Friday, February 13, 2026
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UP: गर्दन की नस से बैलून डालकर फुला रहे दिल का वाॅल्व, प्रदेश में सिर्फ LPS कार्डियोलॉजी में अपनाई जा रही विधि

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कानपुर में गर्दन की नस से बैलून डालकर हृदय रोगियों का वाॅल्व फुला दिया जा रहा है। इससे रोगी सर्जरी से बच जाता है। दर्द और रक्तस्राव भी नहीं होता। रोगी की रिकवरी जल्दी हो जाती है। हृदय के वाॅल्व के इलाज में ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी नामक यह विधि प्रदेश में अभी एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में ही अपनाई जा रही है। जर्नल ऑफ अमेरिकन कार्डियोलॉजी ने इस विधि संबंधी शोध प्रकाशित किया है।

गर्दन की नस से ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी कराने में सबसे राहत उन रोगियों को है जिनकी जांघ की नसों में पतलापन और जन्मजात विकृति होती है। इसके अलावा स्पाइनल कॉर्ड के रोगियों और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के इलाज में कोई दिक्कत नहीं होती। उनकी ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी प्रक्रिया सुरक्षित रहती है। ऐसे रोगियों को जांघ की नस से बैलून डालने में जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं जिससे जान का खतरा रहता है।

प्रदेश में इस विधि से इलाज सिर्फ कार्डियोलॉजी में
इंस्टीट्यूट के कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. एसके सिन्हा ने बताया कि दो साल में 50 रोगियों की ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी की गई है। इनमें 18 रोगियों के ब्योरे संबंधी शोध जर्नल ऑफ अमेरिकन कार्डियोलॉजी में वर्ष 2025 में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने बताया कि देश में अभी चार-पांच शहरों में यह विधि अपनाई जा रही है। प्रदेश में इस विधि से इलाज सिर्फ कार्डियोलॉजी में किया जा रहा है।

विधि के फायदे

  • शारीरिक जटिलताओं यह उन रोगियों के लिए सबसे बड़ा विकल्प है जिनमें पैर की नसों में रुकावट या कोई जन्मजात विकृति हो।
  •  गर्दन की नस (जुगुलर वेन) के माध्यम से माइट्रल वाल्व तक पहुंचने का रास्ता अधिक सीधा होता है। इससे वाॅल्व को पार करना कभी-कभी पारंपरिक तरीके की तुलना में आसान और तेज हो सकता है।
  • जिन रोगियों को गंभीर काइफोस्कोलियोसिस (रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन) है, उनके लिए पारंपरिक बीएमवी करना असंभव हो सकता है। ऐसे मामलों में ट्रांसजुगुलर तरीका एक सफल विकल्प साबित होता है।
  • त्वरित गतिशीलता पैर के बजाय गर्दन के रास्ते प्रक्रिया होने के कारण मरीज प्रक्रिया के बाद बहुत जल्दी चलने-फिरने में सक्षम हो जाता है।
  • यह तकनीक एक साथ माइट्रल और ट्राइकसपिड वाॅल्व दोनों की मरम्मत करने के लिए भी प्रभावी मानी जाती है।

 

प्रभात की ख़बरों का विस्तार 7 भारत समाचार के साथ

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*1* वायुसेना ने गणतंत्र दिवस के मौके पर पाकिस्तान को याद दिलाया ऑपरेशन सिंदूर, IAF ने दिखाए एयर स्ट्राइक वाले हथियार

*2* पीएम मोदी मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम 27 से 30 जनवरी के बीच दक्षिण गोवा में आयोजित होने वाला है।

 

*3* भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच सबसे बड़ी ट्रेड डील आज, 200 करोड़ लोगों का मार्केट बनेगा, दुनिया की 25% इकोनॉमी इसके दायरे में होगी

 

*4* राष्ट्रपति की भी न मानी बात, राहुल गांधी ने एट होम कार्यक्रम में नहीं पहना असम का पटका; BJP का दावा

 

*5* कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार किया। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वे भी पटका पहने हुए नहीं दिख रहे हैं। पवन खेड़ा ने सवाल उठाया, ‘क्या आप राजनाथ सिंह जी से भी माफी मांगने को कहेंगे?

