Orai Road Accident News: कालपी के चौरासी गुंबद के पास अयोध्या से लौट रही कार और ट्रक की भीषण भिड़ंत में एक ही परिवार के सदस्यों सहित आठ लोगों की मौत हो गई। कार में फंसे घायल अपनी आखिरी सांस तक अपनों और पुलिस से बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन गंभीर चोटों के कारण अधिकांश ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
उरई में कालपी कोतवाली क्षेत्र के चौरासी गुंबद के पास हुए भीषण सड़क हादसे के बाद का मंजर दिल दहला देने वाला था। अयोध्या से लौट रही कार तेज रफ्तार ट्रक में पीछे से जा घुसी, जिससे कार सवार लोग बुरी तरह कार में फंस गए थे। हादसे के बाद कथा वाचक मनोज भोडेले ही बोल पा रहे थे। वह लगातार मदद की गुहार लगाते हुए कहते रहे- भाई साहब बचा लो, लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि पुलिसकर्मी और अन्य लोग चाहकर भी उन्हें बचा नहीं सके।
हादसे के कुछ ही मिनटों में पीआरवी और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। कार में फंसे घायलों को निकालने के लिए जवान लगातार प्रयास करते रहे। इस दौरान वे घायलों को हिलाकर-डुलाकर और आवाज देकर उनकी स्थिति जानने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई भी स्पष्ट रूप से जवाब देने की स्थिति में नहीं था। घायलों की हालत बेहद गंभीर थी। कई लोग लहूलुहान हालत में सिर्फ कराह रहे थे, जबकि कुछ पूरी तरह शांत हो चुके थे।
चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था
घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय लोग भी यह भयावह दृश्य देखकर सहम गए और बेबस नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह घायलों को बाहर निकाला और तुरंत उरई मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। इस भीषण हादसे में कुल आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि अन्य दो घायलों का इलाज जारी है। घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता का माहौल है।
चाचा बचा लो…गुहार लगाता रहा शिवानंद, टूट गई जिंदगी की लड़ी
कालपी क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। हादसे के बाद कार में फंसा दीपक उर्फ शिवानंद जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा था। वह बार-बार अपने चाचा स्वामी प्रसाद को आवाज देता रहा, चाचा बचा लो. उसकी आवाज में दर्द, डर और जीने की आखिरी उम्मीद साफ झलक रही थी, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि जिस चाचा को वह पुकार रहा है, वे पहले ही दम तोड़ चुके थे।
हर पल के साथ सांसें कमजोर होती जा रही थीं
कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और अंदर फंसे लोग तड़प रहे थे। शिवानंद की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, फिर भी वह मदद की गुहार लगाता रहा। मौके पर मौजूद लोग और पुलिस उसे निकालने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन हर पल के साथ उसकी सांसें कमजोर होती जा रही थीं। आखिरकार बेबसी और दर्द के बीच जिंदगी की नड़ी टूट गई और उसकी आखिरी पुकार वहीं खामोश हो गई।
लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा दर्दनाक हादसा
यह मंजर देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हादसे ने रिश्तों की उस पीड़ा को उजागर कर दिया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। एक ही परिवार के कई लोगों की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया और यह दर्दनाक हादसा लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।
साढ़े 14 फीट की टवेरा कार 10 फीट में सिमटी
हादसे की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। करीब साढ़े 14 फीट लंबी टवेरा कार सिमटकर महज 10 फीट रह गई। टक्कर के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई लोग कार के अंदर ही बुरी तरह फंस गए। घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर क्रेन और गैस कटर से रेक्सयू कर बाहर निकाला गया।
अयोध्या में सरयू तट पर की थी फोटोग्राफी
आचार्य मनोज भोडेले की अगुवाई में अयोध्या के दर्शनार्थियों ने रविवार को खंडित प्रतिमा को सरयू मे विसर्जित कर जमकर फोटोग्राफी की थी। इसमें सात लोग एक साथ मौजूद हैं। फोटो को रात में अंशुल तिवारी ने अपनी फेसबुक में डाला था।
