Friday, May 15, 2026
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UP: अब घर खरीदना होगा आसान, एक क्लिक में जांचें बिल्डर का रिकॉर्ड, खरीदारों को बड़ी राहत

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फ्लैट खरीदने वालों के लिए अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) जल्द ही रेरा 2.0 नाम से नया एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रहा है। इसके जरिए अब कोई भी व्यक्ति घर खरीदने से पहले बिल्डर या रियल एस्टेट कंपनी की पूरी जानकारी एक क्लिक में देख सकेगा।यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी के मुताबिक, यह ऐप इसी साल दिसंबर तक लॉन्च किया जाएगा। इससे घर खरीदने की प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। इस प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे शिकायतों का निस्तारण तेजी से होगा और नियम तोड़ने वाले बिल्डरों पर जल्दी कार्रवाई हो सकेगी।नई सुविधा के तहत खरीदार किसी भी प्रोजेक्ट या कंपनी के बारे में जरूरी जानकारी जैसे कितनी शिकायतें दर्ज हैं, प्रोजेक्ट में देरी का रिकॉर्ड, नियमों का पालन, आर्थिक स्थिति और अनुभव आसानी से जान सकेंगे। इससे घर खरीदने से पहले सही फैसला लेना आसान होगा।

इसके अलावा, प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी जानकारी जैसे जमीन का मालिकाना हक, मंजूरी, समय सीमा और फंड के इस्तेमाल का विवरण भी उपलब्ध रहेगा। इससे लोगों को बिना बिचौलिये के सही और पक्की जानकारी मिल सकेगी।

पूर्वाग्रह की धुंध: बंगाल के जनादेश पर विदेशी मीडिया गढ़ने लगा हिंदू राष्ट्रवाद का नैरेटिव, असली वजह क्या है?

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पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता तक पहुंचते ही वैश्विक वैचारिक गलियारों में भी बेचैनी पैदा कर दी। विदेशी मीडिया के बड़े हिस्से ने भारत में लोकतंत्र, अल्पसंख्यक अधिकार और चुनावी निष्पक्षता पर अचानक सवाल उठाने शुरू कर दिए। न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्जियन और अल जजीरा जैसे मंचों पर यह नैरेटिव तेजी से गढ़ा जाने लगा कि भारत हिंदू राष्ट्रवाद की ऐसी दिशा में बढ़ रहा है, जहां लोकतंत्र व बहुलता खतरे में है।

दिलचस्प यह है कि यही बेचैनी तमिलनाडु व केरल के परिणामों पर लगभग गायब रही, जहां भाजपा सत्ता से दूर रही। असम में भाजपा की हैट्रिक भी उतना वैचारिक तूफान नहीं खड़ा कर सकी, जितना बंगाल में सत्ता परिवर्तन ने कर दिया। सवाल यही है कि क्या चिंता वास्तव में लोकतंत्र की है या उस सियासी बदलाव की, जिसने दशकों पुराने वामपंथ और छद्म-सेकुलर वैचारिक गढ़ को ध्वस्त कर दिया? जब भाजपा हारती है, तो विदेशी मीडिया भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता की तारीफ करता है, पर जैसे ही वह निर्णायक जनादेश लेकर आती है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया संदेह और संस्थागत संकट की भाषा में बदल जाती है। यह चयनात्मक दृष्टि सिर्फ संयोग नहीं लगती।पश्चिमी मीडिया भारत को अक्सर यूरोपीय राजनीतिक अनुभवों के फ्रेम से समझने की कोशिश करता है। वहां राष्ट्रवाद का अर्थ सत्ता विस्तार व नस्लीय वर्चस्व के इतिहास से जुड़ा रहा है। वहीं, भारत में राष्ट्रवाद सांस्कृतिक स्मृति, सभ्यतागत पहचान और ऐतिहासिक आत्मबोध से जुड़ा है। इसे विदेशी मीडिया समझ नहीं पाता। इसीलिए हमारे सांस्कृतिक पुनर्जागरण को सीधे बहुसंख्यकवादी खतरे से जोड़ देते हैं। यही कारण है कि बंगाल में भाजपा की जीत को लोकतांत्रिक परिवर्तन के बजाय हिंदू राष्ट्रवादी कब्जे की तरह प्रस्तुत किया गया।

