Saturday, July 25, 2026
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सावन 30 से, शिव मंदिरों में तैयारियां शुरू

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बिधूना। भगवान शिव की आराधना का पावन मास सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा।इसको लेकर क्षेत्र के शिवालयों में धार्मिक आयोजनों, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी तेज हो गई हैं। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
वनखंडेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी उमेश चंद्र शुक्ला ने बताया कि सावन में प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। वहीं, मऊ गुरा स्थित देवघट बाबा शिव मंदिर के महंत शरद विज्ञानानंद पुरी ने बताया कि अरिंद नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में सावन भर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा।

सहायल थाना प्रभारी निरीक्षक को अजीतमल की दी गई जिम्मेदारी

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औरैया। पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती ने बृहस्पतिवार को कोतवाल रमेश सिंह को कोतवाली से हटाकर सहायल थाने भेज दिया। रमेश सिंह को 10 जून को ही कोतवाली की जिम्मेदारी मिली थी। अब अजीतमल कोतवाली की जिम्मेदारी सहायल थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार को सौंपी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एसपी ने चोरियों पर लगाम न लगा पाने के कारण यह कार्रवाई की। दो दिन पहले ही कोतवाली पुलिस पर एक डंपर मालिक ने सीज वाहन छोड़ने के एवज में 20 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था। मामला बढ़ने पर डंपर को छोड़ दिया गया था। अजीतमल क्षेत्र में 17 जुलाई को अड्डा गोके गांव में चोरी हुई थी, और इससे पहले मौजमपुर में भी वारदातें हुई थीं। अपर पुलिस अधीक्षक आलोक मिश्रा ने इसे रूटीन तबादला बताया है। दोनों निरीक्षकों को जल्द तैनाती स्थल पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

लापरवाही के आरोप में मुख्य आरक्षी निलंबित

अजीतमत कोतवाली में तैनात मुख्य आरक्षी महेश गुप्ता को एसपी अभिषेक भारती ने बुधवार रात निलंबित कर दिया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई ड्यूटी के दौरान लापरवाही में की गई है। महेश करीब एक साल से अजीतमल कोतवाली में तैनात थे

बस स्टेशन जल्द चालू कराने का आश्वासन

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दिबियापुर। जिले के प्रभारी मंत्री राकेश राठौर अपने दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार शाम गेल के आशियाना गेस्ट हाउस पहुंचे। वहां कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।मंत्री ने दिबियापुर बस स्टेशन का निरीक्षण किया और आश्वासन दिया कि इसे जल्द शुरू कराने के लिए वह मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री के समक्ष बात रखेंगे।
इसके बाद उन्होंने नुमाइश मैदान में बन रहे बहुउद्देशीय हॉल और प्राचीन हनुमान मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य देखा। शनिवार को मंत्री कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक करेंगे और गोशालाओं का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान एसपी अभिषेक भारती, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सर्वेश कठेरिया और चेयरमैन राघव मिश्रा आदि रहे।

मेडिकल कॉलेज में अब 24 घंटे मिलेगी 117 जांचों की सुविधा

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औरैया। चिचौली मेडिकल कॉलेज में अब मरीजों को 24 घंटे 117 तरह की जांचों की सुविधा मिलेगी।इसके लिए शासन के निर्देश पर सेंट्रल लैब के साथ पीएम-अभीम योजना के तहत इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (आईपीएसएल) को एकीकृत कर दिया गया है। अभी तक ओपीडी के बाद इमरजेंसी व वार्ड के मरीजों को ही ये सुविधा मिल पा रही थी।
चिचौली मेडिकल कॉलेज में अभी तक महज पीपीपी मॉडल पर सेंट्रल लैब के जरिये स्वास्थ्य जांचों की सुविधा मरीजों को मिल रही थी। दोनों के एकीकृत हो जाने के बाद अब 117 तरह की जांचें मरीजों को 24 घंटे मिलने का रास्ता साफ हो गया है। प्राचार्य की ओर से जारी पत्र के अनुसार मेडिकल कॉलेज में बनी इस लैब को सेंट्रल लैब के साथ एकीकृत कर दिया गया है। अब इस संयुक्त लैब का संचालन 24 घंटे अनवरत रूप से किया जाएगा।इस व्यवस्था के लागू होने से मरीजों को निर्धारित सभी 117 प्रकार की आवश्यक पैथोलॉजिकल व चिकित्सीय जांचें निशुल्क व प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध होंगी। शासन के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व सेंट्रल लैब के नोडल अधिकारी को निर्देश भी दिए गए हैं।रात में होती थी जांच कराने की दिक्कत
बड़ी और गंभीर मामलों की जांचों को लेकर रात के समय मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ती थी। कभी कभार मरीजों को दिन तक का इंतजार करना पड़ता था लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत इन जांचों को रात में ही कराया जा सकेगा।

