Friday, February 13, 2026
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UP: 11 फरवरी को बजट पेश करेगी योगी सरकार, सत्र के प्रारंभ में दोनों सदनों को संबोधित करेंगी राज्यपाल

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उत्तर प्रदेश का बजट सत्र 9 फरवरी को प्रारंभ होगा और 11 फरवरी को योगी सरकार बजट पेश करेगी।बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल विधानसभा व विधान परिषद दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगी।

इस वर्ष पंचायत चुनाव और 2027 में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार कई लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा कर सकती है।

आर्थिक सर्वे के 800 पन्नों का निचोड़: घरेलू मोर्चे पर मजबूती, लेकिन बाहरी चुनौतियों का डर; जानिए बड़ी बातें

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की। बजट सत्र से ठीक एक दिन पहले पेश किया गया यह दस्तावेज भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा का आधिकारिक रिपोर्ट कार्ड है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किए गए इस सर्वे का लब्बोलुआब यह है कि भारत की विकास गाथा (ग्रोथ स्टोरी) मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हमें सतर्क रहने की जरूरत है।यदि आपके पास पूरा दस्तावेज पढ़ने का समय नहीं है, तो यहां आसान भाषा में समझिए आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख बिंदु और उनके मायने:

1. जीडीपी की रफ्तार
स्थिर और मजबूत सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहेगी। हालांकि, यह चालू वित्त वर्ष (2025-26) के अनुमानित 7.4% से थोड़ी कम है, लेकिन वैश्विक मंदी के माहौल में यह आंकड़ा भारत की स्थिरता को दर्शाता है।

2. महंगाई पर लगाम 
आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि महंगाई ‘नियंत्रित’ है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान घरेलू मुद्रास्फीति औसतन 1.7% रही है। कोर इन्फ्लेशन में कमी यह संकेत देती है कि सप्लाई-साइड की स्थिति में सुधार हुआ है।

3.विदेशी मोर्चे पर चिंता 
सर्वे ने एक महत्वपूर्ण ‘विरोधाभास’की ओर इशारा किया है। जहां भारत के घरेलू फंडामेंटल मजबूत हैं, वहीं बाहरी मोर्चे पर जोखिम बरकरार हैं। विशेष रूप से पूंजी प्रवाह और करेंसी पर दबाव चिंता का विषय है। विदेशी पूंजी के सूखे के कारण 2025 में रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

4. राजकोषीय अनुशासन 
सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारा है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8% रहा, जो बजट अनुमानों से बेहतर है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसे 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

5. राज्यों की ‘मुफ्त रेवड़ी’ पर चेतावनी 
सर्वे में राज्यों द्वारा बिना शर्त नकद हस्तांतरण और वित्तीय लोकलुभावनवाद पर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसे खर्च पूंजीगत व्यय को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे अंततः सॉवरेन उधारी की लागत बढ़ सकती है।

6. इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स की लंबी छलांग 
अर्थव्यवस्था को गति देने में बुनियादी ढांचे का बड़ा हाथ है: 

  • पूंजीगत व्यय: केंद्र का कैपेक्स FY18 के 2.63 लाख करोड़ रुपये से चार गुना बढ़कर FY26 में 11.21 लाख करोड़ रुपये (बजट अनुमान) हो गया है।
  • सड़क और रेलवे: हाई-स्पीड कॉरिडोर 550 किमी (FY14) से बढ़कर 5,364 किमी (दिसंबर 2025 तक) हो गए हैं। रेलवे ने FY26 में 3,500 किमी नई लाइनें जोड़ी हैं।

7. विदेशी मुद्रा भंडार का कवच 
बाहरी झटकों से निपटने के लिए भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त ‘बफर’ है। 16 जनवरी 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।

8. किस सेक्टर के लिए क्या?

