Thursday, February 19, 2026
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पाक-ईरान ने अफगान शरणार्थियों की जिंदगी बनाई नरक ! रोज जबरन निकाले जा रहे हजारों लोग, मानवाधिकार संगठन खामोश क्यों?

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International Desk: पाकिस्तान और ईरान द्वारा अफ़ग़ान शरणार्थियों के खिलाफ सख़्त रवैये ने एक बार फिर मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिर्फ़ एक दिन में 3,000 से अधिक अफ़ग़ान शरणार्थियों को इन दोनों देशों से निकालकर अफ़ग़ानिस्तान भेज दिया गया। तालिबान के उप-प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्ला फ़ितरत के अनुसार, मंगलवार को 693 परिवारों के कुल 3,610 लोग विभिन्न सीमा चौकियों के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान लौटे। इनमें तोरख़म, इस्लाम क़ला, स्पिन बोल्डक और बह्रामचा जैसे प्रमुख बॉर्डर पॉइंट शामिल हैं।

फ़ितरत ने बताया कि कुछ परिवारों को उनके मूल इलाक़ों तक पहुँचाया गया, जबकि सीमित संख्या में लोगों को मानवीय सहायता दी गई। बावजूद इसके, ज़मीनी हक़ीक़त बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। अफ़ग़ान मीडिया और शरणार्थियों के बयानों के मुताबिक, पाकिस्तान में रह रहे अफ़ग़ान नागरिक लगातार पुलिस दबाव, अवैध गिरफ़्तारी और कथित वसूली का सामना कर रहे हैं। कई मामलों में सादे कपड़ों में लोग खुद को पुलिस बताकर शरणार्थियों को पकड़ लेते हैं, जिससे डर और अराजकता का माहौल बना हुआ है।

अफ़ग़ान शरणार्थियों का कहना है कि न तो उन्हें बुनियादी मानवाधिकार मिल रहे हैं और न ही उनकी शिकायत सुनने वाला कोई है। हालात इतने खराब हैं कि कई लोग यह भी नहीं समझ पाते कि उन्हें पकड़ने वाले पुलिस हैं या अपराधी। विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान-पाकिस्तान तनाव के बीच शरणार्थियों को दबाव का हथियार बनाया जा रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस पूरे संकट पर लगभग चुप हैं।

Secret Wife of Jesus : क्या वाकई में थी यीशु मसीह की ‘सीक्रेट वाइफ’? जानें इस रहस्यमयी महिला के बारे में

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सदियों से ईसाई धर्म में यह माना जाता रहा है कि ईसा मसीह (यीशु) ताउम्र अविवाहित रहे लेकिन पिछले कुछ दशकों में ‘द दा विंची कोड’ जैसी किताबों और कुछ प्राचीन पांडुलिपियों ने एक नई बहस को जन्म दिया है। दावा किया जाता है कि मैरी मैग्डलेन जिन्हें केवल एक…

Secret Wife of Jesus : सदियों से ईसाई धर्म में यह माना जाता रहा है कि ईसा मसीह (यीशु) ताउम्र अविवाहित रहे लेकिन पिछले कुछ दशकों में ‘द दा विंची कोड’ जैसी किताबों और कुछ प्राचीन पांडुलिपियों ने एक नई बहस को जन्म दिया है। दावा किया जाता है कि मैरी मैग्डलेन जिन्हें केवल एक शिष्या माना जाता था दरअसल यीशु की पत्नी थीं। आइए जानते हैं इस रहस्यमयी दावे के पीछे का सच और इतिहास।

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कौन थीं मैरी मैग्डलेन?

बाइबल के अनुसार मैरी ‘मैग्डेला’ (उत्तरी इजरायल) की रहने वाली थीं इसलिए उन्हें मैरी मैग्डलेन कहा गया। वे यीशु के सबसे शुरुआती और भरोसेमंद साथियों में से एक थीं। जब यीशु को सूली पर चढ़ाया गया तब उनके पुरुष शिष्य साथ छोड़ गए थे लेकिन मैरी वहां मौजूद रहीं। बाइबल कहती है कि मरने के बाद जब यीशु दोबारा जीवित हुए तो सबसे पहले वे मैरी मैग्डलेन को ही दिखाई दिए।