औरैया जिंक-जाइम और सल्फर खरीदो तभी मिलेगा खाद

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औरैया। सरकारी तंत्र यूरिया और डीएपी की बोरी के साथ जिंक, जाइम, सल्फर, रीजेंट समेत अन्य उत्पादों की टैगिंग पर रोक लगाने का दावा कर रही है।

वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। किसानों को प्राइवेट दुकानों पर खाद तभी दी जा रही है जब वो जिंक, जाइम, सल्फर के थैले साथ में खरीद रहे हैं। हालांकि खाद कारोबारी इसका हवाला दे रहे हैं कि उर्वरक कंपनियों ने इस रोक का तोड़ निकालते हुए डमी कंपनियों के नाम से सप्लाई दे रहे हैं।
क्षेत्र के निजी उर्वरक विक्रेताओं ने बताया कि कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूटरों के माध्यम से डीलरों पर अतिरिक्त उत्पाद लेने का दबाव बना रही हैं। इसके बाद डीलरों को यूरिया और डीएपी के साथ किसानों को जिंक, जाइम और अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर करना पड़ रहा है। इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है।

अटसू दो खंभे गिरने से 30 घरों की आपूर्ति ठप

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अटसू। विद्युत उपकेंद्र अटसू के गांव सांफर में बृहस्पतिवार रात तेज हवा व बारिश से बिजली के दो खंभे सड़क पर गिर गए।इससे करीब 30 घरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। खंभे सड़क पर गिरने से रास्ता भी अवरुद्ध हो गया। इससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि आपूर्ति बाधित होने से लोगों को उमस भरी गर्मी के साथ पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। पूरी रात और दिनभर बिजली नहीं आई। इससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से जल्द नए खंभे लगाकर आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है।

उधर, अवर अभियंता अमित कुमार ने बताया कि टूटे हुए खंभे हटाने और नए खंभे लगाने के लिए औरैया से हाइड्रा मशीन मंगाई गई है। हाइड्रा के पहुंचते ही मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। जल्द बिजली आपूर्ति सुचारु करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रेमानंद आश्रम में जलभराव से परेशानी

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औरैया। खानपुर कस्बे के समीप स्थित प्रेमानंद आश्रम मंदिर परिसर में फैली गंदगी और जलभराव की समस्या से नागरिक परेशान हैं।बारिश के मौसम में मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कीचड़ जमा होने के कारण लोगों का पैदल निकलना भी दूभर हो गया है। श्रद्धालुओं ने साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण कराने की मांग की है।
लोगों का आरोप है कि जलभराव और गंदगी के चलते आवारा मवेशियों व गोवंश का परिसर में जमावड़ा लगा रहता है। कीचड़ के कारण इलाके में तेज दुर्गंध फैल रही है। इससे सुबह-शाम मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। इसके अलावा मंदिर के सामने वाली सड़क पर स्ट्रीट लाइटें न होने के कारण रात में अंधेरा पसरा रहता है।इससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। पूर्व में भी कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से सफाई की गुहार लगाई गई लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
वर्ष 1952 में स्थापित प्रेमानंद आश्रम का यह प्राचीन मंदिर अब देखरेख के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच रहा है। लोगों के अनुसार पूर्व में सदर विधायक गुड़िया कठेरिया और नगर पालिका अध्यक्ष अनूप गुप्ता को भी इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है। उस समय जलभराव की जगह पर मिट्टी डलवाकर समतलीकरण का आश्वासन मिला था लेकिन यह दावा पूरी तरह हवा-हवाई साबित हुआ।

UP Weather: आज इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, यहां वज्रपात की चेतावनी जारी; जानिए मौसम का पूर्वानुमान

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मौसम के बदले मिजाज के बीच लखनऊ मंडल और आसपास के जिलों में 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने लखनऊ, रायबरेली और बाराबंकी समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही प्रदेश के कई अन्य हिस्सों के लिए भी मौसम खराब रहने की चेतावनी दी गई है। विभाग द्वारा जारी तात्कालिक पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के अनेक हिस्सों में हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर तेज बारिश, बिजली गिरने तथा तेज हवाएं चलने के आसार हैं।आसपास के इलाकों में मेघगर्जन, वज्रपात, अचानक तेज़ हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) और मध्यम से भारी वर्षा की प्रबल संभावना जताई गई है। पूर्वांचल और मध्य यूपी के जिलों जैसे प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, आंबेडकर नगर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, गोंडा और बहराइच में भी बारिश हो सकती है।

