Monday, February 16, 2026
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UGC क्या है? नए नियम को लेकर देशभर में क्यों मचा है बवाल, सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा विरोध?

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नेशनल डेस्कः देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक नया नियम इन दिनों सियासत, समाज और सोशल मीडिया—तीनों जगह चर्चा और विवाद का बड़ा कारण बन गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ को लेकर जहां एक तरफ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में इसका कड़ा विरोध भी शुरू हो गया है।

खास तौर पर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठन, कुछ धार्मिक और सामाजिक नेता इस नियम पर सवाल उठा रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।

UGC क्या है और उसका नया रेगुलेशन क्या है?

UGC (University Grants Commission) देश में उच्च शिक्षा से जुड़ी सबसे अहम संस्था है।
इसकी जिम्मेदारी है:

  • विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की गुणवत्ता तय करना
    • उन्हें मान्यता और फंडिंग देना
    • छात्रों और शिक्षकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना

    इसी UGC ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। UGC का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य- कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना, सभी वर्गों के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सुरक्षित, समान और सम्मानजनक माहौल देना है।

    नए कानून में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?

    अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें, मुख्य रूप से SC (अनुसूचित जाति) और ST (अनुसूचित जनजाति) तक सीमित मानी जाती थीं। नए नियम में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी साफ तौर पर इस दायरे में शामिल कर लिया गया है।

    इसका मतलब अब OBC छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ हुए किसी भी तरह के भेदभाव, उत्पीड़न या अपमान की आधिकारिक शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

    हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में क्या करना होगा अनिवार्य?

    नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में SC, ST और OBC के लिए ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ बनाना जरूरी होगा। यूनिवर्सिटी स्तर पर एक Equality Committee (समानता समिति) बनाई जाएगी।

    इस समिति में अनिवार्य रूप से शामिल होंगे:

    • OBC प्रतिनिधि
    • महिला प्रतिनिधि
    • SC और ST प्रतिनिधि
    • दिव्यांग वर्ग का प्रतिनिधि

    यह समिति हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट UGC को भेजी जाएगी। UGC का दावा है कि इससे शिकायतों की निगरानी बेहतर होगी,संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

    अगड़ी जातियों से जुड़े संगठन विरोध क्यों कर रहे हैं?

    नियम लागू होते ही देश के कई हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों में असंतोष देखने को मिला। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है। झूठी शिकायतों के जरिए अगड़ी जातियों के छात्र और शिक्षक
    फंसाए जा सकते हैं। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा, वैश्य संगठन ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)’ बनाई है, ताकि इस नियम के खिलाफ संगठित आंदोलन किया जा सके।

    उत्तर प्रदेश में मामला क्यों ज्यादा गरमाया?

    उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है। गाजियाबाद डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने खुले तौर पर UGC नियमों का विरोध शुरू कर दिया। वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन के लिए जा रहे थे लेकिन गाजियाबाद में ही
    पुलिस ने उन्हें रोककर नजरबंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जिससे विवाद और ज्यादा बढ़ गया।

    सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी है जंग?

    इस नियम को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो, पोस्ट और लाइव बहसों की बाढ़ आ गई है। अगड़ी जातियों से जुड़े कई यूट्यूबर, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और एक्टिविस्ट इसे “सवर्ण विरोधी कानून” बता रहे हैं। स्वामी आनंद स्वरूप के एक वीडियो में सवर्ण समाज से एकजुट होने की अपील के बाद बहस और तेज हो गई। वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय समर्थक, छात्र संगठन और एक्टिविस्ट इसे बराबरी, सम्मान और भेदभाव खत्म करने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।

    UGC के आंकड़े क्या कहते हैं?

