Thursday, February 12, 2026
Home Blog Page 290

Lucknow: ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा क्यूआर कोड से होंगे लैस, स्कैन करते ही सामने आ जाएगी चालक की पूरी डिटेल

0

पब्लिक ट्रांसपोर्ट (ऑटो, टेंपो और ई-रिक्शा) अब क्यूआर कोड से लैस होंगे। इसे स्कैन कर यात्री चंद सेकेंड में वाहन चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर पता कर सकेंगे। यही नहीं इस प्रक्रिया के तहत जो अपराधी किस्म के चालक होंगे, वह वाहन नहीं चला पाएंगे, क्योंकि उनका पुलिस सत्यापन नहीं हो सकेगा। चालकों को ड्रेस कोड का भी पालन करना होगा।यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से मंगलवार से प्रोजेक्ट सेफ राइड अभियान की शुरुआत की है। डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित ने बताया कि सभी वाहन चालकों को ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये रजिस्ट्रेशन करना होगा। जो विवरण रजिस्ट्रेशन के जरिये भरा जाएगा, उसका सत्यापन पुलिस और परिवहन विभाग करेगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदक को मेसेज जाएगा। तब वह ऑनलाइन ही क्यूआर कोड डाउनलोड कर सकेगा। यही क्यूआर कोड वाहन पर चस्पा करना होगा।

इस तरह करें रजिस्ट्रेशन
वाहन का रजिस्ट्रेशन www.lucknowpolice.up.gov.in/eri ckshaw वेबसाइट के जरिये किया जा सकता है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए वैध रजिस्ट्रेशन नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस व फिटनेस सर्टिफिकेट का होना आवश्यक है। वाहन स्वामी की डिटेल, फोटो, चालक का पहचान पत्र, फोटो भी होना चाहिए। अगर वाहन दो चालक चलाते हों तो मालिक के साथ दोनों का विवरण देना होगा। वाहन मालिक व चालक को चरित्र प्रमाण पत्र भी अपलोड करना होगा, जो यूपी कॉप ऐप या
www.lucknowpolice.up.gov.in वेबसाइट से आवेदन कर बनवा सकते हैं।

अवैध वाहनों पर लगेगी रोक: एडीसीपी ट्रैफिक अशोक कुमार ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अगर वाहन चालक या मालिक पर आपराधिक मुकदमे आदि पाए जाते हैं तो उस आवेदन को तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा वर्तमान में तमाम अवैध ई रिक्शा चल रहे हैं, इस प्रक्रिया की वजह से इन अवैध वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा।

31 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन, एक सितंबर से कार्रवाई
रजिस्ट्रेशन करवाकर क्यूआर कोड लेने का वक्त एक महीना तय किया गया है। बुधवार से 31 अगस्त तक वाहन स्वामी रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इस बीच उनको क्यूआर कोड उपलब्ध करा दिया जाएगा। एक सितंबर से पुलिस और परिवहन विभाग अभियान शुरू करेंगे। जिस वाहन पर क्यूआर कोड नहीं होगा, उन वाहनों को सीज किया जाएगा।

Lucknow: दोस्तों के साथ शराब पीने गए ट्रैक्टर चालक की हत्या, घर में खून से लथपथ हालत में मिला शव

0

लखनऊ के माल इलाके के मडवाना गांव में मंगलवार की आधी रात के बाद घर के बाहर बरामदे में फर्श पर सो रहे ट्रैक्टर चालक राजू गौतम (45) की गर्दन पर कई वार कर हत्या कर दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच के बाद शव पीएम के लिये भेजने के साथ तीन लोगों को हिरासत में लिया है।फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंच कर सुबूत जुटाए। पत्नी ममता ने बताया मंगलवार शाम आठ बजे पति गांव के बहादुर, अमित और अशोक के साथ शराब पीने गए थे। वहां किसी बात पर गाली गलौज हो गई। इसकी जानकारी पति ने उसे घर आकर दी थी। अनहोनी की आशंका के कारण वह रात बारह बजे तक जागती रही। उसके बाद उसे नींद आ गई। सुबह खून से लथपथ पति का शव मिला। गर्दन पर कई घाव थे। इंस्पेक्टर नवाब अहमद ने बताया तहरीर के आधार पर बहादुर, अमित और अशोक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर अन्य विधिक कार्यवाही की जा रही है।