एसआईआर पर आधा सच ही दिखाने की कोशिश
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने परिणामों के बाद वोट चोरी का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को भाजपा का आयोग बताया। विदेशी मीडिया ने इन आरोपों को लगभग बिना तथ्य जांचे ही अपने विमर्श का आधार बना लिया। विशेष रूप से एसआईआर को मुस्लिम मतदाताओं को हटाने की साजिश के रूप में पेश किया गया, जबकि हटाए गए 91 लाख नामों में 63% हिंदू मतदाता थे।

बड़ी संख्या में नाम मृत, डुप्लिकेट, स्थायी रूप से स्थानांतरित या फर्जी पाए गए थे। इसके बावजूद विदेशी मीडिया के बड़े हिस्से ने केवल मुस्लिम वोट हटाए गए वाली लाइन को प्रमुखता दी। यही नहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मंचों ने बिना ठोस प्रमाण के मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता तक पर सवाल खड़े किए। चुनाव आयोग को सरकार नियंत्रित संस्था की तरह पेश करने की कोशिश हुई, जबकि यही संस्थाएं तब तक विश्वसनीय मानी जाती हैं जब तक परिणाम उनकी वैचारिक अपेक्षाओं के अनुरूप हों।

असली बेचैनी मोदी की बढ़ती शक्ति 
सच्चाई यह है कि नरेंद्र मोदी और भाजपा का बढ़ता राजनीतिक विस्तार विदेशी वैचारिक प्रतिष्ठानों की सबसे बड़ी बेचैनी बन चुका है। भाजपा अधिकांश राज्यों में प्रत्यक्ष या गठबंधन के जरिए सत्ता में है। ऐसे में भारत को सत्तावादी लोकतंत्र और एकदलीय प्रभुत्व के फ्रेम में फिट करने की कोशिशें और तेज होती दिख रही हैं।

बंगाल का फैसला यह भी साबित करता है कि भारत का मतदाता अपनी प्राथमिकताएं जमीन, अनुभव और आकांक्षाओं के आधार पर तय कर रहा है, न कि न्यूयॉर्क, लंदन या दोहा में बैठे नैरेटिव निर्माताओं की वैचारिक सुविधा के अनुसार।

हिंसा पर चुप्पी, जनादेश पर हंगामा
सबसे बड़ा विरोधाभास बंगाल की हिंसा को लेकर दिखाई देता है। एक दशक में पंचायत से लेकर विधानसभा चुनावों तक बंगाल राजनीतिक हिंसा, हत्याओं व प्रतिशोध की घटनाओं के कारण राष्ट्रीय बहस का केंद्र रहा। विपक्षी कार्यकर्ताओं की हत्याएं, बूथ कब्जाने के आरोप और सिंडिकेट राज की चर्चा भारत के भीतर लगातार होती रही।

विदेशी मीडिया के बड़े हिस्से ने इन्हें कभी उतनी प्रमुखता नहीं दी, जितनी भाजपा की जीत के बाद अल्पसंख्यकों के खतरे को दी जा रही है। अल जजीरा जैसे मंच यह याद दिलाते हैं कि 1984 के दंगों और बाबरी विवाद के बाद बंगाल अपेक्षाकृत शांत रहा, लेकिन वे हाल के वर्षों की सियासी हिंसा पर लगभग मौन दिखते हैं। विडंबना यह है कि इस बार अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण चुनाव हुआ और उसी के बाद लोकतंत्र पर संकट का शोर सबसे ज्यादा सुनाई देने लगा।

बंगाल ने सिर्फ हिंदुत्व पर वोट नहीं दिया
विदेशी विश्लेषणों में बंगाल की जीत को लगभग पूरी तरह हिंदू ध्रुवीकरण के फ्रेम में समेट दिया गया। लेकिन वे यह देखने में विफल रहे कि जनता की नाराजगी के केंद्र में आर्थिक बदहाली, बेरोजगारी, उद्योगों का पलायन और भ्रष्टाचार भी थे।