    UGC ने संसद और सुप्रीम कोर्ट में जो आंकड़े पेश किए हैं, उनके मुताबिक पिछले 5 सालों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की बढ़ोतरी हुई है।

    आंकड़े बताते हैं:

    • 2019-20 में: 173 शिकायतें
    • 2023-24 में: 378 शिकायतें

    देशभर के 704 विश्वविद्यालयों, 1553 कॉलेजों से कुल 1160 शिकायतें सामने आईं। UGC इन आंकड़ों को नए नियम के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क के तौर पर पेश कर रहा है।

    सवर्ण वर्चस्व बनाम सामाजिक न्याय की बहस

    आलोचकों का कहना है कि यह कानून सवर्ण समाज को निशाना बनाता है। समर्थकों का तर्क है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में वंचित वर्गों की भागीदारी अब भी 15% से कम है। SC-ST अत्याचार निवारण कानून को लागू हुए 36 साल हो चुके हैं, फिर भी भेदभाव खत्म नहीं हुआ। इसी वजह से वे UGC के इस कदम को जरूरी और समयानुकूल सुधार मानते हैं।

    आगे क्या असर पड़ेगा?

    UGC का यह नया रेगुलेशन अब सिर्फ शिक्षा से जुड़ा मामला नहीं रहा बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस बन चुका है। यूपी चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा और ज्यादा तेज हो सकता है। आने वाले महीनों में इसका असर कैंपस, सड़क और चुनावी राजनीति तीनों जगह साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।

ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में तैनात किया एयरक्राफ्ट कैरियर, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

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इंटरनेशनल डेस्कः ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्वी समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है। अमेरिका ने सोमवार को बताया कि उसका एक शक्तिशाली नौसैनिक स्ट्राइक ग्रुप, जिसकी अगुवाई एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln कर रहा है, मध्य पूर्व के जलक्षेत्र में तैनात कर दिया गया है। यह तैनाती ऐसे समय पर हुई है, जब ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की, तो वह जोरदार जवाब देगा।

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन और भारी हिंसा

ईरान में दिसंबर के अंत से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन महंगाई और आर्थिक समस्याओं को लेकर हुए थे, लेकिन 8 जनवरी के बाद यह आंदोलन इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। कई दिनों तक सड़कों पर भारी भीड़ देखने को मिली।

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए अभूतपूर्व हिंसा का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने इंटरनेट बंद होने की स्थिति में सीधे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। ईरान में यह इंटरनेट शटडाउन पिछले 18 दिनों से जारी है, जो अब तक का सबसे लंबा ब्लैकआउट माना जा रहा है।

मरने वालों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे

अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन Human Rights Activists News Agency (HRANA) ने बताया कि अब तक 5,848 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें 209 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। संगठन का कहना है कि वह अभी 17,091 और संभावित मौतों की जांच कर रहा है, यानी असली आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा हो सकता है।

HRANA के अनुसार, अब तक 41,283 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, ईरान सरकार ने पहली बार आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए कहा कि 3,117 लोगों की मौत हुई है। सरकार का दावा है कि इनमें से ज्यादातर सुरक्षाकर्मी या फिर “दंगाइयों” की हिंसा में मारे गए आम नागरिक थे। इंटरनेट निगरानी संस्था NetBlocks ने कहा है कि इंटरनेट बंद होने की वजह से असली हालात दुनिया के सामने नहीं आ पा रहे हैं और सरकार अपने पक्ष का प्रचार कर रही है।

अमेरिका की सैन्य तैनाती और ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को चेतावनी दे चुके हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि अमेरिका क्षेत्र में एक “भारी भरकम नौसैनिक बेड़ा” भेज रहा है, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। अब USS Abraham Lincoln के पहुंचने से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य ताकत काफी बढ़ गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह स्ट्राइक ग्रुप “मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने” के लिए तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि अमेरिका ने जून में इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ 12 दिन चले युद्ध में समर्थन किया था। हालांकि हाल में ट्रंप ने सीधे सैन्य कार्रवाई से थोड़ा पीछे हटने के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने इस विकल्प को कभी पूरी तरह खारिज नहीं किया।

ईरान की सख्त चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि किसी भी हमले का “व्यापक और पछतावा कराने वाला जवाब” दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं पर पूरा भरोसा रखता है और किसी भी दबाव से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने एयरक्राफ्ट कैरियर की ओर इशारा करते हुए कहा, “ऐसे युद्धपोतों की मौजूदगी ईरान की अपने देश की रक्षा करने की दृढ़ता को कमजोर नहीं कर सकती।”

