Wednesday, May 6, 2026
Home Blog Page 9

बेटी की शादी करके लौट रहे मां-बाप और बेटे की सड़क हादसे में मौत

0

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां बेटी की शादी करके लौट रहे मां-बाप और बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई। इस हादसे में पांच लोगों की जान गई थी। ससुराल से आई नवविवाहित बेटी ने परिवार के पालतू डॉग ‘रुद्र’ को अपने हाथों से जमीन में दफनाया।

 

रविवार सुबह मां-बाप और भाई की अर्थियों को एक गाड़ी में रखकर गोरखपुर के राजघाट श्मशान घाट लाया गया। यहां भतीजे ने तीनों लोगों की चिताओं को मुखाग्नि दी। एक साथ तीन चिताओं को जलता देख, हर किसी के आंखें नम हो गईं।

कानपुर देहात में नकली-घटिया तेल पर बड़ी कार्रवाई, 28 हजार लीटर सीज; कई कंपनियों के प्रोडक्ट बैन* कानपुर देहात।

0

कानपुर देहात में नकली-घटिया तेल पर बड़ी कार्रवाई, 28 हजार लीटर सीज; कई कंपनियों के प्रोडक्ट बैन*
कानपुर देहात।
ब्रांडेड नाम पर घटिया खाद्य तेल बेचने के मामले में खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। छापेमारी के दौरान लिए गए सैंपल फेल होने के बाद विभाग ने कई कंपनियों के उत्पादों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है।

कार्रवाई के तहत मयूर कंपनी और बावर्ची कंपनी के प्रोडक्ट बैन किए गए हैं। इसके अलावा वैभव एडिबल और अग्रवाल एग्रो के तेल पर भी रोक लगाई गई है। खाद्य विभाग ने करीब 28 हजार लीटर संदिग्ध तेल सीज किया है, जिसमें मयूर कंपनी का 18,822 लीटर और अग्रवाल एग्रो का 9,955 लीटर तेल शामिल है।

अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन बैच नंबर के सैंपल फेल हुए हैं, उन सभी प्रोडक्ट की बिक्री तत्काल प्रभाव से बंद कराई जाए। साथ ही जहां-जहां यह तेल सप्लाई हुआ है, वहां भी बिक्री रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

Luxury Housing Sales: लग्जरी हाउसिंग में गुरुग्राम अव्वल, ₹24,120 करोड़ की बिक्री के साथ मुंबई को पछाड़ा

0

नई दिल्लीः गुरुग्राम में 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक कीमत वाले लक्जरी घरों की बिक्री 2025 में मूल्य के हिसाब से 80 प्रतिशत बढ़कर 24,120 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। मूल्य के लिहाज से गुरुग्राम ने मुंबई को पीछे छोड़ दिया है। एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। रियल एस्टेट सलाहकार ‘इंडिया सॉथबीज इंटरनेशनल रियल्टी’ (आईएसआईआर) और डेटा विश्लेषक कंपनी सीआरई मैट्रिक्स द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) स्थित गुरुग्राम ने 10 करोड़ रुपए और उससे अधिक कीमत वाले मकानों की बिक्री के कुल मूल्य के मामले में मुंबई को पीछे छोड़ दिया। इस श्रेणी में गुरुग्राम में 24,120 करोड़ रुपए के, जबकि मुंबई में 21,902 करोड़ रुपए के घरों की बिक्री हुई।

आंकड़ों के मुताबिक, गुरुग्राम में 10 करोड़ रुपए और उससे अधिक कीमत वाले लक्जरी घरों की बिक्री पिछले कैलेंडर वर्ष में लगभग तीन गुना होकर 1,494 इकाई पर पहुंच गई, जो 2024 में 519 इकाई रही थी। मूल्य के आधार पर बिक्री 2024 के 13,384 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025 में 24,120 करोड़ रुपए हो गई। रिपोर्ट कहती है, ”मुंबई पारंपरिक रूप से देश का सबसे महंगा रियल एस्टेट बाजार रहा है, लेकिन 2025 के दौरान 10 करोड़ रुपए और उससे अधिक कीमत वाले लक्जरी घरों की कुल बिक्री के मूल्य के मामले में गुरुग्राम उससे आगे निकल गया।”

