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बांग्लादेश में डोनाल्ड ट्रम्प नाम से मशहूर सफेद भैंसे की ईद पर कुर्बानी पर रोक लगा दी गई। ईद से पहले इस भैंसे को कुर्बानी के लिए 3.85 लाख टाका (यानी करीब 3 लाख रूपए) में बेच दिया था।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इस भैंसे का पालन-पोषण राजधानी ढाका से कुछ दूर नारायणगंज स्थित रबेया एग्रो फार्म में हुआ। फार्म के मालिक जिया उद्दीन मैरदा ने बताया कि ईद के लिए 700 किलो के इस भैंसे की कीमत 550 टका प्रति किलोग्राम लगाई गई थी।
लेकिन जैसे-जैसे इस सफेद भैंसे की लोकप्रियता बढ़ती गई, वैसे-वैसे सरकार और प्रशासन का ध्यान भी उसकी तरफ गया। इसके बाद बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि भैंसे को बचाकर ढाका के नेशनल जू भेजा जाएगा।
गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने अधिकारियों को इस जानवर को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। सरकार ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति ने कुर्बानी के लिए यह भैंसा खरीदा था, उसे उसके पूरे पैसे वापस किए जाएंगे।
अपने सुनहरे बालों के कारण सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भैंसा
करीब 700 किलो वजन वाला यह भैंसा सोशल मीडिया पर अचानक बहुत मशहूर हो गया। इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। लोग दूर-दूर से सिर्फ इस अनोखे भैंसे को देखने के लिए फार्म पर पहुंचने लगे। बच्चे, परिवार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स उसके साथ फोटो और वीडियो बनाने लगे।
इस भैंसे की सबसे खास बात उसके सिर पर मौजूद सुनहरे बालों का गुच्छा है, जो काफी हद तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेयरस्टाइल जैसा दिखता है। इसी वजह से लोगों ने मजाक-मजाक में उसका नाम डोनाल्ड ट्रम्प रख दिया था।
लोगों की भारी भीड़ फार्म पर जमा होने लगी, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने आखिरी समय में फैसला लिया कि इस दुर्लभ भैंसे की कुर्बानी नहीं होने दी जाएगी।

पशुपालन विभाग ने भैंसे को सुरक्षित रखने कि मांग की
ढाका के केरानीगंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी मोहम्मद रूहुल कुद्दुस ने बताया कि पशुपालन विभाग ने पुलिस से संपर्क कर इस भैंसे को सुरक्षित रखने की मांग की थी। अधिकारियों का मानना है कि यह भैंसा अभी जवान है और कई साल तक जिंदा रह सकता है।
ANI से बात करते हुए फार्म के मालिक ने बताया कि यह भैंस 4 साल का है और यह एल्बिनो किस्म की नस्ल है। इसका रंग सफेद-गुलाबी जैसा है। इसीलिए यह दुर्लभ और अनोखी है।
अब इस भैंसे को बांग्लादेश नेशनल जू में रखा गया है। जू प्रशासन ने उसके लिए अलग बाड़ा तैयार किया है और उसकी देखभाल के लिए खास कर्मचारी भी लगाए गए हैं। जू के क्यूरेटर अतीकुर रहमान ने बताया कि भैंसे को फिलहाल दो हफ्ते तक निगरानी और क्वारंटीन में रखा जाएगा। इसके बाद आम लोग उसे जू में देख सकेंगे।

बांग्लादेश में एल्बिनो नस्ल बेहद दुर्लभ
बांग्लादेश में सफेद या एल्बिनो भैंसे बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। वहां ज्यादातर काले रंग के जानवर ही देखने को मिलते हैं। ऐसे में इस भैंसे का अलग रंग और उसके सिर के सुनहरे बाल लोगों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण बन गए।
एल्बिनो नस्ल के जानवरों के शरीर में मेलेनिन नाम का पिगमेंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं बनता। यही पिगमेंट त्वचा, बाल और आंखों को रंग देता है। इसकी कमी की वजह से ऐसे जानवरों का रंग सफेद या हल्का गुलाबी दिखता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक हजारों सामान्य पशुओं में कभी-कभी एक एल्बिनो जन्म लेता है। इनकी त्वचा और आंखें संवेदनशील होती हैं, इसलिए इन्हें धूप, संक्रमण और त्वचा संबंधी बीमारियों से ज्यादा खतरा रहता है।

