Sunday, February 15, 2026
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रोज 20 घंटे फोन पर बिताती थीं गाजियाबाद में सुसाइड करने वाली तीनों बहनें, डाटा ने खोल दी सारी पोल, कारनामे सुन रह जाओगे हैरान

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Ghaziabad Triple Suicide Case : गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की कथित आत्महत्या की जांच के दौरान पुलिस को एक अहम डिजिटल सुराग मिला है। फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजे गए मोबाइल फोन से बरामद डेटा में सामने आया है कि बहनें कथित तौर पर रोज़ाना लगभग 20 घंटे कोरियन कंटेंट, कार्टून और गेमिंग सामग्री देखती थीं। पुलिस इस डिजिटल पैटर्न को केस के मनोवैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य पहलुओं से जोड़कर जांच कर रही है।

घटना से पहले बेचा गया था फोन
पुलिस के अनुसार, 16, 14 और 12 वर्ष की तीनों बहनों ने 4 फरवरी को सोसायटी की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। जांच में पता चला कि उनके पिता चेतन कुमार ने घटना से करीब 15 दिन पहले लड़कियों का मोबाइल फोन शालीमार गार्डन स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान को 15,000 रुपये में बेचा था। बाद में इस डिवाइस को डिलीट डेटा रिकवर करने और ऑनलाइन गतिविधियों की पड़ताल के लिए फोरेंसिक जांच में शामिल किया गया।

ऑनलाइन कंटेंट और रुचियां
एक जांच अधिकारी ने बताया कि रिकवर किए गए डेटा से यह समझने में मदद मिली कि बहनें इंटरनेट पर क्या देख रही थीं और क्या वे परिवार के बाहर किसी के संपर्क में थीं। अब तक के विश्लेषण में बहनों की कोरियन कल्चर, खासकर K-pop, में गहरी रुचि सामने आई है। सुसाइड नोट में उल्लिखित गेम्स से संबंधित सामग्री भी फोन में पाई गई, जिनमें हॉरर टाइटल्स जैसे Poppy Playtime, The Baby in Yellow, Ice Scream, Evil Nun और Ice Game शामिल हैं।

पांच गेम्स पर बैन की सिफारिश
पुलिस ने इन पांच गेम्स को लेकर सरकार को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें संभावित प्रतिबंध की सिफारिश की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एहतियाती तौर पर उठाया गया है, ताकि किशोरों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जा सके।

YouTube हिस्ट्री और चैनल का खुलासा
फोन की YouTube हिस्ट्री में कोरियन, चीनी, थाई और जापानी कंटेंट की लंबी सूची मिली है। साथ ही कार्टून और गेमिंग वीडियो भी प्रमुखता से देखे गए, जैसे Doraemon, Shinchan, PJ Masks, Masha and the Bear, Shimmer and Shine और Peppa Pig। जांच में यह भी सामने आया कि बहनों ने 2025 में K-ड्रामा और कार्टून कैरेक्टर आधारित एक YouTube चैनल शुरू किया था, जिसके 2,000 से अधिक फॉलोअर्स थे। कथित तौर पर घटना से करीब 10 दिन पहले चैनल डिलीट कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि चैनल हटाने के पीछे पारिवारिक आपत्तियां एक संभावित कारण हो सकती हैं।

कोविड के बाद बदला व्यवहार
अधिकारियों के मुताबिक, कोविड के बाद बहनों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था और उनके सामाजिक दायरे में काफी कमी आई थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बना रही है, ताकि अकेलेपन, डिजिटल निर्भरता और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंधों को समझा जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और सभी निष्कर्ष फोरेंसिक व अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही तय किए जाएंगे।

प्रयागराज में मामूली विवाद बना मौत की वजह, पेशाब का विरोध करने पर व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या

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प्रयागराज: जिले के नैनी थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां घर के पास पेशाब करने पर आपत्ति जताना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। आरोप है कि इसी बात पर हुए विवाद में 45 वर्षीय राजेश निषाद की लोहे की रॉड से पीटकर हत्या कर दी गई।

पुलिस के अनुसार, यह घटना बृहस्पतिवार देर रात मदौका इलाके में स्थित संजय गेस्ट हाउस के पास हुई। रात में आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 पर सूचना मिली कि एक व्यक्ति को बुरी तरह पीटा गया है। मौके पर पहुंची पुलिस को राजेश निषाद गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले, जिन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सहायक पुलिस आयुक्त (करछना) सुनील कुमार ने बताया कि पास के एक शादी घर में ननकू चौरसिया की बेटी का विवाह समारोह चल रहा था। बारात में शामिल कुछ लोग कथित तौर पर राजेश निषाद के घर के पास पेशाब कर रहे थे। जब निषाद ने इसका विरोध किया तो कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई। आरोप है कि हमलावरों ने लोहे की रॉड से निषाद पर हमला किया।