इंडिया सॉथबीज इंटरनेशनल रियल्टी की निदेशक (एरिया) टीना तलवार ने कहा, ”खास बात यह है कि यह वृद्धि अब केवल पुराने प्रतिष्ठित इलाकों तक सीमित नहीं है। द्वारका एक्सप्रेसवे, गोल्फ कोर्स रोड और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड जैसे उभरते बाजार सामूहिक रूप से संरचनात्मक विस्तार को गति दे रहे हैं जिसे बुनियादी ढांचे में सुधार, बेहतर परियोजनाओं की पेशकश और बेहतर संपर्क का समर्थन मिल रहा है।”

सीआरई मैट्रिक्स के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिषेक किरण गुप्ता ने कहा कि पिछले दो साल में लक्जरी खंड में लगभग 10 गुना वृद्धि से खरीदारों का सतत भरोसा, मजबूत पूंजी प्रवाह और उच्च संपदा वाले व्यक्तियों (एचएनआई) की बढ़ती संख्या का संकेत मिलता है।

आशियाना हाउसिंग पुणे में बनाएगी बुजुर्गों के लिए आवास, 1,800 करोड़ रुपए के राजस्व की उम्मीद

0

नई दिल्लीः रियल एस्टेट कंपनी आशियाना हाउसिंग ने पुणे में 28.55 एकड़ जमीन खरीदी है। कंपनी इस भूमि पर बुजुर्गों के लिए एक विशेष आवासीय परियोजना विकसित करेगी, जिससे उसे 1,800 करोड़ रुपए के राजस्व की उम्मीद है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि महाराष्ट्र के पुणे में मावल तालुका के वडगांव में इस जमीन का अधिग्रहण किया गया है। बुजुर्गों के लिए आवासीय परियोजना विकसित करने के उद्देश्य से किया गया यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा भूमि सौदा है।

आशियाना हाउसिंग के संयुक्त प्रबंध निदेशक अंकुर गुप्ता ने कहा कि कंपनी इस क्षेत्र में बुजुर्गों के घरों की भारी मांग को पूरा करने के लिए जमीन की तलाश में थी। कंपनी के अनुसार, 20 लाख वर्ग फुट के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र वाली इस परियोजना से 1,800 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

जापान का वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापार घाटा 1700 अरब येन, लगातार पांचवें वित्त वर्ष में दर्ज किया घाटा

0

तोक्योः जापान का वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापार घाटा 1700 अरब येन (10.7 अरब डॉलर) रहा। सरकार ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि लगातार पांचवें वित्त वर्ष में व्यापार घाटा दर्ज किया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि आयात केवल 0.5 प्रतिशत बढ़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जापान और अन्य देशों से आयात पर लगाए गए ऊंचे शुल्क वैश्विक मोटर वाहन विनिर्माताओं और अन्य उद्योगों के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं। गत वित्त वर्ष में अमेरिका को जापान का कुल निर्यात 6.6 प्रतिशत घटा जबकि मोटर वाहन निर्यात में 16 प्रतिशत की गिरावट आई।

मार्च में जापान का व्यापार अधिशेष एक साल पहले की तुलना में हालांकि 26 प्रतिशत बढ़ा, जो निर्यात क्षेत्र के पिछले झटकों से उबरने का संकेत है। मार्च में निर्यात लगभग 11.7 प्रतिशत और आयात करीब 10.9 प्रतिशत बढ़ा। इस बीच, ईरान युद्ध से पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति में बाधा की आशंका भी जापान के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि वह लगभग अपनी पूरी तेल और गैस जरूरतों का आयात करता है। ऊर्जा के अलावा, तेल की कमी नेफ्था आधारित उत्पादों के उत्पादन को भी प्रभावित कर सकती है जो चिकित्सा आपूर्ति एवं अन्य प्लास्टिक के लिए महत्वपूर्ण हैं।

जापानी सरकार ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा है कि देश के पास ऐसी आपात स्थिति के लिए 254 दिन का तेल भंडार है। आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए सरकार इस भंडार से कुछ आपूर्ति कर सकती है। जापान इसके अलावा एशिया के अधिकतर तेल एवं गैस की आपूर्ति के मुख्य मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प भी तलाश रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध के कारण प्रभावी रूप से बंद है।