  • बिजली कंपनियां: डिस्कॉम के लिए यह एक ऐतिहासिक बदलाव का साल रहा, जिन्होंने FY25 में पहली बार 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया।
  • पीएलआई स्कीम: 14 सेक्टरों में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत 2.0 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है और 12.6 लाख से अधिक रोजगार पैदा हुए हैं।
  • सेमीकंडक्टर: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 1.60 लाख करोड़ रुपये के 10 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
  • 9. गरीबी में भारी गिरावट 
    नीति आयोग के मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) का हवाला देते हुए सर्वे बताता है कि गरीबी 2005-06 के 55.3% से घटकर 2022-23 में 11.28% रह गई है।

    10. इनोवेशन और रोजगार 
    भारत ने इनोवेशन में लंबी छलांग लगाई है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2019 के 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर आ गई है। रोजगार के मोर्चे पर, नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर FY25 में 2.8 करोड़ से अधिक रिक्तियां मोबिलाइज की गईं। आर्थिक समीक्षा 2025-26 साफ करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी चमक बनाए रखी है। हालांकि, राज्यों की वित्तीय स्थिति और अस्थिर वैश्विक पूंजी प्रवाह वे क्षेत्र हैं जिन पर नीति निर्माताओं को आगामी बजट में विशेष ध्यान देना होगा।

Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण में RTI कानून की समीक्षा की सिफारिश, गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा पर जोर

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इस आर्थिक सर्वेक्षण में लगभग 20 साल पुराने सूचना का अधिकार (RTI) कानून, 2005 की समीक्षा की बात कही गई है। इसके साथ ही सर्वेक्षण में यह स्पष्ट कहा गया है कि इस कानून को केवल जिज्ञासा पूरी करने या सरकार को बाहरी निगरानी के माध्यम से नियंत्रित करने के लिए नहीं बल्कि सार्वजनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र में नागरिक भागीदारी बढ़ाने के लिए बनाया गया था।

कानून में बदलाव का सुझाव
सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया कि कानून में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इनमें विचार-मंथन नोट्स, ड्राफ्ट टिप्पणियां और कार्य-पत्र तब तक खुलासे से सुरक्षित रखने की बात कही गई है जब तक वे अंतिम निर्णय का हिस्सा न बन जाएं। इसके अलावा,  सेवा रिकॉर्ड, स्थानांतरण और गोपनीय कर्मचारी रिपोर्ट को ऐसे सामान्य RTI अनुरोधों से बचाने की सिफारिश की गई है जिनका सार्वजनिक हित से कमजोर संबंध हो।
सर्वेक्षण में रखा अहम प्रस्ताव
सर्वेक्षण में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि कुछ मामलों में  मंत्री स्तरीय संकुचित वीटो का प्रावधान किया जाए, जिसे संसद की निगरानी में रखा जाए। हालांकि, सर्वेक्षण  में जोर देकर कहा गया है कि ये केवल सुझाव हैं और कानून की मूल भावना को कमजोर करने का उद्देश्य नहीं रखता है।
राय देने से झिझकते हैं अधिकारी’
सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि वैश्विक अनुभव दिखाते हैं कि पारदर्शिता तभी प्रभावी होती है जब अधिकारियों के लिए ईमानदार और खुला विचार-विमर्श संभव हो। अमेरिका, स्वीडन और ब्रिटेन में नीति ड्राफ्ट, आंतरिक नोट्स और वित्तीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाता है। भारत में, इसके विपरीत, अधिकांश ड्राफ्ट नोट्स, आंतरिक पत्राचार और व्यक्तिगत रिकॉर्ड सार्वजनिक हो जाते हैं, जिससे अधिकारी खुले तौर पर राय व्यक्त करने या साहसिक निर्णय लेने में हिचकिचा सकते हैं।
अफसर केवल अंतिम निर्णय के लिए जवाबदेह’
सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब अधिकारी निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श कर सकें, और केवल अंतिम निर्णय के लिए जवाबदेह हों, न कि हर अधूरा विचार सार्वजनिक होने पर।

‘अजित दादा’ पंचतत्व में विलीन: परिवार समेत समर्थकों ने नम आंखों से दी विदाई; अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को गुरुवार को उनके गृहनगर बारामती में अंतिम विदाई दी गई। एक दुखद विमान हादसे में उनके निधन के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर है। अजित पवार का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में भारी संख्या में समर्थक अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

