Monday, August 3, 2026
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यूपी: मायावती ने बढ़ाया आकाश आनंद का कद, सौंपी प्रदेश में टिकट चयन की जिम्मेदारी; होंगे कार्यकर्ता सम्मेलन

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BSP preparations in UP: लंबे समय तक नाराज रहने के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद का कद एक बार फिर बढ़ा दिया है। अब वह चुनावों में सीधे जुड़ेंगे। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद अब प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका निभाएंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें प्रत्याशियों के चयन की जिम्मेदारी सौंपी है। आकाश की अगुवाई में कार्यकर्ता सम्मेलन भी होंगे, जिसमें वह प्रत्याशी के नाम पर मुहर लगाएंगे। इसकी शुरुआत 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद से होगी। वहीं 25 अगस्त को नोएडा के जेवर में आयोजित सम्मेलन आकाश की अध्यक्षता में होगा।
बता दें कि आकाश ने बीते सप्ताह अपने तीन दिवसीय राजधानी प्रवास पर आने के बाद बसपा सुप्रीमो से यूपी चुनाव को लेकर गहन मंथन किया था। उनके साथ पार्टी उपाध्यक्ष आनंद कुमार भी आए थे। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक आकाश के यूपी में प्रचार की शुरुआत करने से उनका कद बढ़ेगा। अभी तक आकाश को यूपी और उत्तराखंड की राजनीति से दूर रखा जा रहा था। इस फैसले से पार्टी आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद के सामने एक युवा चेहरे को बतौर चुनौती पेश कर सकेगी।

 

यूपी: मायावती ने बढ़ाया आकाश आनंद का कद, सौंपी प्रदेश में टिकट चयन की जिम्मेदारी; होंगे कार्यकर्ता सम्मेलन

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विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद अब प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका निभाएंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें प्रत्याशियों के चयन की जिम्मेदारी सौंपी है। आकाश की अगुवाई में कार्यकर्ता सम्मेलन भी होंगे, जिसमें वह प्रत्याशी के नाम पर मुहर लगाएंगे। इसकी शुरुआत 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद से होगी। वहीं 25 अगस्त को नोएडा के जेवर में आयोजित सम्मेलन आकाश की अध्यक्षता में होगा।

बता दें कि आकाश ने बीते सप्ताह अपने तीन दिवसीय राजधानी प्रवास पर आने के बाद बसपा सुप्रीमो से यूपी चुनाव को लेकर गहन मंथन किया था। उनके साथ पार्टी उपाध्यक्ष आनंद कुमार भी आए थे। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक आकाश के यूपी में प्रचार की शुरुआत करने से उनका कद बढ़ेगा। अभी तक आकाश को यूपी और उत्तराखंड की राजनीति से दूर रखा जा रहा था। इस फैसले से पार्टी आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद के सामने एक युवा चेहरे को बतौर चुनौती पेश कर सकेगी। 

यूपी: आज से लेकर तीन अगस्त तक प्रदेश से दूर रहेगी बारिश, सिर्फ इन जिलों में बरसात का पूर्वानुमान; बढ़ेगी उमस

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Weather in UP: यूपी में मानसून एक बार फिर से कुछ दिनों के लिए ठहरने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और उमस बढ़ सकती है। बारिश  न होने से अवध और पूर्वांचल सहित कई जिलों में गर्मी और तपिश बढ़ेगी। मौसम विभाग के अनुसार यहां दिन के साथ रात का तापमान भी बढ़ सकता है। गर्मी के साथ इन इलाकों में उमस का असर भी बढ़ेगा।
बुधवार को कानपुर में सबसे अधिक 81 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद मेरठ में 80.8 मिमी, बिजनौर में 72 मिमी और मुजफ्फरनगर में 68.3 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मानसून ट्रफ अभी सामान्य स्थिति में है। हालांकि, तीन-चार अगस्त के आसपास इसके फिर उत्तर की ओर खिसकने की संभावना है। इससे प्रदेश में एक बार फिर व्यापक और अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।राजधानी में अगले कुछ दिन मानसून की रफ्तार धीमी रहने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, तीन अगस्त तक लखनऊ में अच्छी बारिश की संभावना कम है। इस दौरान उमस और गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।बुधवार को सुबह दिन चढ़ने के साथ धूप निकल आई। इससे उमस बढ़ गई और लोगों को गर्मी का अहसास हुआ। हालांकि अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव दर्ज नहीं किया गया।

