Saturday, February 21, 2026
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9 लाख वर्ग मीटर कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग, 90 हजार वर्ग मीटर जमीन की ही अनुमति

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लखनऊ- 9 लाख वर्ग मीटर कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग, 90 हजार वर्ग मीटर जमीन की ही अनुमति थी, 4 प्रॉपर्टी डीलरों ने निवेशकों का पैसा फंसाया, बिना नक्शे के कृषि भूमि पर की अवैध प्लॉटिंग, भूउपयोग बदलने की भी प्रशासन से अनुमति नहीं, फुहार इंफ्रा, मातृभूमि क्रिएशन को नोटिस जारी, हाईटेक ग्रीन सिटी, सरकार इंफ्रासॉल्यूशन का खेल, फर्जी नक्शा दिखाकर निवेशकों को गुमराह किया, निबंधन विभाग की रिपोर्ट पर चारों को नोटिस जारी, मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग की

 

आतंकी की गर्लफ्रेंड शाहीन शाहिद पर खुलासा,

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लखनऊ- आतंकी की गर्लफ्रेंड शाहीन शाहिद पर खुलासा, कानपुर के GSVM कॉलेज में प्रवक्ता रही शाहीन, 7 साल प्रवक्ता रही, 2013 से बिना सूचना गायब, 2021 में सेवा से बर्खास्त की गई थी शाहीन शाहिद, एड्रेस में डॉ परवेज सईद का पता दर्ज कराया था, प्रयागराज से MBBS और MD की पढ़ाई की थी, पूर्व पति डॉ हयात जफर नेत्र रोग विशेषज्ञ, 2015 में शाहीन और हयात जफर का हुआ तलाक

Auraiya News: बिगड़ते खानपान से छह माह में दोगुने से ज्यादा हो गए किडनी के रोगी

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औरैया। बिगड़े हुए खानपान के चलते किडनी रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। छह माह पहले महज 40 मरीज ही डायलिसिस करा रहे थे। अब यह आंकड़ा बढ़ाकर 90 तक पहुंच चुका है। 10 बेड के डायलिसिस सेंटर में तीन शिफ्टों में इन मरीजों का डायलिसिस सप्ताह में छह दिन किया जा रहा है।मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस की सुविधा पीपीपी मॉडल के तहत डीसीडीसी कंपनी की ओर से मुहैया कराई जा रही है। इसमें सामान्य किडनी रोगियों के साथ ही हेपेटाइटिस- बी व सी के मरीजों के लिए भी डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। जिसके लिए 10 बेड की सुविधा है। एक साथ 10 रोगियों का डायलिसिस किया जा सकता है।इसमें दो बेड हेपेटाइटिस बी व सी के 15 मरीजों के लिए आरक्षित हैं। जबकि आठ बेड पर 75 सामान्य किडनी रोगियों का डायलिसिस किया जा रहा है। इन मरीजों का दो से तीन दिन के अंतराल से डायलिसिस किया जा रहा है। ऐसे में सीमित बेड के बीच दिन में तीन शिफ्टों में चार-चार घंटे के अंतराल से मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि तीन शिफ्टों में मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। किसी भी रोगी को दिक्कत न हो इसे लेकर जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।

Kanpur: दिल्ली बम विस्फोट के बाद सेंट्रल पर अग्रिम निर्देश तक अलर्ट, 24 घंटे होगी ट्रैक की पेट्रोलिंग

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Kanpur News: कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर बम निरोधक दस्ते और खोजी कुत्ते के साथ चेकिंग की गई।दिल्ली में हुए धमाके के बाद कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर अग्रिम आदेश तक अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 24 घंटे रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग की जाएगी। मंगलवार को भी जीआरपी, आरपीएफ के साथ कमिश्नरी पुलिस ने हर प्लेटफॉर्म के चप्पे-चप्पे और विभिन्न ट्रेनों में चेकिंग अभियान चलाया।मंगलवार सुबह एसीपी आनंद कुमार, हरबंश मोहाल और कलक्टरगंज थाना पुलिस के साथ कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंचे। उन्होंने जीआरपी प्रभारी निरीक्षक ओमनारायण सिंह, आरपीएफ पोस्ट प्रभारी एसएन पाटीदार, बम निरोधक दस्ते और खोजी कुत्तों के साथ सेंट्रल स्टेशन, ट्रेनों और सर्कुलेटिंग एरिया की सघन तलाशी कराई। यात्रियों के बैग खुलवाकर चेक किए गए।दिनभर जीआरपी और आरपीएफ के जवान विभिन्न प्लेटफॉर्म, पार्किंग की चेकिंग करते रहे। सीमाचंल, जोगबनी, इंटरसिटी सहित कई ट्रेनों की भी चेकिंग की गई। कुलियों, वेंडरों से अपील की गई अगर कहीं पर कुछ संदिग्ध दिखे तो तत्काल पुलिस या कंट्रोल रूम को सूचना दें।सीसीटीवी रूम में चौबीसों घंटे निगरानी के लिए चार टीमों को भी लगाया गया है। वहीं, बाबूपुरवा पुलिस ने एसीपी डीके सिंह के नेतृत्व में झकरकटी बस अड्डा पर विभिन्न रूटों पर जाने वाली बसों, यात्रियों के बैग चेक किए गए।ज्यादा देर खड़े होने वाले वाहनों पर रखे नजर

सेंट्रल स्टेशन के कैंट व सिटी साइड की पार्किंग में खड़े होने वाले वाहनों की भी चेकिंग की गई। ठेकेदारों से कहा गया है कि 12 घंटे से अधिक वाहन खड़े करने वालों की आईडी जमा कराएं जिससे उनके बारे में जानकारी रखी जा सके। निर्देश दिए हैं कि वाहन खड़े कराते वक्त यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति या वाहन दिखे तो तुरंत सूचना दें।

यूपी: प्रदेश में तेंदुओं के हमलों से बचाव के लिए बनाई जाएंगी सफारी, गोंडा में बनेगी लैपर्ड सफारी

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Jungle Safari in UP: उत्तर प्रदेश में तेंदुओं के हमलों से बचाव के लिए सफारी की स्थापना का फैसला किया गया है। गोंडा में सफारी बनेगी तो इटावा सफारी का विस्तार होगा।उत्तर प्रदेश में तेंदुओं के हमलों से बचाव के लिए सफारी की स्थापना का फैसला किया गया है। पहले चरण में गोंडा के टिकरी में लैपर्ड सफारी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। साथ ही इटावा लायन सफारी के भीतर बनी लैपर्ड सफारी की क्षमता विस्तार के निर्देश भी वहां के निदेशक अनिल पटेल को दे दिए गए हैं। इससे पहले लैपर्ड सफारी बनाने का सफल प्रयोग राजस्थान और गुजरात में हो चुका है।प्रदेश में प्रति वर्ष करीब 100 तेंदुए बढ़ रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या पैदा हो गई है। बिजनौर से लेकर भारत-नेपाल सीमा के वन क्षेत्रों में इंसानों व पालतू जानवरों पर तेंदुओं के हमले की शिकायतें अक्सर ही मिल रही हैं। यूपी में वर्ष 2018 में 173 बाघ थे, जिनकी संख्या 2022 की गणना में बढ़कर 205 हो गई।वर्ष 2022 की वन विभाग की गणना के अनुसार, यूपी में तेंदुए 848 थे, लेकिन विभाग के ही कुछ अधिकारी इस गणना पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें गन्ने के खेत में रहने वाले तेंदुओं की गिनती शामिल नहीं है। करीब एक हजार तेंदुए तो बिजनौर में ही जंगल से बाहर इन खेतों में बताए जाते हैं। बताते हैं कि तमाम तेंदुए अपनी तीन पीढ़ियों से गन्ने के खेत में ही रह रहे हैं।

 

जंगल में बाघों की संख्या बढ़ने से तेंदुए बाहर भाग रहे हैं, क्योंकि दोनों का प्रे-बेस (शिकार) समान होने के चलते बाघ, तेंदुओं को मार डालते हैं। तेंदुओं की समस्या से निपटने के लिए वन विभाग ने लैपर्ड सफारी बनाने का फैसला किया है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में यह सफारी बनाई जाएंगी। टिकरी में सफारी बनाने के लिए जगह देखी जा रही है।

 

सफारी में प्राकृतिक सी दिखने वाली गुफाओं (पिट्स सेल) का निर्माण कराया जाएगा। लैपर्ड प्रूफ फेंसिंग होगी। जो तेंदुए जंगल से बाहर पकड़े जाएंगे, उन्हें इन सफारी में रखा जाएगा। उनके लिए चिड़ियाघरों की तरह ही खाने के लिए प्रतिदिन 5-7 किग्रा मांस उपलब्ध कराया जाएगा।

 

इटावा में 50 हेक्टेयर में विकसित होगी लैपर्ड सफारी

इटावा के लायन सफारी के भीतर ही लैपर्ड सफारी भी है, जिसके लिए करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित है। अभी इसमें से 5 हेक्टेयर क्षेत्र में ही सफारी विकसित है। वन विभाग ने इसकी क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। तब इसमें 35-40 तेंदुए आसानी से रखे जा सकेंगे।

 

इस योजना पर हो रहा है काम

हम यूपी में लैपर्ड सफारी बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में मदद मिलेगी।-सुनील चौधरी, वन बल प्रमुख, उत्तर प्रदेश

