नाबालिग किशोरी को प्रेमजाल में दुष्कर्म की वारदात,
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई
लखनऊ- उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई, क्रिकेटर आकाशदीप सिंह को परिवहन विभाग का नोट, बिना HSRP वाहन उपयोग करने पर नोटिस भेजा, मेसर्स सनी मोटर्स के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की, सनी मोटर्स की डीलरशिप 1 माह के लिए निलंबित, बिना HSRP वाहन डिलीवरी करने पर डीलरशिप निलंबन, फॉर्च्यूनर की बिना पंजीयन डिलीवरी पर नोटिस जारी, 14 दिन का चिनहट डीलर को स्पष्टीकरण देना होगा
School Teacher बनना नहीं होगा आसान, अब जरूरी है…
चंडीगढ़ (आशीष): केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों, केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय में अब 9वीं से 12वीं कक्षा में शिक्षक बनना आसान नहीं होगा। शिक्षकों को इन कक्षाओं में भी पढ़ाने के लिए केन्द्रीय पात्रता परीक्षा देनी होगी। इसके लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद और सी.बी.एस.ई. की ओर से गाइडलाइन तैयार की जा रही है। इसे जल्द ही जारी किया जाएगा।
नई गाइडलाइन को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार किया जा रहा है। अब तक सी.टी.ई.टी. की परीक्षा दो स्तरों के लिए लिए ली जाती है। इसमें सी.टी.ई.टी. एक और पांच और सी.टी.ई.टी. 6 और 8 कक्षा शामिल है। अब 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए भी यह परीक्षा होगी। बताया जाता कि एन.सी.टी.ई. सी.टी.ई.टी. को चार स्तरों पर कराने की तैयारी में जुटी है। इसमें बाल बाटिका के लिए भी शिक्षकों की परीक्षा ली जाएगी।
जे.वी.टी. और टी.जी.टी. के पदों के लिए जल्द होगी आवेदन प्रक्रिया शुरू
गौरतलब हैकि चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से जे.बी.टी. के 218 और टी.जी.टी. की 104 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके लिए सी.टी.ई.टी. में उतीर्ण होना अनिवार्य है। सी.टी.ई.टी. राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। इसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि कोई व्यक्ति स्कूल में शिक्षक बनने के योग्य है या नहीं।
बी.एड. और स्नातकोतर होना आवश्यक
अभी 9वीं से 12वीं कक्षा में शिक्षक बनने के लिए बी.एड. और स्नातकोतर की जरूरत होती है। हालाकि कुछ स्कूलों में इसके साथ सी.टी.ई.टी. छठी से 8वीं कक्षा के लिए उत्तीर्ण होना भी वांछनीय योग्यता है। गौरतलब है कि सी.बी.एस.ई. स्कूलों में कुल शिक्षकों में से एक निश्चित प्रतिशत शिक्षकों को सी.टी.ई.टी. क्वालीफाई होना अनिवार्य है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में चार स्तरों पर परीक्षा कराने का निर्देश
सी.टी.ई.टी. सी.बी.एस.ई. के निदेशक जे.के. यादव की ओर से जारी निर्देश के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में चार स्तरों पर परीक्षा कराने का दिशा निर्देश है। इसकी नीति एन.सी.टी.ई. तैयार कर रही है। सी.बी.एस.ई. को उसी दिशा निर्देश के आधार पर परीक्षा आयोजित करानी है। गाइडलाइन मिलने के बाद चार स्तर पर परीक्षा आयोजित होगी। संभवत अगले साल से यह लागू होगी।
सामूहिक छुट्टी पर गए कर्मचारियों पर PSPCL की बड़ी कार्रवाई, मंत्री ने की ये अपील
पंजाब डेस्क : पंजाब में बिजली कर्मचारियों ने 11 से 13 अगस्त तक सामूहिक छुट्टी पर जाने का ऐलान किया है। इस दौरान जे.ई., लाइनमैन, क्लर्क समेत अन्य सभी कर्मचारी अवकाश पर रहेंगे। इसलिए अगले 3 दिन बिजली व्यवस्था चलाना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है और बिजली गुल होने की स्थिति में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
PSPCL द्वारा सामूहिक छुट्टी पर गए कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए एक्शन लेंटर में कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के लिए कहा गया है। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कर्मचारियों पर एस्मा लगा दिया है, जिसके चलते कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। कॉर्पोरेशन की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि अगर कॉर्पोरेशन द्वारा भर्ती किए गए कॉन्ट्रैक्ट, वर्कचार्ज, दैनिक वेतन और कंटिंजेंट कर्मचारी हड़ताल में शामिल होते हैं, तो उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं और प्रोबेशन पर चल रहे पदोन्नत अधिकारियों/कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द की जा सकती है। इस संबंध में कॉर्पोरेशन की ओर से जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि कॉर्पोरेशन में कार्यरत सभी कर्मचारियों पर एस्मा लागू है, जिसके तहत 3 साल तक की कैद और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
इसके बाद अधिकारियों को कर्मचारियों की सामूहिक छुट्टी के खिलाफ विभाग द्वारा पत्र जारी किया गया है। वहीं बिजली मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने सामूहिक छुट्टी पर गए कर्मचारियों से काम पर वापिस आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मानसून के कारण बिजली खराबी संबंधी शिकायतें अधिक होती हैं और कर्मचारियों के सामुहिक अवकाश से लाखों लोगों और व्यापारिक केंद्रों को नुकसान होगा। उन्होंने बैठ कर मामले का हल निकलाने की बात कही है।
गोखले ब्रिज में 2 साल की देरी पर ‘5 हजार का जुर्माना’, RTI से हुआ BMC की लापरवाही का खुलासा
नेशनल डेस्क: मुंबई के अंधेरी में स्थित गोखले ब्रिज के पुनर्निर्माण में दो साल की देरी के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक RTI से खुलासा हुआ है कि बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने देरी के लिए ठेकेदार पर मात्र ₹5,000 का जुर्माना लगाया है, जबकि पहले ₹3 करोड़ का जुर्माना लगाने की बात कही गई थी।
₹3 करोड़ से ₹5,000 कैसे हुआ जुर्माना?
आरटीआई कार्यकर्ता और वकील गॉडफ्रे पिमेंटा द्वारा दायर अपील में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पहले यह दावा किया गया था कि देरी के लिए प्रोजेक्ट की लागत का 5-6 प्रतिशत, यानी ₹3 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया जाएगा। इस पर आरटीआई कार्यकर्ता ने सवाल उठाया, “₹87 करोड़ से अधिक की लागत वाला यह प्रोजेक्ट दो साल की देरी से पूरा हुआ। ऐसे में केवल ₹5,000 का जुर्माना कैसे लगाया जा सकता है?”
BMC पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद लोग बीएमसी की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि दो साल की देरी से हुए इस प्रोजेक्ट के लिए इतना मामूली जुर्माना कैसे उचित हो सकता है। हालांकि, इस विवाद के बाद बीएमसी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने अपने कर्मचारियों को ठेकेदार पर सही जुर्माना लगाने के लिए अगले 2-3 दिनों में काम करने का निर्देश दिया है। यह दिखाता है कि इस मामले में अभी तक अंतिम जुर्माना तय नहीं किया गया था।
मरी इंसानियत! मदद की भीख मांगता रहा शख्स, आखिरकार पत्नी के शव को बाइक पर बांधकर ले जाने के लिए मजबूर हुआ पति
नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के नागपुर जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। एक सड़क हादसे में पत्नी की मौत के बाद, मदद की उम्मीद में खड़े पति को जब किसी ने सहारा नहीं दिया, तो उसने मजबूरी में अपनी पत्नी के शव को बाइक पर बांध लिया और फिर उसे ले गया। यह घटना नागपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर, देवलापार थाना क्षेत्र के मोरफटा इलाके में रविवार (10 अगस्त) को हुई। हादसे में मध्य प्रदेश के सिवनी निवासी अमित यादव की पत्नी ग्यारसी की मौके पर ही मौत हो गई।
मदद मांगते रहे, कोई नहीं रुका
अमित यादव के अनुसार, हादसे के बाद उन्होंने सड़क पर गुजर रही गाड़ियों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने भी रुककर सहारा नहीं दिया। निराश होकर उन्होंने अपनी पत्नी के शव को कपड़े से बांधा और मोटरसाइकिल पर रखकर सिवनी स्थित अपने घर ले जाने का निर्णय लिया।
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रक्षाबंधन पर घर जा रहे थे दंपती
अमित और ग्यारसी पिछले 10 साल से नागपुर जिले के लोनारा गांव में रह रहे थे। रक्षाबंधन के मौके पर वे लोनारा से मध्य प्रदेश के करणपुर गांव जा रहे थे। रास्ते में तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे ग्यारसी की मौत हो गई।
पुलिस ने रोका और शव कब्जे में लिया
जब अमित यादव शव के साथ बाइक से आगे बढ़ रहे थे, तो कई लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन डर और आघात की वजह से वे नहीं रुके। बाद में हाईवे पर पुलिस ने उन्हें रोका और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागपुर के मेयो अस्पताल भेज दिया।
बैंकों की मनमानी पर RBI भी दिख रही बेबस, मिनिमम बैलेंस के नाम पर जेब कटाई जारी
नेशनल डेस्क: देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल ICICI बैंक ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे आम ग्राहकों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। बैंक ने बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस की सीमा को बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया है, जो पहले ₹10,000 थी। यह नई व्यवस्था 1 अगस्त 2025 से लागू हो गई है और फिलहाल केवल नए खातों पर ही लागू होगी।
क्या कहा ICICI बैंक ने?
ICICI बैंक का कहना है कि यह निर्णय उसकी बैंकिंग नीति के तहत लिया गया है। बैंक के अनुसार, यह बदलाव केवल नए ग्राहकों के लिए लागू किया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एक व्यापक ट्रेंड की ओर इशारा करता है, जहां बैंक अब अधिक संपन्न ग्राहकों को टारगेट कर रहे हैं और आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।
RBI ने क्या कहा?
बैंक के इस फैसले पर ग्राहकों की नाराजगी बढ़ने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हस्तक्षेप करेगा। लेकिन RBI गवर्नर ने साफ किया कि किसी बैंक का मिनिमम बैलेंस तय करना उसका स्वतंत्र व्यावसायिक निर्णय है और इसमें RBI का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
RBI के अनुसार, सिर्फ बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) या जनधन योजना के तहत खोले गए खातों पर मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता नहीं होती। बाकी सभी खातों के लिए बैंक अपनी शर्तें खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं।
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में भी बढ़ी लिमिट
ICICI बैंक ने यह बदलाव केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रखा है। अब:
मेट्रो शहरों में: ₹50,000
सेमी-अर्बन (कस्बों) में: ₹25,000 (पहले ₹5,000)
रूरल (ग्रामीण) इलाकों में: ₹10,000 (पहले ₹2,500)
क्यों वसूला जा रहा है ज्यादा मिनिमम बैलेंस?
विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकों की प्राथमिकता अब उन ग्राहकों की ओर बढ़ रही है जो अधिक पैसा खाते में रख सकें। इससे बैंक ज्यादा निवेश कर मुनाफा कमा सकते हैं। कम बैलेंस वाले खाताधारकों से बैंक को अपेक्षाकृत कम फायदा होता है, इसलिए वे अब हाई-नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को टारगेट कर रहे हैं।
सरकारी बैंकों में अब भी राहत
जहां प्राइवेट बैंक मिनिमम बैलेंस की सीमा लगातार बढ़ा रहे हैं, वहीं SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे सरकारी बैंकों में अब भी यह सुविधा बनी हुई है। SBI ने तो 2020 में ही मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया था। वहीं HDFC बैंक जैसे प्राइवेट बैंक में अभी भी मिनिमम बैलेंस की व्यवस्था है, पर ICICI के मुकाबले काफी कम है — जैसे:
मेट्रो शहरों में: ₹10,000
कस्बों में: ₹5,000
ग्रामीण इलाकों में: ₹2,500
श्रीलंकाई संसद में गूंजा ट्रंप टैरिफ विवादः मंत्री हर्षा डी सिल्वा ने कहा-”भारत की हिम्मत पूरे एशिया के लिए मिसाल, खेल अभी खत्म नहीं हुआ”
International Desk:अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद ने जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है, वहीं श्रीलंका की संसद में भी यह मुद्दा गूंज उठा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामान पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लगाए जाने के बाद, श्रीलंका के वरिष्ठ सांसद और पूर्व आर्थिक सुधार मंत्री हर्षा डी सिल्वा ने भारत की दृढ़ता और पुराने सहयोग की जमकर तारीफ की। उन्होंने अपनी ही संसद में कहा कि भारत का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए, क्योंकि कठिन समय में भारत ही वह देश था जिसने श्रीलंका को सबसे पहले और सबसे ज्यादा मदद दी।
संसद में भारत के पक्ष में आवाज
समगी जन बालवेगया पार्टी के वरिष्ठ नेता हर्षा डी सिल्वा ने संसद में कहा- “भारत का मजाक मत उड़ाओ। जब वे मुश्किल में हैं, तो उनकी हंसी मत उड़ाओ, क्योंकि जब हम मुश्किल में थे, तो सिर्फ उन्होंने ही हमारा साथ दिया था।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है और भारत की उम्मीद थी कि टैरिफ 15% तक घट जाएगा, जैसा कि श्रीलंका भी चाहता था।
