Tuesday, February 17, 2026
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अजीतमल, अयाना और सहार सीएचसी के डॉक्टरों के भरोसे शुरू होगा ट्रॉमा सेंटर

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औरैया। जिले में सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर इलाज देने के लिए बनाए गए ट्रॉमा सेंटर को पांच साल बाद शुरू कराने के लिए कवायद तेज हो गई है, पर इसकी नींव अजीतमल, अयाना और सहार सीएचसी के डॉक्टरों भरोसे रखी जा रही है।ऐसे में सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होने की आशंका बढ़ गई है। उधर, जिले से भेजी गई डॉक्टरों की डिमांड पर कोई जवाब अभी तक नहीं आया है।
जिले में सड़क हादसों में घायल मरीजों को अब तक सैफई रेफर किया जाता रहा है। समय पर एंबुलेंस और इलाज न मिलने से कई बार रास्ते में ही जान चली जाती है। इसी पीड़ा को खत्म करने के लिए सरकार ने 2019 में औरैया को ट्रॉमा सेंटर की सौगात दी। भगौतीपुर में हाईवे किनारे 2.64 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक भवन भी बन गया और छह नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका वर्चुअल लोकार्पण भी कर दिया।

पांच साल बीतने के बाद भी ट्रॉमा सेंटर सिर्फ एक इमारत बनकर रह गया। अब जब इसे शुरू करने की कवायद तेज हुई है, तो इसकी बुनियाद ही सीएचसी से डॉक्टर खींचकर रखी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने ट्रॉमा सेंटर के लिए स्वीकृत 50 पदों पर स्थायी नियुक्ति करने के बजाय जिले के तीन प्रमुख सीएचसी अजीतमल, अयाना और सहार से यहां डॉक्टरों को शिफ्ट कर नई व्यवस्था बना दी है। इसका सीधा असर अब उन हजारों मरीजों पर पड़ेगा जो रोजाना इलाज के लिए इन सीएचसी पर निर्भर हैं।

अजीतमल सीएचसी में रोजाना 250 से अधिक मरीज पहुंचते हैं, वहां से पहले एक डॉक्टर को ट्रॉमा सेंटर भेजा गया था, अब दो और की नियुक्ति ट्रॉमा सेंटर में कर दी है। अब यहां सात की जगह सिर्फ चार डॉक्टर रहेंगे। अयाना सीएचसी में प्रतिदिन 200 से ज्यादा मरीज आते हैं, वहां भी एक डॉक्टर की कटौती कर दी गई है। सहार सीएचसी से भी एक डॉक्टर हटाया गया है, जिससे वहां अब केवल तीन चिकित्सकों के भरोसे 150 से अधिक मरीजों का इलाज होगा।
पहले से ही संसाधनों की कमी, लंबी कतारें और सीमित स्टाफ से जूझ रहे सीएचसी पर अब मरीजों का दबाव और बढ़ेगा। आशंका है कि इलाज में देरी, रेफर की संख्या और मरीजों की परेशानी में इजाफा होगा।
जिले से 40 डॉक्टरों की डिमांड शासन को भेजी गई थी, पर मिला एक भी नहीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खुद मान रहे हैं कि इससे सीएचसी की व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, पर ट्रॉमा सेंटर भी संचालित करना आवश्यक है।

Auraiya News: खेत में बकरी जाने को लेकर दो पक्ष भिड़े, छह लोग घायल

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फफूंद। थाना क्षेत्र के तुर्कीपुर गांव में रविवार को खेत में बकरी चले जाने के विवाद में दो पक्षों में लाठी-डंडों से मारपीट हुई, जिसमें छह लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस से सीएचसी दिबियापुर भेजकर भर्ती कराया और मामले की जांच शुरू कर दी है।एक पक्ष के अंबुज यादव निवासी तुर्कीपुर ने आरोप लगाया कि वह अपने घर में एचडीएफसी बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र संचालित करता है। बताया कि घर में गांव के ही 10–12 लोग लाठी-डंडा लेकर घुस आए और मारपीट शुरू कर दी, जिससे उसका भाई आलोक और पत्नी मोहिनी घायल हो गए।

