Saturday, February 21, 2026
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गर्लफ्रेंड को करना चाहता था इम्प्रेस, पतला होने गया फिर हुआ कुछ ऐसा कि आशिक की… यूज़र्स बोले- ‘प्यार अगर इतना ही सच्चा…’

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नेशनल डेस्क। चीन से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां हेनान प्रांत के 36 वर्षीय ली जियांग नामक युवक की गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी (Gastric Bypass Surgery) के कुछ ही दिनों बाद मौत हो गई। ली जियांग ने अपनी प्रेमिका के माता-पिता को प्रभावित करने और शादी से पहले खुद को बेहतर और स्वस्थ दिखाने के लिए यह सर्जरी करवाई थी लेकिन उनकी यह कोशिश उनकी ज़िंदगी पर भारी पड़ गई।

मोटापे से थे परेशान, शादी के लिए उठाया जोखिम

रिपोर्ट के अनुसार ली जियांग का वज़न 134 किलोग्राम से अधिक था और उन्हें खाने पर नियंत्रण रखने में कठिनाई होती थी। डॉक्टरों ने उन्हें उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), फैटी लिवर (Fatty Liver) और मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी बताई थीं। ली हाल ही में एक गंभीर रिश्ते में आए थे और जल्द ही अपनी प्रेमिका के माता-पिता से मिलने वाले थे। वह चाहते थे कि उन्हें देखकर उनके घरवाले खुश हों। इसी वजह से उन्होंने तेज़ी से वजन घटाने के लिए यह बड़ी पेट की सर्जरी (बैरिएट्रिक सर्जरी) कराने का फैसला किया। 30 सितंबर को वह झेंगझौ के नौवें पीपुल्स अस्पताल में भर्ती हुए और 2 अक्टूबर को उनकी सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हो गई।

 

Mine Bridge Collapse: कांगो में खदान हादसा: पुल ढहने से कम से कम 50 लोगों की मौत, Video देख रूह कांप जाए

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नेशनल डेस्क:  दक्षिण-पूर्वी कांगो के लुआलाबा प्रांत में स्थित मुलोंडो शहर में सोमवार को एक भयानक हादसा हुआ। कलांडो माइन में कोबाल्ट खदान धंसने के कारण एक पुल टूट गया, जिससे मलबे में फंसे कम से कम 50 लोग मौके पर ही दम तोड़ बैठे। 20 से अधिक घायल लोगों को नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोशल मीडिया पर हादसे का भयावह वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मलबे के नीचे फंसे लोगों की चीखें सुनाई दे रही हैं।

हादसे की वजह: भारी बारिश और अवैध माइनिंग
लुआलाबा के गृह मंत्री रॉय कौम्बा ने बताया कि खदान बारिश और लैंडस्लाइड के कारण पहले से बंद थी। लेकिन मजदूरों ने सुरक्षा के आदेशों की अवहेलना करते हुए खदान में प्रवेश कर लिया। जब सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें बाहर निकालने के लिए फायरिंग की, तो भगदड़ मच गई और लोग पुल की ओर भागे। इसी दौरान खदान का हिस्सा और पुल भरभराकर गिरा, जिससे भारी मलबा लोगों के ऊपर गिर गया।

सोशल मीडिया पर भयावह दृश्य
वीडियो में देखा जा सकता है कि अचानक खदान का हिस्सा टूटता है और लोग भागने लगते हैं। मलबे और धूल के गुबार में कई लोग दम घुटने और दबने से मर गए। घटना के बाद मानवाधिकार आयोग ने सेना, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।

कोबाल्ट और कांगो की खनन चुनौतियां
कांगो दुनिया का सबसे बड़ा कोबाल्ट उत्पादक है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी उद्योग में होता है। लेकिन गरीबी और भ्रष्टाचार के चलते अवैध खनन आम है। बाल मजदूरी और सुरक्षा के कमजोर इंतजाम खदानों में बार-बार हादसों का कारण बनते हैं।

अंतरराष्ट्रीय चिंता
कोबाल्ट उत्पादन में चीन का प्रभाव और स्थानीय भ्रष्टाचार की वजह से खनन की परिस्थितियां अत्यंत खतरनाक मानी जाती हैं। इस हादसे ने न सिर्फ स्थानीय समुदाय को हिला दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सुरक्षा और मजदूरी मानकों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