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ग्नोस्टिक गॉस्पेल और चौंकाने वाले खुलासे

इस विवाद की जड़ें 1945 में मिस्र के नाग हम्मादी (Nag Hammadi) में मिले कुछ प्राचीन ग्रंथों में छिपी हैं। इन ग्रंथों को ‘ग्नोस्टिक गॉस्पेल’ कहा जाता है। ‘गॉस्पेल ऑफ फिलिप’ में उल्लेख है कि यीशु मैरी को अन्य शिष्यों से अधिक प्रेम करते थे और अक्सर उन्हें चूमते थे। ‘गॉस्पेल ऑफ मैरी’ के अनुसार मैरी के पास ऐसा आध्यात्मिक ज्ञान था जो अन्य पुरुष शिष्यों के पास भी नहीं था। इसी कारण कई विद्वान तर्क देते हैं कि उनके बीच का रिश्ता सिर्फ गुरु-शिष्य का नहीं बल्कि पति-पत्नी का था।

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‘द दा विंची कोड’ और ‘होली ग्रेल’ का रहस्य

लेखक डैन ब्राउन के उपन्यास ‘द दा विंची कोड’ ने इस विचार को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। किताब दावा करती है कि यीशु और मैरी मैग्डलेन की संतानें थीं और उनका वंश आज भी मौजूद है। इसे ही ‘होली ग्रेल’ (Holy Grail) कहा गया है। दावा किया जाता है कि लियोनार्डो दा विंची की मशहूर पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ में यीशु के ठीक बगल में बैठा व्यक्ति कोई पुरुष शिष्य नहीं बल्कि खुद मैरी मैग्डलेन हैं।

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क्या कहते हैं विद्वान और चर्च?

हालांकि कुछ प्राचीन ग्रंथ अंतरंग संबंधों का संकेत देते हैं लेकिन पारंपरिक चर्च और अधिकांश इतिहासकार इन दावों को खारिज करते हैं। वैटिकन और अन्य प्रमुख चर्च मैरी मैग्डलेन को एक ‘संत’ (Saint) मानते हैं पत्नी नहीं।2012 में हार्वर्ड की प्रोफेसर करेन किंग ने एक पपीरस (पांडुलिपि) का हवाला देकर कहा था कि यीशु ने मैरी को “मेरी पत्नी” कहा था लेकिन भारी आलोचना के बाद उन्होंने अपने रुख में बदलाव किया।

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फिलहाल मैरी मैग्डलेन इतिहास की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक हैं। वे यीशु की पत्नी थीं या उनकी सबसे प्रिय शिष्या, यह आज भी आस्था और शोध के बीच एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।

किराए का कमरा, मकान मालकिन और कतर में ड्राइवर! महिला से छेड़छाड़ कर सात समंदर पार भागा दरिंदा, जब वतन वापस लौटा तो…

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नेशनल डेस्क। जुर्म की दुनिया का एक पुराना नियम है कानून के हाथ लंबे होते हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस कहावत को एक बार फिर सच कर दिखाया है। छेड़छाड़ और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में फरार चल रहे 35 वर्षीय अपराधी इरफान को पुलिस ने उत्तर प्रदेश के हापुड़ से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए इरफान सात समंदर पार कतर (Qatar) भाग गया था लेकिन दिल्ली पुलिस की सॉदर्न रेंज (Southern Range) ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा ही दिया।

जामिया नगर की वो खौफनाक वारदात

इस पूरे मामले की शुरुआत 29 फरवरी 2024 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके से हुई थी। इरफान एक घर में किराएदार था। वह न तो किराया दे रहा था और न ही कमरा खाली कर रहा था। जब मकान मालकिन और उनके पति ने किराया मांगा तो इरफान ने अपने साथियों के साथ उन पर जानलेवा हमला कर दिया। उसने महिला के साथ छेड़छाड़ की और उनके पति को बुरी तरह पीटा। पुलिस ने आईपीसी की धारा 308 (हत्या का प्रयास) और 354 (छेड़छाड़) समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया।

दिल्ली से कतर: फरारी का सफर

जब पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू किया तो इरफान शातिर तरीके से देश छोड़कर कतर भाग गया। वहां उसने अपनी पहचान छिपाकर एक ड्राइवर की नौकरी शुरू कर दी। उसे लगा कि विदेशों की चकाचौंध में दिल्ली पुलिस उसे भूल जाएगी। इस बीच दिल्ली की अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।