UP: प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की अटेंडेंस के लिए बनी कमेटी कल करेगी बैठक, कई विभागीय अधिकारी होंगे शामिल

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Primary Schools in UP: परिषदीय स्कूलों में शिक्षक समय से आएं इसको सुनिश्चित करने के लिए शासन द्वारा बनाई गई कमेटी 13 नवंबर को एक बैठक करेगी। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शासन द्वारा गठित कमेटी की पहली बैठक 13 नवंबर को होगी। अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक की अध्यक्षता वाली 16 सदस्यीय समिति में विभागीय अधिकारियों के साथ शिक्षकों को भी शामिल किया गया है।जाड़े की छुट्टियों में तबादलों की मांग

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की जाड़े की छुट्टियों में जिले के अंदर व एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले की मांग की गई है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने विभाग से इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है ताकि छुट्टियों में इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सके। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि काफी शिक्षक अब भी अपने घरों से दूर हैं, विभाग इनको अपने घर के पास आने का मौका दे।

दिल्ली ब्लास्ट: डॉक्टरी की नौकरी छोड़ भागी थी डॉ. शाहीन, नेत्र सर्जन पति से ले लिया था तलाक; जानिए कहानी

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Delhi Blast: फरीदाबाद से पकड़ी गई डॉ. शाहीन सईद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में सात साल तक प्रवक्ता के पद पर रही। फिर अचानक गायब हो गई। फरीदाबाद से पकड़ी गई डॉ. शाहीन सईद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में सात साल तक प्रवक्ता के पद पर रही। वर्ष 2013 में बिना सूचना दिए नौकरी से गायब हो गई। उसे नोटिस भेजे जाते रहे लेकिन जवाब नहीं दिया। वर्ष 2021 में शासन ने शाहीन को बर्खास्त कर दिया।जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से मिली जानकारी के मुताबिक, डॉ. शाहीन ने प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज से जनवरी 2003 में एमबीबीएस और दिसंबर 2005 में एमडी किया। इसके बाद लोक सेवा चयन आयोग से उसका चयन हुआ। अगस्त वर्ष 2006 में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में प्रवक्ता के पद पर ज्वाइन किया। वर्ष 2009-10 में कन्नौज मेडिकल कॉलेज तबादला हो गया लेकिन छह महीने के बाद वापस जीएसवीएम आ गई।वर्ष 2013 में वह बिना सूचना के नौकरी छोड़कर चली गई। कॉलेज की ओर से बार-बार भेजे गए नोटिसों का उसने कोई जवाब नहीं दिया। उसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई। शासन ने वर्ष 2021 में उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी की कार्रवाई के बाद शाहीन ने प्रार्थनापत्र देकर कॉलेज से अनुभव प्रमाणपत्र मांगा। प्रार्थना पत्र में उसने अपना पता डॉ. परवेज सईद, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, ओपीडी कॉम्प्लेक्स इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, दसौली, कुर्सी रोड, लखनऊ दिया था। शाहीन ने इंटर की पढ़ाई लखनऊ के लालबाग गर्ल्स इंटर कॉलेज से की। पति नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हयात जफर पीएमएस के डॉक्टर हैं लेकिन वर्ष 2015 में तलाक लेकर दोनों अलग हो गए।शाहीन के पिता ने बताया कि उनकी बेटी शुरू से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। उसने यह फैसला मां की बीमारी के बाद लिया था। मां की बीमारी के दौरान डॉक्टरों को उनकी सेवा करते देख वह काफी प्रभावित हुई थी। मोहल्लेवालों का कहना है कि शाहीन काफी सरल स्वभाव की थी।

 

स्थानीय लोगों में चर्चा है कि शाहीन पढ़ाई में तेज थी। वह लोगों की सेवा करना चाहती थी। पता नहीं वह कैसे संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो गई। कुछ लोगों ने शाहीन का माइंडवॉश किए जाने की बात भी कही। स्थानीय लोगों को भरोसा नहीं हो रहा कि शाहीन के संपर्क आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों से है। परिजनों ने बताया कि शाहीन कुछ दिन दिल्ली में भी काम कर चुकी है। खुफिया एजेंसियां शाहीन के संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में पता लगा रही हैं। अब तक शाहीन ने कहां-कहां काम की है, इसका ब्योरा जुटाया जा रहा है।

 