MCX Gold Price Drop: डॉलर मजबूत होने से सोना फिर हुआ सस्ता, 10 Gram 24K Gold का जानें रेट

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नई दिल्ली: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने और चांदी के दामों में गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में सोने का भाव लाल निशान पर खुला। MCX पर सोने का वायदा 1,23,126 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करते हुए 435 रुपए की कमी के साथ नजर आया। डॉलर में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोर रुख के चलते सोने की मांग में कमी आई है। डॉलर इंडेक्स में 0.14 प्रतिशत की बढ़त ने अन्य मुद्राओं के लिए सोने को महंगा बना दिया, जिससे खरीदारों की रुचि घट गई और कीमतें नीचे आ गईं।

चांदी भी पीछे नहीं रही
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। MCX पर चांदी का भाव 1,55,170 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करते हुए 848 रुपये लुढ़क गया। यह गिरावट भी वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और निवेशकों की कम रुचि से जुड़ी बताई जा रही है।

वैश्विक बाजार में स्थिति
वैश्विक स्तर पर भी सोने की कीमतों में दबाव रहा। comex पर सोने की कीमत 4,083.60 डॉलर प्रति औंस पर आई, जो 0.26 प्रतिशत या 10.60 डॉलर की गिरावट दर्शाती है। gold spot में भी हल्की कमी देखी गई और यह 4,083.11 डॉलर प्रति औंस पर रहा।

इसके विपरीत, चांदी का वैश्विक भाव सोमवार को बढ़त के साथ नजर आया। comex पर सिल्वर 50.76 डॉलर प्रति औंस पर 0.07 डॉलर की बढ़त के साथ ट्रेड कर रही थी, जबकि सिल्वर स्पॉट 50.99 डॉलर प्रति औंस पर 0.41 डॉलर की बढ़त दिखा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से निवेशकों का रुख बदल सकता है। सोने और चांदी में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव आम हैं, इसलिए निवेशक बाजार की स्थितियों पर ध्यान देते हुए ही कदम उठाएं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा, 19 नवंबर को भंग होगी विधानसभा

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Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Election Result 2025) में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने आज राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। 19 नवंबर को विधानसभा भंग होगी।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 दो चरणों में, 6 नवंबर और 11 नवंबर को हुए थे। मतों की गिनती 14 नवंबर को हुई, जिसके परिणामस्वरूप बिहार में एनडीए की जीत हुई। सत्तारूढ़ एनडीए को 243 सदस्यीय सदन में 202 सीटें मिलीं, जो तीन-चौथाई बहुमत है। यह दूसरी बार है जब एनडीए ने विधानसभा चुनावों में 200 का आंकड़ा पार किया है। 2010 के चुनावों में, इसने 206 सीटें जीती थीं। महागठबंधन को केवल 35 सीटें मिलीं, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 25 सीटें, कांग्रेस ने 6, सीटें जीतीं।

प्रतिबंधित कफ सिरप मामला: 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, 26 फर्मों के होंगे लाइसेंस निरस्त

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वाराणसी: यूपी के वाराणसी में इन दिनों कोडीन युक्त प्रतिबंधित सिरप के मामले को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीमें लगातार फर्मों के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। इस प्रकरण के मास्टरमाइंड प्रहलाद घाट निवासी शुभम जायसवाल की तलाश में पुलिस की टीम लगी हुई है। उसके पिता भोला प्रसाद समेत 28 लोगों पर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
अब प्रतिबंधित सिरप की खरीद-बिक्री के मामले में 26 फर्मों के लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी चल रही है। सभी रिकॉडर् खंगाले जा रहे हैं। औषधि निरीक्षक जुबान अली की तहरीर पर 28 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद द्वारा इन 26 फर्मों को विधिविरुद्ध, गैर-चिकित्सकीय, नशे के रूप में प्रयोग करने के लिए बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप बेची और खरीदी गई।

