औरैया। सरकारी तंत्र यूरिया और डीएपी की बोरी के साथ जिंक, जाइम, सल्फर, रीजेंट समेत अन्य उत्पादों की टैगिंग पर रोक लगाने का दावा कर रही है।
वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। किसानों को प्राइवेट दुकानों पर खाद तभी दी जा रही है जब वो जिंक, जाइम, सल्फर के थैले साथ में खरीद रहे हैं। हालांकि खाद कारोबारी इसका हवाला दे रहे हैं कि उर्वरक कंपनियों ने इस रोक का तोड़ निकालते हुए डमी कंपनियों के नाम से सप्लाई दे रहे हैं।
क्षेत्र के निजी उर्वरक विक्रेताओं ने बताया कि कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूटरों के माध्यम से डीलरों पर अतिरिक्त उत्पाद लेने का दबाव बना रही हैं। इसके बाद डीलरों को यूरिया और डीएपी के साथ किसानों को जिंक, जाइम और अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर करना पड़ रहा है। इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है।