तेहरान में अमेरिका विरोधी संदेश

ईरान की राजधानी तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर में अमेरिका विरोधी एक नया होर्डिंग लगाया गया है, जिसमें एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को नष्ट होते हुए दिखाया गया है। इस पर अंग्रेज़ी में लिखा है— “If you sow the wind, you will reap the whirlwind.” (अगर आप हवा बोएंगे, तो तूफान काटेंगे।) ईरानी नौसेना प्रमुख शहराम ईरानी ने कहा कि ईरान की नौसैनिक शक्ति सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने वाली ताकत है।

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और वैश्विक चिंता

लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में रैली निकाली। संगठन के नेता नईम कासेम ने चेतावनी दी कि “अगर इस बार ईरान पर युद्ध थोपा गया, तो पूरा क्षेत्र आग में झुलस जाएगा।” वहीं, ईरान के पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने साफ किया है कि वह अपने क्षेत्र से ईरान पर किसी भी हमले की अनुमति नहीं देगा, जबकि वहां अमेरिका का एक बड़ा एयरबेस मौजूद है।

यूरोप से भी सख्त रुख की मांग

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने यूरोपीय संघ से मांग की है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए, जैसा कि अमेरिका और कनाडा पहले ही कर चुके हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की भारी मौतें इस पर कड़ा कदम उठाने की मांग करती हैं।

Bank Strike: बैंक यूनियंस की हड़ताल आज…जानें कौन-कौन से बैंक रहेंगे बंद, ATM से लेकर किन सेवाओं पर क्या असर

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नेशनल डेस्कः अगर आप 27 जनवरी (मंगलवार) को बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम करने की सोच रहे हैं, तो पहले यह खबर जरूर पढ़ लें। आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस हड़ताल का ऐलान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने किया है।

क्यों हो रही है बैंक हड़ताल?

बैंक यूनियनें लंबे समय से 5-डे वर्क वीक (हफ्ते में 5 दिन काम और 2 दिन छुट्टी) की मांग कर रही हैं। यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 में भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ हुए वेतन संशोधन समझौते में सभी शनिवारों को छुट्टी देने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। इसी देरी और सरकार से मंजूरी न मिलने के विरोध में आज देशव्यापी हड़ताल की जा रही है।

अभी बैंकों में क्या व्यवस्था है?

फिलहाल बैंक कर्मचारियों को हर महीने दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है। बाकी शनिवारों में बैंक खुले रहते हैं, यानी महीने में दो हफ्ते कर्मचारियों को 6 दिन काम करना पड़ता है। यूनियनों का कहना है कि यह व्यवस्था अब समय के हिसाब से ठीक नहीं है।

किन बैंकों पर पड़ेगा असर?

इस हड़ताल में देश के लगभग सभी सरकारी बैंक शामिल हैं, जैसे:

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
  • बैंक ऑफ बड़ौदा
  • बैंक ऑफ इंडिया
  • केनरा बैंक
  • इंडियन बैंक
  • अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक

कई शहरों में बैंक कर्मचारियों ने पहले ही प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।

क्या काम के घंटे कम हो जाएंगे?

यूनियनों ने साफ कहा है कि काम के घंटे कम नहीं होंगे। उनका प्रस्ताव है कि सोमवार से शुक्रवार तक कर्मचारी रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करेंगे। ताकि साप्ताहिक कार्य समय में कोई कमी न आए। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन पिछले दो साल से कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ।

यूनियनों का तर्क क्या है?

यूएफबीयू का कहना है कि आरबीआई, एलआईसी, स्टॉक एक्सचेंज और ज्यादातर सरकारी कार्यालय पहले से ही 5 दिन का कार्य सप्ताह अपनाते हैं। ऐसे में बैंकों में अब भी 6 दिन काम कराने का कोई ठोस कारण नहीं है।

हड़ताल कब से कब तक रहेगी?

यह हड़ताल 26 जनवरी की आधी रात से शुरू होकर 27 जनवरी की आधी रात तक चलेगी। इस दौरान कैश लेन-देन, चेक क्लीयरेंस, ब्रांच से जुड़े काम प्रभावित रहने की संभावना है।

सरकार से मंजूरी क्यों अटकी?

