औरैया। प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आदेश चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर नहीं मानते। यहां डंके की चोट पर सरकारी पर्चे पर बाहर की दवा लिखी जा रही है। चिकित्सक मेडिकल स्टोर संचालकों से साठ-गांठ कर मरीजों को उपचार देने के बजाय कारोबार कर रहे हैं।सरकारी अस्पतालों में कई बार चिकित्सकों की ओर से बाहर की दवा लिखने के मामले सामने आ चुके हैं। शासन इस पर सख्त भी है। खुद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ऐसे मामलों में न केवल चेतावनी देते रहे हैं बल्कि कार्रवाई भी कर चुके हैं। इसके बाद भी चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को न तो डिप्टी सीएम का खौफ है और न ही सरकार का। यहां सरकार के आदेश नहीं बल्कि उनका राज चलता है, तभी वह खुलेआम सरकारी पर्चे पर बाहर की दवा लिख रहे हैं। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में पड़ताल के दौरान हर तीसरे पर्चे पर बाहर की दवा लिखे जाने की बात सामने आई। मरीजों ने बताया कि चिकित्सक ने उनसे कहा था कि यह दवा वह बाहर से ले लें।चिकित्सक कितने बेखौफ हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सरकारी पर्चे पर ही कुछ सरकारी अस्पताल की दवाएं लिखीं और उन्हीं के बीच दो बाहर की दवाएं लिखकर उस पर टिक लगा दिया। मरीजों से यह भी कह दिया कि अस्पताल की दवाएं असरदार नहीं होती हैं वे बाहर से दवाएं खरीद लें। बेचारे मरीज भी डॉक्टर की बातों में आकर निजी मेडिकल स्टोर पर दवाएं लेने जा पहुंचे। यही हाल दिन भर रहा।
ततारपुर निवासी सुरेखा यूरिन इंफेक्शन होने पर मेडिकल कॉलेज में दवा लेने पहुंची थीं। उन्होंने कमरा नंबर 20 में मौजूद चिकित्सक से दवा लिखवाई। चिकित्सक ने अस्पताल की दवा लिखने के बाद एक निजी कंपनी द्वारा बनाई जाने वालीं तीन दवाएं बाहर की लिख दीं। इसमें ओमेज कैप्सूल, एल्कोसोल सिरप और अन्य दवा शामिल थी।
दिबियापुर निवासी प्रिंस भी मेडिकल कॉलेज में स्किन में इचिंग की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचीं थीं। उन्होंने भी 20 नंबर कमरे से ही दवा लिखवाई। उन्हें भी सरकारी पर्चे पर ही बाहर से ओमेज कैप्सूल और एक अन्य दवा लिखी गई थी, जो पठनीय नहीं थी। इस पर डाॅक्टर ने टिक भी लगा दिया।
दिबियापुर निवासी बेबी सिर में लगातार हो रहे दर्द की समस्या लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचीं थीं। उन्होंने चिकित्सक को दिखाया और इसके बाद चिकित्सक ने सरकारी पर्चे पर दवा लिख दी। जब वह दवा लेने काउंटर पर पहुंची तो पता चला कि उन्हें भी एल्कासोल सिरप व एक अन्य दवा लिखी गया है जो बाहर से ही मिलेगी।
मेडिकल कॉलेज के परिसर में ही एक जन औषधि केंद्र बना हुआ है। लेकिन, यहां चिकित्सक दवा लेने के लिए किसी को नहीं भेजते। मरीजों जब उनसे सवाल करते हैं कि बाहर की दवा कहां से लें तो वे मेडिकल कॉलेज के गेट पर संचालित किसी मेडिकल स्टोर का नाम बता देते हैं। कई तो मरीज के हाथ पर ही मेडिकल स्टोर का नाम लिख देते हैं। यही कारण है कि यहां स्थित जन औषधि केंद्र पर पूरे दिन में भी एक हजार तो कभी 1500 रुपये की ही दवाएं बिकती हैं।
सभी चिकित्सकों को बाहर की दवाएं न लिखने के आदेश दिए गए थे। अगर फिर भी कोई गड़बड़ी कर रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। कई बार चिकित्सकों को आदेश जारी करने के साथ ही बैठक में भी निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी सुधार न होने पर कार्रवाई के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे।
-डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज


