रामलला के दर्शन का न्यू ईयर प्लान: भीड़ बढ़ी तो इस तरह करने होंगे दर्शन, पहले दिन इन वस्त्रों को पहनेंगे भगवान
नए वर्ष 2026 की शुरुआत बृहस्पतिवार से हो रही है। उससे पहले ही रामनगरी में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा है। रामलला के दरबार में रोजाना करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर रहे हैं। नए साल के पहले दिन पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। यदि राम मंदिर में भीड़ बढ़ी तो सात कतारों में श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे, सुरक्षा का खाका तैयार कर लिया गया है।नववर्ष के आगमन पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सहित समूची अयोध्या आस्था के उत्सव में डूबेगी। हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल सहित अन्य देवालयों में श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। राम मंदिर में यदि भीड़ अधिक होती है तो श्रद्धालुओं को सात कतारों में दर्शन कराए जाएंगे, ताकि दर्शन सुचारु और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके। अभी पांच कतारों में दर्शन हो रहे हैं। नए वर्ष के पहले दिन रामलला सोने के मुकुट और रत्न जड़ित पीत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। रामलला का अभिषेक-पूजन किया जाएगा और विशेष भोग भी अर्पित किया जाएगा।
रामलला के दर्शन का न्यू ईयर प्लान: भीड़ बढ़ी तो इस तरह करने होंगे दर्शन, पहले दिन इन वस्त्रों को पहनेंगे भगवान
नए वर्ष 2026 की शुरुआत बृहस्पतिवार से हो रही है। उससे पहले ही रामनगरी में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा है। रामलला के दरबार में रोजाना करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर रहे हैं। नए साल के पहले दिन पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। यदि राम मंदिर में भीड़ बढ़ी तो सात कतारों में श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे, सुरक्षा का खाका तैयार कर लिया गया है।नववर्ष के आगमन पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सहित समूची अयोध्या आस्था के उत्सव में डूबेगी। हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल सहित अन्य देवालयों में श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। राम मंदिर में यदि भीड़ अधिक होती है तो श्रद्धालुओं को सात कतारों में दर्शन कराए जाएंगे, ताकि दर्शन सुचारु और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके। अभी पांच कतारों में दर्शन हो रहे हैं। नए वर्ष के पहले दिन रामलला सोने के मुकुट और रत्न जड़ित पीत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। रामलला का अभिषेक-पूजन किया जाएगा और विशेष भोग भी अर्पित किया जाएगा।
न्यू ईयर जश्न नाजायज: मौलानाओं में छिड़ा विवाद; जानें नाच-गाना और पार्टी करने पर क्या कहता है इस्लाम?
राजधानी लखनऊ समेत प्रदेशभर में साल की विदाई और नए साल के आगमन पर जश्न की तैयारियां हैं। इसको लेकर पार्क, रेस्त्रां और पर्यटन स्थलों पर भी तैयारी पूरी है। उधर, मुसलमानों के नया साल मनाने पर कुछ विवाद सामने आया है। इस पर अलग-अलग मौलानाओं के अलग-अलग मत हैं। बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की ओर से नए साल के जश्न को नाजायज करार दिया गया।
इस पर मरकजी शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि इस्लाम ने न तो न्यू ईयर की पार्टी मनाने का हुक्म दिया है, और न ही इसे मना किया है। नए साल के जश्न को नाजायज ठहराना इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं से मेल नहीं खाता है। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि इस्लाम में फूहड़पन, फिजूलखर्ची और नाच-गाने से हमेशा मना किया गया है, लेकिन नए साल के स्वागत को किसी मजहबी एतराज की बुनियाद पर हराम या नाजायज कहना सही नहीं है। उन्होंने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि नए साल पर खर्च करना चाहते हैं तो गरीबों को कंबल व स्वेटर बांटें।
SIR : यूपी में फिर बढ़ी एसआईआर की समय सीमा, अब छह जनवरी को आएगी पहली कच्ची सूची; जानें अपडेट
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि 1 जनवरी, 2026 के आधार पर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषित तिथियों में संशोधन करते हुए नई तिथियां जारी कर दी गई है। संशोधित तिथियों के अनुसार, अब मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 6 जनवरी, 2026 को किया जाएगा। दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी, 2026 तक निर्धारित की गई है। 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण, गणना प्रपत्रों पर निर्णय और दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 6 मार्च, 2026 को किया जाएगा।
करोड़पति क्यों छोड़ रहे भारत? टैक्स और प्रदूषण तो बहाना है, सरकार ने बताई असली वजह
नेशनल डेस्क : भारत से अमीर और करोड़पति लोगों के विदेश जाने को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने एक अहम पहलू की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि करोड़पतियों के देश छोड़ने की वजह केवल बेहतर जीवन-स्तर, कम टैक्स या प्रदूषण नहीं है, बल्कि भारत के बिजनेस सेक्टर में बदलाव और प्रतिस्पर्धा की कमी भी एक बड़ा कारण है।
आर्थिक सलाहकार और इतिहासकार संजीव सान्याल ने यह बात एक पॉडकास्ट के दौरान कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के व्यावसायिक एलिट वर्ग (Business Elite) में लंबे समय से जरूरी बदलाव नहीं हो पाए हैं, जिसका असर देश की आर्थिक गतिशीलता पर पड़ रहा है।
भारतीय करोड़पति क्यों बस रहे विदेश में?
