
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर ऐतिहासिक देवकली मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शहर, क्षेत्र और अन्य जनपदों से आए शिवभक्तों ने महाकालेश्वर का जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन किया। इस वर्ष 300 साल बाद एक दुर्लभ संयोग बना, जिसने भक्तों में विशेष उत्साह भर दिया।
सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। हजारों कांवड़ियों ने मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर शहद, जल, दूध और गन्ने के रस से अभिषेक किया। बड़ी संख्या में परिवारों ने विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा की। मंदिर के पास पूजा सामग्री और फूलों की बिक्री भी खूब हुई। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
जनपद के अन्य शिव मंदिरों जैसे सत्तेश्वर, भूतेश्वर, ओंकारेश्वर, कालीमाता मंदिर, संकट मोचन मंदिर और गौरैया तालाब स्थित शिव मंदिर में भी भक्तों ने अभिषेक और पूजन किया। हजारों श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर भगवान शिव से मन्नतें मांगी। मंदिरों में देर रात तक कीर्तन-भजन चलते रहे और कई स्थानों पर प्रसाद वितरण भी किया गया।


जनपद के विभिन्न कस्बों और ग्रामीण अंचलों में भी महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। फफूंद कस्बे के पाता चौराहे स्थित बारहदरी शिव मंदिर में भी सुबह से भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। नगर के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शिवालयों को फूलों और रोशनी से आकर्षक ढंग से सजाया गया था, और प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रही।