सुबह तक रिस रहा था गर्दन से खून
गांव के बहादुर ने बताया वह सुबह पांच बजे शौच के लिए उनके दरवाजे के पास से गुजर रहा था। वह खून से लथपथ पड़े थे। गर्दन से खून रिस रहा था। उनके घर के सभी लोग उस समय तक सो रहे थे।

परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
परिवार में पत्नी ममता, पुत्र सुजीत, मंगलवार को ससुराल से आई बेटी काजल, कामिनी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है।

 बाप बेटा मजदूरी से चला रहे थे घर
पत्नी ममता ने बताया काफी दिन पहले जमीन दबंगो ने हथिया ली थी। अब बाप बेटे ट्रैक्टर चला कर तथा मजदूरी कर घर चला रहे थे। बेटी और बेटा का ब्याह करना बाकी है।

राजधानी लखनऊ पड़ताल में खुलासा : निजी एंबुलेंस वसूल रहीं फ्लाइट से महंगा किराया, मरीजों की दलाली का चल रहा सिंडिकेट

0

राजधानी लखनऊ में निजी एंबुलेंस की सेवा हवाई जहाज से कम नहीं। सुविधाएं भले हवाई जहाज की न हों, किराया उससे भी ज्यादा है। लखनऊ से दिल्ली तक लगभग 550 किमी दूरी के लिए भले ही आपको आठ से 10 हजार रुपये में रिटर्न टिकट मिल जाएगा। इसी दूरी के लिए निजी एंबुलेंस को 14 से 22 हजार रुपये देने होंगे। साधारण से लेकर लाइफ सपोर्ट सुविधाओं वाली एंबुलेंस में ये रेट अलग-अलग हो सकते हैं।आपको शायद इस बात पर आसानी से यकीन न हो, लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में ये स्याह सच सामने आया है। मंगलवार को तीन सरकारी अस्पतालों के बाहर मौजूद निजी एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए रेट की बात की गई, जिसकी दास्तां हूबहू है।

निजी एंबुलेंस चालक चला रहे सिंडिकेट
सूत्र बताते हैं कि निजी एंबुलेंस चालकों ने मरीजों की दलाली का सिंडिकेट बना रखा है। सरकारी अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल में शिफ्ट कराने में इनकी सबसे अहम भूमिका होती है। इसके बदले निजी अस्पताल इन्हें मोटा कमीशन देते हैं। ऐसे कई मामले पहले सामने आ चुके हैं, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग यह सिंडिकेट तोड़ नहीं पा रहा है। अहम बात यह है कि जिम्मेदार सरकारी अस्पतालों के बाहर से इन निजी एंबुलेंसों को हटा भी नहीं पाते हैं।

कोविड के दौरान तय हुए थे रेट
कोविड के दौरान एंबुलेंसों की मनमानी बढ़ गई थी। उस दौर में ऑक्सीजन सिलेंडर का रेट बहुत अधिक था। तब स्वास्थ्य विभाग ने रेट का खाका तैयार किया था। जिलाधिकारी ने रेट पर मुहर लगाई थी। 10 किमी दायरे में एंबुलेंस के लिए 500 रुपये रेट तय हुआ था। कोविड के बाद से दोबारा एंबुलेंस के रेट तय नहीं किए गए। इसका फायदा निजी एंबुलेंस चालक उठा रहे हैं। 

रिपोर्टर की पड़ताल में सामने आया सच

स्थान : डफरिन अस्पताल का गेट
रिपोर्टर: एक बच्चे को एरा मेडिकल कॉलेज ले चलना है
चालक : एंबुलेंस ऑक्सीजन या बिना ऑक्सीजन चाहिए?
रिपोर्टर : भाई, बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर है।
चालक: ठीक है, बताओ कहां पर
लगानी है एंबुलेंस ?
रिपोर्टर : डफरिन गेट पर एंबुलेंस लेकर चलना होगा, वैसे कितना किराया लोगे? चालक : भैया, 1250 रुपये पड़ेगा। रिपोर्टर: एरा यहां से 8-10 किमी से ज्यादा दूर नहीं है।
चालक : बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर है, लोकल में इतना ही किराया लगता है। रिपोर्टर: ठीक है। अभी रहने दो… बाद में आता हूं।

