Friday, June 19, 2026
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Srinagar Airport से सफर करने वालों को होगी मुश्किल, कई दिनों तक उड़ानों पर लगेगी Break

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श्रीनगर(एजैंसी): भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (ए.ए.आई.) के श्रीनगर एयरपोर्ट निदेशक जावेद अंजुम ने कहा कि श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे की मुरम्मत अत्यंत आवश्यश्क हो चुकी है, क्योंकि अंतिम बार इसका रखरखाव और मरम्मत कार्य 15 वर्ष पहले हुए थे।

प्रत्येक रनवे की मुरम्मत समय-समय पर की जानी जरूरी होती है और सामान्यत. प्रत्येक 10 वर्ष में एक बार रनवे की बड़े स्तर पर मुरम्मत होती है, लेकिन श्रीनगर एयरपोर्ट की मुरम्मत 15 वर्ष से नहीं हुई है। इसलिए जुलाई से सितंबर के अंत तक एयरपोर्ट को प्रत्येक सप्ताह सोमवार और मंगलवार को रनवे की मरम्मत का काम होगा। इसके चलते यात्री विमान सेवा निलंबित रहेगी।

शनिवार को श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में जावेद अंजुम ने कहा कि ए.ए.आई ने जुलाई से प्रत्येक सप्ताह सोमवार और मंगलवार को रनवे के कुछ हिस्सों पर काम करने का निर्णय लिया है। इन दो दिनों में रनवे के एक छोटे हिस्से पर कार्य किया जाएगा, जबकि शेष दिनों में उड़ान संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा।

अक्तूबर में रखराखव का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण पूरा किया जाना है। इसके लिए रनवे को पूरी तरह बंद करना अनिवार्य होगा। इसके चलते अक्तूबर में लगभग 15 दिनों तक श्रीनगर एयरपोर्ट से उड़ान संचालन बंद रह सकता है।

हालांकि ए.ए.आई. ने स्पष्ट किया कि वह उड़ान संचालन के संबंध में केंद्र सरकार के निर्देश का पालन करेगा। अंजुम ने कहा कि यदि सरकार रखरखाव कार्य को स्थगित करने, टालने या उड़ानें जारी रखने के निर्देश देती है, तो प्राधिकरण उसी के अनुसार कार्रवाई करेगा।

इन 5 जिलों में अगले तीन घंटों का अलर्ट, आंधी-तूफान और बिजली कड़कने की चेतावनी

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Uttarakhand Weather: भारतीय मौसम विज्ञान केन्द्र ने उत्तराखंड के पांच जिलों के कुछ हिस्सों में अगले तीन घंटों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान, संबंधित क्षेत्रों में लोगों एवं पर्यटकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

इस चेतावनी के अनुसार, सोमवार अपराह्न 2:07 बजे से शाम 5:07 बजे तक तीन घंटों में जिला बागेश्वर, चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में कुछ जगहों पर तथा देवल, कपकोट, मुनस्यारी, डीडीहाट, बद्रीनाथ, केदारनाथ, तुंगनाथ, बरकोट, पुरोला तथा आस पास के क्षेत्रो में बिजली कड़कने और तेज हवाओं (30-40 किमी/घंटा) के साथ आंधी-तूफान आने की अनुमान जताया गया है।

विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को इस दौरान घरों में या फिर सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

दलबदलुओं को नकारो कहने वाली NCPI ममता संग कर दिया खेल, TMC के टूटे नेताओं से मिलाया हाथ…NDA को समर्थन

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नेशनल डेस्क: अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलुओं को नकारें’ के नारे के साथ 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में लगभग गुमनामी के बीच चुनाव लड़ने वाला एक राजनीतिक दल रविवार को उस वक्त अचानक राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया जब तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों वाले बागी गुट ने एनसीपीआई में विलय का ऐलान किया।