पुलिस ने मृतक के परिजनों की तहरीर पर 12 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी सुनील कनौजिया समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, सुनील कनौजिया मऊ जिले में पुलिस कांस्टेबल के पद पर तैनात है और अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने प्रयागराज आया था। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है।

8th Pay Commission का बड़ा तोहफा: लेवल-1 से लेवल-4 तक मिलेगा 5.10 लाख से 8.01 लाख रुपये तक भारी-भरकम एरियर

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नेशनल डेस्क: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी करने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी और एरियर की राशि कितनी मिलेगी। यदि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानती है और इसे वास्तविक रूप से 2027 में लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों के बैंक खातों में लाखों रुपये का एरियर (बकाया राशि) एकमुश्त आ सकता है।

8th Pay Commission का औपचारिक गठन और प्रभाव
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक आधिकारिक संकल्प के जरिए 8th Pay Commission के गठन की अधिसूचना जारी की थी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, यह आयोग अब अस्तित्व में आ चुका है। 7वें वेतन आयोग के लगभग दस साल बाद गठित यह नया आयोग न केवल केंद्रीय कर्मचारियों, बल्कि रक्षा कर्मियों, ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों और लाखों पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन ढांचे में बड़ा सुधार करेगा।

कब तक मिल सकता है नया वेतन और एरियर?
आयोग की सिफारिशें तकनीकी रूप से 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। हालांकि, रिपोर्ट तैयार करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया में समय लगने के कारण इसे 2027 में जमीन पर उतारा जा सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को 12 से लेकर 20 महीने तक का एरियर मिल सकता है। इसका मतलब यह है कि 1 जनवरी 2026 से लेकर वास्तविक क्रियान्वयन की तारीख तक के पुराने और नए वेतन के बीच का पूरा अंतर सरकार कर्मचारियों को एकमुश्त भुगतान करेगी।

Salary में कितनी होगी वृद्धि और एरियर का संभावित हिसाब?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को 2.57 के आसपास रखा जा सकता है, जिससे कर्मचारियों के वेतन में 30 से 50 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है। संभावित गणना के आधार पर विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों को मिलने वाला एरियर कुछ इस प्रकार हो सकता है:-

लेवल-1 कर्मचारी: लगभग 3.60 लाख से 5.65 लाख रुपये तक का एरियर।

लेवल-2 कर्मचारी: लगभग 3.98 लाख से 6.25 लाख रुपये तक की बकाया राशि।

लेवल-4 कर्मचारी: लगभग 5.10 लाख से 8.01 लाख रुपये तक का भारी-भरकम एरियर।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये आंकड़े संभावित गणनाओं पर आधारित हैं और अंतिम राशि आयोग की रिपोर्ट व सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही तय होगी।

कैसे होती है एरियर की गणना?
एरियर निकालने का तरीका काफी स्पष्ट है। इसके लिए सबसे पहले कर्मचारी की पुरानी बेसिक सैलरी और नई प्रस्तावित बेसिक सैलरी के बीच का अंतर निकाला जाता है। फिर उस अंतर को उन महीनों की संख्या से गुणा किया जाता है जितने समय से वेतन वृद्धि लंबित है। इसके अलावा, चूंकि महंगाई भत्ता (DA) बेसिक सैलरी के आधार पर तय होता है, इसलिए नई Basic Salary बढ़ने से DA का अंतर भी एरियर की कुल राशि में जुड़ जाता है। इस प्रकार कर्मचारियों को मूल वेतन और भत्तों, दोनों का संयुक्त लाभ मिलता है।

महंगाई के दौर में बड़ी राहत
लगातार बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे थे। 8वें वेतन आयोग के गठन से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। हालांकि अंतिम सिफारिशों में अभी वक्त लगेगा, लेकिन प्रक्रिया शुरू होने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में उत्साह की लहर है।

क्या बंद होने वाले हैं 500 रुपए के नोट ! जानें RBI का नए नोटों पर फैसला…

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जम्मू डेस्क :   भारत में चलने वाले 100 और 500 रुपए के नोटों को लेकर बड़ा अपडेट आया है। Reserve Bank of India ने इन नोटों की सुरक्षा और गुणवत्ता बेहतर करने का फैसला किया है। जल्द ही बाजार में नए सिक्योरिटी फीचर्स वाले अपडेटेड नोट आ सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि पुराने 100 और 500 रुपये के नोट पूरी तरह से मान्य रहेंगे। इन्हें बंद करने की कोई योजना नहीं है।

बदलाव क्यों किया जा रहा है?