वहीं दूसरे पक्ष के अशोक कुमार जो पूर्व सैनिक हैं, उन्होंने बताया कि करीब 15 दिन पहले अंबुज की बकरी उनके खेत में चली गई थी, जिसको लेकर विवाद हुआ था और थाने में शिकायत भी दी गई थी। रविवार को दोबारा बकरी खेत में आने पर कहासुनी बढ़ गई और आरोप है कि कुल्हाड़ी से उन पर, उनकी पत्नी शीला देवी और रोहित पर हमला किया गया, जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

थाना अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि खेत में बकरी चले जाने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ है, जिसमें छह लोग घायल हुए हैं। सभी का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

कफ सिरप केस: पुलिस अफसरों से नजदीकी आ रही काम! बर्खास्त सिपाही आलोक की संपत्तियां नहीं जब्त कर सकी SIT और ED

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उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी में एसआईटी और ईडी अब तक बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई नहीं कर सकी। अधिकारियों के दावों के बावजूद सुल्तानपुर रोड स्थित आलोक की आलीशान कोठी को जब्त नहीं किया गया। उसके साथी अमित सिंह टाटा की संपत्तियों की जांच में भी कोई खास सफलता नहीं मिली है।बता दें, आलोक और अमित के करीबी अमित यादव को एसटीएफ ने शनिवार को वाराणसी से गिरफ्तार किया है। इस रैकेट में मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के बाद एजेंसियों के रडार पर विकास सिंह नरवे, आलोक, अमित सिंह टाटा और अमित यादव आए थे।

पुलिस अधिकारियों का करीबी बताया जाता है आलोक

राज्य सरकार के निर्देश पर गठित एसआईटी के निर्देश पर वाराणसी में शुभम उसके पिता भोला जायसवाल समेत आरोपियों की 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को तो जब्त किया गया लेकिन आलोक पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठने लगे हैं। आलोक को कुछ पुलिस अधिकारियों का करीबी बताया जाता है। इसी वजह को उसकी संपत्तियों पर कार्रवाई नहीं होने से जोड़ा जा रहा है।

अमित को रिमांड पर लेगी एसटीएफ

वाराणसी से गिरफ्तार अमित यादव को अब एसटीएफ रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। वह समाजवादी युवजन सभा का प्रदेश सचिव भी रह चुका है। उसके खिलाफ लखनऊ और वाराणसी में चार मुकदमे दर्ज हैं। उस पर शुभम से सांठगांठ कर कफ सिरप की एक लाख से अधिक बोतलों की तस्करी करने का आरोप है।

यूपी: क्या सपा में अनमने ढंग से शामिल हुए हैं नसीमुद्दीन, इन दो पार्टियों में चाहते थे अपनी जगह; जानिए कहानी

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कांग्रेस छोड़ने के बाद पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी बहुजन समाज पार्टी में वापसी की जुगत में थे। सूत्रों की मानें तो उन्होंने बसपा में अपने पुराने साथियों के जरिए संपर्क साधा था। इसका कोई नतीजा सामने नहीं आने पर बसपा अध्यक्ष मायावती की प्रशंसा में बयान भी दिए थे। हालांकि बसपा नेतृत्व ने उनकी वापसी को हरी झंडी नहीं दी, जिसके बाद उन्होंने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद से भी संपर्क साधा था।

प्रदेश की मुस्लिम राजनीति में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का खासा दखल रहा है। उन्हें आजम खां के कद का नेता माना जाता रहा है। इसकी वजह बसपा सरकार में उनकी अहम भूमिका थी। मायावती ने उन्हें एक दर्जन से अधिक बड़े विभाग सौंपे थे, जिसके बाद उन्हें मिनी मुख्यमंत्री कहा जाता था। विधानसभा में भी नसीमुद्दीन सत्र के दौरान आजम खां पर अधिक हमलावर रहते थे, जिसकी वजह मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में रखना था। हालांकि वर्ष 2012 के बाद नसीमुद्दीन ने बसपा छोड़ने के दौरान मायावती के साथ अपनी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक कर दिया था, जिसके बाद उनके लिए बसपा का दरवाजा बंद हो गया। 