संजीव सान्याल के मुताबिक, भारत में बड़े उद्योगों और कारोबारी घरानों पर लंबे समय से वही लोग हावी हैं। नए उद्योगों और नए उद्यमियों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। जब किसी देश के बिजनेस सेक्टर में नए चेहरे, नई सोच और नई प्रतिस्पर्धा नहीं आती, तो इनोवेशन कमजोर हो जाता है। ऐसे माहौल में कई अमीर लोग अपने कारोबार और निवेश को विदेशों में स्थानांतरित करना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
उन्होंने कहा कि कई पुराने कारोबारी जोखिम लेने से बचते हैं और बदलाव लाने की बजाय अपने मौजूदा फायदे बचाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही कारण है कि वे दुबई जैसे देशों में अपने फैमिली ऑफिस या निवेश केंद्र स्थापित कर लेते हैं। सान्याल के अनुसार, यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य देशों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिलती है।
रिसर्च और तकनीक में निवेश की कमी
संजीव सान्याल ने यह भी कहा कि भारत के बड़े उद्योगों को रिसर्च और नई तकनीकों में कहीं ज्यादा निवेश करने की जरूरत है। हालांकि, मौजूदा समय में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियां कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत तो खर्च करती हैं, लेकिन असली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, तकनीक विकसित करने और रिसर्च पर निवेश अपेक्षाकृत कम होता है। इसका नतीजा यह होता है कि लंबे समय में देश की आर्थिक ताकत कमजोर पड़ने लगती है।
युवा उद्यमी जोखिम लेने को तैयार
संज़ीव सान्याल ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की तारीफ करते हुए कहा कि युवा उद्यमी, खासतौर पर बेंगलुरु जैसे शहरों में, जोखिम लेने से नहीं डरते। इसी वजह से स्टार्टअप सेक्टर में तेजी से नए आइडिया और नई कंपनियां सामने आ रही हैं। उनका मानना है कि यही सोच और साहस बड़े उद्योगों में भी आना चाहिए, तभी अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी मजबूत और स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए यह जरूरी है कि असफलता को भी स्वीकार किया जाए। अगर कोई बड़ी कंपनी काम नहीं कर पा रही है, तो उसे बंद होने देना चाहिए, ताकि नई कंपनियों को आगे आने का मौका मिल सके। सान्याल ने जेट एयरवेज और बैंकिंग संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने और कमजोर सिस्टम के टूटने से ही नए अवसर पैदा होते हैं।
करोड़पतियों के पलायन के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं
संजीव सान्याल का मानना है कि अगर भारत को आगे बढ़ना है, तो बिजनेस सेक्टर में लगातार बदलाव, नई सोच और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना होगा। तभी देश में निवेश बढ़ेगा और करोड़पतियों का विदेश पलायन भी रुकेगा। गौरतलब है कि हेनले एंड पार्टनर्स की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3,500 करोड़पति भारत छोड़कर जा सकते हैं। इससे पहले 2023 में यह संख्या 5,100 और 2024 में 4,300 बताई गई थी, जो इस रुझान की गंभीरता को दर्शाता है।
करोड़पति क्यों छोड़ रहे भारत? टैक्स और प्रदूषण तो बहाना है, सरकार ने बताई असली वजह
नेशनल डेस्क : भारत से अमीर और करोड़पति लोगों के विदेश जाने को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने एक अहम पहलू की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि करोड़पतियों के देश छोड़ने की वजह केवल बेहतर जीवन-स्तर, कम टैक्स या प्रदूषण नहीं है, बल्कि भारत के बिजनेस सेक्टर में बदलाव और प्रतिस्पर्धा की कमी भी एक बड़ा कारण है।
आर्थिक सलाहकार और इतिहासकार संजीव सान्याल ने यह बात एक पॉडकास्ट के दौरान कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के व्यावसायिक एलिट वर्ग (Business Elite) में लंबे समय से जरूरी बदलाव नहीं हो पाए हैं, जिसका असर देश की आर्थिक गतिशीलता पर पड़ रहा है।
भारतीय करोड़पति क्यों बस रहे विदेश में?