यूएफबीयू ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत, हड़ताल की सूचना पहले ही IBA, मुख्य श्रम आयुक्त और वित्तीय सेवा विभाग को दे दी थी। यूनियनों के मुताबिक 7 दिसंबर 2023 को IBA और UFBU में समझौता हुआ। 8 मार्च 2024 को संयुक्त नोट भी जारी किया गया। लेकिन अब तक सरकार की अंतिम मंजूरी नहीं मिली।

9 महीने से बातचीत बेनतीजा

यूनियनों का कहना है कि 2015 में दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी लागू हुई। उसके बाद कई दौर की बातचीत हुई लेकिन सभी शनिवारों की छुट्टी पर सहमति नहीं बन पाई। पिछले 9 महीनों से कोई ठोस पहल नहीं होने के कारण यूनियनों को फिर से हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

बिना ऑक्सीजन माउंट एल्ब्रस पर 24 घंटे : रोहताश खिलेरी ने रचा विश्व इतिहास, भारत का नाम किया रोशन

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इंटरनेशनल डेस्कः भारत के लिए यह बेहद गर्व का पल है। भारतीय पर्वतारोही रोहताश खिलेरी ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो आज तक दुनिया में कोई नहीं कर पाया। उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस पर बिना ऑक्सीजन के पूरे 24 घंटे बिताकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। ऐसा करने वाले वे दुनिया के पहले इंसान बन गए हैं।

माउंट एल्ब्रस: जहां जानलेवा है मौसम

माउंट एल्ब्रस रूस की काकेशस पर्वतमाला में स्थित है। इसकी ऊंचाई 18,510 फीट है और यह न सिर्फ यूरोप की सबसे ऊंची चोटी है, बल्कि दुनिया की सेवन समिट्स (सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियां) में भी शामिल है।
यह पर्वत अपने भयानक ग्लेशियरों, तेज तूफानी हवाओं और बेहद कम तापमान के लिए जाना जाता है।

सोशल मीडिया पर साझा की उपलब्धि

रोहताश खिलेरी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने बताया कि बिना ऑक्सीजन के शिखर पर 24 घंटे रुकना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह 8 साल की मेहनत, दर्द, इंतजार और जुनून का नतीजा है।

उन्होंने लिखा, “विश्व रिकॉर्ड | यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर बिना ऑक्सीजन के 24 घंटे रहने वाला पहला इंसान। ‘यूरोप की चोटी पर 24 घंटे!’ यह पोस्ट लिखना आसान नहीं है, क्योंकि इसके पीछे 8 साल का दर्द, इंतजार और एक पागलपन भरा सपना छुपा है।”

जानलेवा ठंड में अकेले जमे रहे

खिलेरी ने बताया कि वे अकेले ही चढ़े और अकेले ही शिखर पर रुके। इतनी खतरनाक ठंड में कोई भी उनके साथ रुकने को तैयार नहीं था। उन्होंने लिखा:“मैं अकेला ही चढ़ गया और अकेला ही रुका। इस हड्डियां तोड़ देने वाली ठंड में कोई भी मेरे साथ रुकने को तैयार नहीं था।”

मौसम की हालत बेहद खतरनाक

माउंट एल्ब्रस पर मौसम उस समय बेहद भयावह था:

  • हवा की रफ्तार: 50–60 किमी प्रति घंटा
  • तापमान: -40 डिग्री सेल्सियस
  • विंड चिल: -50 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे

ऐसे हालात में बिना ऑक्सीजन जिंदा रहना ही अपने आप में असाधारण है।

यह पहली कोशिश नहीं थी

रोहताश खिलेरी ने बताया कि यह उनका पहला प्रयास नहीं था। उन्होंने 2018 से पहले कई बार चढ़ाई की कोशिश की, लेकिन कभी खराब मौसम तो कभी आपात हालात के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

‘पहाड़ ने उंगलियां ले लीं, सपना नहीं’

इस सफर की भारी कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी। पहले के प्रयासों में उन्हें फ्रॉस्टबाइट हो गया था, जिसके कारण उनकी दो उंगलियां कट गईं। उन्होंने भावुक होकर लिखा: “फ्रॉस्टबाइट में मेरी दो उंगलियां चली गईं, लेकिन मेरा सपना नहीं टूटा।”

