Sunday, July 26, 2026
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मथुरा: एनकाउंटर में लूट और हत्या के तीन आरोपित गिरफ्तार, दो के पैर में लगी गोली

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मथुरा। जैंत पुलिस और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जबलपुर के युवक की लूट के बाद हत्या करने वाले तीन आरोपितों को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। दो बदमाशों के पैर में गोली लगी है, जबकि तीसरे को मौके से दबोच लिया गया। घायल बदमाशों को उपचार के लिए संयुक्त अस्पताल वृंदावन भेजा गया है।

सीओ वरुण मिश्र ने बताया कि 18 जुलाई की रात करीब साढ़े बजे मुखबिर से सूचना मिली थी कि थाना जैंत में दर्ज हत्या व लूट के मुकदमे से जुड़े आरोपित सुनरख-नगला कीकी रोड पर फिर किसी वारदात की फिराक में घूम रहे हैं। घेराबंदी के दौरान बदमाशों ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी।

जवाबी कार्रवाई में सियाराम निवासी ग्राम कमई थाना बरसाना और रवि निवासी ग्राम कमई, थाना बरसाना के पैर में गोली लगी, जबकि सचिन निवासी ग्राम कमई थाना बरसाना को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

तीनों आरोपितों ने कबूली हत्या की वारदात

सीओ वरुण मिश्रा ने बताया कि तीनों आरोपितों ने जबलपुर निवासी सुनील कुमार त्रिपाठी से लूटपाट करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी और पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को झाड़ियों में फेंक दिया था। इसी मामले में सीसीटीवी फुटेज मिलने पर पुलिस उनकी तलाश कर रही थी।

बरामद हुआ लूटा एटीएम कार्ड व अन्य सामान

सीओ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से दो तमंचे, दो कारतूस, लूटा हुआ एटीएम कार्ड, लूटा हुआ मोबाइल फोन, लूटे गए 30 हजार रुपये नकद, और घटना में प्रयुक्त बुलेट मोटरसाइकिल बरामद की गई है। तीनों आरोपितों के विरुद्ध पहले से भी विभिन्न थानों में मारपीट, रंगदारी, धोखाधड़ी, आईटी एक्ट, आर्म्स एक्ट के कई मुकदमे दर्ज हैं।

सोनम वांगचुक की पत्नी पहुंचीं दिल्ली हाई कोर्ट, अस्पताल में भर्ती को बताया ‘गैर-कानूनी हिरासत’

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नई दिल्ली। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की पत्नी ने दिल्ली हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की है। पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। आंगमो का कहना है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं है। यह एक गैरकानूनी डिटेंशन जैसा बन गया है।

गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल में अपने पति के भर्ती करने को “गैर-कानूनी हिरासत” बताया है और कोर्ट से उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मांगी है। साथ ही उन्होंने उन डॉक्टरों से मिलने की भी मांग रखी है जो वांगचुक का इलाज कर रहे।

उन्होंने कहा, “मेरा सफदरजंग सरकारी अस्पताल से भरोसा उठ गया है। वांगचुक का पोटैशियम लेवल गिरकर 2.9 हो गया है, जिसे उन्होंने चिंताजनक और जानलेवा बताया। फिर भी, अस्पताल प्रशासन ने हेल्थ बुलेटिन में असल आंकड़ा नहीं बताया और सिर्फ पोटैशियम लेवल कम होने की जानकारी दी।”

वांगचुक की हालत स्थिर

मालूम हो कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के समर्थन में जंतर-मंतर पर बीते 21 दिनों से अनशन कर रहे लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत शनिवार को ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें दिल्ली के सरकारी हॉस्पिटल सफदरजंग में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर है।

 

वांगचुक को हटाए जाने पर AAP ने साधा केंद्र पर निशाना

जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार को बल प्रयोग के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक जैसी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। केजरीवाल ने कहा कि वांगचुक और उनके साथ जुड़े लोग युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, इसलिए सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की।

वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आप से राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की मांगों पर संवाद करने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई की गई।

 

शिमला के नेरवा में सड़क से 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी कार, PWD कर्मी सहित दो युवकों की मौत

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में जिला शिमला के चौपाल उपमंडल के नेरवा क्षेत्र में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा पंचायत पुजारली के दोछी के पास किरी से नाव सड़क पर हुआ। एचपी 08ए-8441 नंबर की एक आल्टो कार अनियंत्रित होकर लगभग 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी।

कार सवार दोनों की मौके पर मौत

जानकारी के अनुसार कार में दो व्यक्ति सवार थे और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान 35 वर्षीय नरेश कुमार पुत्र अनंत राम निवासी गांव दोछी, डाकघर रूसलाह, तहसील नेरवा, जिला शिमला तथा जितेंद्र पुत्र धाजू राम निवासी चाड़चधार धबास के रूप में हुई है।

लोक निर्माण विभाग में कार्यरत था नरेश

बताया गया है कि नरेश कुमार लोक निर्माण विभाग में मल्टी टास्क वर्कर के रूप में कार्यरत थे। प्रशासन की ओर से भी घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है।

मेरठ में 357 करोड़ का टैक्स रिफंड घोटाला: 3000 क्लाइंट्स को दिलाए अवैध Refund, 50 लाख के जेवर और 4 करोड़ की FD सीज

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मेरठ। आयकर विभाग ने मेरठ में एक बड़े टैक्स रिफंड फ्राड का राजफाश किया है। 30 वर्षीय नैंसी अग्रवाल ने 357 करोड़ रुपये की फर्जी कर-धोखाधड़ी की। नैंसी अग्रवाल माधवपुरम क्षेत्र के इन्द्रा नगर स्थित अपने 35 वर्ग मीटर के घर से काम करते हुए तीन सालों में आयकर एक्ट की धारा 80GGC का सिस्टमैटिक तरीके से गलत इस्तेमाल किया, जो लोगों को राजनीतिक दलों को दिए गए डोनेशन पर टैक्स कटौती का दावा करने की इजाजत देती है।

आरोपित देशभर में फैले 3,000 से अधिक क्लाइंट्स को गलत कटौतियों और फर्जी दावों के जरिये 65.5 करोड़ रुपए अवैध रिफंड दिलाने में कामयाब रही। उसने क्लाइंट्स की तरफ से गैर-मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को भारी डोनेशन देने का फर्जीवाड़ा किया।

3 हजार से अधिक क्लाइंट्स के लिए किया 65.5 करोड़ का अवैध टैक्स रिफंड हासिल

आयकर विभाग की टीम ने 14-15 जुलाई 2025 को 357 करोड़ के टैक्स रिफंड फ्राड के मामले में दिल्ली चुंगी स्थित गुप्ता ब्रदर्स के घर और आवास और इन्द्रा नगर निवासी नैंसी अग्रवाल के यहां सर्वे किया। टीम ने उस समय नैंसी अग्रवाल भारतीय स्टेट बैंक ब्रहमपुरी शाखा में दो बैंक लॉकर में रखे करीब 50 लाख के सोने के गहने व 4 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट को सीज किया था।

तलाशी के दौरान करीब 5 लाख नकद, हाथ से लिखे लेजर, कंप्यूटर और लैपटॉप समेत कई दस्तावेजी और डिजिटल सबूत भी बरामद किए गए, जिनमें उसके क्लाइंट नेटवर्क की जानकारी थी।

आरोपित नैंसी अग्रवाल का बैंक लाकर व एफडी सीज

आयकर विभाग में इस मामले की जांच कर रही टीम के एक सदस्य ने बताया कि नैंसी अग्रवाल पिछले तीन सालों में आयकर एक्ट की धारा 80GGC का सिस्टमैटिक तरीके से गलत इस्तेमाल किया। आरोपित ने रेफरल डिस्काउंट के जरिए देश भर में क्लाइंट नेटवर्क बनाया और लोगों को गलत कटौती का दावा करने के लिए लुभाया। अपने काम को बढ़ाने के लिए आरोपित ने क्लाइंट्स को प्रमोशनल डिस्काउंट का ऑफर दिया।

आयकर विभाग ने की नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू

क्लाइंट्स अधिकतर सैलरी पाने वाले लोग हैं, जो या तो जानबूझकर या अनजाने में फर्जी छूट के जरिए ज्यादा रिफंड दिलाने के अग्रवाल के वादों से लुभाए गए थे। इस पूरे प्रकरण की जांच कर रहे आयकर अधिकारी माखन मीना ने अब आरोपित पर मुकदमा चलाने और फर्जी दावों की रकम वसूलने के लिए फायदा उठाने वाले टैक्सपेयर्स को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