“अजित दादा अमर रहें” के नारे से गूंजा बारामती
अंतिम संस्कार की रस्में दोपहर में शुरू हुईं। अजित पवार के बेटों, पार्थ और जय ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान उनकी पत्नी और राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार अपने आंसू नहीं रोक पा रही थीं। जब उनके पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ उनके गांव काटेवाड़ी से विद्या प्रतिष्ठान मैदान लाया गया। मैदान में मौजूद हजारों लोगों ने “अजित दादा अमर रहें” के नारे लगाए, जिससे पूरा माहौल गमगीन हो गया।
अंतिम संस्कार में शामिल हुए कई केंद्रीय मंत्री
इस दुखद घड़ी में देश और राज्य के कई बड़े नेता बारामती पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, मुरलीधर मोहोल और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। अजित पवार के चाचा और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार भी वहां मौजूद थे। वे पूरे समय चुपचाप बैठे रहे और अपने भतीजे को अंतिम विदाई दी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी पुणे से बारामती पहुंचे और पुष्पचक्र अर्पित किए।

अजित पवार की चचेरी बहन और सांसद सुप्रिया सुले पूरे समय सुनेत्रा पवार के साथ खड़ी रहीं और उन्हें सांत्वना देती रहीं। अंतिम संस्कार में प्रफुल्ल पटेल, रामदास अठावले, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, पूर्व मुख्यमंत्री सुशीलकुमार शिंदे और अशोक चव्हाण जैसे दिग्गज नेता भी शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी काटेवाड़ी जाकर अजित पवार को श्रद्धांजलि दी। अभिनेता रितेश देशमुख भी इस मौके पर मौजूद थे।

अजित पवार अपने अनुशासन के लिए जाने जाते थे। अंतिम संस्कार के दौरान लाउडस्पीकर से बार-बार लोगों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई। प्रशासन ने कहा कि शांति बनाए रखना ही ‘दादा’ के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। अजित पवार के भाई श्रीनिवास पवार, बहनें और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उन्हें नमन किया।

कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा बुधवार को तब हुआ जब अजित पवार का विमान बारामती एयरस्ट्रिप के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान लैंडिंग से महज 200 मीटर पहले गिर गया और उसमें आग लग गई। इस हादसे में अजित पवार के साथ चार अन्य लोगों की भी मौत हो गई। मृतकों में पायलट कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट कैप्टन शाम्भवी पाठक, सुरक्षा अधिकारी विदीप जाधव और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली शामिल थे। इन सभी के शव उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं।

ब्लैक बॉक्स हुआ बरामद
हादसे की जांच के लिए पुलिस ने आकस्मिक मौत (एडीआर) का मामला दर्ज किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है। इसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर शामिल हैं, जिससे हादसे की असली वजह पता चल सकेगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, खराब विजिबिलिटी की वजह से विमान को लैंडिंग में दिक्कत हुई थी।

UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

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नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हाल ही में नोटिफाइड नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई की है। कोर्ट ने यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम 2026 को अधिसूचित किए जाने वाले नियम पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसे लेकर सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ भाषा को स्पष्ट करें। इस मामले को लेकर कोर्ट 19 मार्च को अगली सुनवाई करेगा।

उच्चतम न्यायालय की महत्तवपूर्ण बातें :- 

  • CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा- हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ भी हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं ?
  • CJI ने कहा- शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता झलकनी चाहिए।
  • CJI ने केंद्र से कहा- आप SC/ST स्टूडेंट्स के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं।
  • कोर्ट ने आगे कहा- नियमों की परिभाषा पूरी तरह अस्पष्ट है। इसका दुरुपयोग हो सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स इसमें संशोधन की सलाह दे सकते हैं।
  • हम विश्वविद्यालयों में एक स्वतंत्र और समान वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक 3e प्रणाली कायम है, हमें कोई कारण नहीं दिखता… 3c प्रणाली प्रासंगिक कैसे हो सकती है? क्या यह अनावश्यक है?

उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए यूजीजी ने बनाए थे नियम 
आप को बता दें कि यूजीजी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के मकसद से बनाए गए हैं, लेकिन याचिकाकर्ता ने शिकायत निवारण तंत्र से सामान्य वर्ग के छात्रों को बाहर रखने पर चिंता जताई थी। जब यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने आई तो उन्होंने कहा, ‘हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि कमियों को दूर किया जाए।’ ये नियम यूजीसी के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए विनियम, 2026 के तहत आते हैं। इस नियम को 13 जनवरी को नोटिफाइड किया गया था और ये देश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होते हैं।

नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का यूजीसी ने दिया था आदेश 
इन नियमों का उद्देश्य धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान, जाति या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करना था। ये नियम खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और विकलांग व्यक्तियों के सदस्यों के होने वाले शोषण की घटनाओं को रोकने और उच्च शिक्षा में समानता और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए थे। नियमों के तहत, उच्च शिक्षण संस्थानों को वंचित समूहों के लिए नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने और भेदभाव की शिकायतों की जांच करने के लिए समान अवसर केंद्र और समानता समितियों की स्थापना करना आवश्यक है।

यूजीसी के नए नियम को लेकर 19 मार्च होगी अगली सुनवाई 
हालांकि, सर्वोच्च अदालत के समक्ष याचिका में तकर् दिया गया है कि ये नियम प्रकृति में अनुचित इसलिए हैं, क्योंकि वे सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकायत निवारण और संस्थागत सुरक्षा तक पहुंच से वंचित करते हैं। याचिकाकर्ता ने नियमों को उनके मौजूदा स्वरूप में लागू करने पर रोक लगाने के निर्देश मांगे हैं। याचिका में भी कहा गया है कि जाति पहचान के आधार पर शिकायत निवारण तंत्र तक पहुंच से इनकार करना ‘अस्वीकार्य राज्य भेदभाव’ के बराबर है। याचिका में तकर् देते हुए कहा गया है कि ऐसा चयनात्मक ढांचा प्रभावी रूप से गैर-आरक्षित श्रेणियों के खिलाफ दुश्मनी को बढ़ावा देता है और समानता के मूल उद्देश्य को कमजोर करता है। फिलहाल अब इस मामले को लेकर अगली सुनवाई 19 मार्च होगी।

 

मशहूर कथावाचक का हुआ निधन, पिछले साल लीक हुआ था गुरु के साथ पर्सलन वीडियो, जांच में उलझी डेथ मिस्ट्री

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Sadhvi Prem Baisa Death: राजस्थान की चर्चित कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार को हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। साध्वी का निधन संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ है, वहीं उनकी मौत के कुछ घंटों बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किए गए कथित सुसाइड नोट ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

मौत के बाद आया सोशल मीडिया पोस्ट
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा की मौत बुधवार शाम करीब 5:30 बजे हो चुकी थी। इसके बावजूद रात करीब 9:28 बजे उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक लंबी पोस्ट साझा की गई। इस पोस्ट के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मौत के बाद अकाउंट से पोस्ट किसने किया।

पिछले साल वायरल वीडियो से बढ़ा था तनाव
जानकारी के मुताबिक, पिछले साल जुलाई में साध्वी प्रेम बाईसा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद वह मानसिक तनाव में थीं। इस मामले को लेकर उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उस समय साध्वी ने कहा था कि पिता-पुत्री के रिश्ते को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए हर तरह की परीक्षा देने को तैयार हैं।

निजी अस्पताल ले गए परिजन, पहले ही हो चुकी थी मौत
अस्पताल संचालक डॉक्टर प्रवीण जैन ने बताया कि साध्वी को उनके पिता और एक अन्य व्यक्ति शाम करीब 5:30 बजे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जांच में सामने आया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और परिजनों से शव को एसडीएम अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम कराने को कहा गया।

शव आश्रम ले जाना बना सवाल
डॉक्टर के अनुसार, पोस्टमार्टम के लिए एमडीएम अस्पताल ले जाने के बजाय साध्वी के पिता शव को बोरानाडा स्थित उनके आश्रम लेकर चले गए, जो पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है।

पुलिस ने आश्रम का कमरा किया सीज
मौत की सूचना मिलने के बाद बोरानाडा थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और साध्वी प्रेम बाईसा का कमरा सीज कर दिया गया, ताकि किसी भी तरह के सबूतों से छेड़छाड़ न हो सके। बाद में शव को एमडीएम अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज
एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि साध्वी को परिजन निजी अस्पताल लेकर गए थे, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।

‘हमें पता है कि क्या हो रहा है…’, UGC के नए नियम से जुड़े आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई

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नेशनल डेस्कः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों और युवाओं में इन नियमों को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।

UGC के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच आज गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने के बाद इस मुद्दे पर सियासी और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

याचिका में क्या कहा गया है?