24 घंटे का प्रवास सबसे बड़ी परीक्षा

खिलेरी ने बताया कि शिखर पर 24 घंटे रहना उनके जीवन की सबसे कठिन परीक्षा थी। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय एवरेस्ट पर किए गए प्रशिक्षण, वर्षों की मेहनत और अपनों के समर्थन को दिया।

शिखर से लहराया तिरंगा

अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें भारी बर्फबारी, तेज हवाएं और शिखर पर लहराता हुआ भारतीय तिरंगा दिखाई दे रहा है। वीडियो में वे नीचे उतरते हुए यह चेतावनी भी देते नजर आते हैं कि मौसम और ज्यादा खराब होने वाला है। उनकी भौहें और मूंछें बर्फ से जमी हुई साफ दिखाई देती हैं।

सोशल मीडिया पर गर्व और सम्मान

इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। हजारों लोग उनकी हिम्मत और जज्बे की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा: “हम आपके जोश और धैर्य को सलाम करते हैं। हर भारतीय को आप पर गर्व होना चाहिए।” दूसरे ने कहा: “भाई, आज पूरा देश आप पर गर्व कर रहा है।”

माउंट एल्ब्रस पर भारतीयों की बढ़ती उपलब्धियां

रोहताश खिलेरी की यह उपलब्धि माउंट एल्ब्रस पर भारतीयों की बढ़ती कामयाबियों की कड़ी में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है:

  • जून 2025: पंजाब के 6 साल के तेघबीर सिंह सबसे कम उम्र में एल्ब्रस फतह करने वाले बने (उम्र: 6 साल 9 महीने 4 दिन)
  • 2025: नरेंद्र यादव एल्ब्रस पर तीन बार चढ़ाई करने वाले पहले भारतीय बने
  • 15 अगस्त 2024: अंकित मलिक ने शिखर पर 78 मीटर लंबा भारतीय झंडा फहराया, जो किसी एकल पर्वतारोही द्वारा फहराया गया सबसे बड़ा तिरंगा था
  • अगस्त 2021: महाराष्ट्र के शरद कुलकर्णी 59 वर्ष की उम्र में एल्ब्रस पर चढ़ने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय बने

Daily horoscope : भाग्य का मिलेगा साथ, आज इन राशियों की चमकेगी किस्मत

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मेष : व्यापारिक कामों के लिए आपके यत्न अच्छा रिजल्ट देंगे, सफलता साथ देगी, मन सैर-सफर के लिए राजी रहेगा, इज्जत-मान की प्राप्ति।

वृष: उलझनों-झमेलों के कारण आपकी समस्त प्लानिंग के बिगड़ने का डर, लिखत-पढ़त का काम भी आंखें खोलकर फाइनल करें।

मिथुन: मिट्टी, रेता, बजरी, टिम्बर तथा कंस्ट्रक्शन मैटीरियल का काम करने वालों को अपनी कामकाजी भागदौड़ की अच्छी रिटर्न मिलेगी।

कर्क: किसी सरकारी काम में पेश आ रही किसी मुश्किल को टैकल करने के लिए सितारा मजबूत, बड़े लोग भी मेहरबान रहेंगे।

सिंह : मजबूत सितारा आपको हर मोर्चा पर हावी, प्रभावी, विजयी रखेगा, शत्रु भी आपकी पकड़ में रहेंगे, पॉजिटिव सोच रहेगी।

कन्या : खान-पान अटैंटिव रह कर करें, क्योंकि सितारा सेहत के लिए ठीक नहीं, सफर भी टाल देना सही रहेगा।

तुला: अर्थ तथा कारोबारी दशा अच्छी, कोशिशों, प्रोग्रामों में कामयाबी मिलेगी, शुभ कामों में ध्यान, वैसे भी हर तरह से बेहतरी होगी।

वृश्चिक: विरोधियों को कमजोर समझने की भूल करना किसी समय महंगा पड़ सकता है, इसलिए उनसे फासला रखें।

धनु : किसी फैमिली समस्या को सुलझाने के लिए संतान का सुपोर्टिव रुख हैल्पफुल हो सकता है, मान-सम्मान की प्राप्ति।