नैंसी अग्रवाल का आरोप- गुप्ता ब्रदर्स हैं आरोपित

नैंसी अग्रवाल का आरोप है कि 2014 में चावली देवी आर्य कन्या इन्टर कॉलेज ब्रह्मपुरी से 12वीं पास करने के बाद डीएन डिग्री कॉलेज मे बीकॉम में प्रवेश लिया। 2023-24 आयकर विवरणी भरने आदि की प्रक्रिया सीखने के लिए गुप्ता ब्रदर्स के यहां प्रशिक्षण लेना शुरू किया। 14-15 जुलाई 2025 को जब आयकर विभाग की टीम ने सर्वे किया तो उनके यहां भी यहां भी सर्वे हुआ। सर्वे में गुप्ता ब्रदर्स के प्रियम गुप्ता ने सारा दोष आयकर के सामने पर गढ़ दिया जबकि इस मामले से उनका कोई मतलब नहीं है।

आयकर विभाग के सभी आरोपों का दिया जाएगा जवाब

नैंसी ने कहा कि आयकर को जो भी सर्वे में मिला सबके सामने है। मेरे पिता संजीव कुमार गुप्ता एक निजी कंपनी में नौकरी करते है और मां रचना गृहणी है। भाई विशाल अभी पढ़ रहा है। आयकर विभाग को सभी आरोपों को जवाब दिया जाएगा।

गुप्ता ब्रदर्स के प्रियम गुप्ता से इस बाबत बातचीत हुई तो उनका कहना था कि नैंसी अग्रवाल से उनका कोई लेना देना नहीं है न ही उसने कभी उनके यहां कोई प्रशिक्षण लिया। आयकर विभाग ने पिछले साल सर्वे जरूर किया था पर उसमें हमारे यहां कुछ भी गलत नहीं मिला।

जिसे गणित में मिले थे सिर्फ 51 अंक उसी ने रचा इतिहास; पवन ने अंतरिक्ष में भारत को दिया नया आयाम, असफल युवाओं के लिए बना मिसाल

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International Desk: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब Skyroot Aerospace द्वारा विकसित विक्रम-I रॉकेट ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट है, जिसने देश के निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। इस सफलता के केंद्र में हैं पवन कुमार चंदाना-एक IITian, पूर्व ISRO वैज्ञानिक और अब सफल उद्यमी। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, क्योंकि कभी गणित में सिर्फ 51 अंक पाने वाले छात्र ने आज भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई दी है।हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े पवन बचपन से मशीनों और तकनीक को समझने में रुचि रखते थे। शुरुआत में गणित उनका मजबूत विषय नहीं था, लेकिन जिज्ञासा और लगातार मेहनत ने धीरे-धीरे विज्ञान और गणित को उनकी ताकत बना दिया।

 

करीब दो दशक पहले उन्होंने IIT खड़गपुर की प्रवेश परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की। इंजीनियरिंग के बाद उनका सपना अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने का था, जिसके चलते उन्हें ISRO में सीधे कैंपस से भर्ती मिली। ISRO में उन्होंने GSLV Mk III जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम किया और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में छह वर्षों तक रॉकेट डिजाइन और विकास का अनुभव हासिल किया। इसी दौरान उनके मन में विचार आया कि क्या भारत में निजी क्षेत्र भी विश्वस्तरीय रॉकेट बना सकता है।इसी सोच के साथ 2018 में उन्होंने साथी ISRO इंजीनियर नागा भारथ डाका के साथ Skyroot Aerospace की स्थापना की। शुरुआती दिनों में फंडिंग और भरोसा जुटाना बड़ी चुनौती थी, लेकिन कंपनी ने धीरे-धीरे भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली।

राजनाथ सिंह का पाकिस्तान को दोटूक संदेश, बोले- आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ नारा नहीं, हमारी नीति है

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नेशनल डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि देश में ही रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आए जबरदस्त उछाल के दम पर, भारत तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक सुरक्षा साझेदार के तौर पर उभर रहा है और हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सिंह ने कहा कि नयी दिल्ली ने आतंकवाद पर अपना नजरिया पूरी दुनिया के सामने साफ तौर पर रखा है और साथ ही कहा कि ”आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने का नजरिया हमारे लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई की एक नीति है।