मुस्लिम नेताओं पर भरोसा नहीं

जानकारों की मानें तो बसपा में नसीमुद्दीन की वापसी नहीं होने की वजह मायावती का मुस्लिम नेताओं पर डिगा भरोसा है। लोकसभा चुनाव में मायावती ने तमाम मुस्लिम नेताओं को टिकट दिया था। उन्होंने कुल 21 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। इनमें रविवार को सपा में शामिल हुए अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू भी शामिल थे, जिन्हें पीलीभीत से टिकट दिया गया था। हालांकि वह केवल 89,697 वोट पाकर तीसरे स्थान पर आए थे। मुस्लिमों ने वोट नहीं मिलने से बसपा 2019 के चुनाव में जीती अपनी 10 सीटों पर बुरी तरह पराजित हुई थी। इसके बाद मायावती ने कहा था कि मुस्लिम समाज को चुनाव में खासा प्रतिनिधित्व देने पर भी इस समाज के वोट नहीं मिले। इन हालात में अब पार्टी अगले चुनावों में मुस्लिम समाज के उम्मीदवारों को सोच-समझ कर मौका देगी, ताकि पार्टी को नुकसान न पहुंचे।

15 हजार समर्थकों के साथ हुए शामिल

बसपा सरकार में कई विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी रविवार को अपने समर्थकों समेत सपा में शामिल हो गए। उनके साथ ही पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू ने भी सपा का दामन थाम लिया। सपा अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी में ज्वाइनिंग दी। नसीमुद्दीन के कांग्रेस छोड़कर सपा में आने पर अखिलेश ने कहा कि उन्होंने सिर्फ मकान बदला है, मोहल्ला नहीं। यानी अभी भी इंडिया गठबंधन में ही हैं। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख नेता भी सपा में हुए।

शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में देवरिया के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा, प्रतापगढ़ सदर के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, कन्नौज से एआईएमआईएम के प्रत्याशी रहे डॉ. दानिश खान, पूर्व विधान परिषद सदस्य हुस्ना सिद्दीकी, पूनम पाल और पहली ड्रोन पायलट रंजना पाल भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं। इस अवसर पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि 15 हजार 7 सौ 18 लोग विभिन्न दलों को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। सपा मजबूत होगी तो हम सब मजबूत होंगे। हमारा लक्ष्य 2027 में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनाना है।

अखिलेश यादव ने कहा कि फूल बाबू के आने से बहुतों के फूल मुरझा गए हैं। जो नेता शामिल हुए हैं, उनके राजनीतिक सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाएगा। इन नेताओं के चुनाव लड़ने की बात भी कही। होली मिलन से पहले यह पीडीए होली मिलन हो रहा है। यहां बता दें कि फूल बाबू भी बसपा सरकार में मंत्री रहे थे।

कानपुर: रिटायर्ड फौजी ने पत्नी और इकलौते बेटे को गोलियों से भूना, बाहर से ताला लगा रेलवे ट्रैक पर दी जान

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सेनपश्चिम पारा में रिटायर्ड फौजी ने पत्नी और बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद खुद रेलवे ट्रैक पर कटकर जान दे दी। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

कानपुर में हत्या और सुसाइड: रिटायर्ड फौजी ने खेला खूनी खेल, पत्नी-बेटे की हत्या कर ट्रेन के आगे कूदकर दी जान

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कानपुर में सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र के तुलसियापुर गांव नई बस्ती में सोमवार सुबह रिटायर्ड फौजी ने पत्नी और बेटे की दोनाली बंदूक से गोली मारकर हत्या करने के बाद रेलवे ट्रैक में कटकर जान दे दी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

