Kanpur News: कानपुर किडनी कांड की जांच स्वरूपनगर और लाजपतनगर के बड़े नर्सिंगहोम तक पहुंच गई है, जहां जेल गए आरोपी शिवम अग्रवाल का आना-जाना था। पुलिस ने लखनऊ की टीम में शामिल एक पूर्व टेक्नीशियन की पहचान की है, जिसने अब वहां अपना अस्पताल खोल लिया है।
कानपुर शहर में अवैध तरीके से हुए किडनी ट्रांसप्लांट के तार स्वरूपनगर और लाजपतनगर के बड़े नर्सिंगहोम से जुड़ रहे हैं। यहां जेल भेजे गए शिवम अग्रवाल का आना-जाना था। दोनों जगह के कुछ स्टाफ भी आहूजा हॉस्पिटल में अक्सर आते थे। पुलिस ने दोनों नर्सिंगहोम के अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों से शनिवार को पूछताछ की है। उन्हें बिना बताए कहीं भी बाहर जाने के लिए मना किया है।केशवपुरम के आहूजा हॉस्पिटल में रविवार को हुए मुजफ्फनगर की पारुल तोमर को बेगूसराय के आयुष की किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। ट्रांसप्लांट करने के लिए एक टीम गाजियाबाद और दूसरी लखनऊ से आई थी। पुलिस ने गाजियाबाद वाली टीम में शामिल कुलदीप सिंह राघव और राजेश तोमार को जेल भेजा जबकि ओटी मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी की तलाश की जा रही है।केशवपुरम के आहूजा हॉस्पिटल में रविवार को हुए मुजफ्फनगर की पारुल तोमर को बेगूसराय के आयुष की किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। ट्रांसप्लांट करने के लिए एक टीम गाजियाबाद और दूसरी लखनऊ से आई थी। पुलिस ने गाजियाबाद वाली टीम में शामिल कुलदीप सिंह राघव और राजेश तोमार को जेल भेजा जबकि ओटी मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी की तलाश की जा रही है।
अली की पत्नी भी ओटी टेक्नीशियन है
पुलिस ने उसकी पत्नी से उत्तमनगर स्थित फ्लैट में पूछताछ की है। अली की पत्नी भी ओटी टेक्नीशियन है। दूसरी टीम में डॉ. सैफ, डॉ. अखिलेश, डॉ. कैफ समेत अन्य की जानकारी जुटाई जा रही है। इसी तरह दिसंबर 2025 में मेडिलाइफ हॉस्पिटल में महिला की हुई किडनी ट्रांसप्लांट हुई थी। उसमें भी कुलदीप सिंह राघव, राजेश तोमर, अली, डॉ. रोहित समेत अन्य लोग आए थे।
कानपुर किडनी कांड का मामला
स्वरूपनगर के नर्सिंगहोम में कार्य करता था
पुलिस को दोनों ही टीमों में शामिल कुछ लोगों की जानकारी हुई है। डीसीपी पश्चिम जोन एमएस कासिम आबिदी ने बताया कि लखनऊ से आई टीम में एक टेक्नीशियन भी शामिल था। अब तक हुई जानकारी में पता चला है कि उसका लखनऊ में नर्सिंगहोम है। वह कुछ समय पहले स्वरूपनगर के नर्सिंगहोम में कार्य करता था । इसके कुछ दिन बाद तक लाजपतनगर के नर्सिंगहोम से जुड़ा हुआ था।
उनके संचालकों ने भी सहयोग किया
अब उसने लखनऊ में खुद का नर्सिंगहोम खोल लिया है। उससे जेल गए शिवम अग्रवाल का अक्सर मिलना जुलना रहता था। शिवम भी दोनों नर्सिंगहोम में आता-जाता था। वहां के कुछ स्टाफ को आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल में आने की जानकारी हुई है। पुलिस ने दोनों नर्सिंगहोम से चार-पांच लोगों से पूछताछ की है। वहां के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। अब तक उनके संचालकों ने भी सहयोग किया है।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
हमारा किडनी रैकेट से कोई लेनादेना नहीं
प्रकरण के दौरान चर्चा में आए न्यू मान्या अस्पताल के संचालक डॉ. एसके सैनी ने किडनी रैकेट मामले में अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनका इस रैकेट से कोई लेनादेना नहीं है। मान्या अस्पताल में अभी काम चल रहा है। इसके दस्तावेज मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय भिजवा दिए हैं। ऑनलाइन आवेदन भी किया है। जैसे ही अस्पताल का लाइसेंस मिलता है। इसके बाद ही रोगी भर्ती कर इलाज किया जाएगा।