मकर: प्रॉपर्टी के कामों के लिए आपकी भागदौड़ अच्छा नतीजा देगी, शत्रु आपके समक्ष टिक न सकेंगे।

कुंभ: मजबूत सितारा आपको हावी, प्रभावी रखेगा, बड़े लोग तथा कामकाजी साथी आपका लिहाज करेंगे तथा बात ध्यान से सुनेंगे।

मीन : सितारा धन लाभ वाला, कारोबारी टूरिंग करना या टूरिंग का प्रोग्राम बनाना फ्रूटफुल रहेगा, मान-सम्मान की प्राप्ति।

Lucknow: सीएम योगी आज 35 पुलिसकर्मियों को करेंगे सम्मानित, गणतंत्र दिवस के अवसर पर कई पाएंगे प्रशस्ति पत्र

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सीएम योगी सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर विधान भवन के समक्ष ध्वजारोहण के बाद अदम्य साहस का परिचय देने वाले 10 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक देकर सम्मानित करेंगे। इसके अलावा 25 पुलिसकर्मियों को उत्कृष्ट एवं सराहनीय सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र देंगे।

मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित पुलिसकर्मियों को पदक, प्रशस्ति पत्र तथा एक हजार रुपये प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि दी जागी। वहीं मुख्यमंत्री प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र के साथ 25 हजार रुपये की एकमुश्त नकद धनराशि दी जाएगी।इन्हें मिलेगा मुख्यमंत्री वीरता पदक बुलंदशहर के निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह राठौर, एसटीएफ के निरीक्षक अमित, उपनिरीक्षक केशव शांडिल्य, राहुल कुमार, घनश्याम यादव, मुख्य आरक्षी रणधीर सिंह, आरक्षी अमित त्रिपाठी, मथुरा के उपनिरीक्षक अजय कुमार वर्मा, गाजियाबाद के निरीक्षक मनीष बिष्ट व मैनपुरी के उपनिरीक्षक अवनीश कुमार त्यागी।

 इन्हें मिलेगा मुख्यमंत्री प्रशस्ति पत्र
उपनिरीक्षक अमित कुमार, आरक्षी शेखर वर्मा, सरफराज अहमद बरेली), उप निरीक्षक पीयूष  कुमार लखनऊ कमिश्नरेट, मुख्य आरक्षी सुरेंद्र कुमार, आरक्षी पवन भाटी, सोनू भाटी मथुरा, एसटीएफ के मुख्य आरक्षी बैजनाथ राम, आलोक रंजन, शिवानंद शुक्ला, आरक्षी विनोद कुमार यादव, आगरा कमिश्नरेट के निरीक्षक नीरज कुमार शर्मा, जयवीर सिंह, मैनपुरी के आरक्षी नवनीत कुमार, मथुरा जीआरपी के निरीक्षक विकास सक्सेना, मुख्य आरक्षी लोकेश कुमार, जौनपुर के निरीक्षक आदेश त्यागी, मुख्य आरक्षी संदीप कुमार सिंह, आज़मगढ़ के मुख्य आरक्षी सुरेंद्र यादव, अभिमीत कुमार तिवारी, आरक्षी सन्नी कुमार, संभल के उपनिरीक्षक रविन्द्र सिंह, एटीएस के निरीक्षक भारत भूषण तिवारी, मुख्य आरक्षी संजय कुमार, मदन कुमार पासवान।

Republic Day: राजधानी में सीएम योगी ने फहराया तिरंगा, धूमधाम से मनाया जा रहा 77वां गणतंत्र दिवस

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राजधानी लखनऊ में 77वां गणतंत्र दिवस रंगारंग कार्यक्रमों के बीच धूमधाम से मना जा रहा है। इस राष्ट्रीय पर्व पर सीएम योगी ने कालीदास मार्ग स्थित सरकारी आवास में तिरंगा फहराया। इसके बाद झंडे को सलामी दी। उन्होंने देश व प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर सीएम ने कहा कि 76 वर्षों इस यात्रा में अनेक उतार चढ़ाव हमारे इस संविधान ने देखे हैं। इस सबके के बावजूद एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्पों के अनुरूप उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक प्रत्येक भारतवासी के गौरव और अखंडता के लक्ष्य को बढ़ाते हुए एक नए भारत का दर्शन कर रहे हैं। इस मौके पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करता हूं। जिनके नेतृत्व में भारत ंमें स्वाधीनता आंदोलन ने स्मृतियां प्राप्त कीं।