मौके पर मिला है डंपर का टूटा बंपर, दो साल पहले खरीदी थी कार
भले ही हादसा होते किसी ने न देखा हो पर मौके पर मिले डंपर के बंपर के टुकड़े के कारण अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसी से हादसा हुआ है। दुर्घटना का शिकार हुई टवेरा शशिकांत तिवारी चला रहा था। परिजनों ने बताया कि कार को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से दो साल पहले खरीदा गया था। कागज अभी तक ट्रांसफर नहीं कराए थे।
310 किमी सफर के बाद बुंदेलखंड में हादसा
कार सवार अयोध्या से लगभग 310 किलोमीटर की दूरी तय कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पहुंचे थे और लगातार अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन जैसे ही कार ने बुंदेलखंड की सीमा में प्रवेश किया, कालपी क्षेत्र के चौरासी गुंबद के पास कार हादसे का शिकार हो गई। बताया जा रहा है कि उन्हें आगे ललितपुर जिले के महरौनी तक लगभग 225 किलोमीटर का सफर और तय करना था, लेकिन मंजिल से पहले ही यह दर्दनाक हादसा हो गया।
सफेद कार हो गई थी खून से लाल
सोमवार की सुबह 5:45 मिनट पर कालपी के चौरासी गुंबद के पास टवेरा कार का हादसा हुआ। तो जहां एक ओर नींद से जाग रहे थे। वहीं हाईवे पर कार कार सवार घायलों की चीखने की आवाजें आ रही थी। आंखें मलते हुए लोग जब कार के पास पहुंचे तो, कार में लहूलुहान लोग अपनी जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे थे। क्षतिग्रस्त कार की हालत देख लोग मदद भी नहीं कर पा रहे थे। सफेद रंग की कार खून से लाल हो गई थी।
हादसे की संभावित वजहें
तेज रफ्तार– प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चालक कार को करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चला रहा था, जिससे वाहन पर नियंत्रण नहीं रह सका।
नींद की झपकी– करीब 310 किलोमीटर लंबा सफर तय करने के दौरान चालक को झपकी आ जाने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वाहन अचानक असंतुलित हो गया।
थकान– लगातार लंबी दूरी तक ड्राइविंग करने से चालक अत्यधिक थक गया था, जिससे उसकी एकाग्रता और प्रतिक्रिया क्षमता प्रभावित हुई।
वाराणसी कमिश्नरेट के चौबेपुर थाना क्षेत्र के कौवापुर में छह साल की मासूम बच्ची का एक मनबढ़ युवक ने अपहरण कर सोमवार की सुबह छित्तमपुर स्थित डीहबाबा मंदिर के पास 70 फीट गहरे सूखे कुएं में फेंक दिया। घायलावस्था में बच्ची को तत्काल कादीपुर कलां स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसके सिर में करीब तीन इंच गहरे घाव का उपचार किया गया। प्राथमिक इलाज के बाद परिजन उसे घर ले गए। घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है। आरोपी को पुलिस ने ट्रेस कर लिया है। डीसीपी व एडीसीपी ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की। देर रात आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया गया।
घायलावस्था में बच्ची को तत्काल कादीपुर कलां स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसके सिर में करीब तीन इंच गहरा घाव होने का उपचार किया गया। प्राथमिक इलाज के बाद परिजन उसे घर ले गए। घटना की सूचना मिलते ही एडीसीपी, एसीपी सारनाथ, प्रभारी निरीक्षक चौबेपुर, सारनाथ व चोलापुर के प्रभारी निरीक्षक समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और छानबीन शुरू की।
डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार ने बताया कि आरोपी की तलाश की जा रही है। बच्ची की हालत सामान्य है। कुएं में गिरने से उसके सिर, हाथ और पैर में चोटें आई हैं।
पश्चिम बंगाल के चुनावों में ममता बनर्जी को हार मिली है। वहां भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की है। इस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम पर एक्स के माध्यम से कहा कि हर फरेबी फतह की एक मियाद होती है। यह बात ही सच्चाई की बुनियाद होती है।
गंगोत्री से गंगासागर तक भाजपा को मां गंगा और जनता का आशीर्वाद : पंकज चौधरी
पश्चिम बंगाल, असम एवं पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत पर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि गंगोत्री से गंगासागर तक भाजपा को मां गंगा और जनता जनार्दन का आशीर्वाद मिल रहा है। इस जीत का आधार पीएम मोदी का देश में विकास, सुशासन और विश्वास की राजनीति है।
