उत्तर प्रदेश में अब बरसात का मौसम अलविदा कह चुका है और ठंडी हवाओं के आने की दस्तक शुरू हो गई है। माैसम विभाग ने कहा कि पूर्वांचल के दक्षिण-पूर्वी जिलों बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र को छोड़कर यूपी के बाकी इलाकों से मानसून विदा हो चुका है।
70 साल के बुजुर्ग की 30 साल की लड़की से लव मैरिज, लोग हैरान, लेकिन खुश, मोहल्ले वाले बने बाराती
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक अनोखी प्रेम कहानी ने शादी के पवित्र बंधन में परिणत होकर सबको चौंका दिया। 70 वर्षीय दादू राम गंधर्व ने अपने मोहल्ले की 30 वर्षीय युवती से प्रेम विवाह किया। दोनों ने शिव मंदिर में सात फेरे लिए और वरमाला के बाद दादू राम अपनी मूंछों पर ताव देते नजर आए।

कैसे शुरू हुई यह प्रेम कहानी
बिलासपुर के सरकंडा इलाके के चिंगराजपारा अटल आवास क्षेत्र में रहने वाले दादू राम मजदूरी करते हैं। उनकी पहली पत्नी का निधन कई साल पहले हो चुका था। मोहल्ले की 30 वर्षीय युवती से उनका परिचय हुआ, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गया। समाज की परवाह किए बिना दोनों ने साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया।
भगवान शिव को बनाया साक्षी
शुक्रवार की रात दोनों ने मोहल्ले के शिव मंदिर में भगवान शिव को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। विवाह में सभी परंपरागत रस्में, वरमाला, सिंदूरदान, मांग भरना पूरा किया गया। शादी में पूरे मोहल्ले ने बाराती बनकर ढोल-नगाड़ों के साथ नाच-गाना किया और दूल्हा-दुल्हन को नवजीवन की शुभकामनाएं दीं। उम्र के इस बड़े अंतर को देखकर कुछ लोग अचंभित हुए, लेकिन दूल्हा-दुल्हन की खुशी देखकर सभी ने उनके फैसले का सम्मान किया। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि ‘प्यार उम्र नहीं देखता, सच्चे रिश्ते का सम्मान होना चाहिए।’

‘मूंछों पर ताव’ देकर जताई खुशी
शादी के बाद दादू राम ने अपनी मूंछों पर ताव देते हुए कहा अब जिंदगी फिर से नई शुरुआत कर रही है। उनकी खुशी मोहल्ले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या यह सेंसरशिप है? अखिलेश यादव के 80 लाख फॉलोअर्स वाला पेज फेसबुक ने किया सस्पेंड, समर्थकों में नाराजगी की लहर
Lucknow News: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का आधिकारिक फेसबुक पेज सस्पेंड कर दिया गया है। इस पेज से करीब 80 लाख फॉलोअर्स जुड़े हुए थे। पेज के निलंबन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है। पार्टी के अनुसार, यह पेज लंबे समय से अखिलेश यादव के राजनीतिक विचारों और जनहित के मुद्दों को सामने लाने का माध्यम रहा है। फेसबुक के इस निर्णय को लेकर कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला” बताया है।
विधायक अतुल प्रधान ने जताई नाराजगी
मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक अतुल प्रधान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “अखिलेश यादव का फेसबुक अकाउंट बंद करवाकर सरकार उनको जनता के दिलों से दूर नहीं कर सकती।” समर्थकों का मानना है कि यह कदम राजनीतिक दबाव के चलते उठाया गया है। कई यूजर्स ने फेसबुक पर सवाल उठाए हैं कि क्या यह तकनीकी कारण है या जानबूझकर किया गया फैसला। हालांकि, फेसबुक की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एक समर्थक ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह पेज केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि जनता की आवाज था।”
सपा नेताओं का तीखा वार
सपा के कई अन्य नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। एक सपा नेता ने लिखा, “देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता का पेज बंद होना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। सोशल मीडिया अब सत्ता की कठपुतली बनता जा रहा है।” दूसरे नेता ने कहा, “यह कदम न सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि तानाशाही की ओर बढ़ते शासन का संकेत है।”
पेज बहाली की मांग तेज
समाजवादी पार्टी ने फेसबुक से पेज की तत्काल बहाली की मांग की है। पार्टी का कहना है कि वे इस मुद्दे को आगे भी जोर-शोर से उठाएंगे और जरूरत पड़ी तो कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेंगे।
संत प्रेमानंद के लिए कांग्रेस के मुस्लिम विधायक ने मांगी दुआ,बोले- इंसानियत के प्रतीक प्रेमानंद जी हमेशा स्वस्थ्य रहें