 

*6* लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को गणतंत्र दिवस समारोह में तीसरी पंक्ति में बैठाने पर कांग्रेस नेताओं ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की मानसिकता और विपक्ष के नेताओं की गरिमा के प्रति असम्मान को दर्शाता है,2014 तक विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और एलके आडवाणी हमेशा पहली पंक्ति में वहीं बैठते थे

 

*7* कांग्रेस ने मोदी सरकार की जाति जनगणना की नीयत पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जनगणना के फॉर्म में ओबीसी का जिक्र न होना शक पैदा करता है। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रक्रिया तय करने से पहले सभी दलों और राज्यों से बात की जाए

 

*8* जिनपिंग ने भारत को गणतंत्र दिवस की बधाई दी, कहा- ड्रैगन और हाथी साथ डांस करें; ट्रम्प बोले- भारत-अमेरिका का ऐतिहासिक रिश्ता

 

*9* उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी, तुरंत प्रभाव से हुआ लागू;

 

*10* महाराष्ट्र में गणतंत्र दिवस के मौके पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ। ‘राष्ट्र प्रथम’ पहल के तहत राज्य के एक लाख से ज्यादा स्कूलों के दो करोड़ से अधिक छात्रों ने एक साथ देशभक्ति गीतों पर सामूहिक व्यायाम किया। यह आयोजन इतना बड़ा था कि इसे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन ने विश्व रिकॉर्ड के रूप में मान्यता दी है

 

*11* पश्चिम बंगाल में दो गोदामों में आग, 8 की मौत, कई मजदूर के फंसे होने की आशंका; सात घंटे में 12 दमकल गाड़ियों ने आग बुझाई

 

*12* सरकारी बैंकों में आज हड़ताल, नकद लेनदेन और चेक क्लियरेंस जैसे काम नहीं होंगे, लगातार चौथे दिन बैंक बंद

 

*13* कश्मीर से दिल्ली तक ठंड का सितम, पश्चिमी विक्षोभ से बदल रहा मौसम का मिजाज; IMD ने जारी किया अलर्ट

 

*14* ट्रंप को झटका देने की तैयारी में कनाडा के PM मार्क कार्नी! जल्द कर सकते हैं भारत दौरा, बड़ी डील की तैयारी

 

*15* अमेरिका में बर्फ़ीले तूफ़ान के बीच प्राइवेट जेट क्रैश, 7 लोगों की मौत 1 गंभीर रूप से घायल

 

*16* दुनिया को डराने वाले ट्रम्प यूरोप के आगे क्यों झुके, 27 देशों ने ‘ट्रेड बाजूका’ की धमकी दी; घबराए ट्रम्प ने 10% टैरिफ हटाया

 

*17* अमेरिका ने अपना बड़ा युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ तीन युद्धपोत (डिस्ट्रॉयर) पश्चिम एशिया भेज दिए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह जहाजों का समूह अभी हिंद महासागर में है, ईरान के पास वाले अरब सागर में नहीं। लेकिन इसके आने से इलाके में हजारों अमेरिकी सैनिक और सैन्य ताकत बढ़ गई है।

 

VIDEO: 77वें गणतंत्र दिवस पर बच्चों के कौशल और मातृशक्ति के स्वर से गूंजा देशभक्ति का तराना

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भागीरथी एन्क्लेव में 77वां गणतंत्र दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर रेजिडेंट्स ने भारी संख्या में एकत्रित होकर राष्ट्र के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

गणतंत्र दिवस: शिक्षारथों से जन-जन तक पहुंचा शिक्षा का संदेश, 1.48 करोड़ बच्चों ने एक साथ दी तिरंगे को सलामी

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77वें गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश में शिक्षा, संविधान और राष्ट्रभक्ति का संगम देखने को मिला। प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में एक साथ 1.48 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं ने तिरंगे को सलामी देकर लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रनिर्माण के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। विद्यालय प्रांगण राष्ट्रगान, वंदे मातरम और देशभक्ति गीतों से गूंज उठे।सुबह से ही प्रदेश के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालयों और केजीबीवी में गणतंत्र दिवस समारोह पूरे उत्साह के साथ आयोजित किए गए। रंग-बिरंगे झंडों, आकर्षक सजावट, प्रभात फेरियों, तिरंगा रैलियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने विद्यालय परिसरों को जीवंत बनाया। नन्हे हाथों में तिरंगा और आंखों में भारत के उज्ज्वल भविष्य का सपना स्पष्ट झलक रहा था। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों, नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी देते हुए उन्हें जिम्मेदार, जागरूक और संस्कारित नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।

बता दें कि गणतंत्र दिवस पर शिक्षा, जागरूकता और जनसंवाद के इस संयुक्त प्रयास ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा केवल विद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुँचकर सशक्त, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव रख रही है।