इसके अलावा बुंदेलखंड और मध्य-पश्चिमी क्षेत्र के जालौन, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, औरैया, इटावा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज, कन्नौज, हरदोई, फर्रुखाबाद और सीतापुर में भी प्रभाव देखने को मिलेगा। वहीं, रोहिलखंड और तराई क्षेत्र जैसे शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बदायूं व आसपास के इलाकों में मौसम बदला रहेगा, हालांकि यहां बारिश की तीव्रता कम रहने की संभावना है।

मौसम विभाग ने जारी किए सुरक्षा निर्देश..

बारिश और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास बिल्कुल खड़े न हों। तेज हवाओं से सावधान रहे। 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण कच्चे मकानों, होर्डिंग्स और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। सतर्क रहें और सुरक्षित इमारतों में जाएं।

 

मजबूरी ऐसी की पति ने ही Directors संग सोने के लिए बनाया दवाब… Aamir Khan के सौतेले भाई Haider की एक्स वाइफ ईवा ने लगाए गंभीर आरोप

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Eva Grover : हाल ही में अभिनेत्री ईवा ग्रोवर ने अपने पूर्व पति और अभिनेता आमिर खान के सौतेले भाई हैदर अली खान को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि हैदर इन दिनों आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, चाल में रह रहे हैं और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। अब ईवा ने एक और सनसनीखेज आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शादी के दौरान हैदर अली खान उन पर फिल्म इंडस्ट्री में काम दिलाने के नाम पर निर्देशकों के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालते थे। ये आरोप ईवा ग्रोवर की ओर से लगाए गए हैं।

मुझ पर बहुत दबाव डाला गया 

45 वर्षीय अभिनेत्री ईवा ग्रोवर जो रेडी और करिश्मा का करिश्मा जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुकी हैं ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने पूर्व पति हैदर अली खान को लेकर गंभीर आरोप लगाए। सिद्धार्थ कन्नन से बातचीत में जब उनसे पूछा गया की क्या उनके पूर्व पति ने कभी उन्हें दूसरे लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दवाब डाला था तो ईवा ने दावा किया की ऐसा हुआ था। उनके मुताबिक, उन पर इस तरह का दवाब बनाया गया और इस संबंध में उनसे ऐसी बातें कही गई थीं।

डायरेक्टर्स के साथ सोने के लिए बनाया दवाब 
इंटरव्यू के दौरान ईवा ग्रोवर से यह भी पूछा गया कि क्या उन्हें कभी फिल्म इंडस्ट्री में काम दिलाने के लिए निर्देशकों या निर्माताओं के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दवाब बनाया गया था। इस पर ईवा ने दावा किया कि उन्हें अपने करियर में कभी काम की कमी नहीं रही।

मुख्यमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के विजन को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी हर निकाय के अधिकारी की है-केके गुप्ता

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जयपुर/ उदयपुर/ डूंगरपुर। प्रदेश में अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। प्रदेश के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता ने सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के अधिशाषी अधिकारियों को पत्र जारी कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए और हर माह की प्रगति रिपोर्ट राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार तथा केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक भेजी जाए। 21 जुलाई 2026 को जारी इस पत्र में के.के. गुप्ता ने कहा है कि पृथ्वी और प्राकृतिक संसाधन सभी की साझा धरोहर हैं तथा उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक और प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से सभी जिलों में 18 बिंदुओं का एक्शन प्लान लागू किया गया है, जिसमें घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर पुराने डंपिंग यार्ड खत्म करने, प्लास्टिक पर रोक और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तक के निर्देश शामिल हैं।

कचरा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी:- 
शहरों में बेतरतीब फैले कचरे, पुराने डंपिंग यार्ड और प्लास्टिक प्रदूषण पर अब सख्ती शुरू होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों, नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जिले में आरएसपीसीबी अधिकारियों के साथ विशेष निगरानी प्रकोष्ठ बनाया जाएगा, जबकि जिला कलेक्टर स्वयं इसकी मासिक समीक्षा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेंगे। राज्य सरकार यह रिपोर्ट हर महीने सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी। जिला कलेक्टरों की समीक्षा बैठक के लिए जारी 18 बिंदुओं के एजेंडे में स्पष्ट किया गया है कि अब कचरा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। नगर निकायों को घर-घर से 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण, चार श्रेणियों में कचरे का पृथक्करण, अधिकृत वाहनों से ढके हुए परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू करनी होगी। इसके साथ ही हर माह प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेजना भी अनिवार्य किया गया है।