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार से अगले दो दिन तक 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पुरवाई चलने का अनुमान है। इससे तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि तीन अगस्त के आसपास मानसूनी गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। इसके बाद राजधानी में अच्छी बारिश का दौर लौटने की उम्मीद है। बुधवार को अधिकतम तापमान लगभग स्थिर रहते हुए 34.7 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री बढ़कर 28.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

Health Alert: आपके पैरों में दिख रहे हैं ये 7 लक्षण, हो जाएं अलर्ट, हो सकते हैं इस गंभीर बीमरी के संकेत; तुरंत भागे डॉक्टर के पास

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Health Alert: कई बार हम अपने पैर में दिखने वाले कुछ संकेतों को नंजरअंदाज कर देते हैं। हम अक्यर पूरे शरीर के अंगों की देखभाल तो कर लेते हैं तो लेकिन कहीं न कहीं पैरों में दिखने वाले बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो पैरों की त्वचा, रंग, तापमान और नाखूनों में दिखने वाले बदलाव शरीर के भीतर पनप रही गंभीर बीमारियों का शुरुआती इशारा हो सकते हैं। अगर आप समय पर इन्हें पहचान लेते हैं तो आप किसी गंभीर बीमारी को बढ़ावा देने से रोक सकते हैं। आइए जानते हैं कि कौन से ऐसे 7 लक्षण हैं, जिन्हें आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 सामान्य मौसम में भी पैरों का ठंडा रहना

अगर गर्मी के मौसम  में भी आपके पैर ठंडे रहते हैं तो इसके पीछे का कारण ब्लड सर्कुलेशन का स्लो फ्लो हो सकता है। इसके अलावा थायरॉइड की गड़बड़ी, मधुमेह (डायबिटीज) या धमनियों (Arteries) में रुकावट के कारण भी यह समस्या होती है।

नाखूनों का रंग और बनावट बदलना

अगर आपके पैरों के नाखूनों का रंग पीला, काला या सफेद हो रहा है तो यह फंगल इंफ्केश्न का लक्षण हो सकता है। नाखूनों का अचानक रंग बदलना अंदरूनी बीमारी का साफ संकेत है।

3. झुनझुनी, चींटियाँ काटना या सुन्नपन

अगर आपके पैर बार- बार सुन्न पड़ जाते हैं या फिर सुइय़ां चुभती सी महसूस होती हैं तो यह आपकी नसों की कमजोरी को दिखाता है। आमतौर पर यह विटामिन B12 की भारी कमी, अनियंत्रित डायबिटीज या रीढ़ की हड्डी की नस दबने के कारण होता है।

 पैरों में लगातार सूजन बने रहना

यदि आपने कोई लंबी यात्रा नहीं की है और न ही घंटों खड़े रहे हैं, फिर भी आपके पैरों में बार-बार सूजन आ रही है, तो यह शरीर में पानी जमा होने का परिणाम हो सकता है। यह लक्षण सीधे तौर पर आपके गुर्दे (किडनी), यकृत (लिवर) या हृदय (हार्ट) की कार्यप्रणाली में आ रही रुकावट की ओर इशारा करता है। अगर सूजन के साथ सांस लेने में तकलीफ हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

5. पैरों के घाव या छालों का जल्दी न भरना

अगर आपके पैरों के घाव या छाले जल्दी नहीं भर रहे तो यह डायबिटीज (हाई ब्लड शुगर) का बहुत बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है। शुगर के मरीजों में ब्लड सर्कुलेशन धीमा होने के कारण घाव देर से भरते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