भारी मात्रा में की गई प्रतिबंधित सिरप की आपूर्ति 
जांच में पाया गया कि मेमर्स शैली ट्रेडर्स द्वारा भारी मात्रा में प्रतिबंधित सिरप की आपूर्ति की गई, जिसे इन 26 फर्मों द्वारा खपाया गया। शुभम जायसवाल के अन्य पाटर्नरों की तलाश भी की जा रही है। शुभम जायसवाल द्वारा कई स्थानों पर जबरदस्ती दबाव बनाकर बिलिंग कराने का मामला सामने आया है। शुभम जायसवाल और पिता भोला प्रसाद की फर्म मेमर्स शैली ट्रेडर्स का पता झारखंड का है। जिन फर्मों को इनके द्वारा प्रतिबंधित सिरप सप्लाई किया गया, सत्यापन में कई फर्म बंद मिलीं तो कई उस पते पर थीं ही नहीं।

बिहार चुनाव में 2 लाख से अधिक मतदाताओं ने दबाया NOTA बटन, सबसे अधिक नोटा वोट इस सीट पर डाले गए

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Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) एक बार फिर से सुर्खियों में है, जहां इस विकल्प को मिले वोट कई सीट पर निर्णायक साबित हुए। राज्य की 26 विधानसभा सीट पर नोटा (NOTA) को मिले वोट हार-जीत के अंतर से अधिक रहे, जिससे चुनाव के नतीजों पर इसका सीधा असर पड़ा है।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में 7,06,293 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 9,10,710 हो गई। हालांकि यह आंकड़ा वर्ष 2015 के मुकाबले कम है, जब 9,47,279 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। सबसे अधिक 8,634 नोटा वोट कल्याणपुर सीट पर डाले गए। इसके अलावा गड़खा, कुशेश्वरस्थान, मधुबन और खगड़िया जैसी सीट पर भी नोटा के वोट ने नतीजों की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, 26 सीट पर नोटा को मिले वोट हार-जीत के अंतर से अधिक होने के कारण राजनीतिक दलों और रणनीतिकारों को अपनी चुनावी रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर होना पड़ा है।

जनता उम्मीदवारों के चयन को लेकर असंतुष्ट
राजनीतिक विश्लेषक सुभाष पांडे ने कहा कि मतदाताओं के बीच नोटा का बढ़ता चलन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनता उम्मीदवारों के चयन को लेकर असंतुष्ट है। उन्होंने कहा, ‘‘नोटा के बढ़ते वोट राजनीतिक दलों को एक सशक्त संदेश देते हैं। कई सीट पर नोटा ने चुनावी समीकरण बिगाड़े हैं, जिससे पार्टियों की चिंता बढ़ गई है।” बिहार में नोटा का उभरता रुझान यह दर्शाता है कि मतदाता विकल्प की तलाश में हैं और राजनीतिक दलों को उम्मीदवार चयन तथा स्थानीय मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।

कांग्रेस का यह तथाकथित ‘टैलेंट हंट’ कार्यक्रम असल में ‘डैमेज कंट्रोल हंट’ है: प्रतुल शाहदेव

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Ranchi News: झारखंड भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और राष्ट्रीय प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल के प्रेस वार्ता पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस बिहार में सिंगल डिजिट सीटों के आंकड़े पर सिमट गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब इस मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल करने के लिए नया पोस्टर और नया प्रवक्ता पैनल का नाटक कर रही है।

“पूरी दुनिया जानती है कि PM मोदी के विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता है”
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कांग्रेस झारखंड में अपनी संगठनात्मक क्षमता को छुपाने के लिए नए-नए पोस्टर और कार्यक्रम लॉन्च कर रही है, लेकिन जनता सब जानती है कि जिस पार्टी में शीर्ष नेताओं की ही विश्वसनीयता शून्य है, वहां प्रवक्ता बदलने से कुछ नहीं बदलेगा। शाहदेव ने कहा कि इस सीरियस प्रेस कॉन्फ्रेंस को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने उस समय लाफ्टर शो बना दिया, जब उन्होंने कहा कि यथार्थ में और सोशल मीडिया में राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। शाहदेव ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता है। देश की बात छोड़िए विदेश में भी उनकी कोई टक्कर का दूसरा नेता नहीं है। फिर उनकी तुलना तीन-तीन आम चुनाव में बुरे तरीके से हारने वाले कांग्रेस पार्टी के अगुवाई करने वाले राहुल गांधी जी से कैसे हो सकती है? शाहदेव ने कहा कि कांग्रेस जिस टैलेंट हंट की बात कर रही है, वह सिर्फ एक नया राजनीतिक शो-ऑफ है, क्योंकि सबसे पहले कांग्रेस को अपने शीर्ष नेतृत्व में ‘वैचारिक निष्ठा’ ढूंढनी चाहिए, जो रोज दल बदलने वाले, टिकट बेचने वाले और परिवारवाद से ऊपर नहीं उठ पाए हैं।