सीएम ने प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, वर्तमान भारत के शिल्पी लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल, क्रांतिकारियों के सिरमौर नेता सुभाषचंद्र बोष समेत भारत के उन महान सपूतों को भी याद किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। देश को स्वतंत्र कराया। 

यूपी: प्रदेश में बजट की तैयारी हुई शुरू, सीएम बोले- आम आदमी की जिंदगी में बदलाव लाने वाला हो बजट

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ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को सरकार से बड़ी अपेक्षाएं हैं और उन पर खरा उतरना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी बजट का केंद्र लोककल्याण होना चाहिए। गरीब, किसान, श्रमिक, महिला, युवा और वंचित वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही बजट की मूल भावना होनी चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री के अधीन विभागों तथा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के विभागों के बजट प्रस्तावों, नई मांगों और केंद्रीय बजट 2026-27 के संदर्भ में राज्य सरकार के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक फरवरी को केंद्र सरकार का आम बजट आएगा, उसमें उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रावधानों का अध्ययन कर विभागीय बजट प्रस्तावों में आवश्यक संशोधन किए जाएं। उन्होंने  बताया गया कि 2026-27 के प्रस्तावों में लोककल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता, सामाजिक सुरक्षा के विस्तार और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रावधानों को इस दृष्टि से तैयार किया जा रहा है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को मिले समान लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था ही विकास और निवेश की आधारशिला है। उन्होंने पुलिस, न्याय और प्रशासन से जुड़े प्रस्तावों को जन-सुरक्षा, त्वरित न्याय और नागरिक विश्वास बढ़ाने वाला बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अवसंरचना विकास पर जोर देते हुए कहा कि सड़क, भवन और अन्य परियोजनाओं से कनेक्टिविटी, औद्योगिक गतिविधियां और रोजगार बढ़ें, ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को समान लाभ मिले। वित्तीय अनुशासन पर बल देते हुए उन्होंने संसाधनों के प्रभावी और समयबद्ध उपयोग के निर्देश दिए।

UP News: गणतंत्र दिवस पर यूपी के 18 पुलिसकर्मी राष्ट्रपति पदक से होंगे सम्मानित, पढ़ें पूरा अपडेट

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गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश पुलिस के 18 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति का वीरता पदक (गैलेंट्री अवार्ड) देकर सम्मानित किया जाएगा।

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इसके इलावा विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (PSM) से 04 और सराहनीय सेवा के लिए पदक (MSM) से 68 पुलिसकर्मी सम्मानित होंगे। 

बेला रजबहा उफनाने से 40 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न

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बेला। गांव झबरा में शुक्रवार की रात क्षेत्र के रजबहे का पानी ओवरफ्लो होने से किसानों की लगभग 40 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। इससे किसानों के सामने फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है।किसानों ने बताया कि कन्नौज की हजारिया नहर से गुनहा पुल के पास से निकला रजबहा झबरा गांव से होते हुए पांडु नदी में आता है। कई वर्षों से उसकी सफाई न होने के कारण रजबहा पूरी तरह बंद हो गया है। कहीं झाड़ियां हैं तो कहीं कुछ किसानों ने ही इसे अवरुद्ध कर दिया है। इससे पानी छोड़े जाने पर रजबहा उफना जाता है।

यही कारण है कि बीतीरात पानी ओवरफ्लो होने से झबरा निवासी रोहित कुमार की 10 बीघा, हिमांशु आजाद की छह बीघा, गौरव की 11 बीघा, यदुनाथ की सात बीघा व शिवम की सात बीघा में खडी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई।

किसानों ने स्वयं रजबहा को बंद कर खेतों में आ रहे पानी को रोका। सिंचाई विभाग के अभियंता रमाकांत ने बताया कि रजबहा कन्नौज क्षेत्र में आता है।