उपभोक्ता तौसिफ व आसिम के यहां पांच-पांच किलोवाट की चोरी पायी गई। बरेली के कब्रिस्तान वाली गली जोगी नवादा थाना बारादरी निवासी उपभोक्ता आयश बी पत्नी परवेज अहमद के परिसर में पांच किलोवाट की अनियमितता मिली। बदायूं में उपभोक्ता अंकुर के परिसर में छह किलोवाट की बिजली चोरी पायी गई।

‘मैं क्राइम ब्रांच का अधिकारी हूं’, एक महिला का नाम लेकर मांगने लगा इंफॉर्मेशन; सिपाही को धमकाया

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 लखनऊ।  नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी के आरोपित अबू साद ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताक एसीपी चौक कार्यालय के हेड पेशी राधे श्याम सिंह को फोन किया। मुकदमे की जानकारी मांगने का प्रयास किया। विरोध पर धमकाते हुए गाली देने लगा। पेशी हेड की तहरीर पर अबू साद के खिलाफ चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसीपी चौक कार्यालय में हेड पेशी पर सिपाही तैनात राधेश्याम सिंह ने बताया कि सात अक्टूबर को रात पौने नौ बजे मोबाइल पर फोन आया। उसने बताया कि मुंबई क्राइम ब्रांच का अफसर आशुतोष शर्मा बोल रहा है। उसने शालू वर्मा नाम की महिला का नाम लेते हुए उसके मुकदमे के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की।

जब उससे कहा कि इस संबंध में विभाग के अफसरों से बात करें। इस पर वह गाली-गलौज कर धमकी देने लगा और फोन काट दिया। पेशी हेड के मुताबिक शालू वर्मा उन्नाव जनपद के अरसइंदा गुजौली की रहने वाली हैं। उन्होंने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप लगाते हुए अबू साद के खिलाफ ठाकुरगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

अबू साद आजमगढ़ के मुबारकपुर का रहने वाला है। पहले मामले की जांच ठाकुरगंज थाने से रवींद्र कुमार द्वारा की गई थी। उसकी रिपोर्ट एसीपी कार्यालय आई थी। पेशी हेड के मुताबिक उन्होंने साक्ष्य के संबंध में बयान दर्ज कराने के लिए दो अक्टूबर को अबू साद को फोन किया था।

इसके पूर्व भी पूर्व दारोगा रवींद्र कुमार, मुख्य आरक्षी अरुण कुमार, दारोगा अमर सिंह ने मामले की विवेचना की तो उनसे भी अबू साद ने गाली-गलौज कर अभद्रता की थी। इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय के मुताबिक मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।

योजनाओं का लाभ पाने को इस तारीख तक पंजीकरण करा लें श्रमिक, वरना निष्क्रिय लिस्ट में हो जाएंगे शामिल

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश भवन व अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की संचालित किसी भी योजना का लाभ पाने के लिए निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत होना या पंजीयन का नियमानुसार नवीनीकृत होना अनिवार्य है। ऐसे श्रमिक जिनका लेबर या श्रमिक पंजीकरण कार्ड बना है लेकिन, उसका नवीनीकरण चार वर्ष या उससे अधिक समय से नहीं कराया गया, उन्हें 15 अक्टूबर के बाद निष्क्रिय सूची में शामिल कर दिया जाएगा और उनकी गणना पंजीकृत निर्माण श्रमिकों में नहीं की जाएगी।

अपर श्रमायुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने बताया, श्रमिक अपना पंजीकरण व पंजीकृत निर्माण श्रमिक अपना नवीनीकरण सीएससी ई-डिस्ट्रिक्ट सेंटर व सीएससी ईजीओवी सेंटर व बोर्ड की वेबसाइट के माध्यम से करा सकते हैं। इसके बाद बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं, पंजीयन प्रक्रिया व नवीनीकृत की अधिक जानकारी बोर्ड की वेबसाइट upbocw.in से ले सकते हैं।

उत्तर प्रदेश भवन संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों के हित में प्रदेश सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही हैं। गंभीर बीमारी में सहायता दी जाती है। निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना के तहत निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने की दशा में उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता दी जाती है।

महाकुंभ वाली मोनालिसा की फिल्म कब होगी रिलीज? डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने दिया हिंट