पूरी दुनिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत की ताकत देखी 
उन्होंने कहा, ”हम आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ उसकी दहलीज पर ही नहीं, बल्कि उसके घर में घुसकर भी कार्रवाई करेंगे। पूरी दुनिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह देखा था।” रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में बने रक्षा उत्पादों का निर्यात लगभग 100 देशों को किया जा रहा है और देश के रक्षा उत्पादन का कुल मूल्य सालाना लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार बन रहा भारत 
उन्होंने कहा, ”आज भारत न केवल अपने लिए रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार भी बन रहा है। हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक, भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।” रक्षा मंत्री ने कहा कि देश 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, ”अगर कोई देश हथियारों, गोला-बारूद, नौवहन प्रणाली, मिसाइलों, रडार और ड्रोन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता भी सीमित हो जाती है। हम इसे पूरी तरह से बदलने के पक्के इरादे के साथ काम कर रहे हैं।

रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना सरकार का बड़ा कदम 
सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता भारत के उद्योगों में भरोसे का सबूत है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत करने की दिशा में मोदी सरकार ने जो ”सबसे बड़ा कदम” उठाया है, वह रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, ”रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने का हमारा नजरिया भारत की क्षमताओं पर भरोसा करने वाला है। लेकिन पिछली सरकारों का नजरिया भारत की क्षमता और काबिलियत को लेकर कुछ हद तक शक वाला था। शायद उन्हें भारत की क्षमताओं पर उतना भरोसा नहीं था, जितना हमारी सरकार को है।

मां करती है घरों में झाड़ू-पोछा, बेटी ने क्रैक कर डाला NEET, ऑटो चालक के बेटे ने भी लहराया परचम; गरीबी नहीं रोक सकी हौसलों की उड़ान

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लखनऊ/गोरखपुर : लखनऊ में घर-घर जाकर घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली महिला की बेटी और गोरखपुर के एक ऑटो रिक्शा चालक के बेटे ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं। दोनों छात्रों की सफलता अब हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

पिता को खोने के दर्द ने नीलू को बनाया डॉक्टर
गोमती नगर इलाके के एक गांव में रहने वाली नीलू ने आठवीं कक्षा में इलाज के अभाव में अपने पिता को खो दिया था। परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं था कि उनका इलाज करा सके। इसी घटना ने नीलू के जीवन की दिशा बदल दी।

नीलू ने कहा, “मेरे पिता की मौत इसलिए हुई क्योंकि हम इलाज का खर्च नहीं उठा सके। उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि डॉक्टर बनूंगी, ताकि किसी और परिवार को गरीबी की वजह से अपना प्रियजन न खोना पड़े।”

94% अंक और NEET में सफलता
नीलू ने ‘प्रेरणा बालिका स्कूल’ से पढ़ाई की, जिसे ‘स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन (SHEF)’ संचालित करता है। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए उसे छात्रवृत्ति मिली। इस वर्ष उसने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए और साथ ही नीट परीक्षा भी पास कर ली। उसे आगे की मेडिकल शिक्षा और कार्डियोलॉजिस्ट बनने के सपने को पूरा करने के लिए स्कॉलरशिप भी मिली है, जिसके तहत उसकी पढ़ाई और अन्य खर्च वहन किए जाएंगे।

मां ने समाज के दबाव के बावजूद नहीं रुकने दी पढ़ाई
नीलू की मां अस्पताल में अटेंडेंट होने के साथ-साथ घर-घर जाकर घरेलू सहायिका का काम करती हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। रिश्तेदारों और समाज के लोगों ने उन्हें बेटियों की पढ़ाई छुड़ाकर शादी कराने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने सभी दबावों को नजरअंदाज करते हुए बेटियों की शिक्षा जारी रखी। नीलू ने कहा, “मेरे शिक्षकों ने मुझे विश्वास दिलाया कि शिक्षा जिंदगी बदल सकती है। मेरी सफलता मेरे परिवार और स्कूल के लिए सबसे बड़ा उपहार है।”

शिक्षकों ने बताया मेहनत का परिणाम
‘स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन’ की संस्थापक और सीईओ उर्वशी साहनी ने कहा कि नीलू की सफलता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कठिन मेहनत का परिणाम है। वहीं, स्कूल की प्रधानाचार्य मीनाक्षी बहादुर ने उसे बेहद मेहनती छात्रा बताया।

ऑटो चालक के बेटे विशाल ने चौथे प्रयास में पाई मंजिल
गोरखपुर के ऑटो रिक्शा चालक संतोष तिवारी के बेटे विशाल तिवारी ने भी आर्थिक संघर्षों के बावजूद नीट परीक्षा में सफलता हासिल की। चौथे प्रयास में उसने 720 में से 605 अंक प्राप्त किए। विशाल ने 2022 में 12वीं पास करने के बाद बिना कोचिंग के मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की, क्योंकि परिवार कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकता था।

