राजधानी लखनऊ में शनिवार को गोसाईगंज स्थित जिला जेल में भी रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया। जेल पहुंची बहनों ने बंदी भाइयों के माथे पर टीका करके उनकी कलाइयों में राखी बांधी। उनकी लंबी आयु और जल्द रिहा होने की कामना की। इस दौरान कई भावुक कर देने वाली तस्वीरें सामने आईं। कई बंदियों की आंखें छलक पड़ी। इस पर बहनों ने उन्हें संकल्प दिलाया कि वह जेल से छूटने के बाद हमेशा के लिए अपराध की दुनिया छोड़ देंगे। जिला कारागार में बंद बंदियों से बहनों ने मुलाकात कर उन्हें राखी बांधी। मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया। सुबह 6.00 बजे से ही सैकड़ों की संख्या में बहनें जिला जेल पहुंचने लगीं। इस मौके पर उनकी खुली मुलाकात कराई गई। भीड़ की आशंका पर जेल प्रशासन ने कई रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाए थे। महिला पुलिसकर्मी व जेलकर्मियों ने कई चरणों में सघन तलाशी के बाद बहनों को जेल में प्रवेश दिया। इस दौरान 44 दरोगा, 45 पुलिसकर्मियों के अलावा एक प्लाटून पीएसी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर तैनात रही।
2293 पुरुष बंदियों को 3881 बहनों व 1133 बच्चों ने बांधी राखी
जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजेंद्र कुमार जायसवाल ने बताया कि रक्षाबंधन पर 2293 पुरुष बंदियों को 3881 बहनों व 1133 बच्चों ने राखी बांधी। सुबह 6.00 से लेकर शाम करीब 6.00 बजे तक मुलाकात कराई गई। किसी भी महिला मुलाकाती को लौटाया नहीं गया। इस मौके पर जेलर सुनील दत्त मिश्रा, डिप्टी जेलर कुंवर वीरेंद्र विक्रम सिंह, आशुतोष मिश्रा, अजय कुलवंत, तारकेश्वर सिंह व आनंद कुमार के अलावा सभी अफसर व जेलकर्मी मौजूद रहे।
जेलर ऋत्विक प्रियदर्शी ने बताया कि जेल प्रशासन की ओर से हेल्प डेस्क पर राखी और मिष्ठान की निशुल्क व्यवस्था की गई थी। ताकि, जल्दबाजी में जेल पहुंचने वाली महिलाओं को भटकना न पड़े। राखी बांधने के बाद जेल से बाहर निकलने पर महिलाओं और बच्चों के लिए जलपान का भी इंतजाम किया गया था।
एक साल पहले छूट गया बेटा… मिलने की आस में जेल पहुंची मां निराश
जेल में बंद बेटे मनीष यादव से मिलने पहुंचीं सआदतगंज के पुराना चबूतरा निवासी बुजुर्ग शकुंतला ने बताया कि उन्हें दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। लेकिन, उन्हें मायूसी हाथ लगी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजेंद्र कुमार जायसवाल से मदद की गुहार लगाने पर उन्हें पता चला कि उनका बेटा मनीष एक साल पहले ही जेल से छूट गया था। शंकुतला ने बताया कि वह घर नहीं पहुंचा। इस पर राजेंद्र जायसवाल ने किसी दूसरी जेल में शिफ्ट होने की आशंका पर आनलाइन डाटा चेक कराया। लेकिन, पता चला कि मनीष कहीं भी बंद नहीं है। अब वह कहां गया यह जांच का विषय है।


