विकासनगर के के सेक्टर 14 में बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड में दो सगी मासूम बहनें जिंदा जल गईं। बृहस्पतिवार को दोनों के शव बरामद किए गए। दो बच्चों की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। प्रशासन की मदद से दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद शवों का गुलाला घाट पर दफना दिया गया।बस्ती में सतीश पत्नी पूनम, ससुर दुलारे दो वर्षीय स्वाति, चार वर्षीय कुहू और दो माह की बिटिया आयुषी के साथ लंबे समय से रहते थे। सतीष ने बताया कि वह और उनके ससुर बुधवार को मजदूरी करने गए थे। वहीं, पूनम भी काम से बाहर गई थीं। झोपड़ी में तीनों बच्चे मौजूद थे।
पूनम ने बच्चों से कहा था…
पूनम ने बच्चों से कहा था कि वह थोड़ी देर में लौटकर आ रही हैं, झोपड़ी से बाहर नहीं निकलना। शाम को दुलारे काम से लौटे तो देखा कि बस्ती में आग लगी है। दुलारे ने बताया कि उन्होंने बस्ती के भीतर घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने भीतर जाने नहीं दिया। उन्होंने बच्चों की खोजबीन की तो कुहू एक पड़ोसी के पास मिली।
पूछने पर कुहू ने बताया कि आग लगने पर वह शोर मचाते हुए बाहर निकल आई थी, जबकि स्वाति और आयुषी झोपड़ी के भीतर थीं। बुधवार रात में आग बूझने के बाद परिजनों ने बच्चों की तलाश की, लेकिन कछ पता नहीं चल सका। बृहस्पतिवार सुबह पुलिस ने राख के ढ़ेर से दोनों मासूमों के शव निकाले तो चीख पुकार मच गई। उधर, लापता हुए चार अन्य बच्चे अपने परिवार के पास पहुंच गए, जिसके बाद उनके घरवालों ने राहत की सांस ली।
सब कुछ राख, बचे सिर्फ शरीर के कपड़े
सतीश ने बताया कि आग ने उनका सबकुछ छीन लिया। दो बच्चों के साथ-साथ कपड़े, राशन सब चले गए। उन्होंने 20 हजार रुपये बचाकर रखे थे, जो जल गए। अब उनके पास सिर्फ पहने हुए कपड़े बचे हैं। आग की खबर सुनकर गणेशपुर चिनहट में रहने वाले सतीश के भाई कुलदीप पहुंचे और भाई व उनके परिवार को अपने साथ घर लेकर गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों बच्चों के दम घुटने के बाद जलने से मौत की पुष्टि हुई है।


