डाक विभाग के सर्वर अपग्रेडेशन व आईटी एप्लीकेशन के नए वर्जन से संबंधित कार्य के चलते एक से चार अगस्त तक डाक सेवाएं बाधित रहेंगी। इस दौरान स्पीड पोस्ट, पंजीकृत डाक, पार्सल व बचत बैंक सेवाओं के काम नहीं होंगे।जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर ने बताया कि डाक विभाग अगली पीढ़ी के एप्लीकेशन लॉन्च कर रहा है, जो डिजिटल उत्कृष्टता की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्नत प्रणाली, अपग्रेडेड सर्वर व सॉफ्टवेयर चार अगस्त से जीपीओ में लागू हो जाएगा।
यूपी में जनगणना: जो जहां पर रह रहा, वह वहीं पर गिना जाएगा, 1 फरवरी 2027 से 28 फरवरी की अवधि में होगी गिनती
प्रदेश के जिला जनगणना और चार्ज अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि 1 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 की अवधि में जो जहां होगा, वहीं उसकी गिनती की जाएगी।जनगणना निदेशालय और राजस्व परिषद ने संयुक्त रूप से यह ट्रेनिंग दी। अधिकारियों को संबंधित नियमों से अवगत कराया। यहां बता दें कि सभी एडीएम (वित्त) को जिला जनगणना अधिकारी बनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में तहसीलदार और शहरी क्षेत्रों में अधिशासी अधिकारी (ईओ) जनगणना चार्ज अधिकारी बनाए गए हैं।यूपी में 31 दिसंबर तक सभी परिवारों का चिह्नांकन किया जाएगा। जनगणना कर्मियों की ड्यूटी को भी तब तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा। जो जेल में है, उसे जेल में गिना जाएगा और जो मानसिक अस्पताल में है, उसे अस्पताल में गिना जाएगा। गणना करने वाले कर्मी प्रत्येक गांव और मोहल्ले में जाएंगे। निदेशक (जनगणना) शीतल वर्मा और राजस्व परिषद के विशेष कार्याधिकारी राजकुमार द्विवेदी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाई।
नगर निगमों में आयुक्त होंगे नोडल
जिलों में जनगणना के लिए डीएम नोडल बनाए गए हैं। जबकि, नगर निगम क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी नगर आयुक्तों की होगी। जहां नगर निगम नहीं है, उन जिलों में डीएम ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जनगणना के लिए नोडल अफसर होंगे।
Lucknow: ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा क्यूआर कोड से होंगे लैस, स्कैन करते ही सामने आ जाएगी चालक की पूरी डिटेल
पब्लिक ट्रांसपोर्ट (ऑटो, टेंपो और ई-रिक्शा) अब क्यूआर कोड से लैस होंगे। इसे स्कैन कर यात्री चंद सेकेंड में वाहन चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर पता कर सकेंगे। यही नहीं इस प्रक्रिया के तहत जो अपराधी किस्म के चालक होंगे, वह वाहन नहीं चला पाएंगे, क्योंकि उनका पुलिस सत्यापन नहीं हो सकेगा। चालकों को ड्रेस कोड का भी पालन करना होगा।यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से मंगलवार से प्रोजेक्ट सेफ राइड अभियान की शुरुआत की है। डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित ने बताया कि सभी वाहन चालकों को ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये रजिस्ट्रेशन करना होगा। जो विवरण रजिस्ट्रेशन के जरिये भरा जाएगा, उसका सत्यापन पुलिस और परिवहन विभाग करेगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदक को मेसेज जाएगा। तब वह ऑनलाइन ही क्यूआर कोड डाउनलोड कर सकेगा। यही क्यूआर कोड वाहन पर चस्पा करना होगा।
वाहन का रजिस्ट्रेशन www.lucknowpolice.up.gov.in/eri ckshaw वेबसाइट के जरिये किया जा सकता है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए वैध रजिस्ट्रेशन नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस व फिटनेस सर्टिफिकेट का होना आवश्यक है। वाहन स्वामी की डिटेल, फोटो, चालक का पहचान पत्र, फोटो भी होना चाहिए। अगर वाहन दो चालक चलाते हों तो मालिक के साथ दोनों का विवरण देना होगा। वाहन मालिक व चालक को चरित्र प्रमाण पत्र भी अपलोड करना होगा, जो यूपी कॉप ऐप या
www.lucknowpolice.up.gov.in वेबसाइट से आवेदन कर बनवा सकते हैं।