लखनऊ में सपा-बीजेपी के बीच होर्डिंग वार जारी है। बुधवार को सपा मुख्यालय के बाहर एक और होर्डिंग लगी। इसमें बीजेपी और सुभासपा पर निशाना साधा गया। होर्डिंग में आरोप लगाते हुए साल 2024 से लेकर 26 तक राजभर समाज पर अत्याचार का आरोप लगाया गया।
होर्डिंग समाजवादी पार्टी के युवजन सभा के उपाध्यक्ष पंकज राजभर की तरफ से लगवाई गई है। इसमें सबसे ऊपर लिखा है- भाजपा सरकार में 2024 से 2026 के बीच में हुई राजभर समाज के लोगों की हत्याएं’।

1. वाराणसी में 6 हत्याएं: सुरेश राजभर 2025 , फ़या राजभर 2025, छोटू राजभर 2025 , डाक्टर सचिन राजभर 2025 , इंजीनियर रोहित राजभर 2026, फते राजभर 2026
2. बलिया में तीन हत्याएं: दिग्विजय राजभर 2025 , चंदन राजभर 2026, विक्की राजभर 2026
3. गाजीपुर में तीन हत्याएं: शिव मूरत राजभर 2024 , दीपक राजभर 2026 , सुधारन राजभर 2026
4. मऊ में हत्याएं: सुनील राजभर 2024, सुरेश राजभर 2025 , अमित राजभर 2025 , अनिल राजभर 2026, सशिवबचन राजभर 2026
5. जौनपुर में दो हत्याएं: पंकज राजभर 2024 , सुनील राजभर 2026
6. बाराबंकी में हत्या: रिंकी राजभर 2024 और संत कबीर नगर में नंदनी राजभर 2024 की हत्या
लॉ एंड ऑर्डर बिलकुल जीरो
पंकज राजभर ने कहा- आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर बिलकुल जीरो है। साथ यह भी स्पष्ट हो गया कि यहां पर राजभर समाज के लोग बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। मौजूदा सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर सिर्फ राजभर समाज की बात करते हैं। उनके सुरक्षा और विकास के लिए कोई काम नहीं किया। जो व्यक्ति अपने समाज के लोगों की सुरक्षा न कर पाए उस से क्या उम्मीद की जा सकती है।
समाजवादी पार्टी में ही राजभर और पीडीए समाज के लोग सुरक्षित हैं। ओमप्रकाश राजभर सिर्फ हमारे नेता अखिलेश यादव पर हमला करना जानते हैं। उन्हें अपना समय समाज की सेवा और सुरक्षा में लगाना चाहिए। हम लोग राजभर समाज की लड़ाई लड़ रहे हैं और उन्हें न्याय जरूर दिलाएंगे।
राजभर ने अखिलेश पर कसा था तंज
योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा चीफ ओम प्रकाश राजभर ने गत रविवार को लखनऊ में ऑटो चलाया। वे ऑटो चलाकर पार्टी दफ्तर से अपने सरकारी आवास तक गए।
मंत्री ने कहा, अखिलेश यादव ने बताया है कि ऑटो चलाते-चलाते सरकार चलाओ। संदेश यही है कि अब ऑटो वाले ओम प्रकाश राजभर। इससे पहले राजभर ने ऑटो चलाते हुए X पर फोटो पोस्ट किया। उन्होंने खुद को संघर्ष से निकला नेता बताते हुए अखिलेश की राजनीति को ‘AC-PC और ट्विटर’ वाली बताया था। उन्होंने कहा था,
अखिलेश यादवजी, आप चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, हम नहीं। हमारी इसी फोटो को लेकर आपके उजड्ड ट्रोलर लोग हमारी हंसी उड़ा रहे हैं। हमें हमारी औकात बता रहे हैं।