तुलसियपुर नई बस्ती निवासी फौजी चेतराम कुमार (52) ने मकान के अंदर पत्नी सुनीता (40) और बेटे दीप (16) को लाइसेंसी दोनाली बंदूक से गोली मारकर हत्या कर दी। घटना करने के बाद मेनगेट में बाहर से ताला बंदकर करीब दो किलोमीटर दूर कठोगर गांव के पास भाऊ पुर रेलवे ट्रैक में जाकर ट्रेन से कटकर जान दे दी।
घर पहुंचने पर दोहरे हत्याकांड की जानकारी
रेलवे ट्रैक पर युवक के शव मिलने की सूचना पर पुलिस शिनाख्त के लिए घर पहुंची। वहां पहुंचने पर घर के अंदर पत्नी और बेटे के शव मिलने से दोहरे हत्याकांड की जानकारी हुई। इसके बाद पुलिस ने फारेंसिक टीम बुलाकर घटनास्थल की जांच पड़ताल के मौके पर से साक्ष्य इकठ्ठा किए।

पुलिस कर रही है कारणों की जांच
पुलिस ने दोनों को शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। थाना प्रभारी प्रदीप सिंह ने बताया कि पत्नी और बेटे की हत्या करने के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस पारिवारिक और जमीनी विवाद के साथ ही अन्य मामलों की जांच कर रही है।

UP: न्यायालय में लगा दिया है बम, दोपहर बाद होगा धमाका, अमरोहा जिला जज को ईमेल से मिली धमकी

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पिछले दिनों यूपी की कई अदालतों को उडाने की धमकी के बाद सोमवार को अमरोहा जनपद न्यायालय को भी बम से उड़ाने की धमकी का ईमेल भेजा गया है। धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद जिला जज ने बार एसोसिएशन जनपद अमरोहा के अध्यक्ष को भी इसकी जानकारी दी है।धमकी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस पूरी तरह अलर्ट हो गई है। जनपद न्यायालय में चेकिंग शुरू कर दी गई है। डॉग स्क्वॉड के साथ बम निरोधक दस्ता सर्च ऑपरेशन चला रहा है। बार एसोसिएशन जनपद अमरोहा के अध्यक्ष सलीम खान एडवोकेट ने बताया कि अमरोहा जिला जज को एक ईमेल करीब 8:38 पर मिला है।

धमकी देने वालों ने स्पष्ट कहा है कि आपका कोर्ट में जज के चैंबर में 12 आरडीएक्स (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) लगाए गए हैं। तमिलनाडु में ईडब्ल्यूएस रिजर्वेशन लागू होने से रोकें। इसकी जिम्मेदारी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम पाकिस्तान आईएसआई ने ली है।

सोमवार की दोपहर 12:15 बजे न्यायालय में ब्लास्ट होने की बात कही गई। जिला जज ने बार एसोसिएशन जनपद अमरोहा से न्यायालय परिसर की सुरक्षा के लिए सुरक्षा कर्मियों का सहयोग करने की अपील की है। मालूम रहे कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या और मेरठ सहित कई जिलों में न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी।

अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश भदोरिया ने बताया कि पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। डॉग स्क्वायड और बम पहचान एवं निरोधक दस्ते के साथ कचहरी परिसर और न्यायालयों में चेकिंग की जा रही है।

Auraiya News: कार की टक्कर से बाइक सवार दो भाई गंभीर घायल

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दिबियापुर । सहायल थाना क्षेत्र के बर्रू गांव के निकट बाइक सवार दो सगे भाइयों को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी, इससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।हादसे की सूचना पर पहुंची एंबुलेंस ने दोनों घायलों को दिबियापुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए चिचौली अस्पताल रेफर कर दिया गया।
थाना क्षेत्र के वहलोलपुर गांव निवासी अंकित (19) और उसका भाई आशीष (22) बाइक से अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वह बर्रू गांव के सामने पहुंचे, तभी पीछे से आ रही कार ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। जानकारी मिलने पर उनके भाई आलोक कुमार भी अस्पताल पहुंच गए। डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें चिचौली अस्पताल रेफर कर दिया।

यूपी में एसआईआर: तेज होगी नोटिसों की सुनवाई, बढ़ाए गए 3700 एईआरओ; अभी सुने गए हैं महज 26 फीसदी केस