स्थान : बलरामपुर अस्पताल का गेट
रिपोर्टर : भाई, अंदर एक मरीज है, उसे सीतापुर ले चलना है।
चालक: सीतापुर में कहां पर जाना है?
रिपोर्टर : सीतापुर बस स्टैंड के पास मरीज को लेकर जाना है।
चालक : मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत तो नहीं है?
रिपोर्टर नहीं… ऑक्सीजन की जरूरत
नहीं है।
चालक: चार हजार रुपये लगेंगे। उधर से खाली लौटना पड़ेगा।
रिपोर्टर : ये तो बहुत ज्यादा है, ऐसे तो 40 रुपये प्रति किमी हुआ !
चालक: ठीक है आप 3800 ही दे देना,
इससे कम नहीं हो पाएगा।
रिपोर्टर : फिर भी बहुत ज्यादा है। रहने दो।

स्थान : लिंब सेंटर के सामने
रिपोर्टर: 
मरीज को दिल्ली के सफरदगंज अस्पताल ले चलना है।
चालक: मरीज अभी कहां पर भर्ती है?
रिपोर्टर : केजीएमयू ट्रॉमा में भर्ती है।
चालक: ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ेगी?
रिपोर्टर: हां, तभी तो बड़े अस्पताल जा रहे हैं। चालक: 14 हजार रुपये पड़ेंगे, ईको वैन एसी वाली देंगे।
रिपोर्टर : एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस कितने में जाएगी?
चालक : रुको पूछकर बताते हैं… उसमें खर्च बढ़ जाएगा।
रिपोर्टर : पूछ कर बताओ, कितना लगेगा।
चालक: (किसी से फोन पर बात करने के बाद) भैया 22 हजार रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर:  ठीक है, नंबर दो, कॉल करूंगा।

ऑक्सीजन छोड़ अन्य मानक पूरे नहीं करतीं एंबुलेंस

सीएमओ स्वीकार करते हैं कि अधिकतर निजी एंबुलेंस मानकों को पूरा नहीं करती हैं। इन एंबुलेंस में सिर्फ ऑक्सीजन सिलिंडर होता है। बेसिक लाइफ सपोर्ट के साधन भी नहीं होते हैं। एडवांस कहे जाने वाली एंबुलेंस में प्रशिक्षित आपातकालीन चिकित्सा टेक्नीशियन (ईएटी) या पैरामेडिक्स मौजूद होने चाहिए, जो आपात स्थिति में मरीज को सीपीआर, और ऑक्सीजन दे सके।

आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग काकोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है। – डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ कोविड के दौरान एंबुलेंस के रेट तय किए गए थे। इसके बाद वह व्यवस्था खत्म हो गई थी। अभी तक निजी एंबुलेंस की अधिक वसूली को लेकर कोई भी लिखित शिकायत नहीं मिली है। कोई भी मसला आता है तो उसे दिखवाया जाएगा।

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है।

ऑक्सीजन छोड़ अन्य मानक पूरे नहीं करतीं एंबुलेंस
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कोरोना काल में शासन से निर्देश मिलने बाद रेट तय हुए थे। निजी एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकार नहीं है। शासन से निर्देश मिलने पर निजी एंबुलेंसों के लिए रेट का निर्धारण किया जा सकता है। डीएम से संस्तुति बाद ही नए रेट को लागू कराया जा सकता है।

अजीतमल (औरैया) कोटा बैराज जुहीखा गांव में यमुना का पानी खतरे के निशान से ऊपर

0

अजीतमल (औरैया)। कोटा बैराज से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी से यमुना नदी उफान पर है। मंगलवार को जुहीखा गांव में जलस्तर खतरे के निशान 113 मीटर को पार कर गया।वहीं यमुना किनारे बीहड़ पट्टी में बसे दर्जनों गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गौहानी कलां समेत कई गांव में पानी घुसने से उनका अन्य गांवों से संपर्क टूट गया है। सिकरोड़ी में भी पानी घुसने का खतरा है।जिला प्रशासन ने बाढ़ की चपेट में आने वाले गांवों के लोगों को गांव खाली कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने के निर्देश दिए हैं। राजस्व व विकास विभाग की टीम यमुना किनारे बसे गांवों पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं पुलिस भी मुस्तैद है। लोगों को बाढ़ के पानी से दूर रखा जा रहा है।

मंगलवार सुबह आठ बजे तक जुहीखा पुल के पास बनाए गए जल मापक प्वाइंट पर पानी 113.980 मीटर तक पहुंच गया। जबकि यहां खतरे का निशान 113 मीटर पर है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से गौहानी कलां संपर्क मार्ग पर पानी घुस गया है। इससे रपटा पुल डूब गया है। उसके ऊपर से पानी बह रहा है। इससे गांव का संपर्क अजीतमल व अन्य गांवों से कट गया है।

सिकरोड़ी पुल से होकर इटावा को जाने वाली सड़क के किनारे तक पानी पहुंच गया है। आशंका है कि अगर जलस्तर बढ़ता रहा तो इटावा को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग भी बंद हो जाएगा। यमुना किनारे बसे सिकरोड़ी, जुहीखा व बड़ेरा आदि गांवों के किनारे तक पानी पहुंच चुका है। इससे इन गांवों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है। गांव में निचले स्थानों पर रह रहे परिवार पलायन की तैयारी में हैं।

बाढ़ राहत चौकी बनाए गए प्राथमिक विद्यालय हनुमानगढ़ी पहुंचे अधिकारी
यमुना के बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए एसडीएम निखिल राजपूत व बीडीओ अतुल यादव ने मंगलवार को सिकरोड़ी व बड़ेरा गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ राहत चौकी बनाए गए प्राथमिक विद्यालय हनुमान गढ़ी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने तैनात लेखपालों को खराब हैंडपंप सही कराने, टैंकरों से पीने के पानी की सप्लाई कराने और बिजली व सफाई व्यवस्था ठीक कराने के आदेश दिए। उन्होंने सिकरोड़ी गांव का भी जायजा लिया। गांव के लोगों से शाम तक स्थिति को देखते हुए बाढ़ चौकियों एवं ऊंचे स्थानों पर पहुंचने के लिए तैयार रहने के लिए कहा।

गौहानी कलां मार्ग पर भरे पानी में चलेंगी दो नाव
एसडीएम ने गौहानी कलां मार्ग पर पानी को देखते हुए गांव आने-जाने के लिए दो नावों की व्यवस्था करने के आदेश दिए। एसडीएम निखिल राजपूत ने बताया कि यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पानी खतरे के निशान तक पहुंच गया है। अभी कुछ गांव के किनारे तक ही पानी पहुंचा है। लोगों से पानी बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए कहा गया है।

बाढ़ से इन गांवों में बढ़ रहा खतरा
तहसील अजीतमल में यमुना किनारे बसे ग्राम गौहानी कलां, बड़ेरा, सिकरोड़ी, जुहीखा, सिमार, गूंज, फरिहा, बीजलपुर, जाजपुर, असेवा, सड़रापुर, सिखरना, असेवटा, बंसियापुर, गौहानी खुर्द, मिश्रपुर मानिकचंद्र, भूरेपुर कला, पहाड़पुर व ततारपुर कलां में बाढ़ का खतरा है। साल 2019 व 2021 में यह गांव यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रभावित हुए थे। ज्यादा बारिश होने व कोटा बैराज से चंबल नदी में पानी छोड़े जाने से यमुना नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे खार व ऊंचे-नीचे टीलों के मध्य कटानों से होकर यमुना का पानी गांव की तरफ आकर सड़कों पर भर जाता है। इससे आवागमन अवरुद्ध हो जाता है।

बीते पांच सालों में हुई जनहानि
वर्ष 2019 में आई बाढ़ से ग्राम सिकरोड़ी, जुहीखा, गूंज व बड़ेरा समेत पांच गांवों की आबादी सर्वाधिक प्रभावित हुई थी। वर्ष 2019 की बाढ़ के दौरान एक ग्रामीण की मौत हुई थी। वर्ष 2021 में गौहानी कलां, बड़ेरा, सिकरोड़ी, जुहीखा, सिमार, गूंज, फरिहा, बीजलपुर, जाजपुर, असेवा व असेवटा समेत 11 गांवों की आबादी प्रभावित हुई थी।

