Friday, February 20, 2026

Lucknow : डफरिन अस्पताल में इलाज के नाम पर वसूली, पीड़ित परिवार बोला-आठ दिन में नर्सों को छह हजार दिए

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लखनऊ के वीरांगना आवंतीबाई महिला अस्पताल (डफरिन) में नर्सों और आया द्वारा मरीजों के परिजनों से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। अमर उजाला की पड़ताल में कैमरे पर वसूली पकड़ी गई। तीमारदारों ने बताया कि आठ दिन में छह हजार रुपये तक देने पड़े, नहीं देने पर मरीज की देखभाल नहीं होती।वीरांगना आवंतीबाई महिला अस्पताल (डफरिन) में अवैध वसूली का खेल थम नहीं रहा है। अमर उजाला की पड़ताल में एक बार फिर अवैध वसूली का पर्दाफाश हुआ है। नर्स और आया का प्रसुताओं के परिजनों से रुपये लेते हुए कैमरे में कैद हो गई हैं। आए दिन अवैध वसूली की बात सामने आ रही है।अस्पताल के लेबर रूम में बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे एक तीमारदार से आया और नर्स अवैध वसूली करते हुए कैमरे में कैद हो गईं। महिला कर्मचारी तीमारदार से रुपये मांगते हुए नजर आ रही है। तीमारदार कह रहा है कि उसने सुबह कुछ नर्स और कर्मचारियों को रुपये दे चुका है। इस पर भी वह नहीं मानती है। व्यक्ति को मजबूर होकर रुपये देने पड़ते हैं। वहीं, इस संबंध में जब अन्य तीमारदारों से बात की तो उन्होंने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि हर किसी से रुपये वसूले जा रहे हैं। अगर कोई रुपये नहीं देता है तो उसके मरीज की देखभाल सही से नहीं की जाती है।

 

इससे परेशान लोग रुपये देना सही समझते हैं। जिन्हें बेटा होता है उनसे बेटे होने की खुशी का कहकर रुपये लेते हैं। जिनको बेटी होती है उनसे घर में लक्ष्मी आई है ऐसा बोलकर रुपये लिए जाते हैं। रुपये नहीं देने पर तीमारदारों से दुर्व्यवहार भी करती हैं।

 

वहीं, डफरिन अस्पताल के प्रमुख अधिक्षक ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि अस्पताल की सारी सुविधाएं मुफ्त हैं। इस तरह से वसूली करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वीडियो में दिखने वाली आया और नर्स दोनों से जवाबदेही पेश की जाएगी। दोनों की दोपहर तक ड्यूटी रहती है। वीडियो आने तक दोनों अस्पताल से जा चुकी थीं। ऐसे में नाम पता नहीं चल पाया है। जानकारी एकत्रित कर दोनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आठ दिन में तीमारदार से हुई छह हजार की वसूली

अमर उजाला की पड़ताल में आठ नवंबर को एक महिला ने बताया कि उससे आठ दिन में छह हजार रुपये वसूले जा चुके हैं। वीडियो में महिला यह भी कह रही है कि मरीज को व्हील चेयर से बेड तक पहुचाने के बदले 100-200 रुपये देने पड़ते हैं।

 

साथ ही, जब प्रसूता को डिस्चार्ज करते हैं तब भी रुपये लिए बिना नहीं निकले देती हैं। भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने के बीच 10-15 कर्मचारियों और नर्सों को रुपये दे चुकी हूं। अगर इलाज अच्छे से करना है तो ऐसा करना पड़ता है। सभी को रुपये देने पड़ते हैं चाहे खुश होकर दे या दुखी होकर। गरीब होने की वजह से यहां आते हैं, लेकिन यहां भी खर्चा हो रहा है।

रैन बसेरे में 200 रुपये वसूली का आया था मामला

इससे पहले भी अमर उजाला की पड़ताल में डफरिन के रैन बसेरे में केयरटेकर की ओर से तीमारदारों से 200 रुपये वसूली करने का मामला सामने आया था। इसके बाद रैन बसेरे में शुल्क नहीं देने के लिए नोटिस चस्पा किया गया था।

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