विशेष शिक्षा जागरूकता अभियान बना गणतंत्र दिवस की पहचान
इस अवसर पर प्रदेशभर में विशेष शिक्षा जागरूकता अभियान भी संचालित किया गया, जिसने गणतंत्र दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि शिक्षा के व्यापक जनआंदोलन का रूप दे दिया। सभी 75 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों से एक साथ कुल 375 शिक्षा रथों को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। हर जिले से पांच-पांच शिक्षा रथ निकाले गए, जिनका उद्देश्य शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे आमजन तक पहुंचाना रहा। 

4500 शिक्षा प्रहारियों ने किया नेतृत्व

प्रत्येक शिक्षा रथ पर दो शिक्षक व दस विद्यार्थी शामिल रहे। इस प्रकार प्रदेश भर में 4500 से अधिक शिक्षा प्रहरी (शिक्षक और विद्यार्थी), शिक्षा के संदेशवाहक बनकर अभियान का नेतृत्व करते नजर आए। निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत हर शिक्षा रथ ने तीन-तीन स्थानों पर ठहरकर आमजन से सीधा संवाद स्थापित किया। इसके माध्यम से प्रदेश में कुल 1125 स्थानों पर जनसंवाद आयोजित हुआ।

विभाग की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया
जनसंवाद के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग की विभिन्न इकाइयों द्वारा संचालित योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की गई। आमजन को परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाली निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति, निःशुल्क नामांकन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही अभिभावकों को बच्चों के नियमित विद्यालय आने और शिक्षा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया।

छात्राओं ने दिया सशक्त और प्रेरक संदेश
प्रदेश के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में गणतंत्र दिवस समारोह विशेष रूप से उत्साहपूर्ण रहा। छात्राओं ने देशभक्ति गीत, नृत्य, नाटक, भाषण और कविताओं के माध्यम से यह सशक्त संदेश दिया कि बेटियां आज शिक्षा के बल पर आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्रनिर्माण की अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित अभिभावकों और ग्रामीणों को प्रभावित दिया।

निदेशालयों में भी हुआ आयोजन
बेसिक शिक्षा निदेशालय, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद तथा राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में भी गणतंत्र दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। अधिकारियों और शिक्षाविदों ने संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने, गुणवत्तापूर्ण एवं मूल्यनिष्ठ शिक्षा को बढ़ावा देने तथा तकनीक आधारित शिक्षण को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया।

गणतंत्र दिवस: शिक्षारथों से जन-जन तक पहुंचा शिक्षा का संदेश, 1.48 करोड़ बच्चों ने एक साथ दी तिरंगे को सलामी

यूपी: प्रदेश में फिर बदला मौसम, अवध के कई जिलों में छाए बादल; पश्चिमी यूपी के इन इलाकों में होगी बारिश

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उत्तर प्रदेश में लगातार दो पश्चिमी विक्षोभ के असर से एक बार फिर माैसम में बदलाव की आहट है। माैसम विभाग का कहना है कि नए विक्षोभ के असर से 27 और 28 जनवरी को प्रदेश के पश्चिमी व पूर्वी दोनों संभागों में एक बार फिर बरसात होगी। यह बरसात तीन दिन तक चलता रहेगा। वहीं सोमवार को प्रदेश के कई जिलों जैसे कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद व आसपास के इलाको में कोहरा देखा गया है।

आंचलिक माैसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 27 व 28 जनवरी को सुबह पश्चिमी यूपी के आगरा से बारिश का दाैर शुरू होकर इसका विस्तार पूर्वी और मध्य यूपी तक पहुंचेगा। बुंदेलखंड, अवध क्षेत्र समेत राजधानी लखनऊ में भी मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है। बारिश के दाैरान झोंकेदार हवाएं भी चलेंगी। कुछ जिलों में मध्यम आकार के ओले भी गिर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि पश्चिमी यूपी में इस बार कहीं कहीं अच्छी बारिश के संकेत हैं। सोमवार को पूर्वी और पश्चिमी दोनों संभागों में रात के तापमान में 2 से 5 डिग्री की गिरावट आई। तराई के जिलों में हल्का कोहरा रह सकता है। 