Rupee Fall: लगातार तीसरे दिन गिरा रुपया, डॉलर के मुकाबले आज इतनी आई गिरावट

0

मुंबईः रुपए में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट आई और यह 39 पैसे टूटकर 93.83 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता से पश्चिम एशिया में संघर्ष कम होने की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। इसके साथ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भी भारतीय मुद्रा पर दबाव डाला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.69 प्रति डॉलर पर खुला।

कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 93.87 के निचले स्तर तक पहुंचा। अंत में घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले 93.83 (अस्थायी) पर रही जो पिछले बंद भाव से 39 पैसे की गिरावट है। रुपया मंगलवार को 28 पैसे की गिरावट के साथ 93.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण रुपये में गिरावट आई है। विदेशी पूंजी की निकासी के दबाव के कारण रुपए में नकारात्मक रुझान रहने का अनुमान है।

चौधरी ने कहा, ”हालांकि, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से रुपए में तेज गिरावट को रोका जा सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपए का हाजिर भाव 93.60 से 94.20 रुपए के दायरे में रहने का अनुमान है।” इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.15 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 756.84 अंक यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,516.49 अंक पर जबकि निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.81 प्रतिशत टूटकर 24,378.10 अंक पर बंद हुआ।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.75 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 1,918.99 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

stock market crash: शेयर बाजार में मचा कोहराम, सेंसेक्स 800 अंक धड़ाम, ये है बड़ा कारण

0

Share Market 23 April: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली और कुछ ही मिनटों में बाजार लाल निशान में चला गया।

सेंसेक्स में तेज गिरावट
BSE का 30 शेयरों वाला प्रमुख Index Sensex अपने पिछले बंद स्तर 78,516 के मुकाबले गिरकर 77,983 पर खुला। इसके बाद गिरावट और बढ़ गई और कुछ ही समय में यह 800 अंक से ज्यादा टूटकर लगभग 77,693 के आसपास ट्रेड करता दिखा। इस तेज गिरावट ने बाजार में शुरुआती ट्रेडिंग से ही दबाव बना दिया और निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई। National Stock Exchange का निफ्टी भी कमजोर शुरुआत के साथ खुला। यह अपने पिछले बंद 24,378 के मुकाबले गिरकर 24,202 पर खुला और आगे और फिसलते हुए 24,134 के स्तर तक पहुंच गया।

गिरावट के पीछे कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण प्रमुख रहे। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में उछाल ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बनाया है। इसके अलावा अमेरिकी बाजार पहले ही गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला।

Asian markets में भी गिरावट
जापान का निक्केई इंडेक्स शुरुआती कारोबार में लगभग 650 अंक तक गिर गया। वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी दबाव में नजर आए और लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

Share Market Crash: शेयर बाजार धड़ाम, इन कारणों से आई बड़ी गिरावट

0

बिजनेस डेस्कः भारतीय शेयर बाजार आज बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स-निफ्टी आज दिन भर लाल निशान पर कारोबार करते दिखे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 852.49 अंक (1.09%) गिरकर 77,664.00 पर और निफ्टी 205.05 अंक (0.84%) टूटकर 24,173.05 पर बंद हुआ।

बाजार में गिरावट के बड़े कारण…

अमेरिका-ईरान तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बातचीत में ठहराव से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे निवेशकों में घबराहट है।

कच्चे तेल में उछाल

ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार चला गया है। तेल महंगा होने से महंगाई, चालू खाते के घाटे और आर्थिक अस्थिरता की चिंता बढ़ी है।

वैश्विक बाजारों में कमजोरी

अमेरिकी बाजार मिले-जुले बंद हुए, जबकि यूरोपीय और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली। कई प्रमुख एशियाई सूचकांक 1% से अधिक टूट गए।

FII और DII की बिकवाली

22 अप्रैल को विदेशी निवेशकों (FII) ने ₹2,078 करोड़ और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹1,048 करोड़ की नेट बिकवाली की।

इंडिया VIX में बढ़ोतरी

मार्केट की अस्थिरता मापने वाला सूचकांक इंडिया VIX 1.59% बढ़कर 18.59 पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ी।

15-45 उम्र के पुरुषों में बढ़ रहा है Testicular Cancer का खतरा, इन 6 शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

0

Testicular Cancer Symptoms : कैंसर के बदलते स्वरूपों के बीच पुरुषों में टेस्टिकुलर कैंसर (अंडकोष का कैंसर) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। आमतौर पर 15 से 45 वर्ष की आयु के पुरुषों को प्रभावित करने वाला यह कैंसर जितना गंभीर है, समय पर पहचान होने पर इसका इलाज उतना ही सफल भी है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के हालिया आंकड़ों के अनुसार, अकेले अमेरिका में इसके लगभग 9,810 नए मामले दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण अक्सर लोग इसके शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पाते, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकते हैं।

क्या है टेस्टिकुलर कैंसर? 