शादी, जिम्मेदारियां और फिर भी नहीं छोड़ा सपना
तैयारी के दौरान विशाल की शादी हो गई और बाद में वह एक बेटे का पिता भी बना। इसके बावजूद उसने डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा। आखिरकार 2024 में उसके पिता ने उधार लेकर उसे कोचिंग में दाखिला दिलाया। विशाल ने कोचिंग के साथ देर रात तक लाइब्रेरी में पढ़ाई की और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च भी उठाया। विशाल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और पत्नी के सहयोग को देते हुए कहा, “डॉक्टर बनने के बाद मैं सबसे पहले अपने पिता के लिए एक कार खरीदना चाहता हूं।”

महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा: अशोक गहलोत

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नेशनल डेस्कः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।

उन्होंने एक बयान में कहा कि वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल भारतीय लोकतंत्र पर गंभीर धब्बा है। गहलोत ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय जब अन्ना हजारे ने आंदोलन किया था, तब सरकार ने उनसे संवाद का रास्ता अपनाया था और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख स्वयं उनसे बातचीत करने गए थे।

गहलोत ने कहा, ”इसके विपरीत, आज की सरकार का रवैया बिल्कुल अलग है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे किसान आंदोलन का मामला हो, महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन का या अपने अधिकारों की मांग कर रहे पूर्व सैनिकों का, केंद्र सरकार ने हर बार विरोध करने वालों के साथ दमनात्मक रवैया अपनाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ”लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संवैधानिक विरोध नागरिकों का अधिकार होता है, लेकिन इस सरकार के दौर में उसके लिए भी जगह लगातार सिमटती जा रही है।

लोकतंत्र में संवाद होता है, जबकि तानाशाही में बल प्रयोग किया जाता है।” गहलोत ने कहा, ”आज सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल न केवल पूरी तरह अस्वीकार्य है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा भी है। पूरी दुनिया देख रही है कि महात्मा गांधी के देश भारत में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।” उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को शनिवार को अनशन के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।

महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा: अशोक गहलोत

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नेशनल डेस्कः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के देश में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।

उन्होंने एक बयान में कहा कि वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल भारतीय लोकतंत्र पर गंभीर धब्बा है। गहलोत ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय जब अन्ना हजारे ने आंदोलन किया था, तब सरकार ने उनसे संवाद का रास्ता अपनाया था और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख स्वयं उनसे बातचीत करने गए थे।

गहलोत ने कहा, ”इसके विपरीत, आज की सरकार का रवैया बिल्कुल अलग है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे किसान आंदोलन का मामला हो, महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन का या अपने अधिकारों की मांग कर रहे पूर्व सैनिकों का, केंद्र सरकार ने हर बार विरोध करने वालों के साथ दमनात्मक रवैया अपनाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ”लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संवैधानिक विरोध नागरिकों का अधिकार होता है, लेकिन इस सरकार के दौर में उसके लिए भी जगह लगातार सिमटती जा रही है।

लोकतंत्र में संवाद होता है, जबकि तानाशाही में बल प्रयोग किया जाता है।” गहलोत ने कहा, ”आज सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल न केवल पूरी तरह अस्वीकार्य है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा भी है। पूरी दुनिया देख रही है कि महात्मा गांधी के देश भारत में शांतिपूर्ण विरोध का गला घोंटा जा रहा है।” उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को शनिवार को अनशन के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।

UP: कूरियर बन गया नकली दवाओं का सबसे बड़ा हथियार, लखनऊ में बढ़ता जानलेवा खतरा; इन दवाओं की हो रही नकल

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राजधानी में नकली दवाओं की तस्करी का बड़ा माध्यम कूरियर सेवा बन गई है। जांच में सामने आया कि दर्द, बुखार और एंटीबायोटिक जैसी अधिक मांग वाली दवाओं की नकली खेप दूसरे राज्यों से लाई जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसी दवाएं मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग राजधानी में नकली दवाओं के नेटवर्क को तोड़ नहीं पा रहा। इसकी बड़ी वजह ये है कि राजधानी में नकली दवाओं की ज्यादातर आपूर्ति कूरियर के जरिये पहुंच रही है। जिले के अंदर और आसपास के जिलों में माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए ही वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है।

