NEET-UG 2026 Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल एंट्रेस एग्जाम NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने इस केस में कई नए लोगों को घेरे में लिया है। जांच एजेंसी अब सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि पैसों के लेनदेन, डिजिटल चैट और छात्रों तक पेपर पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। CBI ने एजुकेशनल कंसल्टेंसी चलाने वाले शुभम खैरनार को पूछताछ के लिए पुणे लाया। वहीं सस्पेंड की जा चुकी जूनियर कॉलेज टीचर मनीषा मंधारे और ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मनीषा वाघमारे से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से पहले question paper कैसे बाहर आया और किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया।
लातूर के डॉक्टर पर भी शक
जांच में महाराष्ट्र के लातूर से एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर का नाम भी सामने आया है। CBI को शक है कि डॉक्टर ने अपने बच्चे को फायदा दिलाने के लिए लीक हुआ पेपर हासिल किया था। बताया जा रहा है कि यह पेपर रिटायर्ड केमिस्ट्री लेक्चरर प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी के जरिए उपलब्ध कराया गया, जिन्हें जांच एजेंसियां लीक का अहम स्रोत मान रही हैं। CBI अधिकारियों के मुताबिक कई अभिभावकों, जिनमें कुछ डॉक्टर भी शामिल हैं, ने मोटी रकम देकर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लेने की कोशिश की। कई परिवारों से पूछताछ हो चुकी है, जबकि कुछ संदिग्धों पर अभी निगरानी रखी जा रही है।
मेडिकल एडमिशन दिलाने के नाम पर बड़ा खेल
शुभम खैरनार मेडिकल कोर्सेज जैसे MBBS, BDS और BHMS की तैयारी कराने और एडमिशन गाइडेंस देने का काम करता था। जांच एजेंसियों को शक है कि उसका संबंध पुणे के पहले से गिरफ्तार आरोपी से था और वह छात्रों तथा पेपर लीक गैंग के बीच कड़ी का काम कर रहा था।
NTA ने क्या कहा?
इस मामले में National Testing Agency (NTA) ने संसदीय समिति को बताया कि शुरुआती जांच में उसकी प्रणाली से पेपर लीक होने के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि एजेंसी ने यह भी साफ किया कि अंतिम निष्कर्ष CBI की जांच के बाद ही सामने आएगा। गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG 2026 परीक्षा में देशभर से 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था। पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। अब CBI इस पूरे रैकेट में शामिल दलालों, शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है। जांच एजेंसी खासतौर पर बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डाटा की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ था।