ऑपरेशन हापुड़: भेष बदलकर दबोचा अपराधी

क्राइम ब्रांच को जैसे ही भनक लगी कि इरफान कतर से वापस लौटा है और हापुड़ में छिपा है डीसीपी आदित्य गौतम के निर्देशन में एक स्पेशल टीम तैयार की गई। पुलिस टीम ने हापुड़ में डेरा डाल दिया। टीम ने स्थानीय खुफिया जानकारी और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया। पुलिसकर्मियों ने पहचान छिपाकर 15 दिनों तक इरफान की हर हरकत पर नजर रखी। जब पुख्ता लोकेशन मिल गई तो घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस का कड़ा संदेश

पूछताछ में इरफान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि उसे लगा था कि दो साल बाद मामला ठंडा पड़ गया होगा लेकिन कानून की फाइल कभी बंद नहीं हुई थी। दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाए उसे खोज निकाला जाएगा। इस गिरफ्तारी से पीड़ित दंपत्ति ने आखिरकार दो साल बाद राहत की सांस ली है।

New Ration Card: Ration Card की फटने-गलने की परेशानी खत्म, आ गया नया स्मार्ट PVC कार्ड, जानें कैसे बनवाएं

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नेशनल डेस्क: अगर आप भी उस पुरानी राशन कार्ड की किताब के फटने या गलने से परेशान हैं, तो अब वक्त है उसे ‘डिजिटल अवतार’ देने का। जिस तरह आपका आधार कार्ड या एटीएम कार्ड आपके बटुए में सुरक्षित रहता है, अब आपका राशन कार्ड भी वैसा ही स्मार्ट बन सकता है। सरकार की ‘Mera Ration’ पहल ने अब इसे कागज से निकालकर आपके मोबाइल और प्लास्टिक कार्ड (PVC) तक पहुंचा दिया है।

Ration Card की ‘किताब’ को कहें अलविदा: अब जेब में रखें स्मार्ट PVC कार्ड, फटने-गलने का झंझट खत्म

पुराने कागज वाले राशन कार्ड को संभालना एक बड़ी चुनौती है। अक्सर इस्तेमाल के दौरान यह फट जाता है या इसकी लिखावट मिट जाती है। लेकिन अब आप इसे डिजिटल रूप में डाउनलोड कर किसी भी नजदीकी सेंटर से प्लास्टिक कार्ड पर प्रिंट करवा सकते हैं। यह न केवल दिखने में आधुनिक है, बल्कि सालों-साल खराब भी नहीं होता।

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: कैसे पाएं अपना ई-राशन कार्ड?
डिजिटल राशन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत सरल है और आप इसे घर बैठे अपने स्मार्टफोन से कर सकते हैं:

App इंस्टॉल करें: सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से ‘Mera Ration’ ऐप डाउनलोड करें।

login process: ऐप खोलें और ‘Beneficiaries Users’ विकल्प चुनें। अपना आधार नंबर डालें और कैप्चा भरकर सबमिट करें।

OTP Verification: आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा, उसे दर्ज करते ही आप सुरक्षित रूप से लॉगइन हो जाएंगे।

कार्ड देखें: होम स्क्रीन पर आपको आपका डिजिटल राशन कार्ड दिखाई देगा। इसमें एक तरफ मुखिया की जानकारी और दूसरी तरफ परिवार के सदस्यों का विवरण होगा।

डाउनलोड करें: कार्ड के पास दिए गए ‘Download’ बटन पर क्लिक करें। यह आपके फोन में PDF फाइल के रूप में सेव हो जाएगा।

PVC कार्ड में कैसे बदलें?
ध्यान दें कि सरकार फिलहाल केवल डिजिटल कॉपी (Soft Copy) उपलब्ध कराती है। इसे प्लास्टिक कार्ड बनाने के लिए:

डाउनलोड की गई PDF फाइल को लेकर किसी भी कंप्यूटर कैफे या फोटो स्टूडियो पर जाएं।

उन्हें इसे PVC (प्लास्टिक) कार्ड पर प्रिंट करने को कहें।

यह बिल्कुल आपके आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसा मजबूत और वाटरप्रूफ होगा।