कस्बा के पुरानी दिबियापुर मेंसबमर्सिबल का तार छूने से बालक की मौत

0

दिबियापुर। कस्बा के पुरानी दिबियापुर में शिवा पांडे (11) पुत्र राधामोहन पांडे सोमवार की रात नौ बजे के करीब घर में पानी भरने के लिए सबमर्सिबल चलाने गया था।बिजली का तार छू जाने से वह करंट की चपेट में आ गया। वह बुरी तरह झुलस गया। बेसुध पड़ा देख परिजन उसे दिबियापुर में एक निजी अस्पताल में ले गए।
सुधार न होता देख उसे मेडिकल कॉलेज ले गए। जहां डॉक्टर ने बालक को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने घटना को देर रात तक पुलिस को सूचना नहीं दी थी। (

Auraiya News: विशेषज्ञ का अभाव, हड्डी रोगी जा रहे मेडिकल कॉलेज

0

औरैया। शहर व आसपास 100 से ज्यादा गांवों के लिए 50 शैया जिला अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ा केंद्र है। बावजूद इसके अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से हड्डी रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है।यहां पर एक्सरे से लेकर प्लास्टर तक सभी संसाधन हैं, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। ऐसे में हड्डी रोगियों को 10 किमी दूर चिचौली मेडिकल कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ रही है।ऐसा नहीं है कि 50 शैया जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से इस कमी को लेकर ध्यान नहीं दिया गया। शासन को लगातार पत्राचार करते हुए डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन यह कागजी कवायद डेढ़ साल में भी इस कमी को दूर नहीं कर सकी है।

जिला अस्पताल की ओपीडी में 500 से ज्यादा मरीज आते हैं। वहीं इमरजेंसी में हादसों में घायल होने वाले लोग भी पहुंचते हैं। इसके अलावा हड्डी व जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर बुजुर्ग भी पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में उन्हें जरूरी उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें मेडिकल कॉलेज चिचौली का रुख करना पड़ रहा है।

50 शैया जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। पत्राचार के बाद भी डॉक्टर को तैनाती नहीं मिल रही है। ऐसे में अब वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की तैयारी बनाई जा रही है। अजीतमल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय को दो दिन के लिए शहर के अस्पताल भेजा जाएगा।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ

Auraiya News: विशेषज्ञ का अभाव, हड्डी रोगी जा रहे मेडिकल कॉलेज

0

औरैया। शहर व आसपास 100 से ज्यादा गांवों के लिए 50 शैया जिला अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ा केंद्र है। बावजूद इसके अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से हड्डी रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है।यहां पर एक्सरे से लेकर प्लास्टर तक सभी संसाधन हैं, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। ऐसे में हड्डी रोगियों को 10 किमी दूर चिचौली मेडिकल कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ रही है।ऐसा नहीं है कि 50 शैया जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से इस कमी को लेकर ध्यान नहीं दिया गया। शासन को लगातार पत्राचार करते हुए डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन यह कागजी कवायद डेढ़ साल में भी इस कमी को दूर नहीं कर सकी है।

जिला अस्पताल की ओपीडी में 500 से ज्यादा मरीज आते हैं। वहीं इमरजेंसी में हादसों में घायल होने वाले लोग भी पहुंचते हैं। इसके अलावा हड्डी व जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर बुजुर्ग भी पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में उन्हें जरूरी उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें मेडिकल कॉलेज चिचौली का रुख करना पड़ रहा है।

50 शैया जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है। पत्राचार के बाद भी डॉक्टर को तैनाती नहीं मिल रही है। ऐसे में अब वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की तैयारी बनाई जा रही है। अजीतमल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय को दो दिन के लिए शहर के अस्पताल भेजा जाएगा।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ

दिबियापुर कस्बे के बेला रोड स्थित बहरे वाली पुलिया के पास परचून की दुकान का ताला तोड़ नकदी व सामान चोरी

