Wednesday, July 22, 2026

साथ जी न सके तो साथ छोड़ दी दुनिया: अर्थी पर लेटी पत्नी की मांग में भरा सिंदूर…पति ने भी तोड़ा दम

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विवाह के मंडप में सात फेरे लेते हुए पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर वचन लेते हैं कि जिंदगी भर साथ जिएंगे। कई बार यह वचन दोनों को प्रेम के ऐसे अटूट धागे में बांध देता है, जहां वाकई एक की मौत दूसरे की जिंदगी भी खत्म कर देती है। ऐसा ही वाकया मंगलवार को गांव मधवापुर में सामने आया। यहां टीबी की बीमारी से पत्नी की मौत का सदमा पति भी बर्दाश्त नहीं कर सका। पत्नी की अंत्येष्टि की तैयारी के दौरान उसकी मांग में सिंदूर भरते समय पति ने भी दम तोड़ दिया। गांव में एक साथ दोनों की अर्थी उठी तो कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पाया। इसके बाद पति-पत्नी दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।

गांव मधवापुर निवासी श्यामल दास (40) की पत्नी पिंकी (35) चार साल से टीबी की बीमारी से ग्रसित थी। उनका कानपुर में प्राइवेट अस्पताल से इलाज चल रहा था। सोमवार की शाम पिंकी की हालत ज्यादा बिगड़ गई। पति व गांव वाले जब तक उसे अस्पताल ले जाते, पिंकी की मौत हो गई। रात भर श्यामल दास पिंकी के शव के पास बैठा रहा। कभी वह पिंकी का चेहरा देखता तो तभी उसका हाथ पकड़कर रोने लगता और कहता, तुम मुझे ऐसे अकेला छोड़कर कैसे जा सकती हो, तुम तो मेरे बिना एक पल भी नहीं रहती थीं।
जैसे-तैसे रोते बिलखते रात बीत गई। मंगलवार सुबह पिंकी के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। तभी उसकी मांग में सिंदूर भरते समय पति श्यामलदास वहीं लड़खड़ाकर गिर गया। वह पत्नी की मौत का सदमा बर्दाश्त न कर सका और उसकी भी मौत हो गई। उधर, पत्नी के बाद पति की मौत से परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया।

ग्रामीणों ने बताया कि श्यामल दास पत्नी से बहुत प्रेम करता था। बीमारी में उसने पत्नी की बहुत सेवा की थी। हमेशा कहता था कि पिंकी को कुछ हो गया तो वह भी जिंदा नहीं रह पाएगा। वह पूरी रात बेसुध होकर रोता रहा। उधर, श्यामलदास के ससुर रामसनेही ने दोनों के अंतिम संस्कार का इंतजाम कराया। ग्रामीणों ने दोनों की अर्थी एक साथ उठाई और नदी किनारे एक साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया। श्यामलदास के चचेरे भाई सुनील ने अंतिम संस्कार किया।
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