6. एड़ियों में गहरी और दर्दनाक दरारें

सर्दी के मौसम में अक्सर लोग पैरों के फटने की समस्या देखते हैं, लेकिन अगर आपकी पैरों की दरारें इतनी गहरी हों कि उनमें खून निकलने लगे या फिर चलने में दिक्कत हो तो यह शरीर में पोषक तत्वों की कमीं, डिहाइड्रेशन, थायरॉइड या गंभीर त्वचा संक्रमण का संकेत हो सकता है।

पैरों की त्वचा के रंग में बदलाव

यदि आपके पैरों का रंग अचानक बदल रहा है तो यह नसों के खराब स्वास्थ्य या हृदय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है। यह बताता है कि पैरों तक पर्याप्त मात्रा में शुद्ध रक्त नहीं पहुँच पा रहा है। पैरों में दिखने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को ‘मामूली’ मानकर टालें नहीं। समय पर ली गई डॉक्टरी सलाह आपको किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी से बचा सकती है।

न जिम-न डायटिंग फिर भी फिट रहते इस देश के लोग, भारतीय महिला ने बताया इसका सीक्रेट

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International Desk: आज के समय में फिट रहने के लिए लोग महंगे जिम, प्रोटीन सप्लीमेंट्स, डाइट प्लान और पर्सनल ट्रेनर पर हजारों-लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। लेकिन जापान में रहने वाली एक भारतीय महिला का वायरल वीडियो इस सोच को चुनौती देता है। वीडियो में उन्होंने बताया कि जापान के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग बिना जिम और महंगे फिटनेस प्लान के भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीते हैं।

 

शाम होते ही दिनचर्या खत्म 
महिला के मुताबिक, वीडियो शाम करीब 7 बजे का है, लेकिन पूरे गांव में सन्नाटा था। अधिकांश लोग अपने घरों में जा चुके थे। जापान के गांवों में लोग देर रात तक जागने की बजाय समय पर भोजन कर जल्दी सो जाते हैं। सुबह सूरज निकलते ही उनका दिन शुरू हो जाता है। यही नियमित दिनचर्या उनकी अच्छी सेहत की बड़ी वजह मानी जाती है।

रोजमर्रा का काम बन जाता एक्सरसाइज
महिला बताती हैं कि गांवों में रहने वाले लोग खेती, बागवानी, मछली पालन और अन्य शारीरिक काम करते हैं। पूरे दिन सक्रिय रहने के कारण उन्हें अलग से जिम जाने की जरूरत महसूस नहीं होती। उनकी दैनिक गतिविधियां ही शरीर को फिट रखने का काम करती हैं। जापान के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पर्याप्त और अच्छी नींद लेते हैं। इससे तनाव कम होता है, शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। यही वजह है कि वहां कई बुजुर्ग 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र में भी सक्रिय जीवन जीते हैं और अपने अधिकांश काम स्वयं करते हैं।

 

सादा लेकिन पौष्टिक भोजन
महिला के अनुसार, गांवों में लोग ताजा और घर का बना भोजन पसंद करते हैं। उनके भोजन में मौसमी सब्जियां, मछली, चावल, सूप और पारंपरिक जापानी व्यंजन शामिल होते हैं। वे संतुलित मात्रा में भोजन करते हैं और जंक फूड या अधिक तला-भुना खाना खाने से बचते हैं। जहां आज कई लोग देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन पर समय बिताते हैं, वहीं जापान के गांवों में लोग शाम के बाद परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं। शांत वातावरण और तनावमुक्त जीवन उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सोना, सुबह जल्दी उठना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित भोजन लेना और तनाव को कम रखना अच्छी सेहत की मजबूत नींव है। जापान के ग्रामीण इलाकों में लोग इन आदतों को वर्षों से अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए हुए हैं।

 

BP की नकली दवा की एक और खेप ओखला से बरामद, उत्तराखंड से हरियाणा-दिल्ली तक फैला है नेटवर्क