चुनाव में नोटा से भी पीछे रही NCPI 
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) नामक इस दल ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी, लेकिन अंततः उसके प्रत्याशी चावमानु, अंबासा और कैलाशहर सीटों पर ही मैदान में उतर सके। चुनावी नतीजों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और उसके उम्मीदवार या तो ‘नोटा’ (इनमें से कोई नहीं) से पीछे रहे या उससे मामूली अंतर से आगे निकल पाए। करमचारा सीट से पार्टी की उम्मीदवार रीता शिल हलाम का नामांकन जांच के दौरान खारिज कर दिया गया था।
दिलचस्प तथ्य यह है कि एनसीपीआई का पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा में है।

TMC सांसदों का NCPI में मिलना हैरान कर देने वाला फैसला 
निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में शेउली कुंडू का नाम पार्टी की अध्यक्ष के रूप में दर्ज हैं, जो स्वयं को कलकत्ता उच्च न्यायालय में अधिवक्ता बताती हैं। एनसीपीआई के प्रचार पोस्टर पर मतदाताओं से पार्टी के चुनाव चिह्न ‘पेन की निब’ पर मतदान करने की अपील करते हुए संदेश लिखा था, ”अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक दलबदलुओं को नकारें। राजनीतिक हस्तियों के बजाय समाजसेवियों का समर्थन करें।” पार्टी को यह चुनाव चिह्न एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में आवंटित किया गया था। रविवार को जब चावमानु से पार्टी के उम्मीदवार रहे बरजेदा त्रिपुरा से संपर्क किया, तो वह खुद इस घटनाक्रम से हैरान नजर आए।

 राष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय 
उन्होंने कहा, ”मैंने 2023 में चुनाव लड़ा था। अब तीन साल बाद यह सब कैसे हो गया?” लोकसभा के 20 सदस्यों के एनसीपीआई में विलय की खबर सुनकर बरजेदा को यकीन नहीं हुआ। उन्हें आश्चर्य था कि जिस पार्टी का नाम अब राष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, उसी ने कभी उन्हें त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। बरजेदा ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर हैं। उन्होंने कहा, ”2023 में कृष्ण देबबर्मा नाम के एक व्यक्ति ने मुझसे संपर्क किया था। उसी के कहने पर मैंने चुनाव लड़ा। कई वर्ष पहले मैं कांग्रेस का समर्थक था।”

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हालांकि, कृष्ण देबबर्मा से संपर्क नहीं हो सका। बरजेदा के चुनावी हलफनामे के अनुसार, 2023 में उनकी आयु 62 वर्ष थी। उन्होंने आठवीं तक शिक्षा प्राप्त की थी, चार लाख रुपये की संपत्ति घोषित की थी और अपने पेशे के तौर पर, समाजसेवा से जुड़े होने का उल्लेख किया था। चावमानु सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शंभू लाल चकमा विजयी रहे थे। उन्होंने टिपरा मोथा के हांगसा कुमार त्रिपुरा को 2,899 मतों के अंतर से हराया था। बरजेदा 536 वोट के साथ पांचवें स्थान पर रहे और ‘नोटा’ पर डले 500 वोट से मामूली अंतर से आगे रहे।

पार्टी के अन्य उम्मीदवार अंबासा, करमचारा और कैलाशहर सीटों से मैदान में थे। इनमें करमचारा और अंबासा सीट टिपरा मोथा के खाते में गईं, जबकि कैलाशहर से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस में बगावत रविवार को उस वक्त निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई जब बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय का ऐलान किया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि तृणमूण के दो-तिहाई लोकसभा सांसदों ने अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग करते हुए पत्र सौंप दिया है। उन्होंने कहा, ”तृणमूल के दो-तिहाई सांसदों ने अलग बैठने की व्यवस्था के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दिया है। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करेंगे।

वहीं, तृणमूल के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि असंतुष्ट गुट पहले ही एनसीपीआई में विलय कर चुका है। उन्होंने एनसीपीआई को एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल बताया। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल वे होते हैं, जो आयोग में पंजीकृत तो होते हैं लेकिन अभी राज्य या राष्ट्रीय दल का दर्जा हासिल करने के लिए आवश्यक मानदंड पूरे नहीं कर पाए हैं।

