लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी समेत प्रदेश के अन्य शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर जलाभिषेक किया और मंगल कामना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कर लोकमंगल की कामना की। काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर की मंगला आरती के बाद श्रद्धालु कतारों में लगकर दर्शन-पूजन कर रहे हैं।
मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष महाशिवरात्रि पर लगभग 12 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि इस बार 10 से 15 लाख लोगों के आने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि पांच लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले धाम में सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई है। मिश्रा ने बताया कि भीड़ प्रबंधन के लिए अवरोधक लगाए गए हैं और छह द्वारों से दर्शन कराए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तीन स्थानों पर चिकित्सीय टीम भी तैनात हैं।
मंदिर प्रशासन ने सुबह कतार में लगे श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी की। बाबा विश्वनाथ 45 घंटे तक लगातार दर्शन देंगे। मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर मंदिर विश्व का आध्यात्मिक संगम बन रहा है और 62 बड़े मंदिरों से भोग-वस्त्र भेजे गए हैं। देश के 54 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और तीर्थस्थलों से आए प्रसाद, वस्त्र और तीर्थजल को अर्पित करने की परंपरा भी शुरू की गई है। बाराबंकी जिले के रामनगर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ लोधेश्वर महादेवा मंदिर में भी आस्था का जनसैलाब उमड़ा। पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि रात 12 बजे से अब तक करीब ढाई लाख कांवड़िये और श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी सहित अधिकारियों ने रात में मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुरक्षा, यातायात, पार्किंग व प्रकाश व्यवस्था के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि अभी लगभग तीन लाख और लोगों के दर्शन करने का अनुमान है और देर रात तक श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रह सकता है।
मथुरा में, श्री कृष्ण जन्मस्थान की ओर से भेजे गए वस्त्र महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव को अर्पित किए जाएंगे। जन्मस्थान से शिव बारात भी निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न झांकियां, नृत्य दल और अखाड़े शामिल होंगे। जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि भागवत भवन स्थित केशव देवेश्वर महादेव मंदिर में शाम सात बजे से अगली सुबह तीन बजे तक महाभिषेक होगा। वहीं प्राचीन भूतेश्वर महादेव सहित अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।
जम्मू-कश्मीर डेस्क: तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर अब नौकरी के बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है। खासकर करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) की ‘AI एंड जॉब्स’ रिपोर्ट के मुताबिक करीब 63 प्रतिशत कंपनियां अब ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिनके पास डेटा से जुड़ी स्किल्स या AI का अनुभव है। इसके कारण पारंपरिक डिग्री का महत्व धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर एंट्री-लेवल नौकरियों पर पड़ा है। पहले जहां फ्रेशर्स के लिए ज्यादा अवसर होते थे, अब कंपनियां अनुभवी या विशेष कौशल रखने वाले उम्मीदवारों को ज्यादा मौका दे रही हैं। हालांकि मिडिल और सीनियर लेवल की भर्तियों में अभी ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला है।