फिर बदलेगा मौसम, 27 जनवरी से लखनऊ में होगी बारिश

राजधानी में एक नए विक्षोभ के असर से एक बार फिर बदलाव की आहट है। आंचलिक माैसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि इस विक्षोभ के असर से 27 जनवरी को लखनऊ में देर सवेर मध्यम बारिश के संकेत हैं। वहीं सोमवार को लखनऊ में रात के तापमान में हल्की गिरावट हुई। आज दिन में बादलों के साथ हल्की हवा चलने से अधिकतम तापमान में कमी आएगी।

उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी की चेतावनी

देहरादून में भारी बारिश और बर्फबारी की चेतावनी के मद्देनजर, जिले में 27 जनवरी को कक्षा एक से 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मौसम विभाग ने जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जो गरज-चमक के साथ बारिश और बर्फबारी की संभावना को दर्शाता है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित अनहोनी से बचने के उद्देश्य से लिया गया है।

UGC क्या है? नए नियम को लेकर देशभर में क्यों मचा है बवाल, सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा विरोध?

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नेशनल डेस्कः देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक नया नियम इन दिनों सियासत, समाज और सोशल मीडिया—तीनों जगह चर्चा और विवाद का बड़ा कारण बन गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ को लेकर जहां एक तरफ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में इसका कड़ा विरोध भी शुरू हो गया है।

खास तौर पर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठन, कुछ धार्मिक और सामाजिक नेता इस नियम पर सवाल उठा रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।

UGC क्या है और उसका नया रेगुलेशन क्या है?

UGC (University Grants Commission) देश में उच्च शिक्षा से जुड़ी सबसे अहम संस्था है।
इसकी जिम्मेदारी है:

  • विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की गुणवत्ता तय करना
    • उन्हें मान्यता और फंडिंग देना
    • छात्रों और शिक्षकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना

    इसी UGC ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। UGC का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य- कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना, सभी वर्गों के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सुरक्षित, समान और सम्मानजनक माहौल देना है।

    नए कानून में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?

    अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें, मुख्य रूप से SC (अनुसूचित जाति) और ST (अनुसूचित जनजाति) तक सीमित मानी जाती थीं। नए नियम में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी साफ तौर पर इस दायरे में शामिल कर लिया गया है।

    इसका मतलब अब OBC छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ हुए किसी भी तरह के भेदभाव, उत्पीड़न या अपमान की आधिकारिक शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

    हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में क्या करना होगा अनिवार्य?

    नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में SC, ST और OBC के लिए ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ बनाना जरूरी होगा। यूनिवर्सिटी स्तर पर एक Equality Committee (समानता समिति) बनाई जाएगी।

    इस समिति में अनिवार्य रूप से शामिल होंगे:

    • OBC प्रतिनिधि
    • महिला प्रतिनिधि
    • SC और ST प्रतिनिधि
    • दिव्यांग वर्ग का प्रतिनिधि

    यह समिति हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट UGC को भेजी जाएगी। UGC का दावा है कि इससे शिकायतों की निगरानी बेहतर होगी,संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

    अगड़ी जातियों से जुड़े संगठन विरोध क्यों कर रहे हैं?

    नियम लागू होते ही देश के कई हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों में असंतोष देखने को मिला। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है। झूठी शिकायतों के जरिए अगड़ी जातियों के छात्र और शिक्षक
    फंसाए जा सकते हैं। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा, वैश्य संगठन ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)’ बनाई है, ताकि इस नियम के खिलाफ संगठित आंदोलन किया जा सके।

    उत्तर प्रदेश में मामला क्यों ज्यादा गरमाया?

    उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है। गाजियाबाद डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने खुले तौर पर UGC नियमों का विरोध शुरू कर दिया। वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन के लिए जा रहे थे लेकिन गाजियाबाद में ही
    पुलिस ने उन्हें रोककर नजरबंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जिससे विवाद और ज्यादा बढ़ गया।

    सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी है जंग?

    इस नियम को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो, पोस्ट और लाइव बहसों की बाढ़ आ गई है। अगड़ी जातियों से जुड़े कई यूट्यूबर, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और एक्टिविस्ट इसे “सवर्ण विरोधी कानून” बता रहे हैं। स्वामी आनंद स्वरूप के एक वीडियो में सवर्ण समाज से एकजुट होने की अपील के बाद बहस और तेज हो गई। वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय समर्थक, छात्र संगठन और एक्टिविस्ट इसे बराबरी, सम्मान और भेदभाव खत्म करने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।

    UGC के आंकड़े क्या कहते हैं?