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मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दिए गए नोटिसों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए करीब 3700 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) और लगाए गए हैं। इसके लिए यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने चुनाव आयोग से अनुमति लेकर आदेश जारी कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग न हो पाने के कारण 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा तार्किक असंगति के कारण 2.22 करोड़ मतदाताओं को नोटिस की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इस तरह से कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई होगी।इनमें से अभी तक 85 लाख मतदाताओं की ही नोटिस की सुनवाई पूरी हो सकी है। यहां बता दें कि प्रदेश में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा आयोग ने 6 मार्च तक बढ़ाई है। जबकि, नोटिसों की सुनवाई 27 मार्च तक होगी। अंतिम मतदाता सूची अब 10 अप्रैल को प्रकाशित होगी।

पहले यूपी में नोटिसों की सुनवाई के लिए 8990 एईआरओ और 403 ईआरओ लगाए गए थे। नोटिसों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए 3700 एईआरओ और लगा दिए गए हैं, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर यह काम पूरा हो सके। ये एईआरओ मेरठ, शाहजहांपुर, लखनऊ, रायबरेली, ललितपुर, हमीरपुर, बलरामपुर और देवरिया के अलावा शेष सभी जिलों में बढ़ाए गए हैं।

Phone में भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना पुलिस घर से टांगकर ले जाएगी

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UP Desk : डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर ऑफिस वर्क, सोशल मीडिया से निजी डाटा तक-हर जरूरी काम अब मोबाइल पर निर्भर है। लेकिन इसी सुविधा के बीच एक छोटी-सी लापरवाही भी किसी व्यक्ति को गंभीर कानूनी संकट में डाल सकती है।

फोन का डेटा बनेगा डिजिटल सबूत
साइबर विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार, मोबाइल फोन में मौजूद डेटा अब मजबूत डिजिटल सबूत माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति के फोन में गैरकानूनी या आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है, तो कई मामलों में बिना औपचारिक शिकायत के भी पुलिस कार्रवाई संभव है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि फोन में किस तरह का कंटेंट रखना जोखिम भरा हो सकता है।

किन चीजों से बढ़ता है कानूनी खतरा?
सबसे बड़ा जोखिम गैरकानूनी डिजिटल कंटेंट से जुड़ा है। इसमें शामिल हैं:
*आपत्तिजनक फोटो और वीडियो
*बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री
*अवैध हथियारों से जुड़ी जानकारी
*ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े मैसेज
*फर्जी दस्तावेज
*हैकिंग टूल्स या संदिग्ध सॉफ्टवेयर
कानून के तहत ऐसे कंटेंट को केवल बनाना ही नहीं, बल्कि डाउनलोड करना, सेव करना या फॉरवर्ड करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

जांच का दायरा हुआ व्यापक
साइबर सेल अब केवल फोन की गैलरी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां क्लाउड बैकअप, चैट हिस्ट्री और डिलीट किए गए डेटा तक की फॉरेंसिक जांच करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनजान नंबर या संदिग्ध स्रोत से आई फाइलों को सेव करना या शेयर करना खतरे से खाली नहीं है।

फेक न्यूज और भड़काऊ पोस्ट भी अपराध
कानूनी जोखिम केवल फोटो-वीडियो तक सीमित नहीं है। अफवाह फैलाने वाले मैसेज, नफरत भड़काने वाली पोस्ट, फेक न्यूज या भड़काऊ कंटेंट शेयर करना भी गंभीर अपराध माना जा सकता है।

संदिग्ध ऐप्स से भी सावधान
फर्जी लोन ऐप, जासूसी या स्क्रीन रिकॉर्डिंग के नाम पर चलने वाले ऐप्स और ठगी से जुड़े सॉफ्टवेयर भी उपयोगकर्ताओं को मुश्किल में डाल सकते हैं। कई बार लोग आसान कमाई या लालच में ऐसे ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, जो बाद में उनके खिलाफ डिजिटल सबूत बन जाते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों के मुताबिक, अनजान ऐप्स को तुरंत हटाएं, संदिग्ध कंटेंट सेव या शेयर न करें, अनवेरिफाइड फाइल्स डाउनलोड करने से बचें, फोन की सिक्योरिटी सेटिंग्स अपडेट रखें।  थोड़ी-सी सतर्कता आपको बड़ी कानूनी परेशानी से बचा सकती है।