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लखनऊ। निर्देशक सनोज मिश्रा ने फिल्म ””द डायरी आफ मणिपुर”” की शूटिंग लगभग पूरी कर ली है। प्रयागराज कुंभ से वायरल मोनालिसा इसी फिल्म के साथ सिनेमाई जगत में पदार्पण कर रही हैं। सनोज ने शुक्रवार को कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते थे कि बंजारा समाज से आने वाली एक गरीब परिवार की बेटी आगे बढ़े, लेकिन आज वही लड़की फिल्म में काम रही है। हवाई जहाज में यात्रा कर रही है। यह फिल्म फरवरी में रिलीज की जाएगी।

सनोज ने विकासनगर के एक होटल में पत्रकारों से कहा कि कुछ समय पहले मेरे साथ काफी कुछ बुरा किया गया। साजिश करके मेरे ऊपर एक झूठा मामला बनाकर मुझे जेल भेजा गया, मेरी जान लेने की कोशिश की गई। मैंने जेल में ही इस फिल्म की कहानी बनाई। मोनालिसा ने कहा कि सनोज मेरे पिता से बढ़कर हैं। उन्होंने मेरा जीवन बदल दिया।

माला बेचकर गुजारा करने वाली गरीब लड़की को हवाई जहाज में बिठा दिया। मोनालिसा ने बताया कि यह फिल्म एक लव स्टोरी है। इसमें देशभक्ति भी है और समाज के लिए संदेश भी कि कुछ भी हो जाए हमारा देश हमारे लिए सबसे पहले होना चाहिए। अभिनेता अमित राव ने बताया कि मेरी भी यह पहली फिल्म है। अभिनेता अभिषेक त्रिपाठी ने कहा कि यह फिल्म समाज को अच्छा संदेश देगी।

यूपी में कफ सीरप निर्माण में लापरवाही पर चार कंपनियों को नोटिस, जांच के दौरान पता चली ये बात

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लखनऊ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने शुक्रवार को कफ सीरप के 81 नमूने लिए। इनमें 11 नमूने दवा निर्माण इकाइयों से लिए गए। जबकि 70 दुकानों से लिए गए हैं। जांच के दौरान लखनऊ, मथुरा, अलीगढ़, सहारनपुर की चार कंपनियों में कफ सीरप निर्माण के दौरान गुणवत्ता और साफ-सफाई में लापरवाही मिली।

कंपनियां जांच टीम को जरूरी कागजात भी नहीं दिखा पाई। एफएसडीए ने इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सोमवार से जारी जांच अभियान में अब तक कफ सीरप के 595 नमूने लिए जा चुके हैं।

एफएसडीए के अनुसार लखनऊ की आरपाइक फार्मास्युटिकल्स, मथुरा की एवरटच फार्मास्युटिकल्स, अलीगढ़ की गुडलक फार्मा और सहारनपुर की हैडसन फार्मास्युटिकल्स को दवा निर्माण में गुणवत्ता के मानक न पूरे करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

इसके अलावा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से प्रतिबंधित की गई गुजरात की रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स के रेस्पिफ्रेश और शेप फार्मा के रिलीफ कफ सीरप के भंडारण की जांच की गई। इसमें रेस्पिफ्रेश सीरप के नमूने लेते हुए उनकी बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं। शेप फार्मा की कोई भी दवा प्रदेश में नहीं पाई गई है।

हिमाचल प्रदेश की डिजिटल विजन कंपनी की कोल्ड बेस्ट, नेक्सपर फार्मा की डोलो 250 सीरप और उत्तराखंड के टूलब्रस फार्मुलेशन के बेनसेट-डी सीरप के भंडारण की जांच की गई। बीते चार साल के दौरान हुई जांच के दौरान इन कंपनियों के सीरप में इथिलीन ग्लाइकाल मिला था।

पुराने रिकार्ड के आधार पर की गई जांच में डिजिटल विजन का कोई भी सीरप प्रदेश में नहीं पाया गया है। औषधि नियंत्रक शशि मोहन के अनुसार दवा कंपनियों, दुकानों, अस्पतालों और नर्सिंग होम से भी कफ सीरप के नमूने लिए जा रहे हैं। प्रतिबंधित कंपनियों के सीरप का भंडारण कहीं नहीं मिला है।