संजीव सान्याल के मुताबिक, भारत में बड़े उद्योगों और कारोबारी घरानों पर लंबे समय से वही लोग हावी हैं। नए उद्योगों और नए उद्यमियों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। जब किसी देश के बिजनेस सेक्टर में नए चेहरे, नई सोच और नई प्रतिस्पर्धा नहीं आती, तो इनोवेशन कमजोर हो जाता है। ऐसे माहौल में कई अमीर लोग अपने कारोबार और निवेश को विदेशों में स्थानांतरित करना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
उन्होंने कहा कि कई पुराने कारोबारी जोखिम लेने से बचते हैं और बदलाव लाने की बजाय अपने मौजूदा फायदे बचाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही कारण है कि वे दुबई जैसे देशों में अपने फैमिली ऑफिस या निवेश केंद्र स्थापित कर लेते हैं। सान्याल के अनुसार, यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य देशों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिलती है।
रिसर्च और तकनीक में निवेश की कमी
संजीव सान्याल ने यह भी कहा कि भारत के बड़े उद्योगों को रिसर्च और नई तकनीकों में कहीं ज्यादा निवेश करने की जरूरत है। हालांकि, मौजूदा समय में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियां कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत तो खर्च करती हैं, लेकिन असली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, तकनीक विकसित करने और रिसर्च पर निवेश अपेक्षाकृत कम होता है। इसका नतीजा यह होता है कि लंबे समय में देश की आर्थिक ताकत कमजोर पड़ने लगती है।
युवा उद्यमी जोखिम लेने को तैयार
संज़ीव सान्याल ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की तारीफ करते हुए कहा कि युवा उद्यमी, खासतौर पर बेंगलुरु जैसे शहरों में, जोखिम लेने से नहीं डरते। इसी वजह से स्टार्टअप सेक्टर में तेजी से नए आइडिया और नई कंपनियां सामने आ रही हैं। उनका मानना है कि यही सोच और साहस बड़े उद्योगों में भी आना चाहिए, तभी अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी मजबूत और स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए यह जरूरी है कि असफलता को भी स्वीकार किया जाए। अगर कोई बड़ी कंपनी काम नहीं कर पा रही है, तो उसे बंद होने देना चाहिए, ताकि नई कंपनियों को आगे आने का मौका मिल सके। सान्याल ने जेट एयरवेज और बैंकिंग संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने और कमजोर सिस्टम के टूटने से ही नए अवसर पैदा होते हैं।
करोड़पतियों के पलायन के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं
संजीव सान्याल का मानना है कि अगर भारत को आगे बढ़ना है, तो बिजनेस सेक्टर में लगातार बदलाव, नई सोच और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना होगा। तभी देश में निवेश बढ़ेगा और करोड़पतियों का विदेश पलायन भी रुकेगा। गौरतलब है कि हेनले एंड पार्टनर्स की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3,500 करोड़पति भारत छोड़कर जा सकते हैं। इससे पहले 2023 में यह संख्या 5,100 और 2024 में 4,300 बताई गई थी, जो इस रुझान की गंभीरता को दर्शाता है।
Auraiya News: शिव मंदिर के रास्ते पर हो रहा निर्माण कार्य रोकने पर विवाद
एरवाकटरा। उमरैन कस्बे में प्राचीन शिव मंदिर के आम रास्ते पर निर्माण किए जाने का विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है। निर्माण कार्य को लेकर रविवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट गया।ग्रामीणों की काम कर रहे मजदूरों से झड़प हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। इस मामले में कस्बे के लोगों ने मंदिर के पास हो रहे निर्माण कार्य को अवैध बताते हुए मजदूरों को काम बंद करने को कहा। इससे विवाद की स्थिति बन गई। सूचना पर पहुंचे चौकी इंचार्ज किशनवीर सिंह ने निर्माण कार्य रोकने को कहा। इस पर निर्माण कार्य करा रहे व्यक्ति ने चौकी इंचार्ज से काम रुकवाने का लिखित आदेश मांगा।चौकी इंचार्ज ने विवाद की आशंका जताते हुए निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए। रोक के बावजूद हो रहे निर्माण कार्य के मामले में संजीव कुमार, सुभाष चंद्र, मधु, सनी कुमार, अलका, राहुल कुमार आदि ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।