नया सिस्टम: अब पेन से एंट्री की जरूरत नहीं

पुराने राशन कार्ड में डीलर पेन से अनाज की मात्रा दर्ज करता था, जिसमें गड़बड़ी की आशंका रहती थी। अब पूरी प्रक्रिया हाई-टेक हो गई है:-

POS मशीन: जैसे ही आप राशन लेते हैं, डीलर अपनी मशीन में आपकी जानकारी दर्ज करता है।

रियल-टाइम अपडेट: आपके द्वारा लिए गए राशन की मात्रा, तारीख और कीमत तुरंत सरकारी सर्वर पर अपडेट हो जाती है।

ऐप में हिस्ट्री: आपने कब और कितना राशन लिया, इसकी पूरी जानकारी आप खुद अपने ‘Mera Ration’ ऐप में चेक कर सकते हैं।

शहर के ट्रैफिक से चाहिए आजादी! ये 5 ऑटोमेटिक कारें आपके लिए है बेस्ट, कीमत भी है 10 लाख से कम

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नेशनल डेस्क : शहरों के तंग ट्रैफिक में बड़ी सेडान और ऊंची SUV जैसी गाड़ियों को चलाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। अगर शहर के भीतर रोजाना सफर करना हो तो यह और भी थकावट भरा हो जाता है, क्योंकि बार-बार क्लच दबाना और गियर बदलना बोझिल हो जाता है। ऐसे में छोटी हैचबैक और ऑटोमेटिक कारों को शहर के लिए सबसे बेहतरीन ऑप्शन माना जाता है। मजेदार बात यह है कि इन कारों की कीमत भी आमतौर पर कम होती है।

अगर आप 10 लाख रुपये के भीतर एक अच्छी कार खरीदना चाहते हैं, तो यहां हम आपको 5 ऐसी शानदार हैचबैक कारों के बारे में बता रहे हैं, जो इस बजट में आती हैं और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन भी देती हैं।

1. टाटा टियागो
इस लिस्ट में सबसे पहले आती है टाटा टियागो। इसमें पेट्रोल और पेट्रोल-CNG दोनों इंजन ऑप्शन के साथ AMT गियरबॉक्स मिलता है। एक ही कार में AMT और CNG का कॉम्बिनेशन इसे खास बनाता है, क्योंकि इसमें दोनों के फायदे मिलते हैं। टियागो में अच्छी सेफ्टी भी है, इसे 4-स्टार ग्लोबल NCAP सेफ्टी रेटिंग मिली है। AMT वेरिएंट्स XTA, XZA, XZA NRG, XTA CNG, XZA CNG और XZA NRG CNG में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत ₹6.31 लाख से ₹8.10 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है।

2. मारुति सुजुकी स्विफ्ट
भारतीय बाजार की सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में से एक, मारुति सुजुकी स्विफ्ट, 20 साल की विरासत और चार जनरेशन के साथ आती है। मौजूदा जनरेशन में इसमें 1.2-लीटर तीन-सिलेंडर इंजन मिलता है। स्विफ्ट भारतीय पैसेंजर कार बाजार में भरोसेमंद नामों में से एक है। यह हैचबैक उपयोगी, किफायती और प्रीमियम फील देने वाली है। इसमें टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले, वायरलेस फोन चार्जर जैसे फीचर्स मिलते हैं। AMT वेरिएंट्स VXi, VXi (O), ZXi और ZXi+ ट्रिम्स में उपलब्ध हैं और इनकी कीमत ₹7.04 लाख से ₹8.65 लाख (एक्स-शोरूम) तक है।

Auraiya News: लखनऊ गईं 14 बसें, यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

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औरैया। लखनऊ में आयोजित होने जा रहे प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम को लेकर डिपो की 14 बसों को तीन दिन के लिए लखनऊ भेजा जा रहा है।ऐसे में रूटों पर परिवहन सुविधा बेपटरी होने की आशंका है। ट्रेनों की लेटलतीफी के बीच लोग बसों का सहारा ले रहे हैं। अब बसों की कमी यात्रियों को परेशानी में डालेगी।
डिपो के बेड़े में कुल 65 बसें हैं। शासन की ओर से की गई मांग के बाद डिपो प्रशासन ने तीन दिनों के लिए 14 बसों को लखनऊ भेजा है। ऐसे में अब तीन दिन तक महज 51 बसों से ही रूटों पर परिवहन सुविधा दी जाएगी। लखनऊ भेजी गई बसों में बीएस-6 मॉडल शामिल हैं। ऐसे में दिल्ली रूट पर बसों की संख्या में कमी आएगी। दिल्ली रूट पर ही सबसे ज्यादा यात्री सफर करते हैं।

