नेशनल डेस्क: वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स के नियमों को और अधिक सरल और मध्यम वर्ग के अनुकूल बनाने के लिए नए बदलाव प्रस्तावित किए हैं। 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह है कि एक आम आदमी बिना किसी विशेषज्ञ की मदद के खुद अपना टैक्स रिटर्न दाखिल कर सके। इसके लिए पहले से भरे हुए (Pre-filled) फॉर्म जारी किए जाएंगे, जिनमें कर्मचारी की अधिकांश जानकारी पहले से मौजूद होगी।
उपहार और भोजन पर बढ़ी टैक्स फ्री सीमा
नए नियमों के तहत अब नियोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले तोहफों पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले सालाना ₹5,000 तक के गिफ्ट टैक्स फ्री होते थे, जिसे अब बढ़ाकर ₹15,000 कर दिया गया है। इसी तरह, ऑफिस की ओर से मिलने वाले मील कूपन या भोजन पर मिलने वाली छूट को ₹50 प्रति भोजन से बढ़ाकर ₹200 प्रति भोजन करने का प्रस्ताव है। इससे कर्मचारियों को हर महीने खाने-पीने के खर्च पर बेहतर बचत होगी।
बच्चों की पढ़ाई और इलाज के लिए कर्ज में राहत
कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए मिलने वाली टैक्स फ्री मदद की सीमा में भी तीन गुना इजाफा किया गया है। अब नियोक्ता के संस्थान में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ₹3,000 प्रति माह तक की शिक्षा पूरी तरह टैक्स फ्री होगी, जो पहले मात्र ₹1,000 थी। इसके अलावा, बीमारी के इलाज के लिए कंपनी से लिए जाने वाले ब्याज मुक्त कर्ज की सीमा को भी ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2,00,000 कर दिया गया है। यानी अब दो लाख तक के मेडिकल लोन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
कार के इस्तेमाल और रखरखाव के नए नियम
अगर कोई कर्मचारी ऑफिस और निजी काम के लिए कंपनी की कार का उपयोग करता है, तो उसके टैक्स योग्य मूल्य (Perquisite Value) में भी बदलाव किया गया है।
1.6 लीटर इंजन तक की कार: इसके लिए टैक्स योग्य मूल्य अब ₹5,000 प्रति माह होगा (पहले यह ₹1,800 था)।
बड़े इंजन वाली कार (1.6 लीटर से अधिक): इसके लिए ₹7,000 प्रति माह तय किया गया है (पहले यह ₹2,400 था)।
ड्राइवर की सुविधा: यदि कंपनी ड्राइवर भी देती है, तो ₹3,000 प्रति माह अतिरिक्त जोड़े जाएंगे।
वहीं, यदि कार का रखरखाव कर्मचारी खुद करता है लेकिन कार कंपनी की है, तो छोटे इंजन वाली कार के लिए ₹2,000 और बड़ी कार के लिए ₹3,000 प्रति माह का मूल्य टैक्स गणना में शामिल होगा।