भोपाल (इजहार हसन खान):समाज में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की मिसाल कायम करने वाले संत प्रेमानंद जी महाराज के अस्वस्थ होने की खबर के बाद देशभर में उनके स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थनाओं का दौर जारी है। खास बात यह है कि इस प्रार्थना में सिर्फ हिंदू अनुयायी ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल हो गए हैं।

भोपाल की मध्य विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए संत प्रेमानंद जी के जल्द स्वस्थ होने की दुआ की है। उन्होंने लिखा है कि ‘आज के दौर में इंसानियत और सद्भाव के प्रतीक, आदरणीय संत प्रेमानंद जी महाराज के अस्वस्थ होने का समाचार मिला। मालिक से दुआ है कि वे शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ हों और अपनी प्रेरक वाणी से यूं ही समाज का मार्गदर्शन करते रहें। उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घ आयु की दिल से दुआ करता हूं।’ आरिफ मसूद का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
आज के दौर में इंसानियत और सद्भाव के प्रतीक, आदरणीय संत #प्रेमानंद जी #महाराज के अस्वस्थ होने का समाचार मिला।
मालिक से दुआ है कि वे शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ हों और अपनी प्रेरक वाणी से यूँ ही समाज का मार्गदर्शन करते रहें।
उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घ आयु की दिल से दुआ करता हूँ pic.twitter.com/ubSmPwNDlv
— Arif Masood (@arifmasoodbpl) October 10, 2025
मुस्लिम युवक ने जताई थी किडनी दान की इच्छा
इससे पहले एक मुस्लिम युवक ने भी इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए संत प्रेमानंद जी को अपनी एक किडनी दान करने की इच्छा जताई थी। उस वक्त भी सोशल मीडिया पर यह खबर जमकर चर्चा में रही थी। अब विधायक आरिफ मसूद की इस पोस्ट ने एक बार फिर धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत की भावना को जीवंत कर दिया है।
संत प्रेमानंद जी.. मानवता के संदेशवाहक
संत प्रेमानंद जी अपने प्रवचनों में हमेशा मानवता, प्रेम और सद्भाव का संदेश देते रहे हैं। उनकी वाणी हमेशा समाज को जोड़ने और एकता का मार्ग दिखाने वाली रही है। आज जब वे अस्वस्थ हैं, तो हर वर्ग, हर धर्म और हर समुदाय के लोग उनके लिए दुआएं कर रहे हैं। यह नजारा भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे की सजीव मिसाल बन गया है।

लोगों ने कहा.. यही है असली भारत
सोशल मीडिया पर यूजर्स लगातार विधायक मसूद की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि ‘यही है असली भारत, जहां धर्म नहीं, दिल की बात मायने रखती है।’ तो कुछ ने कहा कि ‘संत प्रेमानंद जी जैसे लोग ही समाज में एकता और प्रेम के प्रतीक हैं।’
ट्रंप को नहीं मिला नोबेल, पुतिन ने दी प्रतिक्रिया – ‘वह शांति के लिए बड़ा काम कर रहे हैं’
इंटरनेशनल डेस्क : वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिनो मचाडो के नोबेल शांति पुरस्कार 2025 जीतने के कुछ घंटों बाद, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रयासों को स्वीकार किया और कहा कि ट्रंप “शांति के लिए बहुत कुछ करते हैं”।
नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से पहले, पुतिन ने दिन की शुरुआत में भी ट्रंप की प्रशंसा करते हुए कहा था कि वह “शांति को बढ़ावा देने के लिए बहुत काम कर रहे हैं,” जिसमें गाजा शांति समझौता को एक प्रमुख उदाहरण बताया गया। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह तय करना उनका अधिकार नहीं है कि ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं या नहीं।
ट्रंप को नहीं मिला नोबेल शांति पुरस्कार
इस बार, राष्ट्रपति ट्रंप को उनके साथी रिपब्लिकन, विभिन्न विश्व नेताओं और सबसे मुखर रूप से स्वयं उनके प्रयासों के बावजूद नोबेल शांति पुरस्कार से वंचित रखा गया। वेनेजुएला की विपक्षी कार्यकर्ता मारिया कोरिनो मचाडो को यह पुरस्कार दिया गया। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने कहा कि वह उन्हें “वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके अथक कार्य और तानाशाही से लोकतंत्र में एक न्यायसंगत और शांतिपूर्ण बदलाव हासिल करने के उनके संघर्ष” के लिए सम्मानित कर रही है।