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नेशनल डेस्क: दिल्ली एवं गुरुग्राम एफडीए की टीम ने दिल्ली के ओखला स्थित एक परिसर में छापेमारी कर बीपी दवा ‘टेल्मा-एएम’ (Telma-AM) की 560 नकली स्ट्रिप बरामद की हैं। इसके साथ ही बिना किसी वैध इग लाइसेंस के रखी गईं 323 प्रकार की एलोपैथिक दवाओं को भी जब्त किया गया है।

गुरुग्राम से जुड़ा था नेटवर्क 

बता दें कि तीन दिन पहले हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने गुरुग्राम और दिल्ली पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में ब्लड प्रेशर की नकली दवाइयों की आपूर्ति करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी सुब्रत द्विवेदी और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी जुबैर के रूप में हुई है। इसके बाद जांच में यह बात सामने आई कि ओखला स्थित यह परिसर बिना लाइसेंस के थोक विक्रेता (Wholesaler) के रूप में चलाया जा रहा था। यहीं से नकली टेल्मा-एएम टैबलेट्स की सप्लाई गुरुग्राम के विभिन्न मेडिकल स्टोरों में की जा रही थी।

दरअसल, 19 जुलाई की कार्रवाई से पहले एफडीए को सूचना मिली थी कि गुरुग्राम में ‘श्री बालाजी फोरम’ नाम से संचालित एक थोक दवा एजेंसी के जरिए नकली दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है। संबंधित एजेंसी के पास दवाओं का कारोबार करने के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस नहीं था। इससे बाद टीम ने छापेमारी कर नकली टेल्मा-एएम के 178 पत्ते बरामद किए थे।

उत्तराखंड में हो रहा दवाइयों का निर्माण 

एफडीए अधिकारियों के अनुसार, नकली दवाओं की बिक्री की सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तीन अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई और मामले की जांच शुरू की गई। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली दवाइयों का निर्माण उत्तराखंड के रुड़की में किया जाता था और इसके बाद इन्हें लखनऊ के रास्ते हरियाणा, दिल्ली और अन्य इलाकों में पहुंचाया जाता था।

ज्यादा खुशी भी पड़ सकती है दिल पर भारी! सामने आया ‘हैप्पी हार्ट सिंड्रोम’ का खतरा, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

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नेशनल डेस्क : ऑक्सफोर्ड मेडिकल केस रिपोर्ट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन ने दिल की सेहत को लेकर एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा है। आमतौर पर तनाव, दुख या सदमे को हृदय संबंधी समस्याओं का कारण माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक खुशी भी कुछ लोगों में दिल पर गंभीर असर डाल सकती है। इस दुर्लभ स्थिति को ‘हैप्पी हार्ट सिंड्रोम’ या चिकित्सकीय भाषा में टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी (Takotsubo Cardiomyopathy) कहा जाता है।

क्या है हैप्पी हार्ट सिंड्रोम?
विशेषज्ञों के अनुसार जब कोई व्यक्ति बेहद खुशी या गहरे भावनात्मक झटके का अनुभव करता है, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कैटेकोलामाइन) का स्तर अचानक बढ़ जाता है। हार्मोन का यह तेज़ उछाल दिल की मांसपेशियों को कुछ समय के लिए कमजोर कर सकता है, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है।

अगर यही स्थिति किसी दुखद घटना, शोक या सदमे के कारण होती है तो इसे ‘ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम’ कहा जाता है, जबकि शादी, जन्मदिन, किसी बड़ी उपलब्धि या लंबे समय बाद प्रियजनों से मिलने जैसी अत्यधिक खुशी की वजह से होने पर इसे ‘हैप्पी हार्ट सिंड्रोम’ कहा जाता है।

हार्ट अटैक जैसे दिखते हैं इसके लक्षण
इस सिंड्रोम के लक्षण अक्सर हार्ट अटैक से मिलते-जुलते होते हैं। मरीज को अचानक सीने में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ और घबराहट महसूस हो सकती है। हालांकि जांच के दौरान कई मामलों में दिल की धमनियों में कोई रुकावट नहीं मिलती, लेकिन दिल की मांसपेशियों के काम करने के तरीके में अस्थायी बदलाव दिखाई देता है।

