Sunday, February 15, 2026

Widow Property Rights : क्या ससुर की संपत्ति से विधवा बहू मांग सकती है गुजारा भत्ता, जानें क्या कहती है कोर्ट?

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Widow Property Rights: देश की सर्वोच्च अदालत ने विधवा महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों और आधुनिक कानून का मेल करते हुए स्पष्ट किया है कि एक विधवा बहू का अपने ससुर की संपत्ति पर भरण-पोषण (Maintenance) का कानूनी अधिकार है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने फैसले के दौरान ‘मनुस्मृति’ के नैतिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए समाज को कड़ा संदेश दिया है।

मनुस्मृति का हवाला: अपनों को छोड़ना दंडनीय अपराध

अदालत ने फैसले के दौरान प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति के एक श्लोक का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि शास्त्रों में स्पष्ट है कि माता, पिता, पत्नी और पुत्र को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। जो व्यक्ति समर्थ होने के बावजूद अपनों को बेसहारा छोड़ता है वह दंड का पात्र है। कोर्ट ने इसी सिद्धांत को हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 के साथ जोड़कर देखा। पीठ ने कहा कि ससुर की यह नैतिक और धार्मिक जिम्मेदारी है कि वह अपने पुत्र की मृत्यु के बाद विधवा बहू का ख्याल रखे।

भेदभाव का तर्क पूरी तरह असंवैधानिक

इस मामले में एक अजीबोगरीब कानूनी पेच फंसाया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यदि बहू ससुर के जिंदा रहते विधवा होती है, तभी उसे गुजारा भत्ता मिलना चाहिए। यदि ससुर की मृत्यु के बाद पति की मौत होती है, तो बहू हकदार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा:

  1. मनमाना भेदभाव: पति की मृत्यु के समय के आधार पर विधवा बहुओं को दो श्रेणियों में बांटना पूरी तरह से तर्कहीन और असंवैधानिक है।
  2. समान अधिकार: चाहे पति की मौत ससुर के जीवनकाल में हुई हो या बाद में दोनों ही स्थितियों में विधवा बहू को ससुर की विरासत वाली संपत्ति से सम्मानजनक भरण-पोषण पाने का पूरा हक है।

धारा 22: वारिसों की कानूनी मजबूरी

सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम की धारा 22 की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि मृतक व्यक्ति की संपत्ति जो भी वारिस प्राप्त करता है उस पर यह कानूनी दायित्व (Liability) है कि वह मृतक पर निर्भर व्यक्तियों (जैसे विधवा बहू) का भरण-पोषण करे। यदि विधवा बहू के पास अपनी आय का कोई साधन नहीं है या उसके मृत पति ने उसके लिए कोई संपत्ति नहीं छोड़ी है तो उसे ससुर की संपत्ति से हिस्सा मिलना अनिवार्य है।

महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि

अदालत ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कानून की संकीर्ण व्याख्या करके विधवा बहुओं को हक से वंचित किया गया तो वे गरीबी और सामाजिक हाशिए पर धकेल दी जाएंगी। यह महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के लिए गंभीर खतरा होगा। इस फैसले से अब देशभर की उन विधवा महिलाओं को बल मिलेगा जो ससुराल में संपत्ति विवाद या उपेक्षा का सामना कर रही हैं।

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