नोबेल शांति पुरस्कार पर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप, जिनकी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार पर लंबे समय से नज़र रही है, उन्होंने अपने दोनों राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान इस सम्मान की अपनी इच्छा को लेकर खुलकर बात की है, खासकर हाल ही में जब वह दुनिया भर में संघर्षों को समाप्त करने का श्रेय ले रहे हैं। उन्होंने यह संदेह व्यक्त किया था कि नोबेल समिति उन्हें यह पुरस्कार कभी देगी।
ट्रंप ने गुरुवार को कहा, “उन्हें वह करना होगा जो वे करते हैं। वे जो कुछ भी करते हैं वह ठीक है। मैं यह जानता हूँ: मैंने इसके लिए नहीं किया। मैंने यह इसलिए किया क्योंकि मैंने बहुत से लोगों की जान बचाई।”
हालांकि ट्रंप को पुरस्कार के लिए कई नामांकन मिले थे, लेकिन उनमें से कई 2025 के पुरस्कार के लिए फरवरी 1 की समय सीमा के बाद आए, जो उनके पहले कार्यकाल के केवल डेढ़ सप्ताह बाद ही समाप्त हो गई थी। हालांकि, उनके कार्यालय ने एक बयान में कहा कि रिपब्लिकन प्रतिनिधि क्लाउडिया टेनी (न्यूयॉर्क) द्वारा दिसंबर में उनका नाम प्रस्तावित किया गया था, जिसमें अब्राहम अकॉर्ड्स की मध्यस्थता का हवाला दिया गया था, जिसने 2020 में इज़राइल और कई अरब राज्यों के बीच संबंधों को सामान्य किया था।
व्हाइट हाउस ने नोबेल समिति पर साधा निशाना
दिन की शुरुआत में, व्हाइट हाउस ने नोबेल समिति पर हमला करते हुए कहा कि चयन पैनल ने मचाडो को प्रतिष्ठित पुरस्कार देकर शांति से ऊपर राजनीति को रखा। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप शांति समझौते करना, युद्धों को समाप्त करना और जान बचाना जारी रखेंगे। उनके पास एक मानवतावादी का दिल है, और उनके जैसा कोई और कभी नहीं होगा जो अपनी इच्छाशक्ति के केवल बल से पहाड़ों को हिला सके।”
जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामत ने नथिंग में 2.1 करोड़ डॉलर का निवेश किया
नई दिल्लीः यूनिकॉर्न वेल्थ टेक कंपनी जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामत ने स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी नथिंग में 2.1 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। निखिल कामत ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह निवेश हाल ही में कंपनी द्वारा जुटाए गए 20 करोड़ डॉलर के कोष का हिस्सा है। कामत ने कहा कि यह निवेश कंपनी में 1.3 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर किया गया है। कामत ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में कहा, “मैंने हाल ही में नथिंग के सीरीज सी राउंड में 1.3 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर 2.1 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। उपभोक्ता तकनीक के भविष्य को आकार देने वाले ब्रांड का समर्थन करने पर मैं रोमांचित हूं।”
नथिंग ने हाल ही में सितंबर के मध्य में 20 करोड़ डॉलर का वित्तपोषण हासिल करने की घोषणा की थी। कामत ने कहा कि कंपनी में निवेश करने के उनके मुख्य मापदंडों में उपकरण का डिजाइन शामिल था, जो लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। इसके अलावा उत्पादों की उपयोगिता और संस्थापक की नवाचार क्षमता एवं उनकी प्रतिष्ठा भी महत्वपूर्ण कारण थे। कामत ने कहा, ‘‘2020 में स्थापित नथिंग 2024 तक भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला स्मार्टफोन ब्रांड बन चुका था, जिसमें सालाना आधार पर 577 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि हुई थी। 2025 की दूसरी तिमाही तक इसने लगातार छह तिमाहियों तक यह खिताब अपने पास रखा और अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल गया।”
नथिंग की शुरुआत करने से पहले इसके संस्थापक कार्ल पेई वनप्लस स्मार्टफोन कंपनी के सह-संस्थापक थे। पेई ने बताया कि कामत का नथिंग में शामिल होना ब्रांड के भविष्य के प्रति मजबूत विश्वास का संकेत है। उन्होंने कहा, ‘‘निखिल का हमारे साथ जुड़ना नथिंग और सीएमएफ को लेकर हमारी सोच और दृष्टिकोण पर एक मजबूत विश्वास का संकेत है। वह भारतीय उद्यमियों की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो दूरदर्शी सोच रखते हैं, तेजी से काम करते हैं और वैश्विक प्रभाव बनाने का लक्ष्य रखते हैं। उनके साथ जुड़ना हमारे लिए बेहद उत्साहजनक है। भारत नथिंग की यात्रा की शुरुआत से ही उसका केंद्र रहा है।”
पत्नी के मायके जाने से परेशान पति ने उठाया खौफनाक कदम, घर में मच गई चीख पुकार
बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में शुक्रवार को कथित तौर पर विवाद के बाद पत्नी के मायके चले जाने से परेशान पति ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मनियर कस्बे में रहने वाले जितेंद्र राजभर उर्फ बाघा (40) ने शुक्रवार को अपने घर के एक कमरे में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली।
थाना प्रभारी कौशल पाठक ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को पुलिस को घटना की सूचना मिली और पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। पुलिस के अनुसार, परिवार से जुड़े लोगों ने बताया कि जितेंद्र का अपनी पत्नी प्रमिला से सुबह के समय किसी बात को लेकर विवाद हो गया और इस दौरान प्रमिला अपना सामान लेकर मायके चली गई। पुलिस ने बताया कि पत्नी के जाने से परेशान जितेंद्र ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इंडस्ट्री ने खोया एक और महान सितारा! मशहूर एक्टर और बॉडी बिल्डर का निधन, अंतिम विदाई पर बहन का हाल देख नम हुईं सबकी आंखें
UP Desk : फेमस बॉडी बिल्डर और अभिनेता वरिंदर सिंह घुम्मण का बीते दिन दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान उन्हें दो बार हार्ट अटैक आया, जिसके बाद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। घुम्मण के निधन की खबर से पूरे पंजाब में शोक की लहर दौड़ गई है।
बहन के आंसुओं ने सबकी आंखें की नम
आज यानि शुक्रवार को दोपहर 3 बजे जलंधर के मॉडल टाउन इलाके के शमशानघाट में उनका अंतिम संस्कार हुआ। अंतिम यात्रा के लिए उनकी गाड़ी को विशेष रूप से सजाया गया और उस पर वरिंदर घुम्मण के पोस्टर लगाए गए। घुम्मण की अंतिम यात्रा से पहले परिवार में माहौल बेहद गमगीन रहा। वरिंदर की बहन अपने भाई का चेहरा आखिरी बार देखने के लिए बार-बार रो पड़ीं। बहन के आंसुओं ने मौके पर मौजूद हर शख्स को इमोशनल कर दिया।

वरिंदर सिंह का करियर और उपल्ब्धियां
गौरतलब है कि बाडी बिल्डर वरिंदर सिंह घुम्मन के 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही थी और उन्होंने यह बात स्वीकार भी की थी कि वह 2027 में चुनाव लड़ेंगे। वरिंदर घुम्मन ने सिर्फ पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उन्हें दुनिया का पहला शाकाहारी पेशेवर बॉडी बिल्डर माना जाता है। दुनिया के वह इकलौते ऐसे बाडी बिल्डर थे, जो शाकाहारी रहकर बाडी बिल्डिंग की दुनिया में बडा़ नाम कमा रहे थे। उन्होंने 2009 में मिस्टर इंडिया का खिताब जीता था और मिस्टर एशिया प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया था। उनकी उपलब्धियों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और उन्हें एशिया में बॉडीबिल्डिंग के राजदूत के
रूप में काम करने का मौका मिला।
अपनी दमदार काया और मेहनत के दम पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में भी कदम रखा और ‘टाइगर 3’ से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। वहीं 2013 में हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड श्वार्जनेगर ने एशिया में अपने प्रोडक्ट का प्रचार करने के लिए घुम्मन को चुना था।
यहां 50 साल से ऊपर कोई नहीं जीता… रहस्यमयी बीमारी ने गांव में मचाई दहशत
नेशनल डेस्क: बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड में बसे दूधपनिया गांव की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के पीछे एक डरावनी सच्चाई छिपी है। गंगटा पंचायत के इस नक्सल प्रभावित इलाके में ऐसा कोई परिवार नहीं, जिसने अपने किसी सदस्य को 40 की उम्र पार करने के बाद जिंदा देखा हो। यहां लोगों की जिंदगी धीरे-धीरे खत्म होती जाती है-जैसे कोई अदृश्य जहर उनके शरीर में फैल रहा हो।
रहस्यमयी बीमारी का कहर
56 वर्षीय विनोद बेसरा, गांव के सबसे बुजुर्ग लोगों में से एक हैं- और वो भी साल 2019 से बिस्तर पर पड़े हैं। विनोद कहते हैं, “पहले पैरों में दर्द शुरू हुआ, फिर कमर जवाब दे गई… अब शरीर धीरे-धीरे काम करना बंद कर रहा है।” उनकी पत्नी पूर्णी देवी (43) और बेटी ललिता (27) भी इसी बीमारी की चपेट में हैं। ललिता का चेहरा और शरीर अब उम्र से कई साल बड़ा दिखने लगा है। वर्तमान में छह लोग पूरी तरह से लाचार हैं — जिनमें कमलेश्वरी मुर्मू, छोटा दुर्गा, बड़ा दुर्गा, रेखा देवी और सूर्य नारायण मुर्मू जैसे नाम शामिल हैं. लगभग 25 और ग्रामीण इसी बीमारी से जूझ रहे हैं, जिनकी चाल अब लाठी के सहारे चलती है.