याचिका में दावा किया गया है कि UGC के नए नियम जातिगत भेदभाव खत्म करने के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए जातिगत भेदभाव की शिकायत दर्ज कराने की स्पष्ट व्यवस्था की गई है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को इस दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों के खिलाफ किसी तरह की सजा या कार्रवाई का प्रावधान नहीं किया गया है। जिससे इन नियमों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

क्या है UGC का नया “समानता नियम”?

UGC ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन रेगुलेशंस, 2026” को लागू कर दिया है। UGC के अनुसार, इस नियम का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना, छात्रों और कर्मचारियों को समान अवसर देना और शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित और समावेशी बनाना बताया गया है। इस नियम की सबसे अहम बात यह है कि अब SC और ST के साथ-साथ OBC वर्ग को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है।

नए नियमों के तहत क्या-क्या करना होगा?

UGC के नियमों के अनुसार, हर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre) बनाना अनिवार्य होगा। भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष समितियां गठित करनी होंगी। छात्रों और कर्मचारियों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू करनी होगी और तय समयसीमा के भीतर शिकायतों पर कार्रवाई करनी होगी।

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?

नियम लागू होते ही देश के कई हिस्सों में सवर्ण समाज से जुड़े संगठन, कुछ छात्र संगठन और शिक्षक संघ इसके विरोध में सामने आ गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि नियम सभी वर्गों के लिए संतुलित नहीं हैं। इससे शिक्षण संस्थानों में डर और अविश्वास का माहौल बन सकता है और झूठे आरोप लगाकर छात्रों और शिक्षकों को परेशान किया जा सकता है। यही वजह है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और आज की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

वैष्णो देवी की तरह मचैल माता यात्रा में भी मिलेगी यह खास सुविधा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अहम कदम

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जम्मू-कश्मीर डेस्क: मचैल माता की पवित्र यात्रा को अब और ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पिछले साल की दर्दनाक घटना से सीख लेते हुए प्रशासन ने एक अहम कदम उठाने का फैसला किया है। अब मचैल यात्रा में आरएफआईडी (RFID) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हर श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

दरअसल, 14 अगस्त 2025 को मचैल यात्रा के दौरान बादल फटने से भारी तबाही हुई थी। इस हादसे में 60 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, 100 से अधिक लोग घायल हुए थे और कई लोग लंबे समय तक लापता रहे। राहत और बचाव कार्य करीब एक महीने तक चला। इस घटना ने साफ कर दिया कि पुरानी व्यवस्थाएं अब पर्याप्त नहीं हैं और नई तकनीक अपनाना जरूरी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब मचैल यात्रा को वैष्णो देवी यात्रा की तरह आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना चाहता है। नई व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु को यात्रा के दौरान एक RFID कार्ड दिया जाएगा। इस कार्ड से यह पता लगाया जा सकेगा कि श्रद्धालु किस समय कहां मौजूद है। अगर किसी तरह की आपात स्थिति आती है, तो राहत और बचाव टीम को तुरंत सही जानकारी मिल सकेगी।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि अप्रैल से सितंबर के बीच, मानसून से पहले, आपदा से निपटने की पूरी तैयारी कर ली जाए। खास तौर पर बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम से जुड़ी घटनाओं को लेकर प्रशासन हमेशा सतर्क रहे।

राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग के साथ लगातार तालमेल रखा जा रहा है। मौसम की पहले से चेतावनी, लगातार निगरानी और सही समय पर जानकारी पहुंचाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

RFID सिस्टम के साथ-साथ मचैल यात्रा मार्ग पर सुरक्षित शरण स्थल और सहायक ढांचे बनाने की भी योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, वैष्णो देवी समेत सभी बड़े तीर्थ स्थलों पर नियमित मॉक ड्रिल कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

किश्तवाड़ जिला प्रशासन का कहना है कि मचैल हादसे से मिले अनुभवों के आधार पर एक पूरा आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया गया है। प्रशासन का साफ संदेश है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उम्मीद है कि नई तकनीक, बेहतर योजना और अलग-अलग एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल से मचैल माता की यात्रा आने वाले समय में आस्था के साथ-साथ सुरक्षा की मिसाल बनेगी।