“कांग्रेस के नेता देश और संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन…”
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कांग्रेस जिस ‘स्पष्ट सोच’ की मांग कर रही है, वही सोच उसकी अपनी नीतियों से गायब है। कांग्रेस के नेता देश और संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन झारखंड में भ्रष्टाचार और लूट की राजनीति की सबसे बड़ी साझेदार वही पार्टी रही है। 140 करोड़ आबादी वाले देश में कांग्रेस को 200 करोड लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलना हास्यास्पद, लगता है पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी प्रतिक्रिया मिल रही है। शाहदेव ने कहा 140 करोड़ की आबादी वाले देश में कांग्रेस को 200 करोड लोगों की प्रतिक्रिया मिलने का दावा ही सारे अभियान की पोल खोलता है। कांग्रेस के प्रवक्ता का यह कहना कि उन्हें 200 करोड लोगों ने प्रतिक्रियाएं दी हैं हास्यास्पद है। इसी से प्रतीत होता है कि उनको अब पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी प्रतिक्रिया मिल रही है। बात जमीन की हो या सोशल मीडिया की हो भाजपा और कांग्रेस में कोई मुकाबला ही नहीं है।

मक्का से मदीना जा रहे उमरा यात्रियों की बस का भयानक एक्सीडेंट, 42 की मौत- देखें दिल दहला देने वाला दृश्य

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नेशनल डेस्क: एक धार्मिक यात्रा उमरा पर जा रहे भारतीय यात्रियों के लिए सोमवार सुबह मौत और दर्द लेकर आई। मक्का से मदीना जा रही एक बस सऊदी अरब में डीज़ल टैंकर से टकरा गई, जिससे आग भड़क उठी और बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 42 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है।

बहुत से यात्री सो रहे थे, बचने का मौका नहीं मिला
हादसा मुहरास/मुफ़रीहत के पास हुआ, जो मदीना से लगभग 160 किलोमीटर दूर है। दुर्घटना की समय सुबह लगभग 1:30 बजे थी, जब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। आग लगने के तुरंत बाद कई यात्रियों के पास बाहर निकलने का कोई मौका नहीं था। रेस्क्यू टीमों ने बताया कि बस पूरी तरह से जल गई और मृतकों की पहचान करना बेहद कठिन हो गया है। एक व्यक्ति के बचने की संभावना है, लेकिन उनकी स्थिति अभी साफ नहीं है।

पैसेंजर्स में महिलाओं और बच्चों की संख्या चिंताजनक
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे हो सकते हैं। कुछ अनौपचारिक सूत्रों के मुताबिक, लगभग 11 महिलाएं और 10 बच्चे इस हादसे में शामिल हैं। भारतीय और सऊदी अधिकारियों की ओर से मृतकों की संख्या और पहचान की पुष्टि की जा रही है।

सऊदी और भारतीय अधिकारियों ने राहत कार्य शुरू किया
सऊदी सिविल डिफ़ेंस और पुलिस मौके पर तुरंत पहुंची, जबकि भारतीय अधिकारियों और उमरा एजेंसी के प्रतिनिधियों ने राहत और सूचना समन्वय के लिए मदद शुरू की। यात्रियों के परिवार हाइदराबाद समेत विभिन्न शहरों में बेचैनी के साथ अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।

तेलंगाना सरकार ने की तुरंत कार्रवाई
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए कि वे तुरंत सभी विवरण जुटाएं, प्रभावित लोगों की संख्या निर्धारित करें और केंद्र सरकार व सऊदी दूतावास के साथ समन्वय करें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत राहत कार्य सुनिश्चित किया जाए।

परिवारों के लिए दर्दनाक इंतजार
यह हादसा उन परिवारों के लिए आश्चर्य और चिंता का कारण बन गया है, जो अपने प्रियजनों की सुरक्षित यात्रा की कामना कर रहे थे। मक्का से शुरू हुई पवित्र यात्रा अब अनिश्चितता और दुःख में बदल गई है।