बंगाल में टीएमसी का भय परास्त हुआ और पीएम का भरोसा विजयी हुआ है। असम में विकास की ‘हैट्रिक’ ने साबित कर दिया है कि जनता अब केवल परफॉर्मेंस की राजनीति चुन रही है। पूर्वी भारत से उठी यह लहर उत्तर प्रदेश के ‘मिशन 2027’ को अभूतपूर्व ऊर्जा प्रदान करेगी। प्रदेश में भी संगठन को और सशक्त बनाते हुए ‘मिशन 2027’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्यकर्ता पूरी ऊर्जा के साथ जुटे हैं। भाजपा कार्यकर्ता लगातार जनता की सेवा में समर्पित रहते हैं। बंगाल और असम का यह परिणाम तो केवल ट्रेलर है, यूपी 2027 में सुशासन की हैट्रिक के साथ पूरी पिक्चर अभी बाकी है।
लखनऊ में सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई। इसमें कुल 29 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें रोजगार, शिक्षा, उद्योग और पर्यावरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं। अब 16 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले 5 से 31 मई तक किए जाएंगे।
योगी कैबिनेट ने सोमवार को 2026-27 के लिए तबादला नीति को मंजूरी दी। एक जनपद, एक व्यंजन योजना को स्वीकृति मिल गई। इसके अलावा जालौन में 500 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित होगा। दो-दो सीएम फैलो तैनात होंगे। एक आर्थिक क्षेत्र और दूसरा डेटा एनालिसिस में जानकार होगा। 50 हजार मानदेय, 10 हजार आवास भत्ता और लैपटाप दिया जाएगा। विस्तार से पढ़ें कैबिनेट के 29 फैसले…
दो फिल्में टैक्स फ्री घोषित
कैबिनेट ने आरएसएस से संबंधित फिल्म ‘शतक-राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष’ और ‘गोदान’ को टैक्स फ्री करने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इन दोनों फिल्मों को दर्शकों द्वारा प्रवेश के लिए देय जीएसटी के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
फिरोजाबाद में अमरदीप विश्वविद्यालय की स्थापना को हरी झंडी
प्रदेश सरकार ने एक और निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत कैबिनेट ने फिरोजाबाद में अमरदीप मेमोरियल ट्रस्ट को स्थापना के लिए आशय पत्र जारी करने पर सहमति दी है। फिरोजाबाद के पचवान गांव में 20.08 एकड़ भूमि पर विश्वविद्यालय की स्थापना होगी।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कैबिनेट निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा को अंतिम पायदान तक सरल, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाना है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार हो, जिससे विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त हो सकें।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 व उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली 2021 के तहत प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन उच्च स्तरीय समिति ने करके आशय पत्र जारी करने का निर्णय लिया है। समिति की संस्तुति के बाद सरकार द्वारा आशय पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है। इससे विश्वविद्यालय स्थापना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
किसानों को मिलेगा टावर और विद्युत लाइन का मुआवजा
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया, प्रदेश में किसानों के खेतों से 765, 490, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनें बिछाई जाती हैं। बड़े-बड़े विद्युत टावर भी लगाए जाते हैं। 2018 से पहले खेतों से होकर निकलने वाली विद्युत लाइनों और टावरों के लिए मुआवजा का प्रावधान नहीं था।
लेकिन 2018 में इसका प्रावधान किया गया, लेकिन उस प्रावधान में मुआवजा राशि बहुत कम होने से किसान संतुष्ट नहीं थे। इसके चलते खेतों में विद्युत लाइन निकालने और टावर लगाने में परेशानी आती थी।
सरकार ने अब मुआवजा राशि बढ़ाने का प्रावधान किया है।
खेत में जिस स्थान पर विद्युत टॉवर लगाया जाएगा, उसके एक मीटर की परिधि में स्थित जमीन का किसान को सर्किल रेट से दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। खेत से होकर विद्युत लाइन बिछाने पर भूमि की कीमत का 30 फीसदी तक मुआवजा दिया जाएगा।