मेडिलाइफ हॉस्पिटल के संचालकों को उठाया
पुलिस ने शनिवार को मेडिलाइफ हॉस्पिटल के संचालक रहे रोहन और नरेंद्र को पूछताछ के लिए उठाया गया है। उनसे कुछ जानकारी मिली है। पुलिस लखनऊ से आई टीम के बारे में साक्ष्य एकत्रित कर रही है। डीसीपी पश्चिम ने बताया कि दोनों संचालकों के अलावा दिल्ली में अली की पत्नी से भी पूछताछ की गई है। एक टीम मेरठ और दूसरी गाजियाबाद में सक्रिय है।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
चार अस्पतालों से मांगा गया पांच साल का रिकॉर्ड
गाजियाबाद। कानपुर में पकड़े आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। जिन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा है वहां पिछले पांच वर्षों में हुए सभी मामलों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। खासतौर पर उन मामलों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें विदेश से मरीज ट्रांसप्लांट के लिए आए थे। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के चार प्रमुख अस्पतालों से बीते पांच वर्षों में किए गए सभी किडनी ट्रांसप्लांट का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।
डॉ. रोहित, डॉ. वैभव, डॉ. अफजल की तलाश
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी के मुताबिक डॉ. रोहित, डॉ. वैभव, डॉ. अफजल, डॉ. अमित, मुदस्सर अली सिद्दीकी समेत अन्य की तलाश की जा रही है। डॉ. वैभव डेंटिस्ट और डॉ. अफजल जनरल फिजीशियन बताया जा रहा है। डॉ. अमित फिजियोथेरेपिस्ट है। मेरठ के अल्फा अस्पताल से जुड़े हुए हैं।
किडनी कांड के मरीज पारुल और आयुष चौधरी को देखते डॉक्टर
किडनी डोनर ग्रुप से जुड़े कई सदस्य रडार पर
अवैध तरीके से चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट के खेल में पुलिस को किडनी डोनर ग्रुप की जानकारी मिली है। इसमें 500 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। उनके बीच डोनर, रिसीवर लाने और उन्हें भर्ती कराने की डिटेल है। पुलिस आरोपियों की और जानकारी जुटा रही है जिसके लिए साइबर क्राइम ब्रांच और पश्चिम जोन की साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
शिवम अग्रवाल के मोबाइल में मिला किडनी डोनर ग्रुप
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जेल भेजे गए आठ आरोपियों के मोबाइल में व्हाट्स एप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की गई। शिवम और किडनी डोनर आयुष के मोबाइल में टेलीग्राम पर किडनी डोनर ग्रुप मिला है। इसके सदस्यों के बीच किडनी ट्रांसप्लांट, अस्पताल भेजने, जांच कराने आदि को लेकर आपसी संवाद हैं। इसी में कुछ सदस्य छोटे छोटे टास्क देकर लोगों को रुपये कमाने का लालच देते हैं।
इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड
ग्रुप से जुड़े अन्य लोगों की तलाश
शुरू में आयुष को 500 से दो हजार रुपये तक मिले। उसने ग्रुप पर लिखा कि उसे पांच लाख रुपये की आवश्यकता है, जिस पर उसे अन्य ग्रुप लाइव किडनी में जोड़ लिया गया। इस ग्रुप में उससे किडनी डोनेट करने का प्रस्ताव दिया गया। उसकी सहमति मिलने पर सहमति पत्र देने को कहा गया। डीसीपी के मुताबिक आयुष की जांच हुई और उसे मेरठ के अल्फा अस्पताल में भर्ती किया गया। उसकी ब्लड और अन्य जांचें हुईं। सब कुछ सही मिलने पर सौदा हुआ। पुलिस ग्रुप से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।