डिपो एआरएम अपर्णा मीनाक्षी ने बताया कि डिमांड के तहत 14 बसों को भेजा जा रहा है। तीन दिन तक शेष बसों को बेहतर ढंग से चलाया जाएगा। 26 दिसंबर से विधिवत इन बसों का संचालन अपने रूटों पर किया जाएगा। इन तीन दिनाें में यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों के फेरे बढ़ाकर सेवाएं दी जाएंगी। चालक-परिचालकों को इसे लेकर निर्देश दे दिए गए हैं। किसी तरह की लापरवाही न हो इसके लिए सचेत किया गया है।

Auraiya News: 45 हार्ट अटैक, 13 ब्रेन स्ट्रोक रोगी आए, छह की मौत

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कानपुर। ठंड के मौसम में रोगियों का ब्लड प्रेशर बेकाबू हो रहा है। डायबिटीज के साथ ब्लड प्रेशर का गठजोड़ खतरनाक साबित हो रहा है। मंगलवार को कार्डियोलॉजी में हार्ट अटैक के लक्षण वाले 45 रोगी भर्ती हुए। हैलट इमरजेंसी में 13 रोगी ब्रेन स्ट्रोक के भर्ती हुए। छह रोगी ब्रॉट डेड आए। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि ओपीडी में 869 रोगियों का परीक्षण किया गया। 45 रोगियों को भर्ती किया गया है। पांच रोगी अस्पताल पहुंचने के पहले मर चुके थे। वहीं, हैलट इमरजेंसी में रात नौ बजे तक 52 रोगियों को भर्ती किया गया। ब्रेन स्ट्रोक के 13 रोगियों में आठ के मस्तिष्क की नसें फट गई थीं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. बीपी प्रियदर्शी के मुताबिक, सांस के रोगियों की भी तबीयत बिगड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट और ब्रेन अटैक का प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर है। अचानक बीपी बढ़ने से रोगियों की स्थिति बिगड़ रही है।

Auraiya: बांग्लादेश हिंसा पर गरजे राजू दास, बोले- एकजुट नहीं हुए तो समुद्र में गिरना पड़ेगा, ये भी कहा

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औरैया जिला पहुंचे हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने बांग्लादेश में हिंदू संत की हत्या पर दिया बड़ा बयान। बांग्लादेश में धर्म के नाम पर हत्या हुई है, जाति के नाम पर नहीं। बांग्लादेश में दलित की हत्या पर आज नीलचट्टे, भीमचट्टे व सेक्युलर मौन- महंत राजू दास। राजू दास बोले कि धर्म के नाम पर दंगा कराने वाले भी आज मौन है। सनातनी को कूटा जा रहा, पीटा जा रहा जलाया जा रहा फिर भी सब के सब मौन है। राजू दास ने सनातनियों से एकजुट रहने की अपील की। नहीं तो सनातनी औरैया से कूटेंगे, तो दिल्ली भागना पड़ेगा और दिल्ली से कुटोगे, तो समुद्र में जाओगे या आसमान में।

जिला अस्पताल : ठंड से बचाने के बजाय ब्लोअर भी फेंक रहे ठंडी हवा

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इटावा। अचानक बढ़ी ठंड व शीतलहर की वजह से अस्पताल में भर्ती मरीज के साथ तीमारदार बेहाल है। जिला अस्पताल के वार्डों में ठंड से बचाने को लगाए गए ब्लोअर गर्म हवा की जगह ठंडी हवा फेंक रहे हैं। इससे यहां भर्ती महिला व बच्चे ठंड से ठिठुर रहे हैं। ठंड से बचने के लिए मरीज घरों से दो-तीन कंबल लाकर ओढ़ रहे हैं।डॉ. बीआर आंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल में प्रथम तल पर महिला एवं शिशु वार्ड बना हुआ है। इस समय 28 मरीज भर्ती हैं। इसमें बच्चों की संख्या आठ है। ठंड की शुरुआत होते ही जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी वार्डों में हीटर व ब्लोअर चलाने के निर्देश दिए थे। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इसमें महिला एवं शिशु वार्ड में लगे ब्लोअर गर्म की जगह ठंडी हवा फेंक रहे हैं।