3 तस्वीरें देखिए…



राजभर ने जो कुछ लिखा, हूबहू पढ़िए…
‘उड़ा लीजिए गरीबी का मजाक’
अखिलेश यादवजी, आप चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं… हम नहीं। हमारी इसी फोटो को लेकर आपके उजड्ड ट्रोलर लोग हमारी हंसी उड़ा रहे हैं। हमें हमारी औकात बता रहे हैं…।
जान लीजिए कि हमारी ये फोटो ही हमारा अभिमान है, हमारी आन-बान-शान है…। हमारे संघर्ष के दिनों की न जाने कितनी यादें बसी हैं इसमें। हमारा संघर्ष आज भी जारी है…।
छोड़िए… आपको समझ में नहीं आएगी बात…क्योंकि आपको विरासत में बड़ी-बड़ी गाड़ी, लॉन में टहलाते कुत्ते, विदेश में पढ़ाई, सत्ता का पॉवर, पहले से तैयार मुख्यमंत्री की गद्दी मिली है। जिसे आपने गद्दी मिलने के बाद बस केवल ट्विटर, एसी और पीसी वाली राजनीति में बदल दिया है। इसीलिए आपको ऑटो-रिक्शा चलाने वाले, ठेला-पटरी वाले, गरीब आदमी हंसी के पात्र लगते होंगे।
‘2017 की तरह 2027 में विदेशी साइकिल को कचरेंगे’
उड़ा लीजिए गरीबी का मजाक… और खूब उड़ भी लीजिए सातों आसमान तक…। बस यह बात गांठ बांध लीजिए कि 2027 में यही टेम्पो, रिक्शा, ठेला और खोमचा वाले मिलकर आपकी 2011 वाली विदेशी साइकिल को 2017 की तरह पलटेंगे भी और कचरेंगे भी…।

‘जनता का दुख दर्द सुनना ही मेरी राजनीति’
अखिलेश जी, जब ये ओम प्रकाश राजभर गांव-गांव घूम कर अति पिछड़ा, दलित, वंचित की आवाज उठा रहा था…लाठी खा रहा था… गरीबों के हक की लड़ाई लड़ रहा था, तब आप अपने पावरफुल पिताजी के धन पर विदेश घूम रहे थे। आप लिखे और पढ़े हो सकते हैं लेकिन संस्कारी नहीं हैं। यही वजह है कि आप अपने पिता का अपमान कर राजनीति में आए और सत्ता हासिल की।
वहीं, हमारे पिता जी ने हमें गरीबी में पाला है, लेकिन हम आपकी तरह अपने पिता जी का अपमान करके नहीं, बल्कि उनका आशीर्वाद लेकर राजनीति में आए हैं। हम अपने समाज के दर्द से निकले हुए हैं…।
राजनीति हमारे लिए ट्विटर, एसी और पीसी नहीं है। 45 डिग्री की तपती दोपहरी में गांव की पगडंडियों पर चलकर जनता का दुख सुनना ही हमारी राजनीति है।
क्यों अखिलेश से नाराज हैं राजभर?
सपा के कई समर्थक ओम प्रकाश राजभर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। सुरेंद्र यादव नाम के X अकाउंट होल्डर ने लिखा, अरे ये तो दूर से ही ओमप्रकाश राजभरजी की वाइब दे रहा है। लगता है पहले ऑटो चलाते थे, फिर सोचा ‘जब बिना मीटर के लोग घूम सकते हैं, तो बिना मुद्दे के राजनीति क्यों नहीं।
इनका ऑटो भी बड़ा यूनिक होगा। सवारी पूछे ‘किधर चलोगे?’ तो जवाब आए ‘जिधर सत्ता जाएगी उधर!’ मीटर डाउन कम, बयान डाउन ज्यादा करते लग रहे हैं। और चेहरा ऐसा कि ऑटो में भी बैठो तो लगेगा अभी कहेंगे ‘हमारी पार्टी निर्णायक भूमिका में है।’