PM मोदी ने अमेरिका-ईरान समझौते का किया स्वागत; बोले- समुद्री व्यापार को मिलेगी राहत, वेस्ट एशिया में लौटेगी शांति और स्थिरता

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International Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अमेरिका और ईरान के बीच वेस्ट एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर बनी सहमति का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति, स्थिरता और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है और इससे न केवल आर्थिक व्यवधान पैदा हुआ, बल्कि कई देशों में जान-माल का नुकसान भी हुआ। मोदी ने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बनी इस समझ का स्वागत करता है और आशा करता है कि इसके क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी। उन्होंने कहा कि यह समझ समुद्री मार्गों पर आवाजाही और वैश्विक व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

भारत की नजर अंतिम समझौते पर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि शेष मुद्दों पर जारी बातचीत भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी और अंततः एक स्थायी तथा टिकाऊ समझौते का रास्ता निकलेगा। भारत लंबे समय से वेस्ट एशिया में शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में घोषणा की थी कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे संघर्ष को समाप्त करने के लिए समझौता अंतिम रूप ले चुका है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को Switzerland में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

भारत के लिए क्यों अहम ये डील?
वेस्ट एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत अपनी तेल और गैस आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। इसके अलावा Strait of Hormuz जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में क्षेत्र में तनाव कम होना भारत के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। बता दें कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह और आगे की वार्ताओं पर टिकी हैं। यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो यह वेस्ट एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: 18 हजार की सैलरी… गोबर के ढेर से निकले लाखों, 1.5 करोड़ की जमीन देख SIT हैरान

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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी का मामला अब काफी गंभीर हो चला है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक हाई-लेवल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है। दूसरी तरफ, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने मंदिर के एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच टीम ने जब रुदौली के शुजागंज क्षेत्र में रहने वाले आरोपी कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। लवकुश के घर से करीब 10 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि चोरों और जांच एजेंसियों से बचने के लिए कुछ रकम तो घर की अलमारी में रखी गई थी, जबकि बाकी के पैसे बाहर गोबर के ढेर में दबाकर छिपाए गए थे। हालांकि, प्रशासन ने अभी इस बरामदगी को लेकर कोई आधिकारिक या अंतिम बयान जारी नहीं किया है। इस मामले में एक और संदिग्ध कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है। ये दोनों ही कर्मचारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे को गिनने और उसकी देखरेख के काम में लगे थे।

महीने की तनख्वाह 18 हजार, लेकिन खरीद डाली करोड़ों की जमीन
जांच एजेंसियों के रडार पर इन कर्मचारियों की कमाई और संपत्ति का यह अंतर सबसे पहले आया। बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों की मासिक सैलरी महज 18 से 20 हजार रुपए के बीच थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों में इनकी माली हालत अचानक से बदल गई। जांच में सामने आया है कि एक कर्मचारी ने हाल ही में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की भारी-भरकम कीमत वाली जमीन खरीदी, जबकि दूसरे ने भी लगभग 40 लाख रुपए का एक प्लॉट अपने नाम किया। इतनी कम सैलरी में इतनी बड़ी संपत्तियां खड़ा करना ही जांच एजेंसियों के शक की सबसे बड़ी वजह बना।

पिता का दावा- बेटा निर्दोष है, जमीन गिरवी रखकर जुटाए पैसे
इस बीच, आरोपी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव किया है। उन्होंने घर से 10 लाख रुपए मिलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन बेटे को पूरी तरह निर्दोष बताया। बच्चूलाल का कहना है कि फैजाबाद में जो मकान बन रहा है, उससे उनके बेटे का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मकान बनवाने के लिए उन्होंने अपनी खुद की खेती की जमीन गिरवी रखी थी, जिससे यह रकम आई है। दूसरी ओर, गांव वालों का कहना कुछ और ही है। ग्रामीणों के मुताबिक, जांच टीम में 6 लोग शामिल थे (2 पुलिस की वर्दी में और 4 सादे कपड़ों में)। गांव में यह चर्चा आम है कि राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद से ही लवकुश के ठाट-बाट और आर्थिक स्थिति में अचानक बहुत बड़ा उछाल आया था।