अधिकारी भी मानते हैं कि दवा की दुकानों तक पहुंचने के बाद नकली-असली की पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता है। नकली दवाओं को पकड़ने के लिए गोपनीय सूचनाओं पर आश्रित रहना पड़ता है। बृहस्पतिवार रात विभिन्न ब्रांड की नकली दवाओं की बरामदगी ने फिर से सवाल खड़े किए हैं कि आखिर इन दवाओं के निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है।

पिछले तीन वर्ष में कई बार कार्रवाई के बाद भी नकली दवाओं के धंधे पर पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी है। पुलिस और एफएसडीए के अधिकारी भी मानते हैं कि जब तक नकली दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति पर नकेल नहीं कसेगी, तब तक इस धंधे को रोक पाना मुश्किल है। 

दूसरे राज्यों से आ रहीं नकली दवाएं

एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश ने बताया कि पकड़ी गई नकली दवाओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से हो रही है। विभाग एक-एक कड़ी जोड़कर उन फर्मों पर नकेल कसने की तैयारी में है, जो नकली दवाओं के कारोबार में लिप्त हैं। ब्रजेश के अनुसार, नकली दवाओं की खेप कूरियर के जरिये लखनऊ पहुंच रही है जिसे आसपास के जिलों में खपाया जा रहा है।

ज्यादा प्रचलित दवाओं की करते हैं नकल

अब तक की जांच में सामने आया है कि नकली दवा के सौदागर उन दवाओं नकल ज्यादा करते हैं जो बेहद प्रचलित हैं। जिनका सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे दर्द, सूजन, सर्दी-जुकाम, बुखार के उपचार में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा एंटीबायोटिक, एंटीएलर्जिक और विटामिन सप्लीमेंट वाली नकली दवाएं भी खूब बनाई जाती हैं। बाजार में ऐसी दवाओं की मांग ज्यादा होती है तो इनकी बिक्री बेहद आसानी से हो जाती है।

जान भी ले सकती हैं नकली दवाएं

डॉक्टरों का कहना है नकली दवाओं में उपचार के लिए आवश्यक सक्रिय तत्व नहीं होते या उसकी मात्रा मानक से बेहद कम या ज्यादा होती है। इससे बीमारी नियंत्रित होने के बजाय बढ़ सकती है। एंटीबायोटिक के मामलों में दवा के प्रतिरोध का खतरा बढ़ जाता है, जबकि गंभीर मरीजों में नकली दवा जान भी ले सकती है।

गहन जांच करने की जरूरत

लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता मयंक रस्तोगी ने बताया कि नकली दवाओं के खिलाफ एफएसडीए की टीम अच्छा काम कर रही है। लखनऊ के मेडिसिन मार्केट में टीम ने 28 दुकानों का सर्वे किया था। जांच टीम में प्रदेश भर से बुलाए गए 17-18 ड्रग इंस्पेक्टर भी शामिल थे। किसी भी दुकान से नकली दवाएं बरामद नहीं हुईं। नकली दवाओं के मामले में काफी समय से आगरा का नाम आता रहा है। वहां पर गहन जांच करने की जरूरत है।

राजधानी में नकली दवाओं की बरामदगी के मामले

अगस्त 2023 : अमीनाबाद और बस स्टेशन क्षेत्र में पुलिस व ड्रग विभाग ने छापा मारकर दो करोड़ रुपये कीमत की 65 हजार से अधिक नकली गोलियां बरामद की थीं। रोडवेज बसों के जरिये इनकी सप्लाई दूसरे जिलों में की जा रही थी।

नवंबर-दिसंबर 2023 : अमीनाबाद स्थित वीडीएस फार्मा पर छापे में नामी कंपनियों की नकली दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाएं मिलीं। जांच के दौरान आगरा, चेन्नई और पुडुचेरी तक नेटवर्क फैला मिला।

जून 2025 : काकोरी में किराना स्टोर की आड़ में चल रही अवैध फैक्टरी से करीब 1.2 करोड़ रुपये की नकली ऑक्सीटोसिन दवाएं पकड़ी गईं।

31 अगस्त-1 सितंबर 2025 : पारा क्षेत्र में एसटीएफ और औषधि विभाग ने नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी। दो करोड़ का माल बरामद।

14 फरवरी 2026 : कोडिन कफ सिरप सिंडिकेट मामले में एसटीएफ ने गिरोह के एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया।