Wednesday, February 18, 2026
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शहर के ट्रैफिक से चाहिए आजादी! ये 5 ऑटोमेटिक कारें आपके लिए है बेस्ट, कीमत भी है 10 लाख से कम

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नेशनल डेस्क : शहरों के तंग ट्रैफिक में बड़ी सेडान और ऊंची SUV जैसी गाड़ियों को चलाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। अगर शहर के भीतर रोजाना सफर करना हो तो यह और भी थकावट भरा हो जाता है, क्योंकि बार-बार क्लच दबाना और गियर बदलना बोझिल हो जाता है। ऐसे में छोटी हैचबैक और ऑटोमेटिक कारों को शहर के लिए सबसे बेहतरीन ऑप्शन माना जाता है। मजेदार बात यह है कि इन कारों की कीमत भी आमतौर पर कम होती है।

अगर आप 10 लाख रुपये के भीतर एक अच्छी कार खरीदना चाहते हैं, तो यहां हम आपको 5 ऐसी शानदार हैचबैक कारों के बारे में बता रहे हैं, जो इस बजट में आती हैं और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन भी देती हैं।

1. टाटा टियागो
इस लिस्ट में सबसे पहले आती है टाटा टियागो। इसमें पेट्रोल और पेट्रोल-CNG दोनों इंजन ऑप्शन के साथ AMT गियरबॉक्स मिलता है। एक ही कार में AMT और CNG का कॉम्बिनेशन इसे खास बनाता है, क्योंकि इसमें दोनों के फायदे मिलते हैं। टियागो में अच्छी सेफ्टी भी है, इसे 4-स्टार ग्लोबल NCAP सेफ्टी रेटिंग मिली है। AMT वेरिएंट्स XTA, XZA, XZA NRG, XTA CNG, XZA CNG और XZA NRG CNG में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत ₹6.31 लाख से ₹8.10 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है।

2. मारुति सुजुकी स्विफ्ट
भारतीय बाजार की सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में से एक, मारुति सुजुकी स्विफ्ट, 20 साल की विरासत और चार जनरेशन के साथ आती है। मौजूदा जनरेशन में इसमें 1.2-लीटर तीन-सिलेंडर इंजन मिलता है। स्विफ्ट भारतीय पैसेंजर कार बाजार में भरोसेमंद नामों में से एक है। यह हैचबैक उपयोगी, किफायती और प्रीमियम फील देने वाली है। इसमें टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले, वायरलेस फोन चार्जर जैसे फीचर्स मिलते हैं। AMT वेरिएंट्स VXi, VXi (O), ZXi और ZXi+ ट्रिम्स में उपलब्ध हैं और इनकी कीमत ₹7.04 लाख से ₹8.65 लाख (एक्स-शोरूम) तक है।

Auraiya News: लखनऊ गईं 14 बसें, यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

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औरैया। लखनऊ में आयोजित होने जा रहे प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम को लेकर डिपो की 14 बसों को तीन दिन के लिए लखनऊ भेजा जा रहा है।ऐसे में रूटों पर परिवहन सुविधा बेपटरी होने की आशंका है। ट्रेनों की लेटलतीफी के बीच लोग बसों का सहारा ले रहे हैं। अब बसों की कमी यात्रियों को परेशानी में डालेगी।
डिपो के बेड़े में कुल 65 बसें हैं। शासन की ओर से की गई मांग के बाद डिपो प्रशासन ने तीन दिनों के लिए 14 बसों को लखनऊ भेजा है। ऐसे में अब तीन दिन तक महज 51 बसों से ही रूटों पर परिवहन सुविधा दी जाएगी। लखनऊ भेजी गई बसों में बीएस-6 मॉडल शामिल हैं। ऐसे में दिल्ली रूट पर बसों की संख्या में कमी आएगी। दिल्ली रूट पर ही सबसे ज्यादा यात्री सफर करते हैं।

डिपो एआरएम अपर्णा मीनाक्षी ने बताया कि डिमांड के तहत 14 बसों को भेजा जा रहा है। तीन दिन तक शेष बसों को बेहतर ढंग से चलाया जाएगा। 26 दिसंबर से विधिवत इन बसों का संचालन अपने रूटों पर किया जाएगा। इन तीन दिनाें में यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों के फेरे बढ़ाकर सेवाएं दी जाएंगी। चालक-परिचालकों को इसे लेकर निर्देश दे दिए गए हैं। किसी तरह की लापरवाही न हो इसके लिए सचेत किया गया है।

Auraiya News: 45 हार्ट अटैक, 13 ब्रेन स्ट्रोक रोगी आए, छह की मौत

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कानपुर। ठंड के मौसम में रोगियों का ब्लड प्रेशर बेकाबू हो रहा है। डायबिटीज के साथ ब्लड प्रेशर का गठजोड़ खतरनाक साबित हो रहा है। मंगलवार को कार्डियोलॉजी में हार्ट अटैक के लक्षण वाले 45 रोगी भर्ती हुए। हैलट इमरजेंसी में 13 रोगी ब्रेन स्ट्रोक के भर्ती हुए। छह रोगी ब्रॉट डेड आए। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि ओपीडी में 869 रोगियों का परीक्षण किया गया। 45 रोगियों को भर्ती किया गया है। पांच रोगी अस्पताल पहुंचने के पहले मर चुके थे। वहीं, हैलट इमरजेंसी में रात नौ बजे तक 52 रोगियों को भर्ती किया गया। ब्रेन स्ट्रोक के 13 रोगियों में आठ के मस्तिष्क की नसें फट गई थीं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. बीपी प्रियदर्शी के मुताबिक, सांस के रोगियों की भी तबीयत बिगड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट और ब्रेन अटैक का प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर है। अचानक बीपी बढ़ने से रोगियों की स्थिति बिगड़ रही है।

Auraiya: बांग्लादेश हिंसा पर गरजे राजू दास, बोले- एकजुट नहीं हुए तो समुद्र में गिरना पड़ेगा, ये भी कहा

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औरैया जिला पहुंचे हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने बांग्लादेश में हिंदू संत की हत्या पर दिया बड़ा बयान। बांग्लादेश में धर्म के नाम पर हत्या हुई है, जाति के नाम पर नहीं। बांग्लादेश में दलित की हत्या पर आज नीलचट्टे, भीमचट्टे व सेक्युलर मौन- महंत राजू दास। राजू दास बोले कि धर्म के नाम पर दंगा कराने वाले भी आज मौन है। सनातनी को कूटा जा रहा, पीटा जा रहा जलाया जा रहा फिर भी सब के सब मौन है। राजू दास ने सनातनियों से एकजुट रहने की अपील की। नहीं तो सनातनी औरैया से कूटेंगे, तो दिल्ली भागना पड़ेगा और दिल्ली से कुटोगे, तो समुद्र में जाओगे या आसमान में।

जिला अस्पताल : ठंड से बचाने के बजाय ब्लोअर भी फेंक रहे ठंडी हवा

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इटावा। अचानक बढ़ी ठंड व शीतलहर की वजह से अस्पताल में भर्ती मरीज के साथ तीमारदार बेहाल है। जिला अस्पताल के वार्डों में ठंड से बचाने को लगाए गए ब्लोअर गर्म हवा की जगह ठंडी हवा फेंक रहे हैं। इससे यहां भर्ती महिला व बच्चे ठंड से ठिठुर रहे हैं। ठंड से बचने के लिए मरीज घरों से दो-तीन कंबल लाकर ओढ़ रहे हैं।डॉ. बीआर आंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल में प्रथम तल पर महिला एवं शिशु वार्ड बना हुआ है। इस समय 28 मरीज भर्ती हैं। इसमें बच्चों की संख्या आठ है। ठंड की शुरुआत होते ही जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी वार्डों में हीटर व ब्लोअर चलाने के निर्देश दिए थे। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इसमें महिला एवं शिशु वार्ड में लगे ब्लोअर गर्म की जगह ठंडी हवा फेंक रहे हैं।

साथ ही मरीजों को दिए गए कंबल इतने हल्के हैं कि उनके सहारे सर्द रातें नहीं काटी जा सकतीं है। ऐसे में बीमार और कमजोर मरीजों की परेशानी बढ़ी हुई है। महिला व शिशु वार्ड में खिड़की व एग्जास्ट की जगग्से सीधी हवा वार्ड में आ रही है। इससे मरीज समेत तीमारदारों को ठंड में ठिठुरना पड़ रहा है। ऐसे मरीजों को घर से कंबल लगाकर ठंड से बचाव करना पड़ रहा है।

शहर के नौरंगाबाद चौराहे निवासी माजरा ने बताया कि उसके पुत्र हमजा (3) को दो दिन पहले सर्दी के बाद बुखार आ गया था। हालत में सुधार न होने पर उसे जिला अस्पताल में दिखाया। यहां डॉक्टर ने निमोनिया बताकर उसे भर्ती कर लिया। माजरा ने बताया कि वार्ड में लगा ब्लोअर ठंडी हवा फेंक रहा है। इससे तबीयत सही होने के बजाय बिगड़ सकती है।

अजीतमल के मुरादगंज निवासी मदीना ने बताया कि बेटे जैत मोहम्मद (5) को पेट में तेज दर्द होने पर उसे जिला अस्पताल में दिखाया था। यहां डॉक्टर को दिखाने पर उसे शिशु वार्ड में भर्ती कर लिया गया। बताया कि वार्ड में लगा ब्लोअर बेकार है। अस्पताल से मिला कंबल बहुत हल्का है इसलिए घर से लाए कंबल व जिला अस्पताल से मिले कंबल को ओढ़कर ठंड को भगाया जा रहा है।

महिला व पुरुष अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ व सहयोग स्टाफ के हर कक्ष में एक-एक रूम हीटर लगा है। इससे डॉक्टरों व कर्मियों को ठंड का अहसास भी नहीं होता है। वहीं, एक वार्ड में छह मरीजों के साथ ही छह तीमारदार रहते हैं। उस पर एक ब्लोअर लगा होता है जो गर्म की जगह ठंडी हवा देता है। ऐसे में मरीजों को ठंड में परेशान होना पड़ता है।

जिला अस्पताल के सभी वार्ड में हीटर व ब्लोअर लगा दिए गए हैं। अगर किसी वार्ड में ब्लोअर या हीटर खराब है तो मरीज या तीमारदार इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसको सही करवाया बदलकर दूसरा हीटर लगवा दिया जाएगा। कड़ाके की ठंड में मरीज की सुविधा की हर स्तर पर ध्यान रखा जाएगा। महिला व शिशु वार्ड में लगे ब्लोअर को सही करवाया जाएगा।
-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल।

UP: 100 साल का हुआ कानपुर का तिलकनगर; मोतीलाल नेहरू ने रखा था आधार, गांधीजी ने दिया था स्वदेशी का मंत्र

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कानपुर शहर के पॉश मोहल्लों में शुमार तिलकनगर 25 अक्तूबर को 100 साल का हो गया। ग्वालटोली और नवाबगंज के बीच स्थित म्यूनिसिपल मैदान को 1925 में 23 दिसंबर से 29 दिसंबर तक होने वाले कांग्रेस के 44वें राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए चुना गया था। इसी मैदान पर अधिवेशन के विभिन्न पंडालों के अस्थायी निर्माण का शिलान्यास 25 अक्तूबर 1925 को पंडित मोतीलाल नेहरू ने किया। उन्होंने ही पंडालों की इस अस्थायी बसावट को बाल गंगाधर तिलक के सम्मान में तिलकनगर नाम दिया।