इसके अलावा सॉफ्टवेयर डेवलपर और डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पदों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे साफ है कि नई तकनीक सीखने वाले युवाओं के लिए मौके अभी भी मौजूद हैं, लेकिन सामान्य कौशल रखने वालों को नौकरी पाने में कठिनाई हो सकती है।
नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच देश के 10 बड़े शहरों की 650 आईटी कंपनियों पर किए गए इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि AI के इस्तेमाल से कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ी है, लेकिन भर्ती करने का तरीका बदल गया है। आधे से ज्यादा कंपनियां अपने कर्मचारियों को AI से जुड़ी ट्रेनिंग दे रही हैं, लेकिन बहुत कम कंपनियों ने पिछले साल अपने आधे से ज्यादा कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI नौकरियां खत्म नहीं कर रहा है, बल्कि काम करने का तरीका बदल रहा है। ऐसे में युवाओं के लिए जरूरी है कि वे लगातार नई स्किल्स सीखते रहें और खुद को समय के साथ अपडेट करें। यही सफलता की कुंजी होगी।
नेशनल डेस्कः केंद्र सरकार और UIDAI ने आधार कार्ड में बड़ा बदलाव किया है। जल्द ही नए डिजाइन वाले आधार कार्ड में सिर्फ कार्ड होल्डर की फोटो और QR कोड होगा, जिससे सभी निजी जानकारियां QR कोड के अंदर सुरक्षित रहेंगी और फोटोकॉपी के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी।
आधार कार्ड का नया डिज़ाइन
केंद्र सरकार के निर्देश पर यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) जल्द ही आधार कार्ड का नया डिज़ाइन पेश करने जा रही है। पिछले एक साल से UIDAI इसके नए स्वरूप की योजना पर काम कर रहा था और अब यह फाइनल चरण में है। नए डिज़ाइन के लागू होने के बाद नागरिक इसे आसानी से वेबसाइट और मोबाइल ऐप से डाउनलोड कर सकेंगे।
UIDAI ने बताया कि नए आधार कार्ड में कार्ड होल्डर की फोटो और QR कोड शामिल होगा। इस QR कोड में होल्डर का नाम, पता, मोबाइल नंबर और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी एनक्रिप्टेड तरीके से मौजूद होगी। QR कोड स्कैन करने पर सारी डिटेल तुरंत उपलब्ध होंगी, जिससे आधार कार्ड की फोटोकॉपी के गलत इस्तेमाल की समस्या समाप्त हो जाएगी।
UIDAI के CEO भुवनेश कुमार ने कहा कि आधार कार्ड आज भारतीयों के लिए एक अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। बैंक अकाउंट खोलने, सिम कार्ड लेने, लोन, सरकारी योजनाओं का लाभ या जमीन खरीदने के लिए आधार कार्ड आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक लोग अपने काम के लिए आधार कार्ड की फोटोकॉपी साझा करते थे, लेकिन नए डिजाइन के बाद यह व्यवस्था बदल जाएगी। CEO भुवनेश कुमार ने आगे बताया कि वर्तमान फिजिकल आधार कार्ड पर कार्ड होल्डर की फोटो, नाम, पता और जन्मतिथि जैसी जानकारी छपी होती है। नए कार्ड में केवल फोटो और QR कोड रहेगा, और बाकी सभी जानकारियां QR कोड के अंदर सुरक्षित रहेंगी।
UIDAI के अनुसार QR कोड से बैंकिंग, सिम अलॉटमेंट और सरकारी स्कीमों के लिए वेरिफिकेशन प्रक्रिया अत्यधिक आसान और सुरक्षित होगी। नए आधार ऐप में पहले से ही कार्ड होल्डर की फोटो के साथ QR कोड मौजूद है, और जल्द ही इसे फिजिकल कार्ड के रूप में भी जारी किया जाएगा।
Deoria News: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से महाशिवरात्रि के दिन एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां पूजा में शामिल होने जा रहे एक दंपति की बाइक अनियंत्रित पिकअप से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक की पेट्रोल टंकी फट गई और देखते ही देखते बाइक और पिकअप दोनों आग का गोला बन गए। इस भीषण हादसे में शिक्षक की पत्नी की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि पति गंभीर रूप से झुलस गया।
पूजा में शामिल होने जा रहे थे घर
बरहज थाना क्षेत्र के अमांव गांव के रहने वाले गिरजा शंकर मिश्र सलेमपुर के एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक हैं। रविवार को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उनके पैतृक गांव में विशेष पूजा का आयोजन था। गिरजा शंकर अपनी पत्नी रेनू मिश्रा के साथ बाइक पर सवार होकर गांव के लिए निकले थे। उन्हें क्या पता था कि रास्ते में मौत उनका इंतज़ार कर रही है।
आग की लपटों में घिरी पत्नी, बेबस रहा पति
हादसा मगहरा चौराहे के पास हुआ। सामने से आ रही एक तेज रफ्तार पिकअप ने बाइक को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर होते ही बाइक में भीषण विस्फोट हुआ और आग लग गई। टक्कर लगते ही गिरजा शंकर बाइक से दूर जा गिरे, जिससे उनकी जान तो बच गई लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हो गए। रेनू मिश्रा बाइक और पिकअप के बीच में ही फंस गईं। आग इतनी विकराल थी कि लपटें 10 फीट ऊपर तक उठ रही थीं। रेनू को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और उन्होंने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
फायर ब्रिगेड को आग बुझाने में लगे 45 मिनट
हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। आग इतनी भयानक थी कि दमकलकर्मियों को इसे काबू करने में करीब पौन घंटा लग गया। पुलिस ने गिरजा शंकर को तुरंत देवरिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
प्रशासनिक बयान
सीओ बरहज मनोज कुमार ने बताया कि पिकअप और बाइक की टक्कर के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और पिकअप चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
भदोही: जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र में एक सरकारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) और चिकित्साधिकारी के साथ मारपीट और गाली गलौज करने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
गोपीगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) शैलेश कुमार राय ने बताया कि डॉक्टर असलम अंसारी और डॉक्टर अमित सिंह तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दस कर्मियों की शिकायत पर शनिवार देर शाम शिवांश पांडेय और अरविन्द पांडेय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन्होंने तहरीर के हवाले से कहा कि शनिवार दोपहर असलम अंसारी और अमित सिंह ओपीडी में मरीज़ों को देख रहे थे तभी गोपीगंज थाने के भवानी पुर निवासी शिवांश और अरविन्द सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ओपीडी कक्ष में घुसे और दोनों डॉक्टरों के साथ गाली गलौज करते हुए हाथापाई करने लगे।
पुलिस ने बताया कि इस घटना से वहां भारी अफरा तफरी फ़ैल गई और मरीज़ चले गए । करीब आधे घंटे तक सरकारी काम में बाधा पैदा हुई और सभी डॉक्टरों और अन्य कर्मियों के जमा होने पर दोनों आरोपी धमकी देकर चले गए। थानेदार ने बताया मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
भदोही: जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र में एक सरकारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) और चिकित्साधिकारी के साथ मारपीट और गाली गलौज करने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
गोपीगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) शैलेश कुमार राय ने बताया कि डॉक्टर असलम अंसारी और डॉक्टर अमित सिंह तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दस कर्मियों की शिकायत पर शनिवार देर शाम शिवांश पांडेय और अरविन्द पांडेय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन्होंने तहरीर के हवाले से कहा कि शनिवार दोपहर असलम अंसारी और अमित सिंह ओपीडी में मरीज़ों को देख रहे थे तभी गोपीगंज थाने के भवानी पुर निवासी शिवांश और अरविन्द सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ओपीडी कक्ष में घुसे और दोनों डॉक्टरों के साथ गाली गलौज करते हुए हाथापाई करने लगे।