साथ ही मरीजों को दिए गए कंबल इतने हल्के हैं कि उनके सहारे सर्द रातें नहीं काटी जा सकतीं है। ऐसे में बीमार और कमजोर मरीजों की परेशानी बढ़ी हुई है। महिला व शिशु वार्ड में खिड़की व एग्जास्ट की जगग्से सीधी हवा वार्ड में आ रही है। इससे मरीज समेत तीमारदारों को ठंड में ठिठुरना पड़ रहा है। ऐसे मरीजों को घर से कंबल लगाकर ठंड से बचाव करना पड़ रहा है।

शहर के नौरंगाबाद चौराहे निवासी माजरा ने बताया कि उसके पुत्र हमजा (3) को दो दिन पहले सर्दी के बाद बुखार आ गया था। हालत में सुधार न होने पर उसे जिला अस्पताल में दिखाया। यहां डॉक्टर ने निमोनिया बताकर उसे भर्ती कर लिया। माजरा ने बताया कि वार्ड में लगा ब्लोअर ठंडी हवा फेंक रहा है। इससे तबीयत सही होने के बजाय बिगड़ सकती है।

अजीतमल के मुरादगंज निवासी मदीना ने बताया कि बेटे जैत मोहम्मद (5) को पेट में तेज दर्द होने पर उसे जिला अस्पताल में दिखाया था। यहां डॉक्टर को दिखाने पर उसे शिशु वार्ड में भर्ती कर लिया गया। बताया कि वार्ड में लगा ब्लोअर बेकार है। अस्पताल से मिला कंबल बहुत हल्का है इसलिए घर से लाए कंबल व जिला अस्पताल से मिले कंबल को ओढ़कर ठंड को भगाया जा रहा है।

महिला व पुरुष अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ व सहयोग स्टाफ के हर कक्ष में एक-एक रूम हीटर लगा है। इससे डॉक्टरों व कर्मियों को ठंड का अहसास भी नहीं होता है। वहीं, एक वार्ड में छह मरीजों के साथ ही छह तीमारदार रहते हैं। उस पर एक ब्लोअर लगा होता है जो गर्म की जगह ठंडी हवा देता है। ऐसे में मरीजों को ठंड में परेशान होना पड़ता है।

जिला अस्पताल के सभी वार्ड में हीटर व ब्लोअर लगा दिए गए हैं। अगर किसी वार्ड में ब्लोअर या हीटर खराब है तो मरीज या तीमारदार इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसको सही करवाया बदलकर दूसरा हीटर लगवा दिया जाएगा। कड़ाके की ठंड में मरीज की सुविधा की हर स्तर पर ध्यान रखा जाएगा। महिला व शिशु वार्ड में लगे ब्लोअर को सही करवाया जाएगा।
-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल।

UP: 100 साल का हुआ कानपुर का तिलकनगर; मोतीलाल नेहरू ने रखा था आधार, गांधीजी ने दिया था स्वदेशी का मंत्र

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कानपुर शहर के पॉश मोहल्लों में शुमार तिलकनगर 25 अक्तूबर को 100 साल का हो गया। ग्वालटोली और नवाबगंज के बीच स्थित म्यूनिसिपल मैदान को 1925 में 23 दिसंबर से 29 दिसंबर तक होने वाले कांग्रेस के 44वें राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए चुना गया था। इसी मैदान पर अधिवेशन के विभिन्न पंडालों के अस्थायी निर्माण का शिलान्यास 25 अक्तूबर 1925 को पंडित मोतीलाल नेहरू ने किया। उन्होंने ही पंडालों की इस अस्थायी बसावट को बाल गंगाधर तिलक के सम्मान में तिलकनगर नाम दिया।

