Sunday, February 15, 2026

Ganesh chauth ki Katha: आपने भी रखा है तिल चौथ व्रत, संतान की लंबी आयु के लिए अवश्य पढ़ें श्री गणेश कथा

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Til chauth vrat Katha: माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी, सकट चौथ, माघी चतुर्थी, तिल चौथ या वक्रतुंडी चतुर्थी भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं। इस दिन विशेष रूप से भगवान श्रीगणेश व चंद्रमा की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। गणेश जी को भगवान शिव से वरदान प्राप्त है कि जो व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर शाम में चंद्रोदय के बाद शिव जी सहित गणेश जी की पूजा करेगा उसके सारे संकट दूर हो जाएंगे।

देश के कई हिस्सों में सकट चौथ का व्रत महिलाएं विशेष रूप से रखती हैं। यह संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सभी संकटों (बाधाओं) को दूर करने के लिए भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है, जिसमें महिलाएं बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, तिल-कुटा का भोग लगाती हैं और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।

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