UP: सरकार और विद्युत नियामक आयोग से उपभोक्ताओं के बिजली बिल में वृद्धि से राहत देने की मांग

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UPPCL News: : परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने रविवार को कहा कि उपभोक्ताओं के सरप्लस के आधार पर अगले पांच वर्षों तक बिजली दरों में कम से कम आठ प्रतिशत की कटौती की जाए, क्योंकि एक साथ 40 प्रतिशत की बिजली दरों में कमी पावर कारपोरेशन वहन नहीं कर पाएगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार और विद्युत नियामक आयोग से बिजली बिल में वृद्धि से राहत देने की मांग की है।

परिषद का कहना है कि उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 33,122 करोड़ रुपये अधिक (सरप्लस) निकल रहा है। ऐसे में बिजली दरें बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। इस वर्ष भी कंपनियों पर चार हजार करोड़ रुपये से ऊपर अधिक निकलना तय है।

कानून के तहत प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं हो सकती परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने रविवार को कहा कि उपभोक्ताओं के सरप्लस के आधार पर अगले पांच वर्षों तक बिजली दरों में कम से कम आठ प्रतिशत की कटौती की जाए, क्योंकि एक साथ 40 प्रतिशत की बिजली दरों में कमी पावर कारपोरेशन वहन नहीं कर पाएगा।

69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद गहराया, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले अभ्यर्थियों ने याची लाभ देने की मांग दोहराई

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69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर है। सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर को होने वाली अहम सुनवाई से हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी उम्मीदें हैं। आरक्षण प्रभावित उम्मीदवार सरकार से याची लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि मामला शांतिपूर्ण तरीके से निस्तारित हो सके।

69000 Bharti Latest News: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 सहायक अध्यापक भर्ती एक बार फिर सुर्खियों में है। आरक्षण को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर को होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई को लेकर आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों में भारी उम्मीद और बेचैनी दोनों देखी जा रही हैं। अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि अदालत में “याची लाभ” देने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए, जिससे इस लंबे विवाद का समाधान निकले और किसी भी अभ्यर्थी को इस भर्ती से बाहर न किया जाए।

आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों ने शासन और विभागीय प्रमुख अधिकारियों को मेल भेजकर साफ कहा है कि इस मामले में सरकार यदि सकारात्मक रुख अपनाए, तो यह विवाद बिना किसी बड़े नुकसान के सुलझ सकता है। उनका कहना है कि किसी भी चयनित अभ्यर्थी का चयन रद्द किए बिना, प्रभावित अभ्यर्थियों को याची लाभ देकर न्यायिक समाधान संभव है।

लंबे समय से अटका विवाद, अब निर्णायक क्षण

69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा 2019 से ही विवादों के घेरे में रही है। मेरिट निर्धारण, कट ऑफ, आरक्षण मानक, जिला आवंटन समेत कई बिंदुओं पर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना रहा। विशेषकर आरक्षण से संबंधित गलतियों को लेकर दर्जनों याचिकाए विभिन्न अदालतों में दाखिल हुईं।

आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का सही अनुपालन नहीं किया गया, जिससे कई पात्र अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर रह गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट इसका अंतिम समाधान करेगा। 18 नवंबर की सुनवाई इसलिए अत्यंत अहम मानी जा रही है क्योंकि इस दिन अदालत सरकार के रुख और याचिकाकर्ताओं की दलीलों के आधार पर आगे की दिशा तय कर सकती है।

अभ्यर्थियों की मांग – ‘याची लाभ ही विवाद का शांतिपूर्ण समाधान’

आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों का प्रमुख अनुरोध यह है कि किसी भी चयनित अभ्यर्थी को भर्ती से बाहर न किया जाए। आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों को याची लाभ प्रदान किया जाए। सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस दिशा में सकारात्मक प्रस्ताव पेश करें। लंबित मामला जल्द निपटे ताकि वर्षों से रुका भविष्य आगे बढ़ सके। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे केवल न्याय चाहते हैं, किसी को हटाने या नुकसान पहुँचाने की मांग नहीं कर रहे। उनका मानना है कि याची लाभ (benefit to the petitioners) प्रदान करके सरकार और न्यायालय दोनों एक संतुलित समाधान निकाल सकते हैं।

अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल राज्य मंत्री से मिला

पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप और प्रदेश संरक्षक भास्कर सिंह ने बताया कि हाल ही में अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह से मिला था। मुलाकात के दौरान अभ्यर्थियों ने मंत्री को अपनी स्थिति विस्तार से बताई और उनसे आग्रह किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में ठोस और न्यायोचित रुख अपनाए। मंत्री संदीप सिंह ने आश्वासन दिया कि सरकारी अधिवक्ता 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित रहेंगे। सरकार अभ्यर्थियों की मांग और न्यायिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सर्वोत्तम समाधान की दिशा में कदम उठाएगी। यह आश्वासन अभ्यर्थियों को कुछ राहत देता है, पर वे अंतिम निर्णय के लिए अब भी अदालत की प्रतीक्षा में हैं।

18 नवंबर की सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण है

इस सुनवाई का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह मामला पाँच वर्षों से अटका हुआ है। हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य इससे जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भर्ती की अंतिम स्थिति तय करेगा। चयन सूची और नियुक्तियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। राज्य सरकार को अपने पक्ष और इरादे स्पष्ट करने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट अगर याची लाभ या समानुपातिक समाधान की बात स्वीकार करता है, तो यह भविष्य में होने वाली सभी बड़ी भर्तियों के लिए भी मिसाल बनेगा।

अभ्यर्थियों की बेबसी-नौकरी इंतजार में, उम्र निकल रही

अनेकों अभ्यर्थी लगातार कह रहे हैं कि भर्ती की देरी से उनकी उम्र निकलती जा रही है। कई अभ्यर्थियों ने वर्षों तक तैयारी की लेकिन विवादों के कारण नियुक्तिया रुकने से वे मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से दबाव में आ चुके हैं। हमने 2019 में फॉर्म भरा था। अब 2025 आ गया है। नौकरी नहीं मिली, ऊपर से उम्र भी समाप्ति के कगार पर है,यह भावना लगभग सभी प्रभावित अभ्यर्थियों में देखने को मिलती है। कई उम्मीदवार आज भी कोर्ट-कचहरी, विभागीय कार्यालयों और जनप्रतिनिधियों के बीच दौड़ते दिखाई देते हैं।

शासन की चुप्पी और अभ्यर्थियों की बेचैनी

हालांकि सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन विभागीय सूत्र बताते हैं कि इस बार सरकार विवाद का स्थायी समाधान चाहती है। भर्ती विवादों के कारण शासन की छवि भी प्रभावित होती है और सरकार चाहती है कि बहुप्रतीक्षित शिक्षक भर्ती मुद्दा अब शांत हो जाए। अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकार कहीं तटस्थ रुख न अपनाए। इसलिए वे बार-बार ईमेल, ज्ञापन, और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी आवाज़ सरकार तक पहुँचा रहे हैं।

समाधान की संभावनाएँ

यदि सुप्रीम कोर्ट यह मान ले कि किसी चयनित शिक्षक को हटाए बिना,प्रभावित अभ्यर्थियों को याची लाभ प्रदान करके,भर्ती को नियमित किया जा सकता है, तो यह सभी पक्षों के लिए लाभकारी होगा।

ऐसा होने पर

  • चयनित शिक्षक अपनी नौकरी पर बने रहेंगे
  • आरक्षण प्रभावित दावेदारों को न्याय मिलेगा
  • वर्षों से लंबित प्रक्रिया पूरी होगी
  • शिक्षा विभाग में स्थिरता आएगी

अगली सुबह का इंतज़ार-सुनवाई से बड़ी उम्मीदें

अब लाखों अभ्यर्थी सिर्फ 18 नवंबर का इंतजार कर रहे हैं। यह तारीख उनके जीवन में राहत और उम्मीद की नई किरण ला सकती है, विवाद को और लंबा भी खींच सकती है। लेकिन सभी की इच्छा यही है कि अदालत और सरकार मिलकर ऐसा रास्ता निकालें जिससे न्याय और व्यवस्था दोनों सुरक्षित रहें।