यह कैंसर अंडकोष (Testis) में विकसित होता है, जो स्क्रोटम (अंडकोश की थैली) के भीतर स्थित होते हैं। इनका मुख्य कार्य शरीर में स्पर्म (शुक्राणु) और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण करना है।

सावधान! इन संकेतों को पहचानें 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में होने वाले निम्नलिखित बदलाव टेस्टिकुलर कैंसर का इशारा हो सकते हैं:

अंडकोष में भारीपन: निचले हिस्से या अंडकोष में लगातार खिंचाव या भारीपन महसूस होना, जैसे कि वहां वजन बढ़ गया हो।

बिना दर्द वाली गांठ: अंडकोष में मटर या कंचे के आकार की छोटी सी गांठ का होना सबसे प्राथमिक लक्षण है। चूंकि इसमें दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

सूजन और आकार में बदलाव: एक अंडकोष का अचानक बड़ा हो जाना या उसमें बिना किसी चोट के सूजन आना खतरे की घंटी हो सकता है।

छाती में संवेदनशीलता: दुर्लभ मामलों में, हार्मोनल असंतुलन के कारण पुरुषों की छाती में सूजन या दर्द महसूस हो सकता है।

पेट और कमर में दर्द: पेट के निचले हिस्से, ग्रोइन (जांघ और पेट के बीच का हिस्सा) या कमर में लगातार हल्का दर्द बना रहना।

असहजता या सुन्नपन: अंडकोष में जलन, हल्का दर्द या सुन्नपन महसूस होना जो बार-बार लौटकर आता हो।

समय पर जांच ही बचाव है 

डॉक्टरों का मानना है कि यदि शुरुआती स्टेज में ही गांठ या सूजन का पता चल जाए, तो इलाज की सफलता दर बहुत अधिक होती है। “सेल्फ-एग्जामिनेशन” (खुद से जांच करना) इसका सबसे सरल उपाय है। यदि किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखे, तो बिना झिझक यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सावधान! मोटापे का नया विलेन ज्यादा खाना नहीं, आपकी पसंदीदा ब्रेड और चावल हैं जिम्मेदार, हुआ चौंकाने वाला खुलासा

0

Obesity Research : क्या आप जानते हैं कि वजन बढ़ने का कारण सिर्फ ज्यादा खाना ही नहीं है? एक चौंकाने वाले शोध ने आहार और मोटापे के बीच के पुराने सिद्धांतों को चुनौती दी है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि ब्रेड, चावल और गेहूं जैसे कार्बोहाइड्रेट न केवल खाने की आदतों को बदलते हैं बल्कि शरीर की ऊर्जा खर्च करने की क्षमता (Metabolism) को भी सुस्त कर देते हैं। ब्रेड लंबे समय से आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है जो पीढ़ियों से समाजों का पोषण करता आ रहा है। यह रोजमर्रा की जिंदगी में गहराई से जुड़ा हुआ है लेकिन मोटापे की दर लगातार बढ़ने के साथ शोधकर्ता यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या आधुनिक आहार में कार्बोहाइड्रेट पर यह निर्भरता अभी भी उचित है।

मोटापा बढ़ाता है कई बीमारियों का खतरा

मोटापा जीवनशैली से संबंधित कई बीमारियों का खतरा बढ़ाता है इसलिए रोकथाम एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता बन गई है। परंपरागत रूप से शोध में उच्च वसा सेवन को वजन बढ़ने का मुख्य कारण माना गया है। यही कारण है कि कई पशु अध्ययन उच्च वसा वाले आहार पर आधारित होते हैं। हालांकि ब्रेड, चावल और नूडल्स जैसे कार्बोहाइड्रेट का सेवन दुनिया भर में प्रतिदिन किया जाता है फिर भी मोटापे और चयापचय में इनकी भूमिका का गहन अध्ययन नहीं किया गया है जबकि कई लोग मानते हैं कि “ब्रेड खाने से वजन बढ़ता है” या “कार्बोहाइड्रेट का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए”, यह स्पष्ट नहीं है कि समस्या खाद्य पदार्थों में ही है या लोगों द्वारा उनके चयन और सेवन के तरीके में।