0

दिबियापुर। कस्बे के बेला रोड स्थित बहरे वाली पुलिया के पास परचून की दुकान में चोरी हो गई। चोर ताला तोड़कर 25 हजार रुपये व 20 हजार की कीमत का सामान ले गए। सुबह दुकानदार को ताला टूटा मिला। पुलिस ने जांच के बाद दुकानदार से पूछताछ की।औरैया रोड स्थित सेहुद बंबे के पास रहने वाले कुलभूषण पोरवाल बेला रोड पर बहरे वाली पुलिया के पास परचून की दुकान किए हैं। सोमवार शाम वह दुकान बंद कर घर चला गए थे। मंगलवार की सुबह पांच बजे दुकान खोलने पहुंचे तो ताले टूटे मिले। अंदर सामान बिखरा मिला। उन्होंने पुलिस को बताया कि दुकान में रखी गोलक से 25 हजार रुपये व करीब 20 हजार रुपये का सामान चोरी हुआ है।

आसपास के व्यापारियों का कहना है कि घटनास्थल से कुछ दूरी पर पुलिस की पिकेट लगती थी। जो काफी समय से नहीं लग रही है। दुकानदार ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। थाना प्रभारी निरीक्षक रुद्र प्रताप नारायण त्रिपाठी ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। सीसीटीवी में रात ढ़ाई बजे पुलिस गश्त करते हुए दिखाई दे रही है। वारदात संदिग्ध प्रतीत हो रही है। फिर भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

Auraiya News: मालगाड़ी की चपेट में आए किसान ने तोड़ा दम

0

दिबियापुर। गांव कैजरी के पास शनिवार सुबह मालगाड़ी की चपेट में आकर घायल हुए किसान की कानपुर के हैलट अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। कानपुर से शव घर लाया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।सहायल के गांव बादशाहपुर छौंक निवासी महेंद्र स्वरूप (50) किसान थे। शुक्रवार को उनका घर में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद वह रात करीब आठ बजे खेत पर जाने की बात कह कर घर से निकले थे। इसके बाद वापस घर नहीं पहुंचे। परिजनों ने उनकी तलाश की मगर उनका कहीं पता नहीं चला।शनिवार सुबह पाता और कैंजरी गांव के बीच रेलवे ट्रैक पर महेंद्र घायल हालत में पड़े मिले थे। स्टेशन मास्टर की सूचना पर आरपीएफ कर्मी सतेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने उन्हें दिबियापुर सीएचसी में भर्ती कराया था। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें कानपुर रेफर कर दिया गया था।

यह जानकारी उनके पुत्र अजय तिवारी ने दी है। बताया कि वह तीन भाई हैं। मां कृष्णा देवी हैं और दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। पिता खेती कर परिवार का पालन पोषण करते थे।

Auraiya News: झपकी आने से बाइक डिवाइडर से टकराई, युवक की मौत

0

औरैया। गुरुग्राम से घर जा रहे बाइक सवार को अचानक झपकी आ गई। इससे बाइक बेकाबू होकर हाईवे पर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।उसे शहर स्थित जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक हेलमेट नहीं लगाए था। पुलिस को उसके कान में इयरफोन लगा मिला। जनपद व थाना कौशांबी के गांव सराय आसिर निवासी प्रकाश (22) गुरुग्राम में प्राइवेट नौकरी करता था।सोमवार को वह घर जाने के लिए बाइक से निकला था। मंगलवार सुबह करीब पांच बजे कानपुर-इटावा हाईवे पर शहर के मोहल्ला दयालपुर के सामने से निकले ओवरब्रिज पर अचानक उसे झपकी आ गई। इससे बाइक डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

राहगीरों ने पुलिस को हादसे की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले गई। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर जांच की। ब्रह्मनगर चौकी प्रभारी सोनी रावत ने बताया कि बाइक सवार हेलमेट नहीं लगाए था। साथ ही सफर के दौरान वह इयरफोन भी लगाए था। पुलिस की सूचना पर परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।

पिता उदय सिंह भदौरिया ने बताया कि गुरुग्राम से निकलने के दौरान उसने परिजन से घर आने की बात कही थी। परिजनों ने बाइक से आने से मना भी कर दिया था। इसके बाद भी वह बाइक से घर जा रहा था। कोतवाल राजकुमार सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया है।