    UGC ने संसद और सुप्रीम कोर्ट में जो आंकड़े पेश किए हैं, उनके मुताबिक पिछले 5 सालों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की बढ़ोतरी हुई है।

    आंकड़े बताते हैं:

    • 2019-20 में: 173 शिकायतें
    • 2023-24 में: 378 शिकायतें

    देशभर के 704 विश्वविद्यालयों, 1553 कॉलेजों से कुल 1160 शिकायतें सामने आईं। UGC इन आंकड़ों को नए नियम के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क के तौर पर पेश कर रहा है।

    सवर्ण वर्चस्व बनाम सामाजिक न्याय की बहस

    आलोचकों का कहना है कि यह कानून सवर्ण समाज को निशाना बनाता है। समर्थकों का तर्क है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में वंचित वर्गों की भागीदारी अब भी 15% से कम है। SC-ST अत्याचार निवारण कानून को लागू हुए 36 साल हो चुके हैं, फिर भी भेदभाव खत्म नहीं हुआ। इसी वजह से वे UGC के इस कदम को जरूरी और समयानुकूल सुधार मानते हैं।

    आगे क्या असर पड़ेगा?

    UGC का यह नया रेगुलेशन अब सिर्फ शिक्षा से जुड़ा मामला नहीं रहा बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस बन चुका है। यूपी चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा और ज्यादा तेज हो सकता है। आने वाले महीनों में इसका असर कैंपस, सड़क और चुनावी राजनीति तीनों जगह साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।

ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में तैनात किया एयरक्राफ्ट कैरियर, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

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इंटरनेशनल डेस्कः ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्वी समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है। अमेरिका ने सोमवार को बताया कि उसका एक शक्तिशाली नौसैनिक स्ट्राइक ग्रुप, जिसकी अगुवाई एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln कर रहा है, मध्य पूर्व के जलक्षेत्र में तैनात कर दिया गया है। यह तैनाती ऐसे समय पर हुई है, जब ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की, तो वह जोरदार जवाब देगा।

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन और भारी हिंसा

ईरान में दिसंबर के अंत से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन महंगाई और आर्थिक समस्याओं को लेकर हुए थे, लेकिन 8 जनवरी के बाद यह आंदोलन इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। कई दिनों तक सड़कों पर भारी भीड़ देखने को मिली।

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए अभूतपूर्व हिंसा का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने इंटरनेट बंद होने की स्थिति में सीधे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। ईरान में यह इंटरनेट शटडाउन पिछले 18 दिनों से जारी है, जो अब तक का सबसे लंबा ब्लैकआउट माना जा रहा है।

मरने वालों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे

अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन Human Rights Activists News Agency (HRANA) ने बताया कि अब तक 5,848 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें 209 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। संगठन का कहना है कि वह अभी 17,091 और संभावित मौतों की जांच कर रहा है, यानी असली आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा हो सकता है।

HRANA के अनुसार, अब तक 41,283 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, ईरान सरकार ने पहली बार आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए कहा कि 3,117 लोगों की मौत हुई है। सरकार का दावा है कि इनमें से ज्यादातर सुरक्षाकर्मी या फिर “दंगाइयों” की हिंसा में मारे गए आम नागरिक थे। इंटरनेट निगरानी संस्था NetBlocks ने कहा है कि इंटरनेट बंद होने की वजह से असली हालात दुनिया के सामने नहीं आ पा रहे हैं और सरकार अपने पक्ष का प्रचार कर रही है।

अमेरिका की सैन्य तैनाती और ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को चेतावनी दे चुके हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि अमेरिका क्षेत्र में एक “भारी भरकम नौसैनिक बेड़ा” भेज रहा है, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। अब USS Abraham Lincoln के पहुंचने से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य ताकत काफी बढ़ गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह स्ट्राइक ग्रुप “मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने” के लिए तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि अमेरिका ने जून में इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ 12 दिन चले युद्ध में समर्थन किया था। हालांकि हाल में ट्रंप ने सीधे सैन्य कार्रवाई से थोड़ा पीछे हटने के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने इस विकल्प को कभी पूरी तरह खारिज नहीं किया।

ईरान की सख्त चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि किसी भी हमले का “व्यापक और पछतावा कराने वाला जवाब” दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं पर पूरा भरोसा रखता है और किसी भी दबाव से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने एयरक्राफ्ट कैरियर की ओर इशारा करते हुए कहा, “ऐसे युद्धपोतों की मौजूदगी ईरान की अपने देश की रक्षा करने की दृढ़ता को कमजोर नहीं कर सकती।”