IAS अफसर के हाथ में कमान, नृपेंद्र मिश्र ने साधी चुप्पी

मामले के तूल पकड़ने के बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी 5 दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे। हालांकि, जब उनसे इस वित्तीय गड़बड़ी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि उनका काम सिर्फ और सिर्फ मंदिर निर्माण के कार्यों की देखरेख करना है, वे इस मामले पर टिप्पणी नहीं करेंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की लिखित शिकायत और अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे घोटाले की परतें खोलने के लिए जो SIT बनाई है, उसकी कमान एक सीनियर प्रशासनिक अधिकारी को सौंपी गई है। लखनऊ के कमिश्नर (IAS) विजय विश्वास पंत को इस जांच टीम का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ IPS किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। शासन ने इस टीम को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 7 दिनों के भीतर अपनी शुरुआती (प्रारंभिक) रिपोर्ट और अगले 15 दिनों के अंदर पूरी अंतिम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपें।

Lucknow News: लक्ष्य के मुकाबले 10 फीसदी रफ्तार, 31 मार्च तक ऐसे कैसे एलपीजी मुक्त होगा लखनऊ

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लखनऊ। एलपीजी मिलने में होती आसानी ने राजधानी में पीएनजी कनेक्शन की रफ्तार कम कर दी है। नतीजा यह कि अगले नौ महीने में यानी 31 मार्च 2027 तक लखनऊ को एलपीजी मुक्त करने का लक्ष्य फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। क्योंकि, हर दिन तय लक्ष्य 1200 कनेक्शन के मुकाबले सिर्फ 150 कनेक्शन तक ही हो पा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय गैस संकट के बीच सरकार जनता में पीएनजी (पाइप नैचुरल गैस ) को अपनाने पर जोर दे रही है। लखनऊ में हर दिन 1200 कनेक्शन के लक्ष्य के साथ 31 मार्च 2027 तक 3.60 लाख नए पीएनजी कनेक्शन करने हैं। अगर कंपनी तय लक्ष्य भी हासिल करे तो अब तक के कुल 84 हजार कनेक्शनों की संख्या के साथ 31 मार्च तक यह संख्या 4.5 लाख कुल कनेक्शन तक ही पहुंच पाएगी। उधर, एलपीजी मुक्त लखनऊ के लिए एलपीजी उपभोक्ताओं का भी पीएनजी में कन्वर्जन जरूरी है। ऐसे में यह और भी मुश्किल भरा और चुनौतीपूर्ण है। क्योंकि, लखनऊ में ही 15 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक जहां पीएनजी नेटवर्क नहीं है, वहा तक लाइन पहुंचाने में काफी समय लगेगा। अभी जहां पाइपलाइन है, वहां भी सब कहीं कनेक्शन नहीं पहुंच पाए हैं। लिहाजा, एलपीजी मुक्त लखनऊ का लक्ष्य अभी दूर की कौड़ी ही नजर आ रहा है।

एलपीजी की आसान उपलब्धता ने बढ़ाई चुनौती
पीएनजी कनेक्शन के लिए कंपनियां अपार्टमेंट, सोसायटी में कैंप भी लगा रही हैं, लेकिन अब इन कैंपों में लोगों का रुझान खत्म होता जा रहा है। अफसरों का कहना है कि तमाम कोशिशों के बावजूद न नए ग्राहक ही बढ़ रहे हैं, और न ही कोई क्वेरी आ रही है। ऐसे में वह तय किए गए लक्ष्य के मुकाबले कनेक्शन ही नहीं कर पा रहे हैं।

