Tuesday, February 24, 2026
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UP Weather News: ठंड की विदाई! अभी से दिन में चुभने लगी धूप, बदलते मौसम का सेहत पर पड़ेगा प्रभाव, इन बातों का रखें विशेष ध्यान

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UP Weather News: समेत पूरे उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। ठंड का असर अब कम होने लगा है और तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सुबह और शाम हल्की ठंडक महसूस हो रही है, लेकिन दिन में तेज धूप निकलने से लोगों को अभी से गर्मी का एहसास होने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। फिलहाल कोई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ या अन्य मौसमी सिस्टम प्रभावी नहीं है, जिससे तापमान में और इजाफा हो सकता है।

बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर असर
बदलते मौसम का प्रभाव लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग सर्द-गर्म के कारण बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों में सर्दी, खांसी और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सुबह-शाम बाहर निकलते समय हल्के ऊनी कपड़े पहनें और खानपान का विशेष ध्यान रखें।

फतेहपुर सबसे ठंडा, वाराणसी सबसे गर्म
रविवार को फतेहपुर प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं वाराणसी सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

आगे और बढ़ेगा तापमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, साफ आसमान और तेज धूप के कारण दिन के तापमान में धीरे-धीरे और वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि धूप से बचाव करें, पर्याप्त पानी पिएं और सेहत के प्रति सतर्क रहें, क्योंकि समय से पहले गर्मी का असर महसूस किया जा सकता है।

अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस
राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने की संभावना जताई है। सफदरजंग मौसम केंद्र में न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पालम में 13 डिग्री सेल्सियस और लोधी रोड में तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के आसार हैं।

दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता
‘समीर’ ऐप के अनुसार, दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 207 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। दिल्ली के 26 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में थी जबकि 13 केंद्रों पर यह ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, एक केंद्र का एक्यूआई डेटा उपलब्ध नहीं था। अन्य सभी केंद्रों में से आनंद विहार में वायु गुणवत्ता सबसे खराब रही, जहां एक्यूआई 276 दर्ज किया गया।

सीपीसीबी के अनुसार, शून्य से 50 के बीच ‘एक्यूआई’ को ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। वायु गुणवत्ता पूर्व-चेतावनी प्रणाली (एक्यूईडब्ल्यूएस) के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता के अगले तीन दिन तक ‘खराब’ श्रेणी में रहने की संभावना है। अगले छह दिनों के लिए भी वायु गुणवत्ता के ‘खराब’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में रहने के आसार हैं।

AI अब बनेगा स्कूल का जरूरी सब्जेक्ट! 2026 से कक्षा 3 से शुरू होगी नई पढ़ाई

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नेशनल डेस्क: भारत में स्कूली शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 3 से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और Computational Thinking को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा। उच्च कक्षाओं के लिए AI का नया और ज्यादा एडवांस सिलेबस 2027 से लागू करने की तैयारी है।

यह बदलाव Ministry of Education की उस रणनीति का हिस्सा है, जो National Education Policy 2020 (NEP 2020) और National Curriculum Framework for School Education 2023 (NCF-SE 2023) के अनुरूप तैयार की गई है। उद्देश्य साफ है—बच्चों को AI-ड्रिवन दुनिया के लिए तैयार करना।

 क्या बदलने जा रहा है? AI शिक्षा का नया रोडमैप

  •  कक्षा 3 से 8: बुनियादी स्तर पर AI की शुरुआत (2026-27 से)
  • AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की बेसिक समझ दी जाएगी।
  • इसे “The World Around Us” जैसे विषयों के साथ जोड़ा जाएगा।

इन चीजों पर होगा फोकस

  • तार्किक सोच (Logical Thinking)
  • समस्या समाधान (Problem Solving)
  • AI का नैतिक उपयोग (Ethical AI Use)
  • आसान AI टूल्स की पहचान

इसका ड्राफ्ट सिलेबस Central Board of Secondary Education (CBSE) ने तैयार किया है, जिसकी समीक्षा National Council of Educational Research and Training (NCERT) द्वारा की जा रही है।

 कक्षा 9 और 10: AI होगा अनिवार्य विषय

  • वर्तमान व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन संरचना अधिक व्यवस्थित होगी।
  • एडवांस्ड कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI एप्लिकेशन पर ज्यादा जोर।
  • छात्रों को प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग से जोड़ा जाएगा।
  • कक्षा 11 और 12: 2027-28 से नया एडवांस सिलेबस
  • 2027-28 सत्र से पूरी तरह अपडेटेड AI पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
  • NCERT ने विशेषज्ञों की एक टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी बनाई है।
  • नया सिलेबस मशीन लर्निंग, प्रोग्रामिंग, AI एथिक्स और रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशन पर केंद्रित होगा।
  • 2029 में 12वीं बोर्ड परीक्षा इसी नए सिलेबस के आधार पर आयोजित की जाएगी।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

AI अब हेल्थकेयर, बैंकिंग, इंडस्ट्री, मीडिया और शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर चुका है। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यदि बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही AI की समझ दी जाए, तो वे भविष्य की नौकरियों और तकनीकी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे

उदयपुर में 707 विकास कार्यों को मंजूरी: मंत्री बाबूलाल खराड़ी बोले- सभी स्वीकृत कार्य जल्द होंगे पूरे

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जयपुर । जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार द्वारा उदयपुर जिले तथा उदयपुर ग्रामीण के सभी स्वीकृत कार्य शीघ्र पूरे किये जाएंगे। उन्होंने बताया कि उदयपुर जिले में वर्तमान राज्य सरकार द्वारा 14320.68 लाख रुपये के कुल 707 कार्यों की प्रशासनिक स्‍वीकृतियां जारी की गई है। इसी प्रकार विधान सभा क्षेत्र उदयपुर ग्रामीण में 62 कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है। इसमें से 35 कार्यों की वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है।

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक फूल सिंह मीणा द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थे। सदस्य द्वारा सदन में सड़क संबंधी समस्या बताने पर उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि सम्बंधित सड़क का प्रस्ताव प्रेषित करने पर इसे शीघ्र ही स्वीकृत कर कार्य पूर्ण करा दिया जाएगा।

इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने उदयपुर जिले में जनवरी, 2024 से दिसम्बर, 2025 तक स्वीकृत 707 कार्यों और उनकी प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृतियों का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि स्वीकृत कार्यों में से 99 कार्य पूर्ण हुए है। अपूर्ण कार्यों का मुख्य कारण निविदा प्रक्रिया, भूमि विवाद, कार्यकारी ऐजेन्सी के स्तर पर देरी आदि कारणों से विलम्ब होना है। पूर्ण कार्यों का विवरण भी उन्होंने सदन के पटल पर रखा।

खराड़ी ने बताया कि विधान सभा क्षेत्र उदयपुर ग्रामीण में वर्ष 2024 व 2025 में कुल स्वीकृत 62 कार्यों में से 35 कार्यों की वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है। शेष 27 कार्यों की कार्यकारी ऐजेन्सी से तकनीकी स्वीकृति, सहभागिता राशि, प्रस्तावित कार्यस्थल का जियो टैग फोटो इत्यादि प्राप्त नहीं होने के कारण वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं हो पायी है। समस्‍त 62 कार्यों का विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा।

Kishtwar ऑपरेशन पर सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस: सिर्फ 2 दिन में ही नहीं मिली कामयाबी, सर्दियों में भी डटी रहीं Forces, देखें…

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किश्तवाड़  :  किश्तवाड़ पिछले कई दिनों से चल रहे ऑपरेशन व कल जैश के तीन आतंकियों को मार गिराने के बाद आज सेना ने मीडिया के समक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।  काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC), मेजर जनरल ए पी एस बल ने कहा कि हाल ही में खत्म हुआ ऑपरेशन 16 महीने से ज़्यादा समय तक लगातार कोशिशों का नतीजा था, और इस सोच को खारिज कर दिया कि यह कामयाबी सिर्फ दो दिनों में मिली।

मीडिया से बात करते हुए, मेजर जनरल बल ने जोर देकर कहा कि यह ऑपरेशन सिर्फ़ “आइसबर्ग का सिरा” है, और इसका क्रेडिट उन कई साइलेंट वॉरियर्स को दिया जिन्होंने इसकी कामयाबी पक्की करने के लिए एक साल से ज़्यादा समय तक पर्दे के पीछे बिना थके काम किया। उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी फोर्सेज ने टेररिस्ट मूवमेंट्स के बारे में हर इनपुट और इंटेलिजेंस टिप पर लगातार एक्शन लिया, और तुरंत सर्च और कॉन्टैक्ट ऑपरेशन शुरू किए।

GOC ने ऑपरेशन के दौरान ट्रैकिंग और कॉन्टैक्ट बनाने में आर्मी डॉग स्क्वॉड की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने सर्दियों में पहले कभी नहीं हुई तैनाती पर भी जोर दिया, और कहा कि पहली बार, सिक्योरिटी फोर्सेज कड़ाके की सर्दी के महीनों में भी, ऊंचाई वाले इलाकों में लगभग चार फीट बर्फ होने के बावजूद, सही जगह पर तैनात रहीं।

उन्होंने कहा, “यह इलाका बहुत मुश्किल है। सटीक इंटेलिजेंस इनपुट के बाद भी, लोकेशन तक पहुंचने में अक्सर छह से आठ घंटे लग जाते हैं। जब तक हमारी टीमें पहुंचती हैं, तब तक आतंकवादी कभी-कभी अपने ठिकाने खाली कर देते हैं।”

भारत की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ जारी: सीमा पार आतंक, साइबर और ड्रोन खतरे पर सख्त शिकंजा!

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नेशनल डेस्क: भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी पहली व्यापक राष्ट्रीय काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी और स्ट्रैटेजी ‘PRAHAAR’ जारी कर दी है। यह दस्तावेज 23 फरवरी 2026 को Ministry of Home Affairs (MHA) द्वारा सार्वजनिक किया गया और मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

करीब 8-9 पन्नों की इस नीति में आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को स्पष्ट रूप से दोहराया गया है। साथ ही बदलते वैश्विक और तकनीकी खतरों से निपटने के लिए एक समन्वित और बहु-आयामी ढांचा प्रस्तुत किया गया है।

आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ने की स्पष्ट नीति

PRAHAAR दस्तावेज में साफ कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। यह नीति आतंकवाद को एक आपराधिक और सुरक्षा चुनौती के रूप में देखती है, न कि किसी समुदाय विशेष से जुड़ी पहचान के रूप में।

मुख्य खतरे जिन पर खास नजर

नई रणनीति में कई उभरते और पारंपरिक खतरों को रेखांकित किया गया है:

  • सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद, विशेष रूप से जिहादी संगठनों और उनके फ्रंटल नेटवर्क के जरिए।
  • वैश्विक आतंकी नेटवर्क जैसे Al-Qaeda और Islamic State (ISIS) की स्लीपर सेल गतिविधियां।
  • ड्रोन के माध्यम से हथियार, नशीले पदार्थ और भर्ती गतिविधियां।
  • साइबर हमले, जिनमें आपराधिक हैकर्स और राष्ट्र-प्रायोजित तत्व शामिल हैं।
  • सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल फंडिंग और कट्टरपंथ फैलाने के लिए।
  • CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल) सामग्री का दुरुपयोग।
  • आतंकी संगठनों और संगठित अपराध गिरोहों के बीच बढ़ता गठजोड़।

संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा पर फोकस

नीति में ऊर्जा, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जमीन, समुद्र और वायु मार्ग से आने वाले खतरों के खिलाफ सुरक्षा तंत्र को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर है।

काउंटर-टेरर स्ट्रैटेजी के 7 बड़े स्तंभ

1- रोकथाम (Prevention)

  • इंटेलिजेंस आधारित रणनीति
  • मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के जरिए रियल-टाइम सूचना साझा करना
  • आतंक फंडिंग और ओवरग्राउंड वर्कर्स पर कार्रवाई
  • सीमाओं पर अत्याधुनिक निगरानी तकनीक

2. प्रतिक्रिया (Response)

  • स्थानीय पुलिस को ‘पहली प्रतिक्रिया’ बल के रूप में मजबूत करना
  • बड़ी घटनाओं में National Security Guard (NSG) की तैनाती
  • जांच में National Investigation Agency (NIA) की भूमिका और सजा दर बढ़ाने पर जोर
  • MHA के मानक संचालन प्रक्रियाओं के तहत समन्वित कार्रवाई

3. क्षमता निर्माण (Capacity Building)

  • सुरक्षा एजेंसियों का आधुनिकीकरण
  • नई टेक्नोलॉजी और हथियार
  • विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • राज्यों में एकसमान एंटी-टेरर ढांचा विकसित करना

4. कानून और मानवाधिकार संतुलन

  • Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) को प्रमुख कानूनी आधार
  • मानवाधिकारों की रक्षा और बहु-स्तरीय न्यायिक राहत