प. बंगाल पर कर्ज का बोझ 7.7 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। हजारों कंपनियां राज्य छोड़ चुकी हैं। युवाओं का बड़ा वर्ग रोजगार के लिए पलायन कर रहा है। कट मनी, भर्ती घोटाले और सिंडिकेट संस्कृति जैसे मुद्दे वर्षों से जनता में असंतोष पैदा कर रहे थे। लेकिन विदेशी रिपोर्टों में इन सवालों की जगह हिंदू राष्ट्रवाद बनाम अल्पसंख्यक की बहस ने ले ली।

यूपी में भीषण हादसा: मैजिक वाहन पलटा, आठ लोगों को कुचलते हुए गुजरा ट्रक, चार की मौत; तीन के सिर गायब

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बलिया जिले के मांझी- छपरा मुख्य मार्ग पर इनई गांव के समीप असंतुलित मैजिक वाहन पलटने के बाद सामने से आ रही बेकाबू ट्रक ने आठ लोगों को कुचल दिया। घटनास्थल पर ही चार लोगों की मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से जख्मी चार लोगों का छपरा सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है।

क्या है मामला
बुधवार तड़के मैजिक पर सवार होकर कुल 13 लोग छपरा के ब्रम्हपुर से बरात में डांस का कार्यक्रम कर बलिया के नरही स्थित लक्ष्मण पुर चट्टी लौट रहे थे। लखनऊ निवासी आर्केस्ट्रा संचालक अशोक राम ने बताया कि सभी मृतक लखनऊ के निवासी हैं, जो ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम में आए थे। बताया कि हादसे के बाद मृतकों में से तीन शवों के सिर गायब थे। ट्रक सिर को कुचलते हुए गुजर गया। मृतकों की पहचान राहुल, अवधेश, प्रीति, सोनी के रूप में हुई।

बताया कि बलिया जिले के नरही क्षेत्र में संचालित ‘मुस्कान ऑर्केस्ट्रा’ में काम करते हैं। ऑर्केस्ट्रा टीम छपरा के भगवान बाजार में एक शादी में डांस कर वापस लौट रहे थे। इस दौरान पांच डांसर भी थीं। इनमें से तीन की मौत हो गई। दो की हालत गंभीर है। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वहीं वाहनों को कब्जे में लेकर घायलों को इलाज के लिए भर्ती कराया है।

KGMU: कार्य परिषद में शामिल नहीं किए गए दलित व पिछड़े वर्ग के प्रोफेसर, राजभवन ने कुलपति को भेजा पत्र

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केजीएमयू की कार्यपरिषद में अभी तक दलित व पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों को शामिल नहीं किया गया है। इसे लेकर राजभवन ने केजीएमयू कुलपति को पत्र भेजा है। प्रदेश सरकार ने दो जनवरी 2026 को केजीएमयू की नियमावली में बदलाव किया था। इसे किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश (संशोधन) अधिनियम 2025 नाम दिया गया है।इसके तहत केजीएमयू अधिनियम की धारा 24(1) में यह व्यवस्था दी गई है कि कार्यपरिषद में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के वरिष्ठतम आचार्य को भी शामिल किया जाए। इस संबंध में केजीएमयू कुलपति और कुलसचिव को शासन से पत्र भी जारी किया गया। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन ने पिछड़े और दलित वर्ग के प्रोफेसरों को कार्यपरिषद में शामिल नहीं किया।पूरे मामले को लेकर विधायक जय देवी ने भी राज्यपाल को पत्र लिखा। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन ने सदस्यों का मनोनयन नहीं किया। ऐसे में केजीएमयू कार्यपरिषद के सदस्य डा. सुरेश अहिरवार ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। विभिन्न स्तर से लगातार मिल रहे ज्ञापन के बाद राजभवन ने पूरे मामले को संज्ञान में लिया है।

राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डा. पंकज कुमार एल जानी ने 24 अप्रैल को केजीएमयू कुलपति को पत्र भेजा। इसमें दलित एवं पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों को कार्यपरिषद में शामिल करने के संबंध में आए विभिन्न पत्रों का हवाला दिया। यह भी निर्देश दिया है कि पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए। इस संबंध में केजीएमयू प्रवक्ता डा. केके सिंह का कहना है कि मामले में प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रोफेसरों का मनोनयन किया जाएगा।

अछल्दा गैस सिलिंडर के लिए एजेंसी पर उमड़ी भीड़

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अछल्दा। कस्बा की इंडेन गैस एजेंसी पर मंगलवार को उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिली। यहां पर मंगलवार को गैस सिलिंडर की गाड़ी पहुंचने की सूचना पर उपभोक्ताओं की भीड़ बढ़ गई।सुबह से लेकर दोपहर बाद तक लोगों की सिलिंडर के लिए मारामारी जारी है। स्टॉक पर न होने पर उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंगलवार सुबह 360 सिलिंडर की एक गाड़ी एजेंसी पहुंची तो एजेंसी पर उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गाड़ी से आए 360 सिलिंडर के सापेक्ष दोपहर में दो बजे तक 280 के सिलिंडर उपभोक्ता ले गए। भीड़भाड़ के बीच उपभोक्ताओं व एजेंसी कर्मियों के बीच बहस होती रही। दोपहर को एक और गाड़ी से 340 सिलिंडर पहुंच गए। इससे भीड़ बढ़ गई।

एजेंसी पर भीड़ देखकर संचालक ने पुलिस भेजने की मांग की। थाना प्रभारी सुरेश चंद्र ने एजेंसी पर फोर्स भेजा, जिसकी मौजूदगी में उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर वितरित किए गए। एजेंसी संचालक शिशुपाल सिंह ने बताया कि पर्याप्त मात्रा में गैस सिलिंडर हैं। उपभोक्ताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है।

औरैया 1.31 करोड़ से होगा कुडरी-कवा मार्ग का कायाकल्प

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औरैया। सहार ब्लॉक क्षेत्र में वर्षों से खराब पड़े संपर्क मार्ग के दिन अब बदलने वाले हैं। ग्राम कुडरी से ग्राम कवा तक सड़क का नवनिर्माण करीब 1.31 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाएगा।ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से कराए जाने वाले इस निर्माण कार्य से क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों की करीब 25 हजार आबादी को राहत मिलेगी।यह सड़क सहार ब्लॉक के कुडरी, कवा, बहादुरपुर, हरचंदापुर, मढ़ापुर, नगला खुर्द, मल्हौसी, बरौली, रामपुर, गढ़िया समेत आसपास के कई गांवों को मुख्य मार्ग और ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ती है। लंबे समय से मार्ग जर्जर हालत में पड़ा हुआ था। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़क के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती थी। सड़क पर कीचड़ और जलभराव के चलते लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों को उठानी पड़ती है।

एंबुलेंस और छोटे वाहन कई बार रास्ते में फंस जाते हैं। किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ता था। वहीं, छात्र-छात्राओं को स्कूल और कॉलेज पहुंचने में कठिनाई होती थी।नई सड़क बनने से सहार ब्लॉक क्षेत्र की ग्रामीण संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी। क्षेत्र के लोगों को ब्लॉक मुख्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तहसील, बाजार और जिला मुख्यालय तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। साथ ही ग्रामीण अंचल में व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सड़क निर्माण से आसपास के गांवों में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता एसपी पांडेय ने बताया कि सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। विभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

Auraiya Murder: पत्नी, बेटे व दामाद ने की थी किसान की हत्या, जमीन विवाद और शराब की लत बनी वजह, तीनों को जेल