वर्तमान में बंगलों, चौड़ी सड़कों और नामी हस्तियों का रिहाइशी क्षेत्र तिलकनगर पहले कृषि भूमि था। कानपुर कांग्रेस गाइड (1925) के मुताबिक यह भूमि ग्वालटोली और नवाबगंज के बीच स्थित थी। त्रिभुजाकार भूमि दक्षिण दिशा में बिठूर रोड और उत्तर में पुराना कानपुर रोड के बीच दोनों सड़कों से मिली हुई थी। यही दोनों सड़कें कंपनी बाग के पास मिलकर इसकी पश्चिमी हद को समाप्त करती थीं। खलासी लाइन के पश्चिम वाली सड़क पुराना कानपुर रोड तथा बिठूर रोड को मिलाती है। वह इस जमीन के पूर्व में थी। वर्तमान में यह हिस्सा एलनगंज और वीआईपी रोड के बीच स्थित है।

वार्षिक अधिवेशन 23 दिसंबर से 29 दिसंबर 1925 तक चला
कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप कुमार शुक्ल ने बताया कि 1920 के दशक में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन जोर पकड़ रहा था और कांग्रेस अधिवेशन राष्ट्रीय नेताओं के लिए अपने विचारों को साझा करने का एक मंच बन गया। शहर के म्यूनिसिपल मैदान में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन 23 दिसंबर से 29 दिसंबर 1925 तक चला। अधिवेशन में महात्मा गांधी, पंडित मोतीलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।

कपड़ों का पूरा बहिष्कार कर दें
अधिवेशन का मुख्य एजेंडा स्वराज और राष्ट्रीय एकता था। 24 दिसंबर को स्वदेशी प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए गांधी जी ने कहा था कि मैं केवल खद्दर ही का स्वप्न देखा करता हूं। मैंने प्रदर्शनी खोलने की जिम्मेदारी उसी समय ली जब जवाहरलाल जी ने मुझसे इस बात का विश्वास दिला दिया कि इस प्रदर्शनी में कोई भी विदेशी चीज नहीं रखी जाएगी। आज भी मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि यदि आप सब विदेशी तथा देशी मिलों के कपड़ों का पूरा बहिष्कार कर दें, तो एक वर्ष से कम समय में ही हमें स्वराज्य मिल सकता है।

इसी अधिवेशन में चुनी गईं पहली भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष
शुक्ल के मुताबिक, यह अधिवेशन महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी अहम साबित हुआ। इसी अधिवेशन में 24 दिसंबर 1925 को महात्मा गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद को छोड़ा था। इसी दिन कांग्रेस ने पहली भारतीय महिला सरोजनी नायडू को अध्यक्ष चुना था। इससे पहले 1917 में विदेशी महिला डॉ. एनी बेसेंट को कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष चुना गया था।

1940 से बदली तिलकनगर की सूरत
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शंकर दत्त मिश्रा ने बताया कि बाल गंगाधर तिलक का निधन 1920 में हुआ था। महात्मा गांधी ने उनके सम्मान में देश भर के प्रमुख स्थलों का नामकरण करने की बात रखी थी। इसी के चलते देश भर में कई स्थानों के नाम गंगाधर तिलक पर रखे गए। शहर में औद्योगिकरण की शुरुआत 1950 के दशक में हुई। आसपास कई मिलों के होने के कारण इस क्षेत्र में आवासीय विकास की जरूरत महसूस हुई। कानपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने का निर्णय लिया। 1960 के दशक में क्षेत्र का तेजी से विकास हुआ और यहां आवासीय कॉलोनियां बनाई गईं। तिलक की देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना को सम्मान देने के लिए इस क्षेत्र का नाम तिलकनगर बरकरार रखा। कभी श्रमिकों और मध्य वर्ग के लोगों के लिए बसा मोहल्ला आज नई रंगत में दिखता है। शहर के नामी व्यक्तियों की रिहाईश वाले इस मोहल्ले में मॉल, हाईराइज अपार्टमेंट, होटल और नामचीन कंपनियों के शोरूम हैं।

कोई बड़ा कांग्रेसी नेता नहीं निकला
तिलकनगर का जन्म भले ही कांग्रेस के अधिवेशन से हुआ हो और इसका अस्तित्व कांग्रेस से जुड़ा हो, लेकिन यहां से पार्टी का कोई बड़ा नेता, विधायक, सांसद नहीं बन सका।

यूपी: अब बस चलाने से पहले ड्राइवरों का होगा ‘शराब टेस्ट’; कोहरे में गाड़ी की रफ्तार 40KM प्रति घंटा रहेगी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शरद ऋतु और ठंड के मौसम में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद में प्रदेश में बस यात्रियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किये जाने, रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित करने और यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

कोहरे में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो

उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने परिवहन निगम एवं संबंधित अधिकारियों को शरद ऋतु/ठंड के मौसम में बसों के सुरक्षित एवं नियंत्रित संचालन को लेकर विस्तृत आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किया जाना आवश्यक है और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मुहैया कराना प्रदेश सरकार का दायित्व है।

परिवहन मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि कोहरे की स्थिति में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो, जबकि अत्यधिक कोहरे में बस को किसी सुरक्षित स्थान पर रोककर विजिबिलिटी सामान्य होने पर ही आगे संचालन किया जाए। बस अड्डों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार एनाउंसमेंट कर यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अनुभवी चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए

उन्होंने कहा कि घने कोहरे वाले मार्गों पर रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित किया जाए तथा रात्रि सेवाओं में अनुभवी, दुर्घटना-रहित और अच्छे ईंधन रिकॉर्ड वाले चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि रात्रि सेवा पर जाने से पूर्व चालक को कम से कम 8 घंटे का विश्राम प्राप्त हुआ हो। 50 प्रतिशत से कम लोड फैक्टर वाली रात्रिकालीन सेवाओं को अस्थायी रूप से स्थगित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

चालकों का अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य

लंबी दूरी एवं रात्रिकालीन सेवाओं की बसों को मार्ग पर भेजने से पूर्व 13 बिंदुओं पर आउटशेडिंग जांच तथा संचालन के दौरान 31 बिंदुओं पर नियमित भौतिक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निगम एवं अनुबंधित बसों में रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप, फॉग लाइट, ऑल वेदर बल्ब, वाइपर और शीशे पूर्ण रूप से कार्यरत होना अनिवार्य किया गया है। मार्ग पर तैनात इंटरसेप्टर एवं प्रवर्तन वाहनों द्वारा निरीक्षण के दौरान ब्रेथ एनालाइजर के माध्यम से अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

परिवहन मंत्री ने चालकों को तीन प्रकार की सड़कों पर विशेष सावधानी बरतने को कहा है। एक्सप्रेस-वे पर अचानक ठहराव से बचाव, डिवाइडर युक्त सड़कों पर दायीं ओर संचालन, तथा बिना डिवाइडर वाली सड़कों पर बायीं ओर संचालन कर दुर्घटनाओं से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने निर्देशित किया कि सभी चालकों एवं परिचालकों को इन दिशा-निर्देशों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि संयमित गति और सतर्कता के साथ बसों का संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने दोहराया कि योगी सरकार प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Kanpur: दुग्ध वाहन और ऑटो में टक्कर, चालकों में चले लात-घूंसे, होमगार्ड से भी की बदसलूकी, एक घंटे लगा जाम