तेहरान में अमेरिका विरोधी संदेश

ईरान की राजधानी तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर में अमेरिका विरोधी एक नया होर्डिंग लगाया गया है, जिसमें एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को नष्ट होते हुए दिखाया गया है। इस पर अंग्रेज़ी में लिखा है— “If you sow the wind, you will reap the whirlwind.” (अगर आप हवा बोएंगे, तो तूफान काटेंगे।) ईरानी नौसेना प्रमुख शहराम ईरानी ने कहा कि ईरान की नौसैनिक शक्ति सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने वाली ताकत है।

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और वैश्विक चिंता

लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में रैली निकाली। संगठन के नेता नईम कासेम ने चेतावनी दी कि “अगर इस बार ईरान पर युद्ध थोपा गया, तो पूरा क्षेत्र आग में झुलस जाएगा।” वहीं, ईरान के पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने साफ किया है कि वह अपने क्षेत्र से ईरान पर किसी भी हमले की अनुमति नहीं देगा, जबकि वहां अमेरिका का एक बड़ा एयरबेस मौजूद है।

यूरोप से भी सख्त रुख की मांग

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने यूरोपीय संघ से मांग की है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए, जैसा कि अमेरिका और कनाडा पहले ही कर चुके हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की भारी मौतें इस पर कड़ा कदम उठाने की मांग करती हैं।

Bank Strike: बैंक यूनियंस की हड़ताल आज…जानें कौन-कौन से बैंक रहेंगे बंद, ATM से लेकर किन सेवाओं पर क्या असर

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नेशनल डेस्कः अगर आप 27 जनवरी (मंगलवार) को बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम करने की सोच रहे हैं, तो पहले यह खबर जरूर पढ़ लें। आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस हड़ताल का ऐलान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने किया है।

क्यों हो रही है बैंक हड़ताल?

बैंक यूनियनें लंबे समय से 5-डे वर्क वीक (हफ्ते में 5 दिन काम और 2 दिन छुट्टी) की मांग कर रही हैं। यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 में भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ हुए वेतन संशोधन समझौते में सभी शनिवारों को छुट्टी देने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। इसी देरी और सरकार से मंजूरी न मिलने के विरोध में आज देशव्यापी हड़ताल की जा रही है।

अभी बैंकों में क्या व्यवस्था है?

फिलहाल बैंक कर्मचारियों को हर महीने दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है। बाकी शनिवारों में बैंक खुले रहते हैं, यानी महीने में दो हफ्ते कर्मचारियों को 6 दिन काम करना पड़ता है। यूनियनों का कहना है कि यह व्यवस्था अब समय के हिसाब से ठीक नहीं है।

किन बैंकों पर पड़ेगा असर?

इस हड़ताल में देश के लगभग सभी सरकारी बैंक शामिल हैं, जैसे:

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
  • बैंक ऑफ बड़ौदा
  • बैंक ऑफ इंडिया
  • केनरा बैंक
  • इंडियन बैंक
  • अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक

कई शहरों में बैंक कर्मचारियों ने पहले ही प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।

क्या काम के घंटे कम हो जाएंगे?

यूनियनों ने साफ कहा है कि काम के घंटे कम नहीं होंगे। उनका प्रस्ताव है कि सोमवार से शुक्रवार तक कर्मचारी रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करेंगे। ताकि साप्ताहिक कार्य समय में कोई कमी न आए। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन पिछले दो साल से कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ।

यूनियनों का तर्क क्या है?

यूएफबीयू का कहना है कि आरबीआई, एलआईसी, स्टॉक एक्सचेंज और ज्यादातर सरकारी कार्यालय पहले से ही 5 दिन का कार्य सप्ताह अपनाते हैं। ऐसे में बैंकों में अब भी 6 दिन काम कराने का कोई ठोस कारण नहीं है।

हड़ताल कब से कब तक रहेगी?

यह हड़ताल 26 जनवरी की आधी रात से शुरू होकर 27 जनवरी की आधी रात तक चलेगी। इस दौरान कैश लेन-देन, चेक क्लीयरेंस, ब्रांच से जुड़े काम प्रभावित रहने की संभावना है।

सरकार से मंजूरी क्यों अटकी?