कचरा निस्तारण नहीं किया तो कटेगी बिजली-पानी:-
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) के लिए सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। जिन संस्थानों में प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा निकलता है, 20 हजार वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र है, 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत होती है या 300 से अधिक लोग रहते हैं, उन्हें अपने परिसर में ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण करना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ पहले नोटिस जारी किया जाएगा। निर्धारित समय में व्यवस्था नहीं करने पर पानी और बिजली का कनेक्शन काटने सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इन प्रावधानों का उद्देश्य बड़े संस्थानों को अपने स्तर पर कचरा प्रबंधन के लिए जवाबदेह बनाना और खुले में कचरा फेंकने व प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाना है।

जवाबदेही होंगी होंगी तय  : –
जिला स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) की मजबूत निगरानी व्यवस्था विकसित करने, सभी यूएलबी से फॉर्म-4 की समय पर रिपोर्टिंग, 100 प्रतिशत कचरा उत्पादकों की मैपिंग तथा चार-स्ट्रीम (गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी) कचरा पृथक्करण को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है। निर्देशों के अनुसार अब किसी भी पुराने डंपिंग स्थल पर नया कचरा डालने की अनुमति नहीं होगी। सभी नगर निकायों को पुराने डंपिंग यार्ड का वैज्ञानिक रीमेडिएशन कर उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करनी होगी। साथ ही आकस्मिक निरीक्षण कर फोटो सहित दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर सीधे जवाबदेही तय की जा सके।

खाली भूखंडों की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित मालिक की रहेगी-
शहर में पड़े खाली प्लटो में पड़ी गंदगी के लिए प्लॉट मालिक स्वयं जिम्मेदार होंगे उन्हें अपने प्लॉटों की बाउंड्री वॉल बनाकर स्थान को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी उनकी स्वयं की होगी निकाय स्वच्छ नहीं रखने पर तथा समय अनुसार निर्माण नहीं करने पर करेगी सख्त कार्रवाई

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर सरकार का विशेष फोकस:- 
सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रत्येक जिले में रिड्यूस-रीयूज-रीसायकल (RRR) सेंटर स्थापित किए जाएंगे और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण इकाइयां विकसित की जाएंगी। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संयुक्त ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना तैयार करने पर भी जोर रहेगा। पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी, ताकि स्वच्छता बनाए रखने के साथ प्रदूषण कम हो और कचरे का अधिकतम पुन: उपयोग एवं पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जा सके।

अवैध कचरा डंपिंग पर जीरो टॉलरेंस, नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई :- 
सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर अवैध कचरा डंपिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। एजेंडे के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक (SUP) पर प्रभावी प्रतिबंध लागू कराया जाएगा तथा एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) के तहत संबंधित संस्थानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। सड़कों, झीलों, नदी किनारों, पहाड़ियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने या डंपिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। नगर निकायों को जनभागीदारी बढ़ाने, व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कचरा संग्रहण और परिवहन केवल अधिकृत एजेंसियों तथा पंजीकृत वाहनों के माध्यम से ही किया जाएगा। बिना ढके वाहनों से कचरा ढोने या खुले में कचरा डंप करने वाले निकायों और संबंधित एजेंसियों पर भी नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी निकाय के हर अधिकारी की है-
स्वच्छता न केवल इंसान को स्वस्थ रखती है अपीतू लंबी उम्र भी देती है स्वच्छता हर व्यक्ति तथा देवी देवताओं का भी प्रिय है देश की अर्थव्यवस्था में इसका बहुत बड़ा योगदान है देश को विकसित एवं समृद्ध बनाना है तो स्वच्छ बनाना होगा निकायों के समस्त अधिकारी अगर इसे गंभीरता से लें तो राजस्थान स्वच्छ एवं समृद्ध बन सकता है l

हर माह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगी जिले की रिपोर्ट, जवाबदेह होंगे अधिकारी:- 
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल सफाई व्यवस्था का विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रशासनिक जवाबदेही से सीधे जोड़ा गया है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी जिले में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का प्रभावी पालन नहीं होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की मानी जाएगी। प्रत्येक जिले के जिला कलेक्टर को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रगति, नियमों के अनुपालन, कचरा निस्तारण व्यवस्था और सुधारात्मक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट हर माह राज्य सरकार को भेजनी होगी। राज्य सरकार इन रिपोर्टों का संकलन कर नियमित रूप से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इससे पूरे राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सतत निगरानी होगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाना है।