शाहीन और परवेज का सहारनपुर कनेक्शन

परवेज का ठिकाना सहारनपुर में भी था। वह वहां क्लीनिक भी चलाता था। डॉ. शाहीन के भी सहारनपुर कनेक्शन सामने आए हैं। दरअसल, छह नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित अस्पताल में तैनात डॉ. आदिल अहमद को गिरफ्तार किया था। आदिल के पकड़े जाने के बाद ही मुअज्जिम का नाम सामने आया। मुअज्जिम गिरफ्तार किया गया तो उसने डॉ. शाहीन के बारे में जानकारी दी। खुफिया एजेंसियां अब शाहीन और परवेज के आतंकी कनेक्शन के बारे में पता लगा रही हैं।

Grahan Yog November 2025: 12 या 13 नवंबर को कब बन रहा है ग्रहण योग? जानें सही तारीख, समय और राशियों पर असर

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Grahan Yog November 2025: वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब राहु या केतु की युति सूर्य या चंद्रमा के साथ होती है, तब ग्रहण योग का निर्माण होता है। यह योग जीवन में उथल-पुथल, मानसिक बेचैनी और निर्णयों में भ्रम लाता है। वहीं जब शुभ ग्रहों के प्रभाव में यह योग बनता है, तो यह राजयोग का भी रूप ले सकता है और व्यक्ति को समृद्धि प्रदान करता है।

 

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कब बन रहा है ग्रहण योग नवंबर 2025 में?

पंचांग के अनुसार, 12 नवंबर 2025 की शाम 6:35 बजे से चंद्रमा सिंह राशि में प्रवेश करेगा, जहां पहले से ही केतु स्थित रहेगा। इन दोनों की युति से ग्रहण योग का निर्माण होगा। यह योग 15 नवंबर 2025 की सुबह 3:51 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में चंद्रमा और केतु की संयुक्त ऊर्जा मानसिक, भावनात्मक और वित्तीय क्षेत्र पर असर डाल सकती है।

 

किन राशियों को रहना होगा सावधान?

मेष राशि (Aries): ग्रहण योग के प्रभाव से आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। स्वास्थ्य में गिरावट और कार्यस्थल पर तनाव संभव है। किसी भी आर्थिक निवेश या विवाद से दूर रहें।

 

सिंह राशि (Leo): यह ग्रहण आपकी ही राशि में बन रहा है, इसलिए सावधानी सबसे अधिक जरूरी है। आत्मविश्वास में कमी और शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। व्यवसाय में घाटे के योग हैं, इसलिए सोच-समझ कर निर्णय लें।

 

मीन राशि (Pisces): आपकी राशि के लिए ग्रहण योग आर्थिक उतार-चढ़ाव लाएगा। किसी करीबी से मनमुटाव हो सकता है। वाणी पर संयम रखें और आवेश में निर्णय न लें।

 

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शुभ उपाय ग्रहण योग से राहत के लिए

12 नवंबर की शाम पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।

मां लक्ष्मी और भगवान शिव की आराधना करें।

चांदी का सिक्का तिजोरी में रखें और लाल कपड़े में लपेटकर रख दें।

‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ कें केतवे नमः’ का जाप करें।

ग्रहण योग 12 नवंबर 2025 की शाम से शुरू होकर 15 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। यह समय आत्मनिरीक्षण और सावधानी का है। जिन राशियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, वे धार्मिक कार्यों, दान-पुण्य और ध्यान से ग्रहण दोष को कम कर सकती हैं।

सरकार से समाज तक : हिमाचल की नशामुक्ति मुहिम बनी जनआंदोलन

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गिरफ्तार भी किया। वर्ष 2024 में लागू किए गए पी.आई.टी. एन.डी.पी.ए. के अंतर्गत 123 प्रस्ताव भेजे गए और 41 आदेश गिरफ्तारी के जारी किए गए। नशा तस्करी से जुड़े आरोपी लोगों की 1214 संपत्तियों को चिन्हित, अतिक्रमण के 70 मामलों का पता लगाया और 7 मामलों में संपत्ति गिराने व खाली करवाने की कार्रवाई की गई। वर्ष 2023 में 4.87 करोड़ रुपए, 2024 में 24.42 करोड़ और 2025 में 6.66 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गईं, जबकि 7.74 करोड़ रुपए की संपत्तियों के मामले पुष्टि के लिए भेजे गए हैं।

 

नशे की समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जागरूकता और भागीदारी का विषय है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने जिस प्रतिबद्धता के साथ इस संकट के खिलाफ मोर्चा खोला है, वह आने वाली पीढिय़ों को बचाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। लेकिन यह जंग तब ही सफल होगी जब हर माता-पिता, हर शिक्षक, हर पंचायत और हर नागरिक यह ठान ले कि वह किसी भी रूप में इस जहर को अपने समाज में पनपने नहीं देगा। नशे के खिलाफ यह संघर्ष सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल की आत्मा को बचाने की लड़ाई है और इसमें जीतना ही एकमात्र विकल्प है।(लेखिका हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य हैं)-डा. रचना गुप्ता