ब्रश करने के बाद भी आती है मुंह से बदबू? एक्सपर्ट ने बताई इसके पीछे की बड़ी वजह

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नेशनल डेस्क: मुंह से बदबू आने की समस्या आम होती जा रही है। खाने-पीने के बाद या दिनभर के दौरान कई लोग इस परेशानी से गुजरते हैं। अधिकतर लोग इसे सिर्फ पेट की खराबी या ओरल हाइजीन की कमी से जोड़ते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। कई बार यह समस्या शरीर में किसी छिपी हुई बीमारी का संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार ब्रश करने या माउथवॉश करने के बावजूद अगर बदबू बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बदबू आने के संभावित कारण
एक्सपर्ट आचार्य मनीष के मुताबिक, मुंह से बदबू आने के कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारणों में मुंह की सफाई का ठीक से न होना, पानी की कमी, लंबे समय तक खाली पेट रहना, और सिगरेट या शराब का सेवन शामिल हैं।

गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार मुंह से बदबू आने पर यह कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। पाचन तंत्र की समस्याओं जैसे गैस, एसिडिटी या कब्ज होने पर भी यह समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा मसूड़ों की सूजन, खून आना या जिंजिवाइटिस जैसी बीमारियां भी मुंह से बदबू आने का कारण बन सकती हैं।

साइनस, टॉन्सिल या गले के संक्रमण में म्यूकस जमा होने से भी बदबू आ सकती है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों में मुंह से मीठी या फल जैसी बदबू महसूस हो सकती है, जो ब्लड शुगर कंट्रोल न होने का संकेत देती है। इसके अलावा, लिवर या किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के कारण भी मुंह की बदबू तेज या अजीब तरह की हो सकती है।

मुंह की बदबू से बचने के उपाय
एक्सपर्ट बताते हैं कि सुबह और शाम ब्रश करना, जीभ की सफाई रखना और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। लंबे समय तक खाली पेट न रहना भी इस समस्या को कम कर सकता है। हरी सब्जियां और फल खाने से भी मुंह की बदबू पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यदि बदबू लंबे समय तक बनी रहती है, तो समय पर डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है। मुंह से बदबू केवल सफाई की समस्या नहीं होती, बल्कि यह पेट, दांत, डायबिटीज, लिवर या किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। सही समय पर ध्यान देने और जांच कराने से इस समस्या को रोका जा सकता है।

Kanpur: डिलीवरी बॉयज के बीच बमबाजी, ऑर्डर को लेकर हुआ था विवाद, पुलिस ने एक को हिरासत में लिया, पूछताछ जारी

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कानपुर के कल्याणपुर आवास विकास में आर्डर के विवाद में डिलीवरी ब्वॉय और उसके साथियों पर बम फेंकने के आरोप है। घटना में एक डिलीवरी ब्वॉय घायल हो गया। लोगों ने एक आरोपी को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। जानकारी के अनुसार, इनकम टैक्स हाउसिंग सोसायटी विनायकपुर निवासी सुशील कुमार आवास विकास में केसा चौराहे के पास एक फूड डिलीवरी कंपनी में बतौर डिलीवरी ब्वॉय हैं।

सुशील के मुताबिक बुधवार रात वह आर्डर ले जा रहे थे। तभी एक अन्य डिलीवरी ब्वॉय ने खुद आर्डर ले जाने को बोला। जब उन्होंने उसकी शिफ्ट सुबह और शाम की होने की बात कही, तो वह धमकी देकर चला गया और थोड़ी देर बाद अपने चार साथियों के साथ वापस आया। आरोप है कि उसने साथियों के साथ मिलकर बम चला दिए, जिसमें उसके पैर में काफी चोट आई।आरोपी युवक को हिरासत में लिया
शोर शराबा सुनकर इलाकाई युवकों ने एक युवक को दबोच लिया। पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल की और युवक को लेकर थाने पहुंची। यहां आरोपी से पूछताछ की जा रही है। वहीं, घायल सुशील कुमार को अस्पताल भेजा गया है। कल्याणपुर एसीपी आशुतोष कुमार ने बताया कि एक युवक को हिरासत में लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है।