UP Desk : डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर ऑफिस वर्क, सोशल मीडिया से निजी डाटा तक-हर जरूरी काम अब मोबाइल पर निर्भर है। लेकिन इसी सुविधा के बीच एक छोटी-सी लापरवाही भी किसी व्यक्ति को गंभीर कानूनी संकट में डाल सकती है।
फोन का डेटा बनेगा डिजिटल सबूत
साइबर विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार, मोबाइल फोन में मौजूद डेटा अब मजबूत डिजिटल सबूत माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति के फोन में गैरकानूनी या आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है, तो कई मामलों में बिना औपचारिक शिकायत के भी पुलिस कार्रवाई संभव है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि फोन में किस तरह का कंटेंट रखना जोखिम भरा हो सकता है।
किन चीजों से बढ़ता है कानूनी खतरा?
सबसे बड़ा जोखिम गैरकानूनी डिजिटल कंटेंट से जुड़ा है। इसमें शामिल हैं:
*आपत्तिजनक फोटो और वीडियो
*बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री
*अवैध हथियारों से जुड़ी जानकारी
*ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े मैसेज
*फर्जी दस्तावेज
*हैकिंग टूल्स या संदिग्ध सॉफ्टवेयर
कानून के तहत ऐसे कंटेंट को केवल बनाना ही नहीं, बल्कि डाउनलोड करना, सेव करना या फॉरवर्ड करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
जांच का दायरा हुआ व्यापक
साइबर सेल अब केवल फोन की गैलरी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां क्लाउड बैकअप, चैट हिस्ट्री और डिलीट किए गए डेटा तक की फॉरेंसिक जांच करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनजान नंबर या संदिग्ध स्रोत से आई फाइलों को सेव करना या शेयर करना खतरे से खाली नहीं है।
फेक न्यूज और भड़काऊ पोस्ट भी अपराध
कानूनी जोखिम केवल फोटो-वीडियो तक सीमित नहीं है। अफवाह फैलाने वाले मैसेज, नफरत भड़काने वाली पोस्ट, फेक न्यूज या भड़काऊ कंटेंट शेयर करना भी गंभीर अपराध माना जा सकता है।
संदिग्ध ऐप्स से भी सावधान
फर्जी लोन ऐप, जासूसी या स्क्रीन रिकॉर्डिंग के नाम पर चलने वाले ऐप्स और ठगी से जुड़े सॉफ्टवेयर भी उपयोगकर्ताओं को मुश्किल में डाल सकते हैं। कई बार लोग आसान कमाई या लालच में ऐसे ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, जो बाद में उनके खिलाफ डिजिटल सबूत बन जाते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों के मुताबिक, अनजान ऐप्स को तुरंत हटाएं, संदिग्ध कंटेंट सेव या शेयर न करें, अनवेरिफाइड फाइल्स डाउनलोड करने से बचें, फोन की सिक्योरिटी सेटिंग्स अपडेट रखें। थोड़ी-सी सतर्कता आपको बड़ी कानूनी परेशानी से बचा सकती है।