समय पर इलाज से पूरी तरह हो सकती है रिकवरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर पहचान और उपचार मिलने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। अध्ययन में शामिल मरीजों की भी इलाज के बाद सामान्य स्थिति में वापसी हुई। विशेषज्ञों के अनुसार इस सिंड्रोम के लक्षण ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम की तुलना में अपेक्षाकृत हल्के हो सकते हैं।

एक केस जिसने डॉक्टरों को चौंकाया
रिपोर्ट के अनुसार 65 वर्षीय एक महिला को बेटी की शादी के कुछ दिन बाद अचानक सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी हुई। शुरुआत में इसे हार्ट अटैक समझा गया, लेकिन जांच में दिल की धमनियां सामान्य मिलीं। हालांकि, दिल का बायां हिस्सा अस्थायी रूप से प्रभावित पाया गया, जिसके कारण रक्त पंप करने में दिक्कत हो रही थी। समय पर इलाज मिलने से महिला पूरी तरह स्वस्थ हो गई।

कैसे रखें दिल का ख्याल?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि सीने में दर्द, सांस फूलना या अचानक बेचैनी महसूस हो तो इसे हल्के में न लें और तुरंत ईसीजी सहित आवश्यक जांच कराएं। भावनात्मक उतार-चढ़ाव के दौरान खुद को शांत रखने की कोशिश करें। नियमित योग, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच दिल को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राज्यसभा में पास हुआ ‘वंदे मातरम’ से जुड़ा बिल, अपमान करने पर हो सकती है इतने साल की जेल

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Vande Mataram Bill: राज्यसभा ने बुधवार को ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित किया। इस विधेयक का मकसद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का जानबूझकर अपमान करने को राष्ट्रीय गान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े मौजूदा प्रावधानों के समान ही दंडनीय अपराध बनाना है। यह विधेयक तीखी बहस के बाद पारित किया गया।

जानें इसमें क्या है प्रावधान
इस कानून का मकसद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह ‘वंदे मातरम’ को भी कानूनी सुरक्षा देना है। कानून लागू होने के बाद अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम् का अपमान करता है या गीत में बाधा डालता है तो उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा देने का प्रावधान है। चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया और बाद में विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट किया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के जवाब देने से पहले दोनों पक्षों के कई सदस्यों ने इस कानून पर अपनी बात रखी। CPI(M) के जॉन ब्रिटास, कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और अन्य सदस्यों ने ‘पॉइंट ऑफ़ ऑर्डर’ (कार्यवाही के नियम से जुड़ा मुद्दा) उठाया, लेकिन उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने इसकी अनुमति नहीं दी क्योंकि “सदन में व्यवस्था नहीं थी” (हंगामा हो रहा था)।