5.  रेडिकलाइजेशन पर रोक

  • डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम
  • जेलों में निगरानी और सुधारात्मक कदम
  • धार्मिक व सामुदायिक नेताओं की भागीदारी
  • युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार योजनाएं

6. अंतरराष्ट्रीय सहयोग

MLAT और प्रत्यर्पण संधियां

संयुक्त राष्ट्र में आतंकी संगठनों की लिस्टिंग

द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी

7. समाज-आधारित रिकवरी

  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
  • प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वास
  • समुदाय में विश्वास बहाली

आगे की रणनीति

PRAHAAR नीति में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, कानूनों में समय-समय पर संशोधन, राज्यों की ATS यूनिट्स को मजबूत करना, तकनीकी निवेश बढ़ाना और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी जैसे बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है। यह रणनीति भारत को पारंपरिक और आधुनिक—दोनों तरह के आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए एकीकृत और सक्षम ढांचा प्रदान करती है।

Gold Rate: क्या 80,000 रुपये तक पहुंच जाएगा सोना? सोने की कीमतों को लेकर Bloomberg का बड़ा अनुमान

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नेशनल डेस्कः सोने की कीमतों को लेकर बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। हालिया महीनों में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अब गोल्ड रेट में संभावित गिरावट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भारत में सोने का भाव 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।

हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद प्रमुख कारण रहे हैं। खासतौर पर ब्रिक्स (BRICS) समूह के देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—ने पिछले छह महीनों में वैश्विक सोना खरीद का लगभग आधा हिस्सा अपने नाम किया है। इन देशों का उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाना रहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की मांग और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

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विश्लेषकों के अनुसार, बदलते भू-राजनीतिक समीकरण अब सोने के बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से जारी तनाव के चलते रूस ने अपने विदेशी व्यापार में डॉलर के उपयोग को सीमित किया और सोने के भंडार को तेजी से बढ़ाया। हालांकि, हालिया संकेत बताते हैं कि रूस अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में डॉलर की हिस्सेदारी फिर बढ़ा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह सोने के बाजार के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का आकलन है कि डॉलर की ओर झुकाव बढ़ने की स्थिति में रूस अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बाजार में उतार सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में अचानक वृद्धि होगी और कीमतों पर दबाव बन सकता है। बड़ी मात्रा में बिकवाली की स्थिति में सोने के दामों में उल्लेखनीय गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता।

कीमतों पर अतिरिक्त दबाव

सोने की संभावित गिरावट का एक अन्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता है। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि यह संघर्ष कूटनीतिक समझौते या व्यापारिक सहमति के माध्यम से समाप्त होता है, तो वैश्विक बाजार में स्थिरता लौट सकती है। ऐतिहासिक अनुभव बताता है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और आर्थिक संतुलन कायम होता है, तब निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने से दूरी बनाते हैं, जिससे इसकी कीमतों में नरमी आती है। इसी बीच, चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख खरीदार देशों द्वारा हाल में की गई भारी खरीदारी के बाद अब मांग में कमी के संकेत मिल रहे हैं। यदि इन देशों की ओर से सोने की खरीद घटती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

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70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसी Bloomberg ने अनुमान जताया है कि भारत में सोने के दाम आने वाले समय में 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक आ सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अचानक नहीं होगी, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों में क्रमिक बदलाव के साथ चरणबद्ध तरीके से देखने को मिल सकती है। उनका आकलन है कि वर्ष 2027 के अंत तक बाजार में स्थिरता आने की स्थिति में कीमतें लगभग 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ठहर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी आगाह करते हैं कि सोना वैश्विक संकटों के प्रति अत्यंत संवेदनशील धातु है। इसलिए खुदरा निवेशकों और आम खरीदारों को बाजार की दिशा समझकर ही निवेश या खरीदारी का निर्णय लेना चाहिए, ताकि ऊंचे स्तर पर खरीद कर नुकसान उठाने से बचा जा सके।

फिलहाल वैश्विक निवेशकों की नजरें रूस, अमेरिका और ब्रिक्स देशों की नीतियों पर टिकी हुई हैं। यदि डॉलर मजबूत होता है और रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान निकलता है, तो सोने की कीमतों में गिरावट संभव है। वहीं, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में चमक सकता है।

सावधान! शुगर के मरीज बिना प्लानिंग के न रखें रोजा, छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

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Diabetes and Ramadan Guide : रमजान का महीना शुरू होने वाला है और दुनिया भर के मुसलमान रोजे की तैयारी में हैं। हालांकि डायबिटीज (मधुमेह) से जूझ रहे लोगों के लिए लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना जोखिम भरा हो सकता है। बिना सही प्लानिंग के रोजा रखने से ब्लड शुगर अचानक गिर सकती है (Hypoglycemia) या बढ़ सकती है (Hyperglycemia) जो सेहत के लिए गंभीर खतरा है।

किन्हें रोजा रखने से बचना चाहिए? 

डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कोविल के अनुसार हर मरीज की स्थिति अलग होती है। उन्होंने रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन यानी जोखिम के आकलन पर जोर दिया है:

  • किसे है मनाही: जिन्हें किडनी की बीमारी, हार्ट फेल्योर, गर्भावस्था, या हाल ही में कोई गंभीर इंफेक्शन हुआ हो उन्हें रोजा रखने से बचना चाहिए।
  • टाइप-2 डायबिटीज: जिन मरीजों की शुगर कंट्रोल में है वे डॉक्टर की निगरानी और दवाओं में जरूरी बदलाव के साथ रोजा रख सकते हैं।

    डॉक्टर की 3 गोल्डन सलाह

    1. दवाओं का समय: इंसुलिन या शुगर की दवाओं की डोज़ को सहरी और इफ्तार के हिसाब से बदलना पड़ता है। आमतौर पर सुबह की डोज़ कम की जाती है ताकि दिन में शुगर लेवल अचानक न गिरे।
    2. नियमित जांच: डॉ. अंशुल सिंह बताते हैं कि दिन में कई बार ब्लड शुगर चेक करना चाहिए। याद रखें शुगर जांचने से रोजा नहीं टूटता।
    3. कब तोड़ें रोजा: यदि शुगर 70 mg/dL से कम या 300 mg/dL से ज्यादा हो जाए या फिर चक्कर और पसीना आने लगे तो जान बचाने के लिए तुरंत रोजा तोड़ देना चाहिए।

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    सहरी और इफ्तार की परफेक्ट डाइट

    सही पोषण ही आपको पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखेगा:

    समय क्या खाएं? क्या न खाएं?
    सहरी (Suhur) ओट्स, बेसन चीला, अंडा, फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन। ज्यादा मीठा और नमकीन खाना (इससे प्यास ज्यादा लगती है)।
    इफ्तार (Iftar) एक खजूर और पानी से शुरुआत करें। हल्का सूप, ग्रिल्ड चिकन, दाल और सब्जियां। तला-भुना (पकौड़े), कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा मिठाई।

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    हाइड्रेशन का रखें खास ख्याल

    इफ्तार से सहरी के बीच शरीर में पानी की कमी न होने दें। 8 से 10 गिलास तरल पदार्थ लें। सादे पानी के अलावा नींबू पानी, छाछ, सूप या हर्बल चाय बेहतर विकल्प हैं। चाय और कॉफी कम पिएं क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं।

देवरिया में टीचर-स्टूडेंट का रिश्ता शर्मसार,

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देवरिया- देवरिया में टीचर-स्टूडेंट का रिश्ता शर्मसार, स्कूल में छात्रा से टीचर ने की अश्लील हरकत, क्लास में अश्लील हरकत करते वीडियो वायरल, टीचर अश्वनी शर्मा स्कूल से निकाला गया, पुलिस और शिक्षा विभाग ने लिया संज्ञान, वायरल वीडियो 2 माह पुराना बताया गया, पथरदेवा कस्बे में MBD स्कूल का मामला

इटावा कानपुर-आगरा हाईवे पर भीषण हादसा

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इटावा- कानपुर-आगरा हाईवे पर भीषण हादसा, 2 लोगों की मौके पर मौत, 6 घायल, पेट्रोल पंप के सामने 2 कारों की टक्कर, पीछे से कार ने दूसरी कार को मारी टक्कर, घटना से हाईवे पर मची अफरा तफरी, कोतवाली जसवंतनगर क्षेत्र में दर्दनाक घटना

लखनऊ भाजपा माले समेत कई संगठनों का पैदल मार्च,

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लखनऊ- भाजपा माले समेत कई संगठनों का पैदल मार्च, चारबाग से निकाला गया विरोध मार्च, हाथों में तख्ती-बैनर लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, गरीबों पर अत्याचार बंद करो के नारे लगाए