यूएफबीयू ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत, हड़ताल की सूचना पहले ही IBA, मुख्य श्रम आयुक्त और वित्तीय सेवा विभाग को दे दी थी। यूनियनों के मुताबिक 7 दिसंबर 2023 को IBA और UFBU में समझौता हुआ। 8 मार्च 2024 को संयुक्त नोट भी जारी किया गया। लेकिन अब तक सरकार की अंतिम मंजूरी नहीं मिली।

9 महीने से बातचीत बेनतीजा

यूनियनों का कहना है कि 2015 में दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी लागू हुई। उसके बाद कई दौर की बातचीत हुई लेकिन सभी शनिवारों की छुट्टी पर सहमति नहीं बन पाई। पिछले 9 महीनों से कोई ठोस पहल नहीं होने के कारण यूनियनों को फिर से हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

बिना ऑक्सीजन माउंट एल्ब्रस पर 24 घंटे : रोहताश खिलेरी ने रचा विश्व इतिहास, भारत का नाम किया रोशन

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इंटरनेशनल डेस्कः भारत के लिए यह बेहद गर्व का पल है। भारतीय पर्वतारोही रोहताश खिलेरी ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो आज तक दुनिया में कोई नहीं कर पाया। उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस पर बिना ऑक्सीजन के पूरे 24 घंटे बिताकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। ऐसा करने वाले वे दुनिया के पहले इंसान बन गए हैं।

माउंट एल्ब्रस: जहां जानलेवा है मौसम

माउंट एल्ब्रस रूस की काकेशस पर्वतमाला में स्थित है। इसकी ऊंचाई 18,510 फीट है और यह न सिर्फ यूरोप की सबसे ऊंची चोटी है, बल्कि दुनिया की सेवन समिट्स (सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियां) में भी शामिल है।
यह पर्वत अपने भयानक ग्लेशियरों, तेज तूफानी हवाओं और बेहद कम तापमान के लिए जाना जाता है।

सोशल मीडिया पर साझा की उपलब्धि

रोहताश खिलेरी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने बताया कि बिना ऑक्सीजन के शिखर पर 24 घंटे रुकना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह 8 साल की मेहनत, दर्द, इंतजार और जुनून का नतीजा है।

उन्होंने लिखा, “विश्व रिकॉर्ड | यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर बिना ऑक्सीजन के 24 घंटे रहने वाला पहला इंसान। ‘यूरोप की चोटी पर 24 घंटे!’ यह पोस्ट लिखना आसान नहीं है, क्योंकि इसके पीछे 8 साल का दर्द, इंतजार और एक पागलपन भरा सपना छुपा है।”

जानलेवा ठंड में अकेले जमे रहे

खिलेरी ने बताया कि वे अकेले ही चढ़े और अकेले ही शिखर पर रुके। इतनी खतरनाक ठंड में कोई भी उनके साथ रुकने को तैयार नहीं था। उन्होंने लिखा:“मैं अकेला ही चढ़ गया और अकेला ही रुका। इस हड्डियां तोड़ देने वाली ठंड में कोई भी मेरे साथ रुकने को तैयार नहीं था।”

मौसम की हालत बेहद खतरनाक

माउंट एल्ब्रस पर मौसम उस समय बेहद भयावह था:

  • हवा की रफ्तार: 50–60 किमी प्रति घंटा
  • तापमान: -40 डिग्री सेल्सियस
  • विंड चिल: -50 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे

ऐसे हालात में बिना ऑक्सीजन जिंदा रहना ही अपने आप में असाधारण है।

यह पहली कोशिश नहीं थी

रोहताश खिलेरी ने बताया कि यह उनका पहला प्रयास नहीं था। उन्होंने 2018 से पहले कई बार चढ़ाई की कोशिश की, लेकिन कभी खराब मौसम तो कभी आपात हालात के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

‘पहाड़ ने उंगलियां ले लीं, सपना नहीं’

इस सफर की भारी कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी। पहले के प्रयासों में उन्हें फ्रॉस्टबाइट हो गया था, जिसके कारण उनकी दो उंगलियां कट गईं। उन्होंने भावुक होकर लिखा: “फ्रॉस्टबाइट में मेरी दो उंगलियां चली गईं, लेकिन मेरा सपना नहीं टूटा।”

24 घंटे का प्रवास सबसे बड़ी परीक्षा

खिलेरी ने बताया कि शिखर पर 24 घंटे रहना उनके जीवन की सबसे कठिन परीक्षा थी। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय एवरेस्ट पर किए गए प्रशिक्षण, वर्षों की मेहनत और अपनों के समर्थन को दिया।

