आधुनिक जीवनशैली में पौष्टिक भोजन, उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरुकता के बावजूद इंसान अक्सर अपनी औसत उम्र तक पहुंचने से पहले ही जिंदगी की दौड़ से बाहर हो जा रहा है। लेकिन, वन्यजीवों की दुनिया में तस्वीर कुछ अलग है। यहां कई ऐसे जीव हैं जो अपनी प्राकृतिक औसत उम्र को पीछे छोड़ते हुए लंबी जिंदगी जी रहे हैं।राजधानी लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान (लखनऊ चिड़ियाघर) में वन्यजीवों के जीवनकाल पर किए गए अध्ययन में यह दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि चिड़ियाघर के पिंजरों और बाड़ों में रह रहे कई वन्यजीव अपनी औसत प्राकृतिक उम्र से अधिक समय तक जीवित हैं। इसके पीछे बेहतर भोजन, नियमित चिकित्सकीय देखभाल और पूरी तरह सुरक्षित वातावरण को प्रमुख वजह माना गया है।
चिड़ियाघर प्रशासन ने शेर, हिप्पो, जिराफ और चिंपांजी समेत कई प्रमुख वन्यजीवों के जीवनकाल का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि प्रत्येक जीव की उम्र, शारीरिक जरूरत और मौसम के अनुसार उसकी खुराक तय की जाती है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और विशेषज्ञ चिकित्सकीय निगरानी उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वहीं जंगल की तरह यहां शिकारियों या अन्य प्राकृतिक खतरों का सामना भी नहीं करना पड़ता।
एक नजर में
| वन्यजीव |
जन्म |
उम्र |
औसत उम्र |
वजह |
| बब्बर शेरनी (वंसुधरा) |
2006 |
19 वर्ष |
14-15 वर्ष |
मौसम व उम्र के साथ खुराक में बदलाव, पूरी तरह सुरक्षित वातावरण |
| हिप्पो (धीरज) |
1981 |
45 वर्ष |
35-40 वर्ष |
वजन के मुताबिक चोकर, हरा चारा, खीरा और अन्य विशेष सुविधाएं |
| जिराफ (सुजाता) |
2001 |
25 वर्ष |
23-25 वर्ष |
चोकर, चना, हरी पत्तियां, दाना, नियमित देखभाल और अन्य जीवों से सुरक्षा |
| चिंपांजी (निकिथा) |
1990 |
36 वर्ष |
35-38 वर्ष |
हाई-टेक चिकित्सा, सुरक्षित माहौल और मौसम के अनुकूल पौष्टिक भोजन |
जंगल से ज्यादा सुरक्षित है चिड़ियाघर का बाड़ा
जंगल में वन्यजीवों के अस्तित्व पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। उन्हें कभी अपने ही कुनबे के जीवों से तो कभी बाहरी शिकारियों से जूझना पड़ता है। इसके विपरीत, चिड़ियाघर के बाड़ों में वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। यहां उन्हें उनकी शारीरिक जरूरत के आधार पर मापा हुआ पौष्टिक आहार दिया जाता है और चौबीसों घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रहते हैं। -उत्कर्ष शुक्ला, वन्यजीव चिकित्सक व उप निदेशक, लखनऊ चिड़ियाघर
इंसानों से सीख, वन्यजीवों पर प्रयोग
लखनऊ चिड़ियाघर के निदेशक संजय कुमार बिस्वाल के मुताबिक वर्तमान में मनुष्यों की औसत उम्र लगभग 70 वर्ष है, लेकिन तनाव और अन्य कारणों से लोग समय से पहले ही काल के गाल में समा जाते हैं। वन्यजीवों के मामले में ऐसा नहीं है। चिड़ियाघर परिसर में इस समय दो दर्जन से अधिक ऐसे वन्यजीव मौजूद हैं, जो अपनी ढलती उम्र के बावजूद बेहतर देखरेख, प्यार और समय पर मिलने वाले इलाज की बदौलत लंबी और खुशहाल जिंदगी का आनंद ले रहे।