अवैध वाहनों पर लगेगी रोक: एडीसीपी ट्रैफिक अशोक कुमार ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अगर वाहन चालक या मालिक पर आपराधिक मुकदमे आदि पाए जाते हैं तो उस आवेदन को तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा वर्तमान में तमाम अवैध ई रिक्शा चल रहे हैं, इस प्रक्रिया की वजह से इन अवैध वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा।
31 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन, एक सितंबर से कार्रवाई
रजिस्ट्रेशन करवाकर क्यूआर कोड लेने का वक्त एक महीना तय किया गया है। बुधवार से 31 अगस्त तक वाहन स्वामी रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इस बीच उनको क्यूआर कोड उपलब्ध करा दिया जाएगा। एक सितंबर से पुलिस और परिवहन विभाग अभियान शुरू करेंगे। जिस वाहन पर क्यूआर कोड नहीं होगा, उन वाहनों को सीज किया जाएगा।
Lucknow: दोस्तों के साथ शराब पीने गए ट्रैक्टर चालक की हत्या, घर में खून से लथपथ हालत में मिला शव
लखनऊ के माल इलाके के मडवाना गांव में मंगलवार की आधी रात के बाद घर के बाहर बरामदे में फर्श पर सो रहे ट्रैक्टर चालक राजू गौतम (45) की गर्दन पर कई वार कर हत्या कर दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच के बाद शव पीएम के लिये भेजने के साथ तीन लोगों को हिरासत में लिया है।फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंच कर सुबूत जुटाए। पत्नी ममता ने बताया मंगलवार शाम आठ बजे पति गांव के बहादुर, अमित और अशोक के साथ शराब पीने गए थे। वहां किसी बात पर गाली गलौज हो गई। इसकी जानकारी पति ने उसे घर आकर दी थी। अनहोनी की आशंका के कारण वह रात बारह बजे तक जागती रही। उसके बाद उसे नींद आ गई। सुबह खून से लथपथ पति का शव मिला। गर्दन पर कई घाव थे। इंस्पेक्टर नवाब अहमद ने बताया तहरीर के आधार पर बहादुर, अमित और अशोक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर अन्य विधिक कार्यवाही की जा रही है।
गांव के बहादुर ने बताया वह सुबह पांच बजे शौच के लिए उनके दरवाजे के पास से गुजर रहा था। वह खून से लथपथ पड़े थे। गर्दन से खून रिस रहा था। उनके घर के सभी लोग उस समय तक सो रहे थे।
परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
परिवार में पत्नी ममता, पुत्र सुजीत, मंगलवार को ससुराल से आई बेटी काजल, कामिनी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है।
बाप बेटा मजदूरी से चला रहे थे घर
पत्नी ममता ने बताया काफी दिन पहले जमीन दबंगो ने हथिया ली थी। अब बाप बेटे ट्रैक्टर चला कर तथा मजदूरी कर घर चला रहे थे। बेटी और बेटा का ब्याह करना बाकी है।
राजधानी लखनऊ पड़ताल में खुलासा : निजी एंबुलेंस वसूल रहीं फ्लाइट से महंगा किराया, मरीजों की दलाली का चल रहा सिंडिकेट
राजधानी लखनऊ में निजी एंबुलेंस की सेवा हवाई जहाज से कम नहीं। सुविधाएं भले हवाई जहाज की न हों, किराया उससे भी ज्यादा है। लखनऊ से दिल्ली तक लगभग 550 किमी दूरी के लिए भले ही आपको आठ से 10 हजार रुपये में रिटर्न टिकट मिल जाएगा। इसी दूरी के लिए निजी एंबुलेंस को 14 से 22 हजार रुपये देने होंगे। साधारण से लेकर लाइफ सपोर्ट सुविधाओं वाली एंबुलेंस में ये रेट अलग-अलग हो सकते हैं।आपको शायद इस बात पर आसानी से यकीन न हो, लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में ये स्याह सच सामने आया है। मंगलवार को तीन सरकारी अस्पतालों के बाहर मौजूद निजी एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए रेट की बात की गई, जिसकी दास्तां हूबहू है।
अजीतमल (औरैया) कोटा बैराज जुहीखा गांव में यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर
अजीतमल (औरैया)। कोटा बैराज से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी से यमुना नदी उफान पर है। मंगलवार को जुहीखा गांव में जलस्तर खतरे के निशान 113 मीटर को पार कर गया।वहीं यमुना किनारे बीहड़ पट्टी में बसे दर्जनों गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गौहानी कलां समेत कई गांव में पानी घुसने से उनका अन्य गांवों से संपर्क टूट गया है। सिकरोड़ी में भी पानी घुसने का खतरा है।जिला प्रशासन ने बाढ़ की चपेट में आने वाले गांवों के लोगों को गांव खाली कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने के निर्देश दिए हैं। राजस्व व विकास विभाग की टीम यमुना किनारे बसे गांवों पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं पुलिस भी मुस्तैद है। लोगों को बाढ़ के पानी से दूर रखा जा रहा है।