आगरा को भी एलपीजी मुक्त करने की तैयारी
ग्रीन गैस लिमिटेड के अफसरों ने बताया कि सरकार ने भी बड़े शहरों को एलपीजी मुक्त महानगर बनाने का फैसला लिया है। इसके लिए लखनऊ को हर दिन 1200 तो आगरा को 400 कनेक्शन करने हैं, जिससे कि 31 मार्च 2027 तक दोनों महानगर एलपीजी मुक्त घोषित किए जा सकें। लेकिन, लखनऊ में हर रोज 150 तो आगरा में 60-70 कनेक्शन ही हो पा रहे हैं।

लखनऊ में करीब 8000 कनेक्शन, आगरा में 2500
Iएक जनवरी से अब तक लखनऊ में 8000 तो आगरा में 2500 के करीब पीएनजी कनेक्शन हुए हैं। इसमें भी पिछले तीन महीने के अंदर ही लखनऊ में करीब 5500 कनेक्शन किए गए हैं, जबकि औद्योगिक निकायों में 20 कनेक्शन किए गए हैं। अपार्टमेंट व सोसायटीज के नए लोगों में रुझान नहीं दिख रहा है। कैंप में भी लोग कम आ रहे हैं।I
Iप्रवीण सिंह, डीजीएम, मार्केटिंग, ग्रीन गैस लिमिटेडI

लखनऊ गोमती में 60 फीसदी तक घटा प्रवाह, 26 में 22 सहायक नदियां सूखीं

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लखनऊ। अवध क्षेत्र की वरदान गोमती नदी की बदहाली और दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण उसका भूजल से टूटता रिश्ता है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरणविद प्रो. वेंकटेश दत्ता के अध्ययन में सामने आया है कि गोमती रिवरफ्रंट परियोजना के दौरान बनाई गई कंक्रीट की 16 मीटर गहरी डायफ्राम दीवार ने नदी और भूजल के बीच प्राकृतिक संपर्क को बाधित कर दिया है। इससे नदी के प्रवाह में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आ गई है।
स्थिति की गंभीरता इस तथ्य से समझी जा सकती है कि गोमती की 26 सहायक नदियों में से 22 पूरी तरह सूख चुकी हैं, जबकि कल्याणी, कथना जैसी शेष चार में ही थोड़ा बहाव बचा है। पीलीभीत, सीतापुर और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र के अनेक प्राकृतिक जलस्रोत भी समाप्त हो रहे हैं। डाॅ. दत्ता ने बताया कि लखनऊ में नदी के कुल प्रवाह का 76 प्रतिशत हिस्सा भूजल से प्राप्त होता है। लगातार भूजल दोहन के कारण जलस्तर अब काफी नीचे पहुंच गया है, जिससे नदी को मिलने वाला प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हुआ है।

कब्जों और अतिक्रमण से सिमटा नदी का विस्तार

रिपोर्ट में नदी के बाढ़ क्षेत्र पर बढ़ते अतिक्रमण को भी संकट का प्रमुख कारण बताया गया है। आज देखें तो गोमतीनगर का एक बड़ा हिस्सा गोमती की जमीन पर नदी के पुराने बाढ़ क्षेत्र में ही बसा हुआ है। वर्ष 1970 के बाद तटबंध निर्माण के साथ शुरू हुए कब्जों के कारण नदी का प्राकृतिक विस्तार लगातार सिकुड़ा है। कई स्थानों पर नदी की चौड़ाई और प्रवाह क्षेत्र 100 मीटर तक कम हो गया है।

Ram Mandir: महाकुंभ बना था चंदा चोरों के लिए सुनहरा मौका, रोज पार किए 10-15 लाख, आज तफ्तीश करने जाएगी एसआईटी

