नई दिल्ली। लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण ‘डार्क ज़ोन’ की तरफ बढ़ रही देश की राजधानी के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के सात बायोडायवर्सिटी पार्क बड़े ‘रीचार्जिंग स्टेशन’ बनकर उभरे हैं।
इन पार्कों में विकसित की गईं 20 से अधिक छोटी-बड़ी झीलें और जलाशय मानसून में लगभग 1100 मिलियन गैलन वर्षा जल को जमीन के भीतर उतारने (भूजल संभरण) का माध्यम बन रहे हैं। विज्ञानियों के मुताबिक, कंक्रीट के चलते सीमेंटेड हो चुकी दिल्ली में ये पार्क उन गिने- चुने प्राकृतिक सिंक में से हैं, जहां वर्षा का पानी सीधे जमीन के भीतर पहुंच रहा है।
कंक्रीट की परत के बीच ‘रीचार्ज विंडो’
राजधानी का एक बड़ा हिस्सा निर्माण कार्यों के कारण ”वाटरप्रूफ” हो चुका है, जिससे वर्षा जल जमीन में जाने के बजाय नालों के रास्ते बह जाता है। इसी वर्षा जल को सहेजने के लिए इन पार्कों में दिल्ली की मूल अरावली और यमुना खादर की वनस्पतियों को विज्ञानी तरीके से पुनर्जीवित किया गया है।
इन स्वदेशी पेड़ों की जड़ें मिट्टी को स्पंज की तरह बनाती हैं, जिससे पानी बहने के बजाय तुरंत जमीन में समा जाता है। यहां भूजल संभरण सामान्य जल संचयन पिट्स की तुलना में कई गुना ज्यादा है, क्योंकि यहां ढलान और प्राकृतिक जल धाराओं को इस तरह मोड़ा गया है कि पार्क की एक-एक बूंद अंदर जलाशयों में जाकर ठहरे।