मंगलवार सुबह आठ बजे तक जुहीखा पुल के पास बनाए गए जल मापक प्वाइंट पर पानी 113.980 मीटर तक पहुंच गया। जबकि यहां खतरे का निशान 113 मीटर पर है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से गौहानी कलां संपर्क मार्ग पर पानी घुस गया है। इससे रपटा पुल डूब गया है। उसके ऊपर से पानी बह रहा है। इससे गांव का संपर्क अजीतमल व अन्य गांवों से कट गया है।
सिकरोड़ी पुल से होकर इटावा को जाने वाली सड़क के किनारे तक पानी पहुंच गया है। आशंका है कि अगर जलस्तर बढ़ता रहा तो इटावा को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग भी बंद हो जाएगा। यमुना किनारे बसे सिकरोड़ी, जुहीखा व बड़ेरा आदि गांवों के किनारे तक पानी पहुंच चुका है। इससे इन गांवों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है। गांव में निचले स्थानों पर रह रहे परिवार पलायन की तैयारी में हैं।
बाढ़ राहत चौकी बनाए गए प्राथमिक विद्यालय हनुमानगढ़ी पहुंचे अधिकारी
यमुना के बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए एसडीएम निखिल राजपूत व बीडीओ अतुल यादव ने मंगलवार को सिकरोड़ी व बड़ेरा गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ राहत चौकी बनाए गए प्राथमिक विद्यालय हनुमान गढ़ी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने तैनात लेखपालों को खराब हैंडपंप सही कराने, टैंकरों से पीने के पानी की सप्लाई कराने और बिजली व सफाई व्यवस्था ठीक कराने के आदेश दिए। उन्होंने सिकरोड़ी गांव का भी जायजा लिया। गांव के लोगों से शाम तक स्थिति को देखते हुए बाढ़ चौकियों एवं ऊंचे स्थानों पर पहुंचने के लिए तैयार रहने के लिए कहा।
गौहानी कलां मार्ग पर भरे पानी में चलेंगी दो नाव
एसडीएम ने गौहानी कलां मार्ग पर पानी को देखते हुए गांव आने-जाने के लिए दो नावों की व्यवस्था करने के आदेश दिए। एसडीएम निखिल राजपूत ने बताया कि यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पानी खतरे के निशान तक पहुंच गया है। अभी कुछ गांव के किनारे तक ही पानी पहुंचा है। लोगों से पानी बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए कहा गया है।
बाढ़ से इन गांवों में बढ़ रहा खतरा
तहसील अजीतमल में यमुना किनारे बसे ग्राम गौहानी कलां, बड़ेरा, सिकरोड़ी, जुहीखा, सिमार, गूंज, फरिहा, बीजलपुर, जाजपुर, असेवा, सड़रापुर, सिखरना, असेवटा, बंसियापुर, गौहानी खुर्द, मिश्रपुर मानिकचंद्र, भूरेपुर कला, पहाड़पुर व ततारपुर कलां में बाढ़ का खतरा है। साल 2019 व 2021 में यह गांव यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रभावित हुए थे। ज्यादा बारिश होने व कोटा बैराज से चंबल नदी में पानी छोड़े जाने से यमुना नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे खार व ऊंचे-नीचे टीलों के मध्य कटानों से होकर यमुना का पानी गांव की तरफ आकर सड़कों पर भर जाता है। इससे आवागमन अवरुद्ध हो जाता है।
बीते पांच सालों में हुई जनहानि
वर्ष 2019 में आई बाढ़ से ग्राम सिकरोड़ी, जुहीखा, गूंज व बड़ेरा समेत पांच गांवों की आबादी सर्वाधिक प्रभावित हुई थी। वर्ष 2019 की बाढ़ के दौरान एक ग्रामीण की मौत हुई थी। वर्ष 2021 में गौहानी कलां, बड़ेरा, सिकरोड़ी, जुहीखा, सिमार, गूंज, फरिहा, बीजलपुर, जाजपुर, असेवा व असेवटा समेत 11 गांवों की आबादी प्रभावित हुई थी।
कस्बा के पुरानी दिबियापुर मेंसबमर्सिबल का तार छूने से बालक की मौत
दिबियापुर। कस्बा के पुरानी दिबियापुर में शिवा पांडे (11) पुत्र राधामोहन पांडे सोमवार की रात नौ बजे के करीब घर में पानी भरने के लिए सबमर्सिबल चलाने गया था।बिजली का तार छू जाने से वह करंट की चपेट में आ गया। वह बुरी तरह झुलस गया। बेसुध पड़ा देख परिजन उसे दिबियापुर में एक निजी अस्पताल में ले गए।