अब यूपी के स्वाद की होगी अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग, 75 जिलों के पारंपरिक पकवानों को मिलेगा वैश्विक बाजार
प्रदेश सरकार अब प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को संगठित पहचान और बड़ा बाजार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) की तर्ज पर ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना लागू की जा रही है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट व्यंजनों को चिन्हित कर उन्हें ब्रांड, पैकेजिंग और गुणवत्ता के मानकों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
कैबिनेट मंजूरी के बाद एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि हर जिले की सांस्कृतिक पहचान बने इन व्यंजनों को संरक्षित करने के साथ उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने, पैकेजिंग को आधुनिक बनाने और उत्पादन को मानकीकृत करने पर फोकस रहेगा। योजना का मकसद स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों, लघु उद्यमियों और महिला समूहों को सीधा लाभ पहुंचाते हुए उनकी आय में वृद्धि करना है।
पारंपरिक स्वाद को मिलेगा नया आयाम
प्रदेश के अलग-अलग जिलों के व्यंजन पहले से ही अपनी अलग पहचान रखते हैं। आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, मेरठ की गजक, जौनपुर की इमरती, गोरखपुर का लिट्टी-चोखा और वाराणसी की कचौड़ी जैसे व्यंजन दशकों से लोगों की पसंद बने हुए हैं। योजना के तहत इन व्यंजनों को न सिर्फ संरक्षित किया जाएगा, बल्कि डिजाइन, तकनीक, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और पैकेजिंग में व्यापक सुधार कर इन्हें बड़े बाजार से जोड़ा जाएगा।
इसी तरह मिर्जापुर में लाल पेड़ा और गुलाब जामुन, मुरादाबाद में दाल और हब्शी हलवा, प्रयागराज में बेदमी पूरी और कचौड़ी, वाराणसी में तिरंगा बर्फी, बनारसी पान और कचौड़ी, सहारनपुर मंडल में गुड़ व शहद आधारित उत्पादों को प्रमुखता दी गई है।
ब्रांडिंग से लेकर बाजार तक पूरी चेन पर काम
राकेश सचान ने बताया कि योजना के तहत चयनित व्यंजनों के लिए अलग-अलग ‘लोगो’ विकसित किए जाएंगे, जिससे उनकी ब्रांड पहचान बने। साथ ही आधुनिक पैकेजिंग और लेबलिंग गुणवत्ता का मानकीकरण, शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उपाय, फूड सेफ्टी मानकों का पालन जैसे
पहलुओं पर विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद से काम किया जाएगा। योजना के जरिए कारीगरों और छोटे उद्यमियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे आधुनिक उत्पादन तकनीकों को अपनाकर प्रतिस्पर्धी बन सकें। इसके अलावा वित्त पोषण, आसान ऋण सुविधा और विपणन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को भी इससे जोड़ा जाएगा।
मेले-प्रदर्शनियों में मिलेगा बड़ा मंच
इन व्यंजनों को राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फूड फेस्टिवल, एक्सपो और प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे न सिर्फ उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि यूपी के पारंपरिक व्यंजन ‘ब्रांड यूपी’ के रूप में स्थापित हों।
ईमेल, मोबाइल, मैसेजिंग एप के जरिए भेजे जा सकेंगे समन
कैबिनेट ने तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत तीन नियमों की गाइडलाइन को मंजूरी दी। भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ई-साक्ष्य, ई-समन और सामुदायिक सेवा से संबंधित मॉडल नियम (गाइडलाइन) इलाहाबाद हाईकोर्ट की सहमति से तैयार की गई है। इन नियमों के प्रभावी होने से समन ईमेल, मोबाइल और मैसेजिंग एप के जरिए भेजे जा सकेंगे।
उत्तर प्रदेश ई-साक्ष्य प्रबंधन नियम 2026 के जरिये डिजिटल साक्ष्यों के संकलन, संरक्षण और न्यायालय में प्रस्तुत करने की एक वैज्ञानिक एवं मानकीकरण व्यवस्था स्थापित की गई है। इससे साक्ष्यों की अखंडता (एंटिग्रिटी) और चेन ऑफ कस्टडी सुनिश्चित की जा सकेगी। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रानिक आदेशिका (ई-समन) नियम, 2026 के तहत समन एवं वारंट इलेक्ट्रानिक तरीके से जारी हो सकेंगे। ईमेल, मोबाइल और मैसेजिंग एप के जरिए उनका तामीला कराया जा सकेगा।
इससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसमें महिलाओं और बच्चों से संबंधित मामलों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने का विशेष प्रावधान भी किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस, 2026 के अंतर्गत छोटे अपराधों के लिए कारावास के विकल्प के रूप में ‘सामुदायिक सेवा’ को सुधारात्मक दंड के रूप में लागू किया गया है। इससे अपराधियों के पुनर्वास को प्रोत्साहन मिलेगा तथा कारागारों के भार में कमी आएगी। इसके अंतर्गत स्वच्छता, पौधरोपण, गौ-सेवा, यातायात प्रबंधन आदि सार्वजनिक कार्यों में सहभागिता का प्रावधान किया गया है।
यूपी में 31 मई तक होंगे सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादले
उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादले 31 मई तक किए जाएंगे। इसके लिए सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। जिले में 3 साल और मंडल में 7 साल पूरे कर चुके अधिकारी और कर्मचारी स्थानांतरित किए जाएंगे।
कैबिनेट से पास प्रस्ताव में कहा गया है कि यह स्थानांतरण नीति वर्ष 2026-27 के लिए है। समूह क व ख के ऐसे अधिकारी जो अपने सेवाकाल में किसी जिले में 3 वर्ष पूरे कर चुके हैं, उनका तबादला किया जाएगा। मंडल में तैनाती की यह अवधि 7 वर्ष की होगी। विभागाध्यक्ष और मंडलीय कार्यालयों में की गई तैनाती की अवधि को इस समयसीमा में नहीं गिना जाएगा।
मंडलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम सीमा तीन वर्ष होगी और इसके लिए सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गई है। समूह क व ख के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत और समूह ग व घ के कार्मिकों के स्थानांतरण संवर्गवार कुल कार्यरत कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत सीमा तक किए जा सकेंगे।
समूह ग के लिए पटल परिवर्तन व क्षेत्र परिवर्तन के संबंध में 13 मई 2022 के शासनादेश के अनुसार व्यवस्था इस बार भी लागू रहेगी। समूह ख व ग के कार्मिकों के स्थानांतरण यथासंभव मेरिट आधारित ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गई है।
दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को प्राथमिकता
मंदित बच्चों व चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर किए जाने की व्यवस्था की गई है, जहां उसकी उचित देखभाल व चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो। केंद्र सरकार से घोषित 8 आकांक्षी जिलों और 34 जिलों के 100 आकांक्षी विकास खंडों में में तैनाती संतृप्त किए जाने की व्यवस्था की गई है।
स्थानांतरण सत्र के बाद सीएम की अनुमति अनिवार्य
स्थानांतरण सत्र के बाद समूह क व ख के तबादले विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही हो सकेंगे।
चार कताई मिलों की जमीन पर विकसित होंगे संत कबीर टेक्सटाइल पार्क
संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के तहत प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी में टेक्सटाइल पार्क की का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा अमरोहा, बहेड़ी (बरेली), मगहर ( संत कबीर नगर) और नगीना (बिजनौर) में टेक्सटाइल पार्क विकसित होंगे। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।
इस संबंध में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि प्रस्ताव के माध्यम से चार कताई मिलों की कुल 251.80 एकड़ जमीन पर टेक्सटाइल पार्क विकसित होंगे। इसमें सहकारी कताई मिल्स अमरोहा की 79.82 एकड़ जमीन, बहेड़ी (बरेली) की 79.58 एकड़ जमीन, मगहर (संत कबीर नगर) की 39.49 एकड़ और नगीना (बिजनौर) की 52.91 एकड़ जमीन पर टेक्सटाइल पार्क का विकास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ये जमीनें बंधमुक्त और विवाद रहित हैं। इन पर किसी का कोई अतिक्रमण नहीं है। सभी कर्मचारियों को भी अधिकतम देयों का भुगतान किया जा चुका है। ये टेक्सटाइल पार्क पीपीपी मोड पर विकसित किए जाएंगे। इसे लेकर मास्टर डेवलपर्स के चयन के लिए एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट (ईओआई) निकाला गया था, जिसमें 10 निवेशकों द्वारा पार्क विकसित करने की रुचि दिखाई गई थी।
इन जमीनों के सापेक्ष टेक्सटाइल क्षेत्र के निवेशकों की रुचि का भी अध्ययन किया गया था। नगीना में 76 निवेशकों ने 49 एकड़ जमीन की मांग की है। इसी प्रकार अमरोहा, बहेड़ी, मगहर में भी निवेशकों ने जमीन मांगी है।