मौत की उम्र- सिर्फ 40 साल!
गांववालों के मुताबिक, बीमारी 30 की उम्र में पैरों के दर्द से शुरू होती है, फिर धीरे-धीरे कमर और मांसपेशियों को जकड़ लेती है.
बीते एक साल में ही फुलमनी देवी (40), रमेश मुर्मू (30), मालती देवी (48), सलमा देवी (45), रंगलाल मरांडी (55) और नंदू मुर्मू (50) जैसे कई लोग दम तोड़ चुके हैं.
गांव के लोग मानते हैं कि बीमारी की जड़ दूषित पानी है. पहले वे पहाड़ी झरनों और कुओं का पानी पीते थे, तब यह समस्या नहीं थी. अब सप्लाई किया गया पानी ही उनकी मौत की वजह बन रहा है.
स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू
आज तक की रिपोर्ट के बाद, डॉ. सुभोद कुमार (मेडिकल ऑफिसर, हवेली खड़गपुर) गांव पहुंचे. उन्होंने बताया कि “प्रारंभिक जांच में हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी ज्यादा पाई गई है।” उन्होंने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है और डॉक्टरों की टीम व पानी की जांच की सिफारिश की है। एसडीएम राजीव रोशन ने भी माना कि यह बीमारी संभवतः भूजल और खनिज असंतुलन से जुड़ी हो सकती है।
न नौकरी चाहिए, न मुआवज़ा, बस साफ पानी और इलाज
दूधपनिया के लोग जंगल से लकड़ी और झाड़ू बेचकर गुजर-बसर करते हैं. बिजली और सड़क तो मिली, लेकिन रोजगार और चिकित्सा सुविधाएं अब भी दूर हैं। गांववाले अब बस एक ही गुहार लगा रहे हैं- “हमें काम नहीं चाहिए, बस साफ पानी दो… ताकि हमारे बच्चे ज़िंदा रह सकें।”
मौत का गांव या सरकारी लापरवाही का आईना?
दूधपनिया गांव की कहानी सिर्फ एक बीमारी की नहीं, बल्कि सिस्टम की चुप्पी की है. जहां हर घर में कोई न कोई बीमार है, वहां ज़िंदगी अब एक धीमी मौत का इंतज़ार बन चुकी है.
हाईकोर्ट ने कहा: ‘पत्नी शिक्षित है और वह कमा सकती है, इस आधार पर भरण-पोषण के दावे को खारिज नहीं कर सकते’
Allahabad High Court News : तलाक के बाद पत्नी और बच्ची के भरण पोषण के लिए हर माह 40 हजार रुपये देने का आदेश कानपुर की फेमिली कोर्ट ने दिया है। इस आदेश के खिलाफ पति ने इलाहाबाद कोर्ट में याचिका दायर की थी। पति का तर्क था कि पत्नी शिक्षित है और वह कमा सकती है। कोर्ट ने इस दलील को मानने से इनकार करते हुए परिवार न्यायालय के फैसले पर मुहर लगा दी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पत्नी शिक्षित है और वह कमा सकती है के आधार पर भरण-पोषण के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मदनपाल सिंह की एकलपीठ ने परिवार न्यायालय के पत्नी के पक्ष में 40 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के आदेश को चुनौती देने वाली कानपुर नगर निवासी गौरव गुप्ता की अर्जी खारिज कर दी।