आरबीआई के अनुसार, गांवों, छोटे दुकानदारों और रोजमर्रा के लेनदेन में अब भी नकद का ज्यादा इस्तेमाल होता है। नकली नोटों पर रोक लगाने और नोटों को ज्यादा टिकाऊ बनाने के लिए सुरक्षा फीचर्स को मजबूत किया जा रहा है।

100 रुपए के नोट में क्या नया होगा?

इसके डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। लेकिन इसकी छपाई, स्याही, वॉटरमार्क और सुरक्षा धागा पहले से ज्यादा साफ और बेहतर होंगे। नोट ज्यादा मजबूत भी होगा ताकि जल्दी खराब न हो।

500 रुपए के नोट में क्या बदलाव होगा?

500 रुपये के नोट में माइक्रो-प्रिंटिंग और रंगों की गुणवत्ता बेहतर की जाएगी। इसका मूल डिजाइन वही रहेगा, ताकि लोगों को पहचानने में परेशानी न हो।

पुराने नोटों का क्या होगा?

पुराने नोट पहले की तरह चलते रहेंगे। एटीएम और बैंक दोनों नए और पुराने नोट स्वीकार करेंगे। यह बदलाव सिर्फ सुरक्षा बढ़ाने के लिए है, नोट बंद करने के लिए नहीं।

वेलेन्टाइन डे के मौके पर सजी दुकानें..देखें तस्वीरें

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वेलेन्टाइन डे के मौके पर सजी दुकानें..देखें तस्वीरें
वेलेन्टाइन डे पर दुकानों का रूप निखर उठता है। लाल गुलाबों, दिल आकार की सजावट और चमकदार रोशनी से हर कोना प्रेम का संदेश देता है। शोकेस में उपहार, चॉकलेट और कार्ड सजे रहते हैं। रंगीन गुब्बारे और खुशबूदार माहौल ग्राहकों को आकर्षित करते हैं। यह सजावट त्योहार को और खास बना देती है, मानो हर दुकान प्रेम का उत्सव मना रही हो।

प्रेम का पर्व वेलेंटाइन डे नज़दीक आते ही सूरत शहर की गिफ्ट शॉप्स और फ्लावर स्टोर्स में खास सजावट देखने को मिल रही है। युवाओं के बीच इस दिन का इंतज़ार सबसे अधिक रहता है। शहर के अठवा क्षेत्र की एक गिफ्ट शॉप पर युवतियां वेलेंटाइन डे के लिए उपहार चुनते हुए नज़र आईं। फोटो— मुकेश

दुकानदारों ने चेन्नई के चेपेट इलाके में अपनी दुकानों को वेलेन्टाइन डे के सामान से सजाया। दिल के आकार वाले गुब्बारे और कट-आउट, ग्रीटिंग कार्ड, गिफ्ट हैम्पर और फूलों के गुलदस्ते आकर्षक ढंग से सजाए गए। यह तैयारी वार्षिक प्रेम उत्सव और वेलेन्टाइन डे से पहले होने वाली तेज़ बिक्री के लिए की गई। फोटो— हरिहर कृष्णन

उदयपुर में वेलेंटाइन डे के लिए बाजार में दुकानों पर सजे वेलेंटाइन गिफ्ट। शहर के बापू बाजार में एक गिफ्ट सामग्री की दुकान पर सजे गिफ्ट। फोटो— प्रमोद सोनी

वैलेंटाइन डे वीक चल रहा है जोधपुर शहर की एक गिफ्ट की दुकान उपहार पसंद करते युवा। फ़ोटो – गौतम उड़ेलिया

जोधपुर भगत की कोठी के पास पाली रोड पर वैलेंटाइन डे के लिए टेडी बियर खरीदते हुए। फोटो एसके मुन्ना

क्या इमरान खान हो रहे हैं अंधे! जेल में टॉर्चर से पूर्व पाकिस्तानी पीएम के हाल बेहाल,रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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Adiala Jail Torture: पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की जेल में हालत गंभीर है। मेडिकल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इलाज न मिलने और टॉर्चर से उनकी दाहिनी आंख की 85% रोशनी चली गई है।