इसमें प्राचीन शिव मंदिर व सरकारी कन्या पाठशाला विद्यालय को जाने वाले रास्ते पर निर्माण कार्य कर रास्ता बंद किए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की गई है। इधर, काम करा रहे व्यक्ति का कहना है कि विवाद का निपटारा हो चुका है। उपनिरीक्षक किशनवीर सिंह ने बताया कि विवाद की आशंका के चलते फिलहाल निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है।
Kanpur: जन्मदिन पार्टी में चली बेल्टें व डंडे, 13 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
आईफोन न मिलने पर 11वीं की छात्रा ने जहर खा लिया। परिजनों ने उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। गंभीर हालत होने पर उसे यहां से मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया। झांसी में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पिता का कहना है कि अगर वह जान जाता कि उसकी बेटी यह कदम उठा लेगी तो वह उसे किसी हालत में फोन दिला देता।डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव निवासी तुलसीराम राजपूत खेती और ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी माया (17) गांव के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 11वीं की छात्रा थी। बेटा मानवेंद्र भी पढ़ाई कर रहा है।परिजनों ने बताया कि कुछ समय पहले माया का मोबाइल फोन टूट गया था। इसके बाद वह नया मोबाइल दिलाने की जिद करने लगी। माया एक पुराना आईफोन मांग रही थी, जिसकी कीमत करीब 40 हजार रुपये बताई जा रही है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण तुलसीराम उसकी यह मांग पूरी नहीं कर सके। उन्होंने बेटी को समझाया था कि फिलहाल उनके पास इतने पैसे नहीं हैं और 15 दिन बाद हरी मटर की फसल बिकने पर वह उसे फोन दिला देंगे। इसके बाद भी माया जिद पर अड़ी रही।तुलसीराम ने बताया कि माया का स्वभाव कुछ जिद्दी था। इससे पहले उसने घड़ी की मांग की थी, जिसे पूरा कर दिया गया था। बाद में उसने सोने की झुमकी की मांग की लेकिन फिर झुमकी छोड़कर आईफोन की मांग पर अड़ गई। शुक्रवार को माया ने पिता से कहा था कि अगर दो दिन में आईफोन नहीं दिलाया गया तो उसका अंजाम बुरा होगा। उस समय पिता उसकी बात का अर्थ नहीं समझ सके।
रविवार को जब पिता ऑटो चलाने गए थे और मां बबली खेत पर मटर तोड़ने गई हुई थीं। उसी दौरान माया घर पर अकेली थी। इसी बीच उसने चूहा मारने की दवा खा ली। घर लौटने पर भाई मानवेंद्र को माया ने बताया कि उसने जहर खा लिया है। इसके बाद परिजन आनन-फानन उसे उरई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
रात में झांसी पहुंचने पर माया की मौत हो गई। तुलसीराम ने कहा कि वह गरीब किसान हैं, बंटाई पर जमीन लेकर खेती करते हैं और ऑटो चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। आईफोन के लिए पैसे न होने के कारण वह बेटी की मांग पूरी नहीं कर सके। उन्हें इस बात का गहरा पछतावा है कि वह बेटी की मन की स्थिति को समय रहते नहीं समझ पाए। डकोर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय पांडेय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। युवती ने किन परिस्थितियों में जहर खाया, परिजनों से इसकी पूछताछ की जा रही है।
बेटा सब्जी बेचकर दिलवा दूंगा, मोबाइल, कुछ दिन रुक जाओ
तुलसीराम ने बताया कि वह ऑटो चलाते हैं। घर में करीब 30 हजार रुपये रखे थे। इसकी जानकारी बेटी को थी। उसका मोबाइल टूट जाने पर वह लगातार फोन दिलवाने की बात कह रही थी। कुछ दिन पहले वह किसी का आईफोन देख आई थी। उसी को लेने की जिद कर रही थी। जब उसने कहा कि वह इतना महंगा फोन नहीं दिलवा पाएगा तो वह जान देने की धमकी देने लगी। बताया कि उसने कहा कि वह इन रुपयों से सब्जी बेचने का काम करेगा। फायदा होने पर उसे फोन दिलवा देगा। वह सब्जी लेने उरई आ गया और बेटी ने यह कदम उठा लिया। उसे पता होता कि वास्तव में वह गलत कदम उठा लेगी तो वह सब्जी का काम नहीं करता और बेटी को फोन दिलवा देता।