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औरैया जिले में  दो मई की रात पत्नी-बेटे व दामाद ने ही किसान की हत्या कर उसका शव बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर फेंका था। खेत बेचकर शराब पीने का विरोध करने पर किसान ने पत्नी को पीट दिया था। इसके बाद तीनों ने उसकी हत्या की साजिश रची। किसान के बड़े बेटे ने तीनों पर हत्या की आशंका जताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। वहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।

अपर पुलिस अधीक्षक आलोक मिश्रा ने बताया कि अछल्दा थाना क्षेत्र से निकले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर दो मई की रात एक किसान की हत्या कर शव फेंक दिया गया था। पुलिस जांच में उसकी पहचान गांव मढ़ा प्रीतम निवासी रणवीर सिंह यादव (48) के रूप में हुई थी। शुरुआती जांच में पुलिस सड़क हादसा मान रही थी लेकिन पुलिस जब उसके घर पहुंची तो कमरे में खून फैला मिला था, जबकि पत्नी और बच्चे लापता थे। घटनास्थल से पुलिस व फॉरेंसिक टीम को साक्ष्य मिले। 

शराब के नशे में पहुंचा था घर
मामले को लेकर मृतक के बड़े बेटे सतेंद्र यादव की तहरीर पर पुलिस ने उसकी मां, छोटे भाई और बहनोई के भाई (किसान के दामाद का भाई) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। मंगलवार को थाना क्षेत्र के गांव तुर्कपुर अंडरपास पर हत्यारोपियों के होने की सूचना मिली। पुलिस ने घेराबंदी कर किसान की पत्नी विनीता, बेटे हर्षित व बेला थाना क्षेत्र के गांव लच्छीराम पुरवा निवासी बेटी के जेठ को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में विनीता ने बताया कि पति जमीन बेचकर रुपये बर्बाद कर रहा था। दो मई को वह शराब के नशे में घर पहुंचा था।

Auraiya Wife Son and Son in Law Murdered Farmer Land Dispute and Alcohol Addiction Cited as Motives

कुल्हाड़ी, लोहे की रॉड व बाइक बरामद
विरोध करने पर उसे पीट दिया, तो इसकी जानकारी उसने छोटे बेटे हर्षित को दी। बेटा अपने बहनोई के भाई गुरजीत यादव को लेकर घर पहुंचा। वहां तीनों ने मिलकर कुल्हाड़ी और लोहे की रॉड से हमला कर रणवीर की हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपियों ने सड़क हादसे का रूप देने के लिए शव को एक्सप्रेसवे पर फेंक दिया। इसके बाद घटनास्थल से भाग गए थे। पूछताछ के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से तीनों को इटावा जेल भेज दिया गया। आरोपियों से पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त कुल्हाड़ी, लोहे की रॉड व बाइक बरामद कर ली है।

कानपुर में रहकर नौकरी करता है बड़ा बेटा सतेंद्र
मृतक किसान रणवीर सिंह के परिवार में दो बेटे सतेंद्र, हर्षित और दो बेटियां राधा व छवि हैं। राधा की शादी बेला के लच्छीराम पुरवा और छवि की शादी कन्नौज के खानपुर में हुई है। बड़ा बेटा सतेंद्र विवाहित है और कानपुर में परिवार के साथ रहकर नौकरी करता है। तीन मई दोपहर जब वह गांव पहुंचा तो घर के कमरे में खून फैला देख उसके होश उड़ गए। मां और भाई के लापता होने पर उसने अपनी मां, भाई और बहनोई के भाई के खिलाफ हत्या की तहरीर दी है।

छह साल में बेची चार बीघा जमीन, शराब की लत बनी कलह की जड़
पुलिस जांच में सामने आया कि रणवीर के पास कुल 10 बीघा जमीन थी। छह साल पहले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में दो बीघा जमीन अधिग्रहित हो गई थी। इसके बाद रणवीर ने बीते पांच वर्षों में अपनी चार बीघा जमीन और बेच दी। अब उसके पास चार बीघा खेत बचे थे। जमीन बेचकर मिले रुपयों से उसे शराब की लत लग गई थी। नशे में धुत होकर घर आने के कारण अक्सर परिजन से उसका विवाद होता था। घटना वाले दिन दो मई को भी वह शराब के नशे में घर पहुंचा था, जिसके बाद यह खौफनाक वारदात हुई।