Pakistan Deep State: पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल लाने वाली एक सनसनीखेज खबर अदियाला जेल (Adiala Jail News) की चारदीवारी से बाहर आई है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की हालत जेल में बहुत नाजुक बताई जा रही है। एक सनसनीखेज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ‘पाकिस्तानी डीप स्टेट’ (सैन्य प्रतिष्ठान) के इशारे पर जेल में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसके चलते उनकी दाहिनी आंख की 85% रोशनी (Vision) चली गई है। यह खुलासा किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत के मित्र) सलमान सफदर की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान (Imran Khan Health Update) को अदियाला जेल में पिछले दो साल और चार महीने से ‘काल कोठरी’ (Solitary Confinement) में रखा गया है। इस दौरान उन्हें जानबूझ कर मेडिकल सुविधाएं नहीं दी गईं। सफदर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि खान की आंखों से लगातार पानी आ रहा था और वे बार-बार टिश्यू से आंखें पोंछ रहे थे, जो उनकी पीड़ा बयान कर रहा था।

इलाज नहीं मिला, खून का थक्का जम गया

73 साल के इमरान खान ने बताया कि अक्टूबर 2025 तक उनकी आंखों की रोशनी बिल्कुल ठीक (6×6) थी। इसके बाद उन्हें धुंधला दिखाई देने लगा। उन्होंने जेल अधीक्षक से डॉक्टर को दिखाने की कई बार गुहार लगाई, लेकिन ‘डीप स्टेट’ के दबाव में अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी। नतीजा यह हुआ कि उनकी दाहिनी आंख में खून का थक्का (Blood Clot) जम गया और समय पर इलाज न मिलने से नसें डैमेज हो गईं। अब स्पेशलिस्ट का कहना है कि उनकी आंख में सिर्फ 15% विजन बचा है।

अकेलापन और मानसिक प्रताड़ना

रिपोर्ट में इमरान खान के साथ हो रहे सुलूक को ‘स्लो पॉइजन’ जैसा बताया गया है। एक पूर्व पीएम को 24 घंटे अकेले रखा जा रहा है। 73 साल की उम्र में न तो उनका ब्लड टेस्ट कराया गया और न ही दांतों की जांच कराई गई। रिपोर्ट में लिखा है कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ने के लिए यह सब जानबूझ कर किया जा रहा है।

अपनों से मिलने पर पाबंदी

इमरान खान को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में उन्हें अपने बेटों कासिम और सुलेमान से फोन पर बात करने की सिर्फ दो बार इजाजत मिली। उन पर अपनी बहनों और वकीलों से मिलने पर भी सख्त पहरा है। हालांकि, जेल अधीक्षक बदलने के बाद अब उन्हें हफ्ते में एक बार 30 मिनट के लिए अपनी पत्नी बुशरा बीबी से मिलने दिया जा रहा है।

जान को खतरा हो सकता है

सलमान सफदर ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत बड़े डॉक्टरों की टीम ने इमरान की जांच नहीं की, तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इमरान के समर्थकों का कहना है कि सेना एक लोकप्रिय नेता को रास्ते से हटाने के लिए जेल को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।

पीटीआई प्रवक्ता ने कही ये बात (Pakistan Political Crisis)

“यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह हत्या की साजिश है। इमरान खान को जेल में अंधा किया जा रहा है ताकि वे देश का नेतृत्व न कर सकें।”

मानवाधिकार संगठन: “एक पूर्व प्रधानमंत्री को बुनियादी इलाज और वकील से महरूम रखना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।”

मेडिकल बेल के लिए हो सकती है नई याचिका दायर

पाकिस्ताान का सुप्रीम कोर्ट इस रिपोर्ट पर क्या संज्ञान लेता है, यह देखना अहम होगा। इमरान खान की लीगल टीम अब मेडिकल बेल (Medical Bail) के लिए नई याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है।

देश में’डीप स्टेट’ का डर

पाकिस्तान के इतिहास में पहले भी लोकप्रिय नेताओं को जेलों में यातनाएं दी गई हैं (जैसे जुल्फिकार अली भुट्टो)। विश्लेषकों का मानना है कि सेना इमरान खान की लोकप्रियता से डरी हुई है, इसलिए उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम राजनीति से बाहर करने का यह ‘प्लान-बी’ हो सकता है।