शिखर से लहराया तिरंगा

अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें भारी बर्फबारी, तेज हवाएं और शिखर पर लहराता हुआ भारतीय तिरंगा दिखाई दे रहा है। वीडियो में वे नीचे उतरते हुए यह चेतावनी भी देते नजर आते हैं कि मौसम और ज्यादा खराब होने वाला है। उनकी भौहें और मूंछें बर्फ से जमी हुई साफ दिखाई देती हैं।

सोशल मीडिया पर गर्व और सम्मान

इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। हजारों लोग उनकी हिम्मत और जज्बे की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा: “हम आपके जोश और धैर्य को सलाम करते हैं। हर भारतीय को आप पर गर्व होना चाहिए।” दूसरे ने कहा: “भाई, आज पूरा देश आप पर गर्व कर रहा है।”

माउंट एल्ब्रस पर भारतीयों की बढ़ती उपलब्धियां

रोहताश खिलेरी की यह उपलब्धि माउंट एल्ब्रस पर भारतीयों की बढ़ती कामयाबियों की कड़ी में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है:

  • जून 2025: पंजाब के 6 साल के तेघबीर सिंह सबसे कम उम्र में एल्ब्रस फतह करने वाले बने (उम्र: 6 साल 9 महीने 4 दिन)
  • 2025: नरेंद्र यादव एल्ब्रस पर तीन बार चढ़ाई करने वाले पहले भारतीय बने
  • 15 अगस्त 2024: अंकित मलिक ने शिखर पर 78 मीटर लंबा भारतीय झंडा फहराया, जो किसी एकल पर्वतारोही द्वारा फहराया गया सबसे बड़ा तिरंगा था
  • अगस्त 2021: महाराष्ट्र के शरद कुलकर्णी 59 वर्ष की उम्र में एल्ब्रस पर चढ़ने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय बने

Daily horoscope : भाग्य का मिलेगा साथ, आज इन राशियों की चमकेगी किस्मत

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मेष : व्यापारिक कामों के लिए आपके यत्न अच्छा रिजल्ट देंगे, सफलता साथ देगी, मन सैर-सफर के लिए राजी रहेगा, इज्जत-मान की प्राप्ति।

वृष: उलझनों-झमेलों के कारण आपकी समस्त प्लानिंग के बिगड़ने का डर, लिखत-पढ़त का काम भी आंखें खोलकर फाइनल करें।

मिथुन: मिट्टी, रेता, बजरी, टिम्बर तथा कंस्ट्रक्शन मैटीरियल का काम करने वालों को अपनी कामकाजी भागदौड़ की अच्छी रिटर्न मिलेगी।

कर्क: किसी सरकारी काम में पेश आ रही किसी मुश्किल को टैकल करने के लिए सितारा मजबूत, बड़े लोग भी मेहरबान रहेंगे।

सिंह : मजबूत सितारा आपको हर मोर्चा पर हावी, प्रभावी, विजयी रखेगा, शत्रु भी आपकी पकड़ में रहेंगे, पॉजिटिव सोच रहेगी।

कन्या : खान-पान अटैंटिव रह कर करें, क्योंकि सितारा सेहत के लिए ठीक नहीं, सफर भी टाल देना सही रहेगा।

तुला: अर्थ तथा कारोबारी दशा अच्छी, कोशिशों, प्रोग्रामों में कामयाबी मिलेगी, शुभ कामों में ध्यान, वैसे भी हर तरह से बेहतरी होगी।

वृश्चिक: विरोधियों को कमजोर समझने की भूल करना किसी समय महंगा पड़ सकता है, इसलिए उनसे फासला रखें।

धनु : किसी फैमिली समस्या को सुलझाने के लिए संतान का सुपोर्टिव रुख हैल्पफुल हो सकता है, मान-सम्मान की प्राप्ति।

मकर: प्रॉपर्टी के कामों के लिए आपकी भागदौड़ अच्छा नतीजा देगी, शत्रु आपके समक्ष टिक न सकेंगे।

कुंभ: मजबूत सितारा आपको हावी, प्रभावी रखेगा, बड़े लोग तथा कामकाजी साथी आपका लिहाज करेंगे तथा बात ध्यान से सुनेंगे।

मीन : सितारा धन लाभ वाला, कारोबारी टूरिंग करना या टूरिंग का प्रोग्राम बनाना फ्रूटफुल रहेगा, मान-सम्मान की प्राप्ति।