नारेबाजी करते रहे विपक्ष के सदस्य
विपक्ष के सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग करते रहे। वे लगातार नारेबाजी करते रहे, जिससे सदस्यों की आवाज दब गई। AAP के संजय सिंह ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक उस पार्टी द्वारा पेश किया गया है जिसके मूल संगठन ने अपने मुख्यालय में कभी राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। अपने जवाब में राय ने कहा कि हर संशोधन केवल विधायी बदलाव नहीं होता, बल्कि यह देश की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति देश की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा के लिए 1971 में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ बनाया गया था। मौजूदा संशोधन का मकसद ‘वंदे मातरम’ को भी वही सुरक्षा प्रदान करना है। राय ने 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस गीत के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में इसे गाया था और सरला देवी चौधरानी ने 1905 में वाराणसी में इसका पूरा संस्करण प्रस्तुत किया था। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की कांग्रेस अध्यक्षता के दौरान 1937 में इस गीत को केवल दो छंदों तक सीमित करने के फैसले की आलोचना की, साथ ही 1938 में सुभाष चंद्र बोस द्वारा इसके पूर्ण संगीत संयोजन (म्यूजिकल अरेंजमेंट) को तैयार कराने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बयान का भी हुआ ज़िक्र 
राय ने सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर 1947 में स्वतंत्रता दिवस पर ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित पूरे गीत और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस बयान का भी ज़िक्र किया, जिसमें ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान को समान दर्जा दिया गया था। मंत्री ने कहा कि इस बिल का विरोध करना राष्ट्रीय नेताओं के विचारों को नज़रअंदाज़ करने और तुष्टीकरण के बराबर है। उन्होंने याद दिलाया कि चंद्रशेखर आज़ाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ान और खुदीराम बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने अंतिम क्षणों में ‘वंदे मातरम’ का नारा लगाया था। उन्होंने तर्क दिया कि गीत का विरोध करने से उन लोगों का मनोबल बढ़ता है जो भारत के टुकड़े करने के नारे लगाते हैं। राय ने इस बिल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विज़न से जोड़ा और कहा कि राष्ट्रीय एकता के लिए पूरा ‘वंदे मातरम’ गाना ज़रूरी है। उन्होंने इस कानून को राजनीति से ऊपर उठकर उठाया गया कदम बताया, जिसका मार्गदर्शन गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं और जो भारत के लोगों की भावनाओं को दर्शाता है। बहस और विपक्ष के वॉकआउट के बाद, बिल को उच्च सदन (राज्यसभा) ने पारित कर दिया।

फेमस एक्टर एवं पूर्व विधायक पर 68 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, शिकायत दर्ज

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Soham Chakraborty: बंगाली एक्टर और पूर्व तृणमूल कांग्रेस MLA सोहम चक्रवर्ती पर एक बिज़नेसमैन के साथ 68 लाख रुपए की धोखाधड़ी, जान से मारने की धमकी देने और विश्वासघात करने का आरोप है। हुगली जिले के आरामबाग के रहने वाले और ‘सोनम मूवीज़’ के मालिक शेख शाहिद इमाम ने बुधवार को दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज इलाके के चारू मार्केट पुलिस स्टेशन में एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।एक्टर के खिलाफ औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराने के बाद, शाहिद ने मीडिया के कुछ लोगों से कहा, “मैंने 2021 में फिल्म बनाने के लिए सोहम को पैसे दिए थे। उस समय फिल्म का नाम ‘माणिकजोर’ था। बाद में फिल्म का नाम बदलकर ‘पाका देखा’ कर दिया गया। वह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई और अच्छा बिजनेस किया। सोहम को भी पैसे मिले। फिर जब मैंने मुनाफे में अपना हिस्सा मांगा, तो वह टालते रहे कि ‘आज दे दूंगा’, ‘कल दे दूंगा’।” शाहिद ने आगे कहा, “एक दिन, सोहम के असिस्टेंट अर्घ्य चटर्जी कोलकाता के एक मॉल के बेसमेंट में मुझसे मिले। फिर, जब मैंने उन पैसों की मांग की, तो अर्घ्य ने मुझे जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने कहा, ‘अगर पैसे मांगोगे तो मुसीबत में पड़ जाओगे।’ उस समय सोहम MLA थे। मुझसे कहा गया कि अगर मैंने MLA पर दबाव डाला, तो मेरी हालत और खराब हो जाएगी। “बाद में, मैंने सीधे सोहम से भी बात की। तब उन्होंने साफ कह दिया कि वह पैसे नहीं दे सकते। ‘पाका देखा’ फिल्म के सैटेलाइट और अन्य अधिकार बेच दिए गए हैं। मुझे यकीन है कि सोहम को भी वे पैसे मिले हैं।” “मेरे पास इसका भी सबूत है।”