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कानपुर में नजीराबाद थाना क्षेत्र के सरोजनीनगर चौराहे पर मंगलवार सुबह ऑटो और दुग्ध वाहन में टक्कर हो गई। नशे में धुत चालक ने ऑटो को बीच सड़क पर तिरछा खड़ा कर दिया। इसके बाद ऑटो चालक और दुग्ध वाहन के चालक के बीच जमकर लात-घूंसे चले। इससे वहां से गुजर रही एंबुलेंस, कैश वैन समेत कई वाहन जाम में फंस गए। होमगार्ड ने रोकने की कोशिश की, तो दोनों ने उससे भी धक्का-मुक्की की।बीचबचाव के बाद दोनों अपने वाहन लेकर चले गए। जवाहरनगर के अमरनाथ दुबे दुग्ध वाहन के चालक हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह गुमटी से वाहन लेकर कालपी रोड होते विजयनगर जा रहे थे। गुमटी में उनके आगे शराब के नशे में ऑटो लेकर चल रहा चंद्रनगर निवासी धीरज साइड नहीं दे रहा था। सरोजनीनगर चौराहे पर ऑटो में टक्कर हो गई। इसे लेकर ही दोनों में विवाद हुआ था।सीसीटीवी कैमरे दिखाए जाएंगे

किसी तरह वहां से निकले, तो ऑटो चालक ने चेन फैक्टरी चौराहे के आगे बीच सड़क ऑटो लगाकर रोक लिया। करीब एक घंटे तक सड़क पर ड्रामा चला। इससे सड़क पर जाम लगा रहा। नजीराबाद थाने के एसएसआई ज्ञानेश कुमार सिंह ने बताया कि थाने में कोई सूचना नहीं आई। फिर भी सीसीटीवी कैमरे दिखाए जाएंगे। मामले की जांच कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

Kanpur: आयकर भरने वाली महिलाएं ले रहीं 1000 रुपये विधवा पेंशन, फैमिली आईडी और केवाईसी सत्यापन के दौरान खुलासा

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UP: ‘पार्टनर के साथ जुड़ना मेरी बड़ी गलती..’, दो पेज के नोट में लिखीं ये बातें; नस काटी, फिर फंदा लगाकर दी जान

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कानपुर के बर्रा विश्वबैंक कॉलोनी डी ब्लॉक में सोलर पैनल रूफ फिटिंग का व्यापार करने वाले ओमेंद्र सिंह (46) ने सोमवार रात सात बार चाकू से हाथ की नस काटने की कोशिश की फिर फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस ने व्यापारी के पास से सुसाइड नोट बरामद किया है जिसमें व्यापार में पार्टनर को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है।जानकारी होने पर भाई का उससे विवाद हुआ था। इसके बाद से भाई काफी तनाव में था। सोमवार रात करीब नौ बजे ओमेंद्र घर आया और दूसरे तल पर बने कमरे में चला गया। उस दौरान परिवार के अन्य सदस्य प्रथम तल पर थे।

पहले उसने अपने हाथ की कलाई पर चाकू से कई वार किए। इससे फर्श पर खून की छींटे फैल गई। इसके बाद उसने पंखे से मफलर का फंदा बनाकर उससे लटक जान दे दी। बर्रा इंस्पेक्टर रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी के घर दबिश दी गई है लेकिन वह भाग निकला। तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

 

पार्टनर के साथ जुड़ना मेरी बड़ी गलती… योगी जी न्याय दिलाना…

मेरी मौत का जिम्मेदार दामोदरनगर का रहने वाला मेरे व्यापार में पार्टनर है। मेरा सोलर का काम करना… पार्टनर के साथ जुड़ना मेरी सबसे बड़ी गलती थी। माननीय योगी जी… मेरे मरने के बाद मेरे परिवार को कतई परेशान न किया जाए विनम्न निवेदन है…।

आप बेहद न्याय प्रिय हैं… मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं। मैंने जीवन में कोई काम ऐसा नहीं किया जो गलत हो। जीवन भर ईमानदार रहा इससे मेरा यह हाल हुआ… दो पन्ने के सुसाइड नोट में ओमेंद्र ने अपने पार्टनर को ही अपनी मौत का दोषी बताया है।