UP Desk : भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय एक बड़े मानव तस्करी गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। जांच में सामने आया है कि यह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क संगठित तरीके से युवतियों को झांसे में लेकर अलग-अलग शहरों में भेजता था। जांच में ये भी सामने आया है कि यह गिरोह लगभग ₹400 करोड़ तक का नेटवर्क चलाता था। मामले के सामने आने के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है।
सोशल मीडिया के जरिए शिकार बनती लड़कियां
जांच एजेंसियों के अनुसार, रक्सौल सीमा लंबे समय से मानव तस्करी के लिए संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। हालिया कार्रवाई में एक ऐसे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसका नेटवर्क देश के कई बड़े शहरों तक फैला हुआ था। बताया जा रहा है कि गिरोह सोशल मीडिया के जरिए युवतियों को अपने जाल में फंसाता था।
कोडवर्ड से लड़कियों को फसाया
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि तस्कर फर्जी पहचान और रिश्तों के नाम का इस्तेमाल करते थे। गिरोह के सदस्य “मामी”, “मौसी”, “बुआ” और “दीदी” जैसे कोडवर्ड के जरिए अलग-अलग शहरों और संपर्क सूत्रों की पहचान करते थे। व्हाट्सएप चैट और डिजिटल साक्ष्यों से यह भी सामने आया कि पीड़ितों की विस्तृत जानकारी साझा की जाती थी, ताकि उन्हें आगे भेजने में आसानी हो सके।
जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी युवतियों को प्रेम जाल, नौकरी या शादी के झूठे वादों में फंसाते थे। विश्वास हासिल करने के बाद उन्हें ब्लैकमेल कर नेटवर्क के हवाले कर दिया जाता था। इस पूरे रैकेट में एजेंटों को हर पीड़िता के बदले मोटी रकम दी जाती थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने कई लड़कियों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त कराया है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा है और इसकी जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। वहीं, मानव तस्करी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सीमा क्षेत्रों में निगरानी और सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।