चुनाव हारकर भी मुख्यमंत्री बनीं रह सकती हैं ममता?: इस्तीफा नहीं दिया तो क्या होगा, जानें क्या कहता है संविधान

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने जा रही है। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस का 15 साल के शासन का अब अंत हो चुका है। इस बीच मंगलवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसमें उन्होंने भाजपा पर गलत तरीके से चुनाव जीतने का आरोप लगाया। साथ ही चुनाव आयोग को भी घेरा। इस बीच उन्होंने एक सवाल पर कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, क्योंकि हमें जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हराया गया है। ममता ने इस बयान में यह भी जोड़ा कि वे चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए लोकभवन जाने का सवाल ही नहीं है। ममता ने चुनौती देते हुए कहा कि वह चाहें तो सांविधानिक नियमों से कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अगर कोई मुख्यमंत्री चुनाव में हार के बाद अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दे तो क्या हो सकता है? संविधान में नई सरकार के गठन और चुनाव हारने वाले सीएम को हटाए जाने से जुड़े क्या नियम हैं? इन नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी किसकी होती है? आइये जानते हैं…

पहले जानें- कैसे अपने पद से हट सकता है कोई मुख्यमंत्री?

अगर कोई मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत खोने या चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर देता है, तो स्थिति को संभालने के लिए सांविधानिक और कानूनी रास्ते अपनाए जाते हैं।

1. विधानसभा में बहुमत खोने पर
अगर ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री के पास बहुमत बनाए रखने के लिए विधायकों का समर्थन नहीं है, तो उन्हें फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़ता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री को सदन बुलाने और अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दे सकते हैं। वहीं, विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद को सांविधानिक रूप से तुरंत इस्तीफा देना पड़ता है।

अगर मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट में विफल रहते हैं और फिर भी पद छोड़ने से इनकार करते हैं, तो राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने की शक्तियां होती हैं। हालांकि, यह पूरी स्थिति तभी लागू होती है, अगर नई विधानसभा गठित हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में फिलहाल ताजा चुनाव हुए हैं और अब तक विधानसभा का गठन नहीं हुआ है।

2. चुनाव में हार या कार्यकाल खत्म होने पर
जब विधानसभा चुनाव में सत्तासीन दल हार जाता है तो आम प्रक्रिया यह कि उस दल का नेता खुद ही जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपता है, जिसके बाद राज्यपाल नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को आमंत्रित करते हैं। हालांकि, अगर कोई मुख्यमंत्री हार के बावजूद व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा न भी दें तो पुरानी विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही सरकार का कानूनी वजूद खत्म हो जाता है।

इस लिहाज से देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में सरकार का कार्यकाल 7 मई तक ही है। इसके बाद चुनी हुई सरकार का कार्यकाल खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा और इसी के साथ मुख्यमंत्री पद भी अपने आप ही खाली हो जाएगा। यानी ममता बनर्जी इस पद से बिना इस्तीफा दिए ही हट जाएंगी और राज्यपाल को नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को बुलाना पड़ेगा। इसके बाद नए मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही पिछला प्रशासन अपने आप खत्म हो जाता है और नई सरकार का शासन शुरू होता है।

3. सांविधानिक संकट और राष्ट्रपति शासन
अगर किसी राज्य में सरकार के शासन के दौरान मुख्यमंत्री के इस्तीफा न देने से गतिरोध पैदा हो जाए और कोई अन्य दल सरकार बनाने की स्थिति में न हो तो…

अनुच्छेद 356: राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकते हैं कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इसके बाद विधानसभा को भंग या स्थगित कर दिया जाता है और राज्य का सीधा नियंत्रण केंद्र सरकार (राज्यपाल के माध्यम से) के पास चला जाता है। इसके बाद सही समय को देखते हुए नई सरकार के गठन की कोशिश की जाती है। यह या तो दोबारा चुनाव कराकर संभव होता है या किसी दल के बहुमत के लिए जरूरी विधायकों को जुटाने के बाद। हालांकि, बंगाल को देखा जाए तो सामने आता है कि यहां चुनाव के बाद अब तक सरकार का गठन ही नहीं हुआ है।

4. छह महीने के भीतर निर्वाचित न होने पर
अगर कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बना है, लेकिन वह विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है तो संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, अगर वह शपथ लेने के छह महीने के अंदर सदन के सदस्य नहीं बन पाते, तो उसे अपने आप पद छोड़ना होगा। हालांकि, यह स्थिति भी तभी लागू होती है, जब राज्यपाल पहले ही किसी दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर चुके हों और सीएम का शपथग्रहण राज्यपाल की ही मौजूदगी में पूरा हुआ हो। इन दोनों स्थितियों के बिना कोई व्यक्ति सीएम नहीं बन सकता।

Rupee Recovers: तेल गिरा… और अचानक मजबूत हुआ रुपया, डॉलर को दी पटखनी

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Rupee Recovers: रुपया बुधवार को 61 पैसे चढ़कर 94.57 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत देने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत टूटकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से रुपया मजबूत हुआ है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि रुपए पर पड़ रहे भारी दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुद्रा को समर्थन देने के लिए सक्रिय रूप से एक ‘अप्रत्यक्ष’ रणनीति भी अपना रहा है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 पर खुला। कारोबार के दौरान टूटकर 95.18 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया। अंततः 94.57 (अस्थायी) पर बंद रहा जो पिछले बंद भाव से 61 पैसे की बढ़त है। रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.18 पर बंद हुआ था। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक अमित पबारी ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का सीधे उपयोग किए बिना मुद्रा को समर्थन देने के तरीकों की तलाश कर रहा है।

पबारी ने कहा कि जिन विचारों पर चर्चा हो रही है उनमें से एक यह है कि सरकारी बैंकों को विदेशी मुद्रा बॉन्ड के माध्यम से धन जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए जिससे प्रणाली में डॉलर का नया प्रवाह लाने में मदद मिल सकती है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 97.79 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 940.73 अंक चढ़कर 77,958.52 अंक जबकि निफ्टी 298.15 अंक की बढ़त के साथ 24,330.95 अंक पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 8.25 प्रतिशत गिरावट के साथ 100.81 डॉलर प्रति बैरल रहा।

 

बंगाल में 9 मई को होगा नई सरकार का शपथग्रहण समारोह, PM मोदी-शाह के शामिल होने की संभावना

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नेशनल डेस्क : भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रमुख समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को कहा कि राज्य में भाजपा की पहली सरकार का शपथग्रहण समारोह नौ मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुबह 10 बजे शुरू होने वाले शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और कई केंद्रीय मंत्रियों के उपस्थित रहने की उम्मीद है।

भट्टाचार्य ने पत्रकारों से कहा, ”नयी भाजपा सरकार 9 मई को सुबह 10 बजे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेगी।” खास बात यह है कि शपथग्रहण समारोह बंगाली पंचांग के बैसाख महीने के 25वें दिन आयोजित किया जाएगा जिसे पूरे राज्य में रवींद्र जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। इससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता की झलक नजर आएगी।

प्रदेश भाजपा सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक हलकों में इस तारीख के चयन को भाजपा द्वारा बंगाल की सांस्कृतिक परिकल्पना में अपने ऐतिहासिक उदय को स्थापित करने और तृणमूल कांग्रेस द्वारा इसे बंगाल की भाषाई एवं बौद्धिक लोकाचार से अलग ”बाहरी लोगों की पार्टी” बताए जाने का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों की बैठक आठ मई की शाम बुलाई गई है, हालांकि नेतृत्व मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर चुप्पी साधे हुए है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की जिससे वर्षों के संगठनात्मक विस्तार और तीव्र वैचारिक ध्रुवीकरण के बाद बंगाल में इसकी पहली सरकार बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ।