औरैया। शासन ने किसानों की उपज के विक्रय के लिए मंडी में नीलामी चबूतरे बनवाए हैं। इन चूबतरों पर शेड भी डाला गया है। लेकिन मंडी प्रशासन की लापरवाही से एक भी चबूतरा किसानों के काम नहीं आ रहा है। इन पर आढ़तियों ने अतिक्रमण कर लिया है। आज तक किसी ने इन चबूतरों को खाली कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किए। किसान कच्ची सड़कों पर धान उतारने के लिए मजबूर हैंमंडी के निर्माण के दौरान आढ़तियों के लिए दुकानें और किसानों की फसलों के विक्रय के लिए नीलामी चबूतरे बनवाए गए थे। 10 मीटर चौड़े और 50 मीटर लंबे कुल चार चबूतरे मंडी में बने हैं। ये चबूतरे पक्के होने के साथ ही ऊपर टिनशेड भी पड़ा है। इनका निर्माण का उद्देश्य बस इतना है कि इन पर किसानों की फसल किसी भी परिस्थिति में सुरक्षित रहे। लेकिन मंडी में इन चबूतरों पर आढ़तियों का कब्जा है। चारों चबूतरे बांस का टट्टर लगाकर आढ़तियों ने बंद कर लिए हैं। कोई इसमें खरीदा गया धान रखता है तो कोई बारदाना। कुछ आढ़तियों ने केवल नाम के लिए चबूतरों को घेर रखा है। ऐसे में किसानों द्वारा लाई जाने वाली फसल सड़क पर पलटी जा रही है।इन दिनों धान की अधिक आवक के चलते कच्ची सड़क और मिट्टी में ही किसानों को धान पलटना पड़ रहा है। इससे एक तरफ जहां फसल में नुकसान होता है तो वहीं दूसरी तरफ मौसम खराब होने पर किसानों की चिंता बढ़ जाती है। किसानों की परेशानी से मंडी प्रशासन को कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तो बस चबूतरों पर अतिक्रमण करने वाले आढ़तियों से हमदर्दी है। तभी तो आज तक कभी भी इन चबूतरों को खाली कराने का प्रयास नहीं किया गया। मंडी प्रशासन के अधिकारी सब कुछ जानकार मंडी में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
मामले में मंडी सचिव हरविलास से जब बात की गई तो वे बचते नजर आए। वहीं मंडी के सभापति कमल कुमार सिंह ने बताया कि वह किसी काम से बाहर गए थे। जल्द ही मंडी का निरीक्षण कर अनियमितताओं की जांच कर उन्हें दूर कराया जाएगा। —
चबूतरों पर अतिक्रमण करने वाले कुछ आढ़ती ऐसे हैं, जिन्हें मंडी समिति द्वारा दुकान का भी आवंटन किया गया है। इसके बाद भी वे चबूतरों पर कब्जा किए हुए हैं। प्रतिदिन मंडी निरीक्षक भ्रमण कर हर स्थिति देखकर मंडी प्रशासन को रिपोर्ट देते हैं। लेकिन, मिलीभगत के कारण यहां मंडी निरीक्षक भी सब देखकर चुपचाप लौट जाते हैं।
हाईवे स्थित मंडी में जाम लगना आम बात हो गई है। कई बार तो यह जाम पूरे दिन या पूरी रात भी नहीं खुल पाता है। मंडी सचिव और कर्मचारी जाम खुलवाने की मशक्कत का खूब गाना गाते हैं, लेकिन कभी उन्होंने इसके समाधान पर विचार नहीं किया। दरअसल, चबूतरों पर कब्जा होने के कारण किसान सड़क पर धान पलट देते हैं, इससे रास्ता बाधित हो जाता है। इसके कारण ही जाम लगता है। मंडी प्रशासन को जाम की समस्या मंजूर है, लेकिन वह चबूतरे खाली कराने के लिए तैयार नहीं हैं।