भारत की मानवीय और आर्थिक मदद
डी सिल्वा ने विस्तार से बताया कि कैसे श्रीलंका के सबसे बुरे आर्थिक संकट के दौरान भारत ने बड़े पैमाने पर मदद दी:
- 2016 में एम्बुलेंस सेवा के लिए 3.3 टन मेडिकल सामान
- 5 अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता
- 400 मिलियन डॉलर का करेंसी स्वैप (RBI के जरिए)
- 500 मिलियन डॉलर के व्यापारिक ऋण की पुनर्भुगतान में छूट
- 3.1 अरब डॉलर की क्रेडिट सुविधा भोजन, ईंधन और दवाइयों के लिए
- पेट्रोलियम उत्पाद, लोकोमोटिव, बसें और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण
- अनुदान और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं-डिजिटल पहचान प्रणाली
- सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट, और प्लांटेशन वर्कर्स के लिए आवास निर्माण
- कुछ कर्ज़ों को अनुदान में परिवर्तित करना
- ब्याज दरों में कटौती, और रियायती कर्ज़ देकर वित्तीय बोझ कम करना
सोशल मीडिया पर भी भारत की तारीफ
संसद में भाषण के अलावा, डी सिल्वा ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा-“भारत हमारा सच्चा दोस्त है। मुश्किल वक्त में भारत हमारे साथ खड़ा रहा। हमें उनकी लड़ाई का सम्मान करना चाहिए। भारत की हिम्मत पूरे एशिया के लिए मिसाल है।”
अमेरिका-भारत टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इसके जवाब में भारत ने झुकने से इनकार करते हुए कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर अपनी सख्त स्थिति कायम रखी है। यह कदम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें ब्राजील, चीन और रूस जैसे कई देश भी अमेरिकी नीति की आलोचना कर रहे हैं।
फिर कांपी धरती, चीखते रहे लोग, ढह गई इमारत, भूकंप से मचा कोहराम, देखें डरावना Video
इंटरनेशनल डेस्क। दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में रविवार को भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। मेक्सिको में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया जबकि तुर्किए में 6.1 तीव्रता के झटकों ने एक बार फिर तबाही मचाई। इन दोनों देशों की भौगोलिक स्थिति इन्हें भूकंप के लिए बेहद संवेदनशील बनाती है।
मेक्सिको में क्यों आता है भूकंप?
रिपोर्ट के अनुसार मेक्सिको के ओक्साका तट के पास आया यह भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित था। मेक्सिको ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है जो प्रशांत महासागर के चारों ओर भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों का एक प्रमुख क्षेत्र है। यहां प्रशांत, उत्तरी अमेरिकी और रिवेरा प्लेटें आपस में टकराती हैं जिससे लगातार भूकंप आते हैं।
तुर्किए में भी जोरदार झटके
रिपोर्ट के मुताबिक तुर्किए के उत्तर-पश्चिमी प्रांत बालिकेसिर में आए 6.1 तीव्रता के भूकंप से भारी नुकसान हुआ। तुर्किए के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि इस हादसे में 81 साल के एक बुजुर्ग की मौत हो गई कई लोग घायल हुए और 15 से ज़्यादा इमारतें गिर गईं।
भारत और अन्य देश भी प्रभावित
भूकंप की वजह से भारत में भी कई बार बड़ी तबाही हो चुकी है। नेपाल, पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देश भी भूकंप के कारण बुरी तरह प्रभावित होते रहे हैं। ये सभी देश टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल वाले क्षेत्रों में स्थित हैं जिससे यहां भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है।