घुमंतू जनजाति का विधानसभा घेराव, देखें तस्वीरें

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जयपुर में चल रही विधानसभा को घेरने के लिए घुमंतू जनजाति के लोग पहुंचे। विधानसभा कूच से पहले सभा हुई। उसके बाद विधानसभा कूच किया गया जिसे पुलिस ने 22 गोदाम पर रोक दिया। आपस में हल्की-फुल्की धक्का मुक्की भी हुई। देखें तस्वीरें। सभी फोटोज अनुग्रह सोलोमन।
Demo at vidhansabha

विधानसभा कूच से पहले सभा करते घुमंतू जनजाति के लोग। फोटो अनुग्रह सोलोमन।

Demo at vidhansabha

विधानसभा कूच के लिए शंखनाद किया गया। फोटो अनुग्रह सोलोमन

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विधानसभा कूच को पुलिस ने 22 गोदाम पर रोका। फोटो अनुग्रह सोलोमन।

राजस्थान का बजट हुआ पेश, देखें तस्वीरें

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जयपुर में विधानसभा में राजस्थान का बजट पेश किया गया। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दिया कुमारी ने विधानसभा में बजट पेश किया।लगभग 2 घंटे और 52 मिनट का कुल बजट था। देखें तस्वीरें। सभी फोटोज अनुग्रह सोलोमन।

Rajasthan budget 2026-27

विधानसभा पहुंची राजस्थान उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दिया कुमारी। फोटो अनुग्रह सोलोमन।

Rajasthan budget 2026-27

विधानसभा में बजट पेश करती दिया कुमारी। फोटो अनुग्रह सोलोमन।

Rajasthan budget 2026-27

बजट के बाद मीडिया से रूबरू होते मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वित्त मंत्री दिया कुमारी। फोटो अनुग्रह सोलोमन।

Rajasthan budget 2026-27

बजट के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस को संबोधित किया। फोटो अनुग्रह सोलोमन।

यूपी बजट 2026-27 में महिलाओं को बड़ा तोहफा, ‘लखपति दीदी’ अभियान और उद्यमिता योजनाओं को बढ़ावा

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UP Budget 2026-27 में महिला सशक्तिकरण को विकास के केंद्र में रखा गया है। ‘लखपति दीदी’ अभियान, महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना और उत्पाद विपणन पहल के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

UP Budget 2026-27: उत्तर प्रदेश सरकार के बजट वर्ष 2026-27 में महिला सशक्तिकरण को विकास की धुरी के रूप में स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पेश इस बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने, महिलाओं को उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। “नव निर्माण के 9 वर्ष” की थीम के साथ सरकार ने महिला केंद्रित योजनाओं को व्यापक बजटीय समर्थन देकर सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संदेश दिया है।

 

‘लखपति दीदी’ अभियान को नई ऊर्जा

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सरकार का महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ अभियान इस बजट में प्रमुखता से उभरा है। इस लक्ष्य को गति देने के लिए ₹200 करोड़ की बजटीय व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को पूंजी, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़कर उन्हें छोटे उद्यम स्थापित करने में सक्षम बनाना है, ताकि वे नियमित आय अर्जित कर सकें और ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि हो।

उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना

बजट में ‘उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना’ के तहत भी ₹200 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इस योजना का लक्ष्य महिलाओं को आसान, ब्याज-मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराना है, जिससे वे छोटे उद्योग या स्वरोजगार इकाइयाँ शुरू कर सकें। सरकार का फोकस महिलाओं को कर्ज निर्भरता से मुक्त कर उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बनाना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और महिलाओं की सामाजिक स्थिति भी मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

 

उत्पादों के विपणन के लिए नई पहल

महिला उद्यमिता केवल उत्पादन तक सीमित न रहे, इसके लिए सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना’ शुरू करने की घोषणा की है, जिसके लिए ₹100 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। इस योजना के तहत,रेलवे स्टेशनों,बस टर्मिनलों,हवाई अड्डों,प्रमुख बाजारों में तीन वर्ष की अवधि के लिए शोरूम और दुकानों को किराए पर लिया जाएगा, जिन्हें पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित किया जाएगा। सरकार शुरुआती तीन वर्षों का किराया स्वयं वहन करेगी। इसके बाद स्वयं सहायता समूह और महिला उद्यमी इन केंद्रों का संचालन संभालेंगी। यह कदम महिला उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