पुलिस ने बताया कि इस घटना से वहां भारी अफरा तफरी फ़ैल गई और मरीज़ चले गए । करीब आधे घंटे तक सरकारी काम में बाधा पैदा हुई और सभी डॉक्टरों और अन्य कर्मियों के जमा होने पर दोनों आरोपी धमकी देकर चले गए। थानेदार ने बताया मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
हाथरस : उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक पैसेंजर ट्रेन में टिकट चेकिंग के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नशे में धुत एक यात्री ने टीटीई पर हमला कर दिया। घटना के बाद कोच में काफी देर तक हंगामा चलता रहा, जिसे अन्य यात्रियों और रेलवे स्टाफ ने मिलकर काबू किया।
नशे में यात्री ने टीटीई पर किया हमला
जानकारी के अनुसार, ट्रेन में सफर कर रहा युवक विजित मानोलिया, पुत्र राजेंद्र प्रसाद, निवासी लालकुआं, जिला नैनीताल (उत्तराखंड), बैंगलौर जा रहा था। आरोप है कि देर रात टिकट चेकिंग के दौरान टीटीई द्वारा टिकट मांगे जाने पर युवक ने टिकट दिखाने से इनकार कर दिया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए अचानक हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब एक यात्री ने टीटीई को बचाने की कोशिश की तो आरोपी युवक ने उसका गला दबाने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख अन्य यात्रियों और कोच अटेंडेंट ने युवक को पकड़कर ट्रेन के टॉयलेट के पास बैठा दिया।
हाथरस सिटी स्टेशन पर आरपीएफ को सौंपा गया
ट्रेन के हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही टीटीई और यात्रियों ने आरोपी को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के हवाले कर दिया। पूछताछ के दौरान भी युवक का आक्रामक व्यवहार जारी रहा और उसने कथित तौर पर एक आरपीएफ कर्मी को थप्पड़ मार दिया।
कई धाराओं में मुकदमा दर्ज
रेलवे पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ हाथरस सिटी आरपीएफ थाने में सरकारी कर्मचारी पर हमला, मारपीट, गलत तरीके से रोकना, अपमानजनक शब्दों का प्रयोग, धमकी और रेलवे एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। युवक का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया है। पुलिस का कहना है कि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
डबरा (भरत रावत): मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा स्थित नवग्रह पीठ पर आयोजित ‘अपने-अपने राम’ कार्यक्रम में शनिवार को प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भारतीय संस्कृति, प्रेम और अध्यात्म पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हर पल प्रेम करना सिखाती है, जबकि पाश्चात्य संस्कृति में प्रेम के लिए भी एक विशेष दिन निर्धारित किया गया है। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि पश्चिमी परंपरा को प्रेम व्यक्त करने के लिए 14 फरवरी जैसे वेलेंटाइन डे की जरूरत पड़ती है, लेकिन हमारी संस्कृति में प्रेम ही आधार है और परिवार को जोड़ने का माध्यम है।
डॉ. विश्वास ने कहा कि राम कथा हमें सिखाती है कि प्रेम ही परिवार की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने भगवान राम के विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा कि राम पर संदेह नहीं करना चाहिए। यदि कोई ऐसा करता है तो उसकी बातों से विचलित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने परिवार में आपसी सम्मान और प्रेम पर जोर देते हुए कहा कि बड़ा भाई छोटे भाई को स्नेह और सम्मान दे, जबकि छोटा भाई बड़े भाई का आदर करे। ऐसा करने से हर घर अयोध्या बन सकता है।
देखिए कुमार विश्वास की ‘अपने अपने राम’ कथा
कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं के अध्यात्म की ओर बढ़ते रुझान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी का झुकाव आध्यात्मिक स्थलों की ओर बढ़ रहा है। कथाओं में बड़ी संख्या में युवा शामिल हो रहे हैं। डॉ. कुमार विश्वास ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जिस तरह 18 वर्ष की आयु में ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी होता है, उसी तरह 18 वर्ष की उम्र से ही अध्यात्म का ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ ले लेना चाहिए, ताकि अपनी संस्कृति और मूल्यों की सही समझ विकसित हो सके।
महाशिवरात्रि पर कानपुर के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। परमट में रात 12 बजे श्री आनंदेश्वर मंदिर में मेंहदी का श्रृंगार हुआ। 1 बजे शिवलिंग को दुल्हे के रूप में सजाया गया। 1.30 बजे रात्रि आरती शुरू हुई। इसके बाद दर्शन के लिए पट खोल दिए गए। बाबा आनंदेश्वर दूल्हे के रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं।
गंगा घाट से ग्रीन पार्क गेट तक “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज रहा। अब तक करीब 2 लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि देर रात तक 3 लाख से ज्यादा भक्त बाबा आनंदेश्वर का जलाभिषेक करेंगे।
भीड़ को देखते हुए 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं और 120 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। प्रवेश और निकास मार्ग अलग किए गए हैं, घाट किनारे भी सुरक्षा बढ़ाई गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन मिल सकें।
आधी रात बाबा आनंदेश्वर की हल्दी रश्म हुई, गर्भगृह को पीले रंग से सजाया गया।
आनंदेश्वर मंदिर के बाहर आज सुरक्षा बढ़ाई गई है।
बाबा आनंदेश्वर का आज दूल्हे के रूप में श्रृंगार किया गया है।
रात में बाबा आनंदेश्वर की मेहंदी रश्म मनाई गई। गर्भगृह को हरे रंग से सजाया गया।
जब भी कोई ICC टूर्नामेंट भारत में होता है, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) का रवैया लगभग तय रहता है। पहले वह कहता है – हम नहीं खेलेंगे। फिर कुछ दिन बाद कहता है – हम खेलेंगे, लेकिन हमारी शर्तें माननी होंगी और आखिर में, टूर्नामेंट खेल भी लेता है, मगर तब तक इतना हंगामा कर चुका होता है कि पूरा इवेंट उसी के इर्द-गिर्द घूमता दिखता है।
यही वजह है कि पिछले कुछ सालों से ICC टूर्नामेंट में पाकिस्तान का रोल क्रिकेट टीम से ज्यादा शादी में आए फूफा जैसा लगने लगा है, जो पहले कहता है, ‘मैं नहीं आऊंगा’, फिर कहता है, ‘आऊंगा लेकिन मेरी बात चलेगी’, और अंत में खाना खाकर फोटो खिंचवाकर निकल जाता है।
पाकिस्तान के इस रवैये की शुरुआत भारत में हुए 2023 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान हुई थी। तब वह बहुत आनाकानी करने के बाद खेलने के लिए राजी हुआ। इस बार भी पाकिस्तान ने पहले भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार किया, फिर यू-टर्न ले लिया। बीच में इतना माहौल बनाया गया कि बांग्लादेश की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई।
सवाल है, पाकिस्तान ऐसा करता क्यों है? जवाब भावनाओं में नहीं, पावर, पैरिटी, पैसे, पॉलिटिक्स और प्रतिशोध में छिपा है। पाकिस्तान का ये रवैया सिर्फ जिद या राजनीति नहीं है। इसके पीछे पांच ठोस वजहें हैं-
1. पावरः क्रिकेट जगत को अपनी इम्पोर्टेंस जताना
2. पैरिटीः भारत से बराबरी की जिद, क्रिकेट में भी
3. पैसेः भारत के साथ बाइलेट्रल सीरीज की चाह, ताकि कमाई हो
4. पॉलिटिक्सः अपने देश में मजबूत दिखने की मजबूरी
5. प्रतिशोधः चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के पाकिस्तान न जाने का बदला
इन सभी वजहों को एक-एक कर विस्तार से समझते हैं…
1. पावर- क्रिकेट जगत को अपनी इम्पोर्टेंस जताना