वर्तमान में बंगलों, चौड़ी सड़कों और नामी हस्तियों का रिहाइशी क्षेत्र तिलकनगर पहले कृषि भूमि था। कानपुर कांग्रेस गाइड (1925) के मुताबिक यह भूमि ग्वालटोली और नवाबगंज के बीच स्थित थी। त्रिभुजाकार भूमि दक्षिण दिशा में बिठूर रोड और उत्तर में पुराना कानपुर रोड के बीच दोनों सड़कों से मिली हुई थी। यही दोनों सड़कें कंपनी बाग के पास मिलकर इसकी पश्चिमी हद को समाप्त करती थीं। खलासी लाइन के पश्चिम वाली सड़क पुराना कानपुर रोड तथा बिठूर रोड को मिलाती है। वह इस जमीन के पूर्व में थी। वर्तमान में यह हिस्सा एलनगंज और वीआईपी रोड के बीच स्थित है।

वार्षिक अधिवेशन 23 दिसंबर से 29 दिसंबर 1925 तक चला
कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप कुमार शुक्ल ने बताया कि 1920 के दशक में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन जोर पकड़ रहा था और कांग्रेस अधिवेशन राष्ट्रीय नेताओं के लिए अपने विचारों को साझा करने का एक मंच बन गया। शहर के म्यूनिसिपल मैदान में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन 23 दिसंबर से 29 दिसंबर 1925 तक चला। अधिवेशन में महात्मा गांधी, पंडित मोतीलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।

कपड़ों का पूरा बहिष्कार कर दें
अधिवेशन का मुख्य एजेंडा स्वराज और राष्ट्रीय एकता था। 24 दिसंबर को स्वदेशी प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए गांधी जी ने कहा था कि मैं केवल खद्दर ही का स्वप्न देखा करता हूं। मैंने प्रदर्शनी खोलने की जिम्मेदारी उसी समय ली जब जवाहरलाल जी ने मुझसे इस बात का विश्वास दिला दिया कि इस प्रदर्शनी में कोई भी विदेशी चीज नहीं रखी जाएगी। आज भी मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि यदि आप सब विदेशी तथा देशी मिलों के कपड़ों का पूरा बहिष्कार कर दें, तो एक वर्ष से कम समय में ही हमें स्वराज्य मिल सकता है।

इसी अधिवेशन में चुनी गईं पहली भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष
शुक्ल के मुताबिक, यह अधिवेशन महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी अहम साबित हुआ। इसी अधिवेशन में 24 दिसंबर 1925 को महात्मा गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद को छोड़ा था। इसी दिन कांग्रेस ने पहली भारतीय महिला सरोजनी नायडू को अध्यक्ष चुना था। इससे पहले 1917 में विदेशी महिला डॉ. एनी बेसेंट को कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष चुना गया था।

1940 से बदली तिलकनगर की सूरत
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शंकर दत्त मिश्रा ने बताया कि बाल गंगाधर तिलक का निधन 1920 में हुआ था। महात्मा गांधी ने उनके सम्मान में देश भर के प्रमुख स्थलों का नामकरण करने की बात रखी थी। इसी के चलते देश भर में कई स्थानों के नाम गंगाधर तिलक पर रखे गए। शहर में औद्योगिकरण की शुरुआत 1950 के दशक में हुई। आसपास कई मिलों के होने के कारण इस क्षेत्र में आवासीय विकास की जरूरत महसूस हुई। कानपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने का निर्णय लिया। 1960 के दशक में क्षेत्र का तेजी से विकास हुआ और यहां आवासीय कॉलोनियां बनाई गईं। तिलक की देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना को सम्मान देने के लिए इस क्षेत्र का नाम तिलकनगर बरकरार रखा। कभी श्रमिकों और मध्य वर्ग के लोगों के लिए बसा मोहल्ला आज नई रंगत में दिखता है। शहर के नामी व्यक्तियों की रिहाईश वाले इस मोहल्ले में मॉल, हाईराइज अपार्टमेंट, होटल और नामचीन कंपनियों के शोरूम हैं।

कोई बड़ा कांग्रेसी नेता नहीं निकला
तिलकनगर का जन्म भले ही कांग्रेस के अधिवेशन से हुआ हो और इसका अस्तित्व कांग्रेस से जुड़ा हो, लेकिन यहां से पार्टी का कोई बड़ा नेता, विधायक, सांसद नहीं बन सका।