माध्यमिक के छात्र एआई, रोबोटिक्स, डिजाइन में होंगे दक्ष
प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा नौ से 12 के छात्र डिजाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैनुफेक्चरिंग, एआई, ई-व्हीकल आदि क्षेत्रों से जुड़ी न सिर्फ पढ़ाई करेंगे। बल्कि इस क्षेत्र का अत्याधुनिक लैब के माध्यम से प्रशिक्षण भी लेंगे। इसके लिए टाटा के नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट लिमिटेड (टाटा) की ओर से प्रदेश के 150 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में ड्रीम स्किल लैब स्थापित की जाएगी।
प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग व नेल्को नेटवर्क के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी। योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश के 18 राजकीय माध्यमिक विद्यालय एक हब के रूप में विकसित किए जाएंगे। यहां पर नेल्को नेटवर्क की ओर से अत्याधुनिक क्षेत्र से जुड़ी मशीनें लगाई जाएंगी। साथ ही प्रशिक्षक भी तैनात किए जाएंगे।
इन प्रत्येक विद्यालय से तीन-तीन विद्यालय स्पोक मॉडल में जुड़ेंगे। इस तरह पहले चरण में 75 और दूसरे चरण में 75 कुल 150 विद्यालय में यह अत्याधुनिक लैब स्थापित की जाएगी। इसमें लगभग 12 हजार छात्र लाभांवित होंगे। योजना पर कुल 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 68 फीसदी खर्च नेल्को नेटवर्क व 32 फीसदी प्रदेश सरकार वहन करेगी। इतना ही नहीं नेल्को द्वारा पांच साल तक प्रशिक्षकों को भी मानदेय खुद ही दिया जाएगा।
ड्रीम स्किल लैब में छात्रों को वर्तमान व भविष्य की तकनीकी व औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल व व्यक्तित्व विकास किया जाएगा। साथ ही अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से प्रशिक्षण भी प्राप्त करेंगे। इससे उनको सरकारी व निजी क्षेत्र की कंपनियों में बेहतर प्लेसमेंट, सेवायोजन व रोजगार के अवसर मिलेंगे। बता दें कि विभाग ने इस सत्र से पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को भी शामिल किया है।
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रथम अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी
प्रदेश में सांस्कृतिक शिक्षा को अब और रफ्तार मिलेगी। प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रथम अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी है। इससे प्रदेश में कला, संगीत और संस्कृति से जुड़ी शिक्षा और शोध को व्यवस्थित करने में और सहयोग मिलेगा।
इसका उद्देश्य प्रदेश में सांस्कृतिक शिक्षा के लिए एक सशक्त और संगठित ढांचा तैयार करना है। जब तक विश्वविद्यालय के स्थायी नियम लागू नहीं हो जाते, तब तक यह अध्यादेश उसके कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद करेगा। अध्यादेश लागू होने के बाद विश्वविद्यालय को शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण अधिकार मिलेंगे।
इसमें छात्रों के प्रवेश, पाठ्यक्रम निर्धारण, परीक्षाओं का संचालन, डिग्री और डिप्लोमा देने की प्रक्रिया, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इससे छात्रों को बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार की योजना इस विश्वविद्यालय को एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान के रूप में विकसित करने की है। यह संस्थान न केवल शास्त्रीय संगीत और प्रदर्शन कलाओं में प्रशिक्षण देगा, बल्कि शोध के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने का कार्य भी करेगा। इससे प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को नया मंच और पहचान मिलने की उम्मीद है।
बरेली के सुभाषनगर इलाके से दो दिन पहले लापता हुईं एलआईयू के सेवानिवृत्त दरोगा गजराज सिंह की पत्नी शारदा यादव की उनके मुंहबोले बेटे नगर निगम के संविदा कर्मी वरुण पाराशरी ने हत्या कर दी। उसने शव पीलीभीत जिले की सीमा में छिपा दिया।
पुलिस ने सर्विलांस, सीसी कैमरों से कड़ियां जोड़कर वरुण को गिरफ्तार किया तो थोड़ी ना-नुकूर के बाद उसने संपत्ति की खातिर हत्या की बात कबूल कर ली। उसकी निशानदेही पर पीलीभीत के जहानाबाद इलाके से शव भी बरामद कर लिया गया।