इन सवालों को बेहतर ढंग से समझने के लिए ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ह्यूमन लाइफ एंड इकोलॉजी के प्रोफेसर शिगेनोबू मात्सुमुरा के नेतृत्व में एक शोध दल ने चूहों में कार्बोहाइड्रेट के खाने के व्यवहार और चयापचय पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने यह जांच की कि क्या चूहे सामान्य चारे की तुलना में गेहूं, ब्रेड और चावल जैसे खाद्य पदार्थों को अधिक पसंद करते हैं और इन विकल्पों का उनके शरीर के वजन और ऊर्जा के उपयोग पर क्या प्रभाव पड़ता है।

न सवालों को बेहतर ढंग से समझने के लिए ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ह्यूमन लाइफ एंड इकोलॉजी के प्रोफेसर शिगेनोबू मात्सुमुरा के नेतृत्व में एक शोध दल ने चूहों में कार्बोहाइड्रेट के खाने के व्यवहार और चयापचय पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने यह जांच की कि क्या चूहे सामान्य चारे की तुलना में गेहूं, ब्रेड और चावल जैसे खाद्य पदार्थों को अधिक पसंद करते हैं और इन विकल्पों का उनके शरीर के वजन और ऊर्जा के उपयोग पर क्या प्रभाव पड़ता है।

जानवरों को कई आहार समूहों में विभाजित किया गया था जिनमें सामान्य चारा, सामान्य चारा + ब्रेड, सामान्य चारा + गेहूं का आटा, सामान्य चारा + चावल का आटा, उच्च वसा वाला आहार (एचएफडी) + सामान्य चारा और एचएफडी + गेहूं का आटा शामिल थे। टीम ने शरीर के वजन, ऊर्जा व्यय, रक्त चयापचय और यकृत जीन अभिव्यक्ति में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया। अधिक कैलोरी लिए बिना भी कार्बोहाइड्रेट के प्रति रुचि वजन बढ़ने से जुड़ी है।

चूहों ने कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों को दी प्राथमिकता

वहीं पता चला है कि चूहों ने कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी और अपना सामान्य आहार पूरी तरह से बंद कर दिया। हालांकि उनकी कुल कैलोरी की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई फिर भी उनके शरीर का वजन और वसा दोनों बढ़ गए। चावल का आटा खाने वाले चूहों का वजन गेहूं का आटा खाने वाले चूहों के समान ही बढ़ा। इसके विपरीत, उच्च वसा वाले आहार (HFD) + गेहूं का आटा दिए गए चूहों का वजन उच्च वसा वाले आहार (HFD) + सामान्य आहार दिए गए चूहों की तुलना में कम बढ़ा।

प्रोफेसर मात्सुमुरा ने कहा, वजन बढ़ना गेहूं के विशिष्ट प्रभावों के कारण नहीं, बल्कि कार्बोहाइड्रेट के प्रति प्रबल पसंद और उससे जुड़े चयापचय परिवर्तनों के कारण हो सकता है।” ऊर्जा का धीमा उपयोग वजन बढ़ने का कारण हो सकता है। टीम ने ऊर्जा उपयोग को बेहतर ढंग से समझने के लिए श्वसन गैस विश्लेषण के साथ अप्रत्यक्ष कैलोरीमेट्री का भी उपयोग किया। परिणामों से पता चला कि वजन बढ़ना “अधिक खाने” के कारण नहीं बल्कि ऊर्जा व्यय में कमी के कारण हुआ था।

राहत की बात 

जैसे ही डाइट से गेहूं का आटा हटाया गया, चूहों का वजन और मेटाबॉलिज्म तेजी से सुधरने लगा। इससे साबित होता है कि संतुलित आहार वजन घटाने में जादुई असर दिखा सकता है।

इंसानों पर रिसर्च

प्रोफेसर मात्सुमुरा का कहना है कि अब वे इस शोध को इंसानों पर परखेंगे। वे यह भी देखना चाहते हैं कि क्या साबुत अनाज (Whole Grains) और फाइबर का सेवन इन नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकता है। यह शोध भविष्य में ‘स्वाद’ और ‘सेहत’ के बीच सही संतुलन बनाने में मदद करेगा।