लखनऊ- नगर निगम को देख भैंस-बकरी घर में छुपाया, बेडरूम में भैंस बंद कर बाहर से ताला लगाया, अवैध डेयरी के खिलाफ नगर निगम का अभियान, बिजनौर में रॉयल सिटी कॉलोनी में अवैध डेयरी
औरैया। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली टीमों के औचक निरीक्षण में सामने आ गई। सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की 16 टीमें सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल पहुंचीं तो खामियां ही खामियां सामने आ गईं।कहीं दवा उपलब्ध नहीं थीं तो कहीं जांच नहीं हो रही थी। कहीं मरीजों को समय से खाना नहीं मिल रहा था तो कहीं गंदगी पसरी मिली। टीमों ने खामियां ठीक कराने के निर्देश दिए।एसीएमओ डॉ. शिशिर पूरी सीएचसी दिबियापुर का निरीक्षण करने पहुंचे। दवा स्टॉक चेक किया तो 22 प्रकार की दवाएं उपलब्ध नहीं मिलीं। इनके बारे में बताया गया कि दवाएं मंगवाने के लिए पत्र भेजा है। उन्होंने लैब का भी निरीक्षण किया। यहां पाया कि मरीजों को जांच रिपोर्ट मोबाइल पर नहीं भेजी जा रही थी। मरीजों से बात की तो पता चला कि मरीजों को समय से खाना नहीं मिल रहा है।
निरीक्षण के दौरान ओपीडी में डॉ रश्मि एवं डॉ. सऊद अहमद, फार्मासिस्ट मृदुल पाल ,वार्ड व्याय उमाशंकर उपस्थित मिले। डॉ. शिशिर पुरी ने ही पीएचसी देवरपुर और फफूंद का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने सिटीजन चार्ट और शिकायत पेटिका नहीं मिली।
आग बुझाने वाले उपकरण की एक्सपायरी तिथि निकट मिली। इस दौरान जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता अखिलेश कुमार, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक अश्वनी कुमार, हिमांशु चंदन, उपेंद्र पाल, स्टाफ नर्स रीना, सोनाली, आरती सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
आयुष्मान आरोग्य केंद्र ककोर में सीएचसी की ओर से बीसीपीएम जमीर अहमद एवं एचईओ विवेक कुमार ने निरीक्षण किया। यहां मरीजों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं मिली। आरोग्य केंद्र के सामने मिट्टी न होने के कारण बारिश में पानी भर जाता है, शौचालय का चैंबर गंदगी से भरा मिला। सीएचओ रजनी पाल ने बताया कि इस संबंध में ग्राम प्रधान से कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
जिला संयुक्त चिकित्सालय में डॉ. मनोज शंखवार निरीक्षण करने पहुंचे। यहां सबसे बड़ी समस्या पर्चा बनने को लेकर उन्हें दिखी। आधार कार्ड साथ न लाने वालों के पर्चे नहीं बन पा रहे थे। सीएमएस डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि ऑनलाइन पर्चे के लिए आधार नंबर आवश्यक है। अस्पताल के अंदर ही पानी फैला मिला, जिससे साफ कराया गया। अस्पताल में सफाईकर्मी यूनिफार्म में नहीं मिले।
एसीएमओ सीएमओ डॉ. बृजेश कुमार एवं डॉ. अनीस अंसारी ने सीएचसी बिधूना की स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। यहां अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो रही थी। सीएचसी बिधूना के अधीक्षक डॉ. वीपी शाक्य ने बताया कि टेक्नीशियन न होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। टीम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र असजना, रुरुगंज तथा उपकेंद्र पुरवा बड़े का भी निरीक्षण किया व साफ-सफाई दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में औचक निरीक्षण करवाकर व्यवस्थाओं की जांच कराई गई है। संबंधितों को सुधार के निर्देश दिए हैं। आगे भी इसी प्रकार निरीक्षण कराए जाएंगे, जिससे हकीकत सामने आती रहे।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ।
औरैया। जिले में मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक हुई बारिश ने मौसम का रुख बदल दिया है। धीरे-धीरे बढ़ता पारा एकाएक नीचे गिर गया है। इस बारिश ने आलू, सरसों, अरहर समेत सब्जी फसलों को झटका दे दिया है।स्थिति यह है कि सरसों की फसल गिर गई। वहीं आलू के खेत में पानी घुस गया। इन फसलों में नुकसान की आशंका है। पिछले तीन दिन से आसमान में छाए बादल मंगलवार रात बरसे। पूरी रात रुक-रुककर बारिश होती रही। वहीं जिले के कुछ स्थानों पर दिन में भी बारिश हुई। तेज हवा के साथ हुई इस बारिश ने फसलों को झकझोर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार रातभर में पांच मिलीमीटर बारिश हुई है। वहीं पांच डिग्री पारा गिरा है।
ऐसे में अगले सप्ताह तक सब्जी के भाव उछाल मारेंगे। रात की तरह बुधवार दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। सर्द हवाएं चलती रहीं। कुछ जगह हल्की बूंदाबांदी भी हुई। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखने को मिली।
बुधवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जोकि एक दिन पहले 26 डिग्री रहा। हालांकि न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिक डॉ. रामपलट ने बताया कि दो दिन और बादल छाए रहने के आसार है। छुटपुट बारिश हो सकती है। फसलों में पानी की निकासी के इंतजाम रखें। ताकि जलभराव से फसल को बचाया जा सके।
गेहूं की फसल को फायदा
एक तरफ जो बारिश आलू, सरसों, अरहर समेत अन्य फसलों के लिए मुसीबत बन गई है, वहीं गेहूं को इससे फायदा है। दरअसल अभी गेहूं में बाली नहीं आई है। ऐसे में गेहूं को सिंचाई की जरूरत भी थी। बारिश होने से सिंचाई की जरूरत भी पूरी हो गई है। वहीं तापमान में गिरावट भी गेहूं के लिए फायदेमंद है।
बोले किसान-बारिश आफत बन गई
आलू में फंगस का खतरा
आलू की अगेती फसल किसानों की आय में अहम मानी जाती है। जिले में आलू की फसल का रकबा सात हजार हेक्टेयर के करीब है। इन दिनों हो रही बारिश से आलू में फंगस का खतरा बढ़ गया है।
मोनू शाक्य, रामपुर
भाव पर होगा असर
झुलसा रोग से प्रभावित हुई आलू की फसल पर अब बारिश आफत बन गई है। उत्पादन गिरने की आशंका है। ऐसे में इसका असर आलू के भाव पर भी देखने को मिलेगा।
बीनू राठौर, पुरवा कमल सिंह
दिबियापुर। पूर्व बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ला ने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने स्कूलों में वंदे मातरम गायन अनिवार्य करने का आदेश दिया था। इस आदेश को वापस लेने का दबाव पड़ा तो उन्होंने आदेश वापस न लेकर अपना मंत्री पद छोड़ दिया था।
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में बुधवार को भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन हुए। शिक्षण संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों ने बैनर पोस्टर लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रयागराज में हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसे पूरी तरह से वापस लेने की मांग की।ब्रज में आगरा, फिरोजाबाद , मैनपुरी, एटा और कासगंज में सवर्ण समाज ने कलेक्ट्रेट समेत अन्य स्थानों पर धरना देकर प्रदर्शन किया। मऊ में नगर क्षेत्र के ताजोपुर में भाजपा के एक सेक्टर अध्यक्ष, पांच बूथ अध्यक्ष सहित 20 कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देकर पार्टी का झंडा भी फूंका।
हाथरस के मुरसान में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अलीगढ़ मंडल अध्यक्ष व राष्ट्रीय सचिव राम ठाकुर ने राष्ट्रपति के नाम खून से लिखा पत्र कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम को सौंपा। वाराणसी में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने काशी विद्यापीठ को बंद करवा दिया। विरोध की वजह से स्नातक, स्नातकोत्तर की परीक्षा भी टालनी पड़ी।
उधर, राष्ट्रीय हिंदू दल संगठन की ओर से पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर नियमावली को तत्काल वापस लेने की मांग की है। वहीं, दूसरी तरफ रामपुर के बिलासपुर में राष्ट्रीय पटेल महासभा के कार्यकर्ताओं ने समर्थन में जुलूस निकालकर राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा।
राज्य कर्मचारियों की तरह प्रदेश सरकार शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा का तोहफा देने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी। प्रदेश के करीब 8 लाख से अधिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों को इस योजना का लाभ मिलेगा।इसके अलावा लखीमपुर खीरी में नाव पलटने से हुए हादसे से पीड़ित ग्रामीणों को घर देने, आवास विभाग के वाह्य विकास शुल्क प्रणाली में सुधार के लिए ‘उप्र नगर योजना और विकास (विकास शुल्क) उद्ग्रहण, संग्रहण नियमावली,2026’ और उप्र शहरी पुर्नविकास नीति, 2026 को भी मंजूरी दी जा सकती है।