UP Politics: मायावती पर आपत्तिजनक पोस्ट से मचा सियासी तूफान, लखनऊ पुलिस की कार्रवाई में श्रेया यादव फंसी

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UP Politics Update: लखनऊ में बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कृष्णा नगर थाने में श्रेया यादव नामक महिला के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।

UP Politics Update Social Media Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में कांग्रेस, सपा-बसपा गठबंधन और राजनीतिक दलों के बीच एक नया विवाद उभर गया है। कृष्णा नगर कोतवाली पुलिस स्टेशन में श्रेया यादव नामक एक महिला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिस पर आरोप है कि उसने फेसबुक पर मायावती के खिलाफ “आपत्तिजनक,” “अभद्र” और “अपमानजनक” भाषा का उपयोग किया था।

यह मामला सोमवार शाम आलमबाग स्थित दामोदर नगर इलाके में बसपा कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान सामने आया। कैंट विधानसभा प्रभारी देवेश कुमार गौतम के आवास पर आयोजित बैठक में बसपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता फेसबुक पर एक पोस्ट देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें श्रेया यादव नामक फेसबुक आईडी से बनाई गई एक टिप्पणी दिखाई दी, जिसमें पार्टी के मुताबिक मायावती के प्रति अपमानजनक और अस्वीकार्य भाषा का उपयोग किया गया था।

क्या था विवादित कमेंट और क्या आपत्ति जताई गई

बैठक में मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उक्त टिप्पणी में न केवल राजनीतिक आलोचना थी, बल्कि भाषा इतनी “भद्दी” और “आपत्तिजनक” थी कि इससे बसपा सुप्रीमो आहत हुई हैं और समर्थकों की भावनाएँ भी ठेस पहुंची हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति इस प्रकार के शब्दों का उपयोग सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है तथा इससे राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरता है।

बीएसपी कैंट विधानसभा अध्यक्ष गंगाराम वर्मा ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि 9 फरवरी की दोपहर लगभग 4 बजे यह कमेंट देखा गया था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियाँ राजनीतिक माहौल को बिगाड़ सकती हैं और भलाई की बजाय नफरत और विभाजन फैला सकती हैं।

श्रेया यादव कौन हैं

श्रेया यादव की फेसबुक प्रोफाइल पर करीब 50,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं और वह स्वयं को समाजवादी पार्टी (SP) की सक्रिय सदस्य बताती हैं। बसपा समर्थकों का आरोप है कि एक जिम्मेदार दल की सदस्य द्वारा वरिष्ठ विपक्षी नेता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना अत्यंत निंदनीय है। इस बारे में उन्होंने मीडिया के सामने अपनी सफाई रखी है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

कृष्णा नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी रूप से फेसबुक आईडी की सत्यता और कमेंट की वास्तविकता के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और जरूरत पड़ने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी अनुरोध किया जाएगा। यदि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और माहौल

इस घटना ने राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर गर्मी ला दी है।  BSP समर्थकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर आक्रामक और अपमानजनक टिप्पणियाँ रोकने के लिए सख्त कानूनी उदाहरण पेश किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। वहीं, अन्य राजनीतिक दलों से भी इस मामले पर प्रतिक्रियाएँ मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि यह केवल एक व्यक्तिगत मामले नहीं रह गया बल्कि राजनीतिक गहमागहमी का विषय बन गया है।

पिछले कुछ वर्षों में मायावती पर दी गई टिप्पणियों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, जहां विभिन्न दलों के नेताओं ने आलोचनात्मक बयान दिए थे और उनका असर राजनीति पर पड़ा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि मायावती जैसे वरिष्ठ नेता के प्रति कही भी गई टिप्पणी न केवल राजनीति में महत्व रखती है बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और राजनीतिक आचार-संहिता पर भी सवाल उठाती है।

सोशल मीडिया और राजनीतिक जिम्मेदारी

समय के साथ सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का एक मुख्य मंच बन गया है, जहां लाखों लोग अपनी राय साझा करते हैं। वहीं, इस मंच पर अभद्र या अपमानजनक टिप्पणियाँ कभी-कभी कानून की सीमा के भीतर नहीं आतीं। कानून के तहत भी धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक विभाजन फैलाने वाली टिप्पणियाँ अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं और उस पर कार्रवाई भी हो सकती है। इस मामले ने यही प्रश्न उठाया है कि क्या राजनीतिक मतभेद सोशल मीडिया पर इस हद तक बढ़ने चाहिए कि कानून को हस्तक्षेप करना पड़े।