ICC टूर्नामेंट में पाकिस्तान की असली ताकत उसके खिलाड़ी नहीं, बल्कि इंडिया-पाकिस्तान राइवलरी है। ICC का सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल भी यही है। ICC की कुल कमाई का करीब 90% हिस्सा मीडिया राइट्स से आता है।
मीडिया राइट्स में भी सबसे बड़ा योगदान भारतीय मार्केट का होता है, क्योंकि क्रिकेट की सबसे बड़ी ऑडियंस भारत में है, सबसे ज्यादा स्पॉन्सर भारत से आते हैं, और सबसे महंगी ब्रॉडकास्ट डील्स भारत में होती हैं।
इसी वजह से ICC ने 2024 से 2027 के लिए अपने मीडिया राइट्स जियो हॉटस्टार को करीब 3.1 बिलियन डॉलर में बेचे हैं। अलग-अलग सूत्रों और इंडस्ट्री अनुमान के मुताबिक, इस 3.1 बिलियन डॉलर की डील का 10% से 25% हिस्सा सिर्फ इसलिए प्रीमियम में गया क्योंकि ICC ने अपने हर बड़े व्हाइट-बॉल टूर्नामेंट में कम से कम एक भारत-पाकिस्तान मैच की गारंटी दी।
ICC ने 2024 टी-20 वर्ल्ड कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी, 2026 टी-20 वर्ल्ड कप, 2027 वनडे वर्ल्ड कप में कुल 4 भारत-पाकिस्तान मैच तय कर दिए। अब इसी आधार पर एक भारत-पाकिस्तान मैच की कीमत निकाली जा सकती है।
पाकिस्तान को पता है कि ICC के सबसे बड़े टूर्नामेंट में उसकी भूमिका एक टीम की नहीं, बल्कि रेवेन्यू ट्रिगर की है। इसलिए वह हर बार भारत में टूर्नामेंट आते ही ‘हम नहीं खेलेंगे’ बोलकर दबाव बनाता है।
यह सिर्फ भारत को नहीं, बल्कि ICC और बाकी देशों को भी संदेश होता है, अगर हम नहीं खेले, तो आपकी कमाई घट जाएगी।
ICC की कमाई सिर्फ ICC के पास नहीं रहती
ICC अपनी कमाई को अपने सदस्य बोर्ड्स में डिस्ट्रीब्यूट करती है। यानी ICC जितना कमाएगी, उतना ज्यादा पैसा दुनिया भर के क्रिकेट बोर्ड्स में जाएगा। अगर भारत-पाकिस्तान मैच नहीं हुआ, तो ICC की कमाई घटेगी।
उस कमाई के घटने का नुकसान सिर्फ ICC को नहीं, बल्कि हर सदस्य बोर्ड को होगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड से लेकर छोटे बोर्ड्स तक शामिल हैं।भारत जैसे अमीर बोर्ड (BCCI) को इससे बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन बाकी बोर्ड्स की कमाई और योजनाएं हिल जाती हैं। यही पाकिस्तान का असली लेवरेज है।
ICC अपनी कमाई का कितना हिस्सा किस बोर्ड को देती है इसे अगले ग्राफिक्स में देख सकते हैं…
2. पैरिटी- भारत से बराबरी की जिद, क्रिकेट में भी
दूसरी वजह भावनात्मक और राजनीतिक है, लेकिन उतनी ही असली है। क्रिकेट की दुनिया में आज भारत सिर्फ सबसे बड़ी टीम नहीं है, बल्कि सबसे बड़ा मार्केट, सबसे बड़ा ब्रांड और सबसे बड़ा कंट्रोल सेंटर भी है। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं-
सबसे ज्यादा पैसा भारत से आता है
सबसे ज्यादा स्पॉन्सर भारत से आते हैं
सबसे ज्यादा व्यूअर भारत में हैं
पॉलिसी-डिसीजनिंग में भारत का असर सबसे ज्यादा है
पाकिस्तान आबादी के लिहाज से भारत के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्रिकेटिंग नेशन है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन नजम सेठी कह चुके हैं कि ICC के सभी सदस्यों को पाकिस्तान का महत्व समझना चाहिए।
भारत-पाकिस्तान मैच अहम है तो यह सिर्फ भारत की वजह से नहीं है। पाकिस्तान इस मैच में खेलता है तभी मुकाबला संभव होता है। भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक जितने इंटरनेशनल मैच हुए हैं उसमें अब भी ज्यादा जीत पाकिस्तान के नाम है। इसलिए ICC पाकिस्तान को भी उतनी ही अहमियत दे जितनी वह भारत को देती है।
3. पैसेः भारत के साथ बाइलेट्रल सीरीज की चाह, ताकि कमाई हो
भारत ने 2012 के बाद से पाकिस्तान से कोई बाइलेट्रल सीरीज नहीं खेली है। भारत का स्टांस है कि क्रिकेट और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते। भारत के इस फैसले से पाकिस्तान की क्रिकेट को बहुत नुकसान झेलना पड़ा है।
2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड सालाना 69 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू जेनरेट करता है। अगर भारत उसके साथ बाइलेट्रल सीरीज खेले तो उसकी कमाई तीन गुनी होकर सालाना करीब 200 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका सहित सभी बोर्ड इस कोशिश में रहते हैं कि भारतीय टीम उनके यहां ज्यादा से ज्यादा टूर करे। उनके ब्रॉडकास्ट राइट्स को ऊंची कीमत इसलिए मिलती है क्योंकि हर दो साल में कम से कम एक बार टीम इंडिया उनके यहां जाकर सीरीज खेलती है। पाकिस्तान को यह मौका नहीं मिलता है।
पाकिस्तान ने 2018 में BCCI के खिलाफ ICC में एक केस भी दर्ज कराया था। इसमें उसने कहा था कि भारत उससे वादा करने के बावजूद बायलेट्रल सीरीज नहीं खेलता है इसलिए उसे 70 मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया जाए। पाकिस्तान यह मुकदमा हार गया था।
4. पॉलिटिक्सः अपने देश में मजबूत दिखने की मजबूरी
भारत की ही तरह पाकिस्तान में भी क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं है। यह राष्ट्रीय भावना, राजनीति और पहचान का हिस्सा है। 90 के दशक में पाकिस्तान के कप्तान इमरान खान ने यहां तक कह दिया था कि कश्मीर विवाद का हल क्रिकेट मैच से हो जाए, जो टीम जीते कश्मीर उसका।
जब भी क्रिकेट की राजनीति में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और BCCI आमने-सामने होते हैं, तो पाकिस्तानी अधिकारी मामले को इस तरह दिखाने की कोशिश करते हैं कि उसने भारत को सबक सिखा दिया।
ऐसे में भारत में टूर्नामेंट हो और PCB बिना शोर किए सीधे खेलने चला जाए, तो पाकिस्तान के अंदर उसे कमजोर या झुका हुआ कहा जा सकता है। इसलिए PCB पहले “हम नहीं खेलेंगे” बोलकर घरेलू दर्शकों को संकेत देता है कि-
हमने स्टैंड लिया है
हमने दबाव बनाया है
हमने ICC से बात मनवाई है
फिर अंत में खेल भी लेता है, क्योंकि असल फायदा वहीं है।
5. प्रतिशोधः चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के पाकिस्तान न जाने का बदला
भारत ने पिछले साल पाकिस्तान की मेजबानी में हुए चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था। भारत के सभी मैच दुबई में खेले गए।
इसके बाद पाकिस्तान ने कहा कि अगर भारतीय टीम हमारे यहां नहीं आती तो फिर पाकिस्तानी टीम भी वर्ल्ड कप खेलने भारत नहीं जाएगी और उसके मैच किसी अन्य देश में कराए जाए। भारत ने इस प्रस्ताव को मान लिया। इस वजह से इस वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के मैच कोलंबो में हो रहे हैं।
जब वर्ल्ड कप शुरू होने की बारी आई तो पाकिस्तान ने बांग्लादेश का मामला उठा दिया। बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर किया गया। इसके बाद बांग्लादेश ने भी पाकिस्तान की शह पर यह मांग रखी कि उसके भी मैच श्रीलंका में हो।
ICC ने बांग्लादेश की डिमांड नहीं मानी। बांग्लादेश वर्ल्ड कप से बाहर हो गया। पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में भारत के मैच का बायकॉट करने का फैसला लिया। हालांकि, बाद में वह पलट गया।
पाकिस्तान की धमकी उसका सबसे बड़ा हथियार
पाकिस्तान की धमकी का असर इसलिए होता है क्योंकि यह सिर्फ एक मैच की बात नहीं है। यह ICC के पूरे बिजनेस मॉडल की बात है। ICC भारत-पाकिस्तान मैच किसी भी हालत पर करवाना चाहता है। अगर यह मैच नहीं हुए, तो 4 बातें हो सकती हैं-
ब्रॉडकास्टिंग रेवेन्यू पर असर
स्पॉन्सरशिप वैल्यू पर असर
टिकटिंग और ग्राउंड रेवेन्यू पर असर
और ICC के पूरे हाइप स्ट्रक्चर पर असर
यही वजह है कि पाकिस्तान बार-बार नहीं खेलेंगे बोलकर खुद को महत्वपूर्ण साबित करने की कोशिश है। इसी वजह से हर बार उसकी धमकी के बाद ICC, बोर्ड्स और दूसरे देश एक्टिव हो जाते हैं। फिर पाकिस्तान अपने स्टैंड से पलटी मार जाता है। एक और इंडिया Vs पाकिस्तान मैच हो जाता है।