इस मामले में एक्टर और पूर्व MLA की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, सोहम चक्रवर्ती के खिलाफ ऐसी शिकायत पहली बार नहीं हुई है। इस साल जून में भी एक्टर के खिलाफ ऐसा ही एक आरोप सामने आया था। आरोप यह था कि शिकायतकर्ता कौशिक करमाकर ने सोहम की कंपनी ‘सोहम एंटरटेनमेंट’ में निवेश करने के लिए सोहम को 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा दिए थे। कहा गया था कि सोहम ‘लाल सूटकेस टा’ (Lal Suitcase ta) फिल्म में काम करेंगे और यह पैसा उसी के लिए दिया गया था। हालांकि, वह फिल्म नहीं बनी और सोहम ने उसमें काम भी नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने पैसे वापस मांगे, तो एक्टर ने MLA होने के नाते अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए उन्हें धमकाया।

 

दिल्ली पुलिस ने ‘X’ से मांगी कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई, यूजर की जानकारी और डेटा सुरक्षित रखने को कहा

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) को एक शिकायत के संबंध में पत्र लिखा। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म पर संवैधानिक प्रमुखों को निशाना बनाने वाला “अपमानजनक, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक कंटेंट” फैलाया जा रहा है।

पुलिस ने X से कहा है कि वह प्लेटफॉर्म से उस कथित पोस्ट/वीडियो को तुरंत हटा दे और उस X अकाउंट होल्डर की पूरी जानकारी दे जिसने यह कंटेंट पोस्ट किया था। इसमें उनका पूरा नाम, पता, संपर्क विवरण और ईमेल आईडी शामिल होनी चाहिए। पुलिस ने अकाउंट के लॉगिन और लॉगआउट विवरण के साथ-साथ संबंधित समय और तारीख की जानकारी भी मांगी है, और साथ ही कोई अन्य प्रासंगिक जानकारी भी मांगी है जो जांच में मदद कर सके।

 पुलिस ने प्लेटफॉर्म से की ये मांगें:

1. प्लेटफॉर्म से उस कथित पोस्ट/वीडियो को तुरंत डिलीट करें/हटाएं।

2. उस ‘X’ अकाउंट होल्डर की पूरी जानकारी दें जिसने वह सामग्री पोस्ट की है। इसमें पूरा नाम, पता, कॉन्टैक्ट डिटेल्स और ईमेल आईडी शामिल होनी चाहिए। साथ ही, लॉगिन और लॉगआउट की जानकारी भी दें, जिसमें समय और तारीख का स्टैम्प हो।

3. कोई भी अन्य संबंधित जानकारी जो इस मामले की जांच में काम आ सके।

4. कथित पोस्ट/वीडियो से जुड़ी जानकारी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाए।

5. BSA की धारा 63(4) के तहत सर्टिफिकेट।

प्लेटफॉर्म से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे भविष्य की जांच के लिए कथित पोस्ट/वीडियो से संबंधित विवरण सुरक्षित रखें और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63(4) के तहत एक प्रमाण पत्र प्रदान करें। इससे पहले, 27 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों वाले पोस्ट और वीडियो हटा दें। ये पोस्ट और वीडियो जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च से जुड़ी हिंसा के दौरान अपलोड किए गए थे।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद हुई हिंसा के दौरान विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले कई पोस्ट सामने आए। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ऐसे कंटेंट की पहचान करने के लिए लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की निगरानी कर रही है। आपत्तिजनक पोस्ट मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया मध्यस्थों (intermediaries) को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उन्हें कंटेंट हटाने का निर्देश दिया जा रहा है।

पुलिस ने कहा कि बल द्वारा जारी नोटिस के बाद प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा वाली कई भद्दी टिप्पणियां और वीडियो पहले ही हटा दिए गए हैं। निगरानी की प्रक्रिया जारी है, और साइबर तथा… सोशल मीडिया टीमें विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी नज़र रख रही हैं ताकि और भी आपत्तिजनक पोस्ट की पहचान की जा सके और नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की जा सके। यह घटनाक्रम 20 जुलाई को हुए ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर बढ़े राजनीतिक तनाव के बीच सामने आया है। इस मार्च के दौरान, NEET और CBSE परीक्षाओं में गड़बड़ियों का विरोध कर रहे छात्र जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ते समय सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गए थे।