सुधार न होता देख उसे मेडिकल कॉलेज ले गए। जहां डॉक्टर ने बालक को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने घटना को देर रात तक पुलिस को सूचना नहीं दी थी। (
Auraiya News: विशेषज्ञ का अभाव, हड्डी रोगी जा रहे मेडिकल कॉलेज
औरैया। शहर व आसपास 100 से ज्यादा गांवों के लिए 50 शैया जिला अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ा केंद्र है। बावजूद इसके अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से हड्डी रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है।यहां पर एक्सरे से लेकर प्लास्टर तक सभी संसाधन हैं, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। ऐसे में हड्डी रोगियों को 10 किमी दूर चिचौली मेडिकल कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ रही है।ऐसा नहीं है कि 50 शैया जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से इस कमी को लेकर ध्यान नहीं दिया गया। शासन को लगातार पत्राचार करते हुए डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन यह कागजी कवायद डेढ़ साल में भी इस कमी को दूर नहीं कर सकी है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में 500 से ज्यादा मरीज आते हैं। वहीं इमरजेंसी में हादसों में घायल होने वाले लोग भी पहुंचते हैं। इसके अलावा हड्डी व जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर बुजुर्ग भी पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में उन्हें जरूरी उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें मेडिकल कॉलेज चिचौली का रुख करना पड़ रहा है।
50 शैया जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। पत्राचार के बाद भी डॉक्टर को तैनाती नहीं मिल रही है। ऐसे में अब वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की तैयारी बनाई जा रही है। अजीतमल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय को दो दिन के लिए शहर के अस्पताल भेजा जाएगा।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ
Auraiya News: विशेषज्ञ का अभाव, हड्डी रोगी जा रहे मेडिकल कॉलेज
औरैया। शहर व आसपास 100 से ज्यादा गांवों के लिए 50 शैया जिला अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ा केंद्र है। बावजूद इसके अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से हड्डी रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है।यहां पर एक्सरे से लेकर प्लास्टर तक सभी संसाधन हैं, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। ऐसे में हड्डी रोगियों को 10 किमी दूर चिचौली मेडिकल कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ रही है।ऐसा नहीं है कि 50 शैया जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से इस कमी को लेकर ध्यान नहीं दिया गया। शासन को लगातार पत्राचार करते हुए डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन यह कागजी कवायद डेढ़ साल में भी इस कमी को दूर नहीं कर सकी है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में 500 से ज्यादा मरीज आते हैं। वहीं इमरजेंसी में हादसों में घायल होने वाले लोग भी पहुंचते हैं। इसके अलावा हड्डी व जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर बुजुर्ग भी पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में उन्हें जरूरी उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें मेडिकल कॉलेज चिचौली का रुख करना पड़ रहा है।
50 शैया जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। पत्राचार के बाद भी डॉक्टर को तैनाती नहीं मिल रही है। ऐसे में अब वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की तैयारी बनाई जा रही है। अजीतमल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय को दो दिन के लिए शहर के अस्पताल भेजा जाएगा।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ