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महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में चंदे की राशि में बड़ा इजाफा हुआ था। गिनती करने वालों को यह बखूबी पता था, इसलिए उन्होंने इसका खूब फायदा उठाया। एक-एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये तक चंदे की राशि से पार किए गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया और कुल गबन की राशि कितनी बड़ी हो सकती है।दरअसल, महाकुंभ में देश भर से करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे थे। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं ने इस दौरान काशी और अयोध्या में भी दर्शन किए थे। कुंभ के दौरान अयोध्या शहर भी श्रद्धालुओं से भरा था। लाजिमी है कि चंदे की राशि भी आम दिनों की अपेक्षा उस दौरान कई गुना बढ़ी। एक-एक दिन में करोड़ों रुपये की राशि दान में मिली। सूत्रों के मुताबिक, चंदे की राशि पार करने वालों के लिए वह दौर स्वर्णिम हो गया। जितनी चाही, उतनी रकम पार की। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि कुंभ के दौरान हर दिन 10 से 15 लाख रुपये पार किए गए। तब गिनती भी लंबी चलती थी। आसानी से रकम पार कर ली जाती थी।

जेवरात भी किए पार, नकली सोना रखा गया
चढ़ावे में जेवरात भी चढ़ाए जाते हैं। बड़े पैमाने पर जेवरात दान में दिए जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, नकदी के साथ-साथ जेवरात भी पार किए गए। यही नहीं, असली सोना पार कर नकली भी रखा गया। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। इसको लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। हकीकत और तथ्य तभी सामने आएंगे, जब निष्पक्षता से मामले की तह तक तफ्तीश की जाएगी। वरना यह मामला दबकर खत्म हो जाएगा।

मामले में सवाल ही सवाल
राम मंदिर के प्रमुख व संवेदनशील कार्यों में से एक कार्य चंदे की राशि की गिनती होता है, जिसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। वहां से चंदे की राशि पार कर ले जाना, वह भी इतनी अधिक, संभव नहीं लगता। यह तभी संभव लगता है, जब वहां हर स्तर पर लोगों की मिलीभगत रही हो, खासकर उन लोगों की जो गिनती के कार्य में लगे हों और मंदिर परिसर से बाहर निकलने की प्रक्रिया से जुड़े हों। क्योंकि सवाल उठता है कि सीसीटीवी निगरानी का क्या हुआ? ट्रस्ट व बैंक के जिम्मेदार क्या करते रहे? गिनती करने वालों की तलाशी क्यों नहीं होती थी? ऐसे तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब ट्रस्ट के पास नहीं हैं। इसलिए वह चुप्पी साधे हुए है।

Women Health: पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में बीमारियों का असर ज्यादा, एनएसएसओ रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

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भारत में बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है और इसका असर महिलाओं पर पुरुषों की तुलना में अधिक दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के स्वास्थ्य एवं जीवन स्थितियों से जुड़े नवीनतम आंकड़ों के अनुसार महिलाओं में बीमारियों की दर सामान्यतः पुरुषों से अधिक दर्ज की गई है।विशेष रूप से हड्डी-मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं, उच्च रक्तचाप, थायरॉयड विकार और संक्रमण महिलाओं में ज्यादा पाए गए हैं। वहीं पुरुषों में सीने के दर्द से जुड़े हृदय रोग तथा शारीरिक चोटों के मामले अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किए गए हैं। आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि बढ़ती बीमारियां केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और कार्यक्षमता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनती जा रही हैं।अधिकारियों के अनुसार सर्वेक्षण से पहले के 15 दिनों के भीतर बीमारी दर्ज कराने वालों की संख्या महिलाओं में पुरुषों की तुलना में काफी अधिक रही। प्रति एक लाख आबादी पर पुरुषों में कुल 13,504 बीमारी के मामले दर्ज किए गए, जबकि महिलाओं में यह संख्या 17,006 रही। यह अंतर दर्शाता है कि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना अपेक्षाकृत अधिक करना पड़ रहा है। बीमारियों की प्रमुख श्रेणियों में हृदय रोग के 3,523 मामले पुरुषों और 4,273 मामले महिलाओं में दर्ज हुए।

मानसिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी महिलाओं पर अधिक दबाव
मानसिक एवं न्यूरोलॉजिकल रोगों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। अवसाद, तनाव, चिंता और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कई समस्याएं महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक दर्ज हुईं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू जिम्मेदारियों, कार्यस्थल के दबाव, देखभाल की भूमिका और सामाजिक अपेक्षाओं का संयुक्त प्रभाव महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

श्वसन रोगों में पुरुषों और महिलाओं में अंतर बहुत कम
श्वसन रोगों के मामलों में पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर बहुत कम दिखाई दिया। ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण, सर्दी-जुकाम और गले की समस्याओं जैसे रोग दोनों वर्गों में लगभग समान स्तर पर दर्ज किए गए। इससे संकेत मिलता है कि कुछ संक्रामक और मौसमी बीमारियां लिंग के आधार पर बहुत अधिक भिन्नता नहीं दिखातीं।

दुधवा नेशनल पार्क की मोटिवेटर नाजरुन निशा को जहरीले सांप ने काटा, खुद ही बाइक चलाकर पहुंचीं अस्पताल

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लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क की मोटिवेटर नाजरुन निशा ने एक बार फिर साहसिक काम से सुर्खियां बटोरी हैं। उन्होंने लखीमपुर खीरी के जहरीले सांप करैत को रेस्क्यू किया। इस कार्य के दौरान सांप ने उनको काट भी लिया। इसके बाद भी नाजरुन निशा बाइक चलाकर अस्पताल पहुंच गईं और इलाज कराया।

नाजरुन निशा को सूचना दी गई कि रविवार को लखीमपुर खीरी में एक नाले के पास बेहद जहरीला सांप देखा गया है। नाजरुन निशा ने फिर साहस दिखाया जहरीले सांप को पकड़ा। इस दौरान जहरीले सांप ने उनको काट लिया, लेकिन उन्होंने सांप को नहीं छोड़ा और नाजरुन खुद ही बाइक चलाकर अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने वहां पर अपना इलाज कराया।

दुधवा नेशनल पार्क की मोटिवेटर नाजरुन 300 से ज्यादा जहरीले सांपों का रेस्क्यू कर चुकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो भी पोस्ट किया और लिखा कि रेस्क्यू के दौरान अचानक मुझे सांप ने काट लिया। घबराने की कोई बात नहीं है, मैंने तुरंत अस्पताल जाकर आवश्यक उपचार और इंजेक्शन लगवा लिया है तथा अब मैं पूरी तरह सुरक्षित हूं।

इसके साथ ही सलाह दी कि यदि किसी को सांप काट ले, तो घबराएं नहीं और किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार पर भरोसा न करें। आप तुरंत नज़दीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सहायता लें। सही समय पर इलाज ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

दुधवा नेशनल पार्क में ‘मोटिवेटर’ (वन्यजीव रेस्क्यूअर) के रूप में कार्यरत नाजरून निशा साहसी व प्रेरणादायक महिला हैं। लखीमपुर खीरी जिले के अपने गांव में 19 वर्ष की उम्र में सांप पकड़ने की शुरुआत करने वाली नाजरीन अब दुधवा के आस-पास के गांवों के लिए एक रक्षक बन चुकी हैं।

वर्ष 2022 में दुधवा टाइगर रिजर्व में मोटिवेटर के रूप में जुड़ने के बाद उन्होंने वन्यजीव विशेषज्ञों से औपचारिक प्रशिक्षण लिया।निशा अब तक आबादी वाले क्षेत्रों से 300 से अधिक जहरीले सांप और दस से अधिक मगरमच्छ सुरक्षित निकालकर जंगलों में छोड़ चुकी हैं।

उन्होंने महज दो मिनट में एक 18-फुट लंबे विशाल अजगर का रेस्क्यू करके तहलका मचा दिया था, जो कि उनके सबसे कठिन ऑपरेशनों में से एक था। उनके इस साहसिक कार्य से दुधवा से सटे लगभग 50 गांवों के निवासियों को जंगली जानवरों के खतरे से सुरक्षा और राहत मिली है।