पुलिस के मुताबिक, 65 वर्षीय शारदा यादव शनिवार दोपहर 12 बजे घर से निकली थीं। उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला तो गजराज सिंह ने सुभाषनगर थाने में रविवार दोपहर उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शारदा का मोबाइल फोन बंद जा रहा था।
सर्विलांस से पता लगा कि उनका फोन पुलिस लाइन के पास बंद हुआ था। वहां के सीसी कैमरों की जांच की गई। सुराग जुटाते हुए पुलिस को बिहारीपुर कहरवान निवासी वरुण पाराशरी की भूमिका संदिग्ध लगी।
वरुण ने कबूली हत्या की बात
इंस्पेक्टर सतीश कुमार नैन ने बताया कि वरुण के नंबर से शारदा के नंबर पर कुछ कॉल्स भी मिलीं। सोमवार को पुलिस ने वरुण को बुलाकर पूछताछ की। थोड़ी सख्ती की तो वरुण ने हत्या की बात कबूल कर ली।
सम्पत्ति में चौथा हिस्सा न मिलने पर की हत्या
उसने बताया कि शारदा उसे अपना बेटा मानती थीं। अपने तीन बेटों के अलावा उसे भी संपत्ति का चौथा हिस्सा देने की बात कही थी, लेकिन हिस्सा नहीं दे रही थीं। इसी वजह से उसने उनकी हत्या कर दी।
कार में मिला खून, हत्या में प्रयुक्त पाना बरामद
एसओजी टीम सोमवार शाम वरुण के घर पहुंची और उसकी कार की तलाशी ली। कार में खून बिखरा पड़ा था। साथ ही, टायर बदलने वाला पाना भी मिला। इसी से शारदा की हत्या की गई थी। पुलिस आरोपी को पीटती हुई ले गई।
पुलिस टीम उसे लेकर पीलीभीत के जहानाबाद इलाके में पहुंची। वहां वरुण की निशानदेही पर झाड़ियों से शव बरामद किया गया। शारदा घर से जाते वक्त करीब ढाई लाख के जेवर पहने थीं जो गायब बताए जा रहे हैं
वृद्ध महिला से मां का रिश्ता जोड़कर नगर निगम के संविदा कर्मी वरुण ने यह घटना की। उसने मंदिर में दर्शन कराने के बहाने वृद्धा को बुलाया और कार में उनका कत्ल कर दिया। फिलहाल उसने संपत्ति के लालच में हत्या की बात कबूली है। मानुष पारीक, एसपी सिटी
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि होर्मुज की घटनाओं से यह साफ हो गया है कि किसी भी राजनीतिक संकट का सैन्य समाधान नहीं हो सकता। अराघची ने अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को ‘प्रोजेक्ट डेडलॉक’ (गतिरोध) करार दिया।ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कोशिशों से बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका को उन लोगों से सावधान रहना चाहिए जो उसे फिर से दलदल में खींचना चाहते हैं। उन्होंने यूएई को भी ऐसी ही सलाह दी।ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि होर्मुज की घटनाओं से यह साफ हो गया है कि किसी भी राजनीतिक संकट का सैन्य समाधान नहीं हो सकता। अराघची ने अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को ‘प्रोजेक्ट डेडलॉक’ (गतिरोध) करार दिया।ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कोशिशों से बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका को उन लोगों से सावधान रहना चाहिए जो उसे फिर से दलदल में खींचना चाहते हैं। उन्होंने यूएई को भी ऐसी ही सलाह दी।
इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर हुए मिसाइल हमलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर कहा कि वह अभी इसे युद्धविराम का उल्लंघन नहीं कहेंगे। ट्रंप ने बताया कि ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया है। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके लिए यही बेहतर है कि युद्धविराम बना रहे।
ईरान के सरकारी मीडिया ने एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के हवाले से हमलों के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारी ने कहा कि फुजैराह के तेल ठिकानों पर हमला करने की ईरान की कोई योजना नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका होर्मुज के प्रतिबंधित इलाकों से अवैध रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस पूरी स्थिति के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की तरफ से छोड़ी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों, 3 क्रूज मिसाइलों और 4 ड्रोनों को रोका है। इस हमले में तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। मंत्रालय ने बताया कि अब तक वे ईरान के कुल 549 बैलिस्टिक मिसाइल, 29 क्रूज मिसाइल और 2,260 ड्रोनों को नाकाम कर चुके हैं।
फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन में हुए इन हमलों में तीन भारतीय नागरिक भी घायल हुए हैं। यूएई में भारतीय दूतावास ने बताया कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं। घायल भारतीयों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूतावास उनके स्वास्थ्य और मदद पर पूरी नजर रख रहा है।
Bada Mangal Significance: सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह को विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। वैशाख पूर्णिमा के बाद ज्येष्ठ माह की शुरुआत होती है। इस माह में श्रीहनुमान जी की साधना का विशेष महत्व है, क्योंकि इस माह में हर मंगलवार को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाता है।
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार का विशेष महत्व माना जाता है। इस माह के मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है, जो भगवान हनुमान की पूजा के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस साल ज्येष्ठ माह का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस बार अधिकमास का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसी वजह से सामान्य 4 या 5 की बजाय पूरे 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जो अपने आप में बेहद खास हैं। खास बात यह है कि अधिमास (पुरुषोत्तम मास) की वजह से आठ बड़े मंगल का विशेष संयोग मिलेगा, जो सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुना हैं। इसकी वजह से श्रीहनुमान जी की उपासना को दोहरा अवसर प्राप्त होगा।
इनमें पहले और अंतिम मंगल का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन भक्त सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ कर भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार 40 दिनों तक हनुमान चालीसा का पाठ करता है, तो उसे विशेष कृपा और कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।
कब से ज्येष्ठ का पहला मंगलवार?
इस वर्ष ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई से होकर 29 जून तक रहेगी। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने का पहला बड़ा मंगल 5 मई को पड़ रहा है। यह दिन हनुमान भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी के साथ बड़े मंगल के पावन पर्व की शुरुआत होती है और भक्त पूरे उत्साह व श्रद्धा के साथ बजरंगबली की पूजा-अर्चना करते हैं।
रामायण की कथा के अनुसार जब प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज कर रहे थे, तो हनुमान जी पहली बार प्रभु श्रीराम से मिले थे। हनुमान जी ने राम जी और लक्ष्मण जी की सच्चाई जानने के लिए एक पुरोहित का रूप बनाया हुआ था। जब हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण जी की सच्चाई जानी, तो उन्होंने प्रभु श्रीराम को प्रणाम किया। हनुमान जी और प्रभु श्रीराम का मिलन पहली बार ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हुआ था, इसलिए इस ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा मंगलवार के नाम से जाना गया।
श्रद्धा और उपासना का पावन दिन ज्येष्ठ माह के ‘बड़े मंगल’ पर हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस दिन पवनपुत्र को सिंदूर और चोला अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना भक्तों के लिए विशेष फलदायी और मानसिक शांति देने वाला माना जाता है। निस्वार्थ सेवा की अनूठी परंपरा का प्रतीक यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा का एक जीवंत उदाहरण है। जगह-जगह आयोजित होने वाले विशाल भंडारे इस दिन की पहचान हैं, जहां समाज का हर वर्ग एक साथ मिलकर प्रसाद ग्रहण करता है।बड़ा मंगल पर जगह-जगह प्याऊ (ठंडा पानी) लगवाने और शरबत-प्रसाद वितरित करने का विधान है, जो हनुमान जी की कृपा पाने के लिए उत्तम माना जाता है।
ज्येष्ठ माह में किए गए व्रत और उपायों का विशेष फल मिलता है, क्योंकि इस समय सूर्य की प्रखरता अधिक होती है और यह ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करता है। इस माह में की गई पूजा और तपस्या से पुण्य प्राप्ति होती है।
पूजा विधि
सुबह जल्दी स्नान कर लाल वस्त्र पहनें। हनुमान जी को सिंदूर का चोला और चमेली का तेल अर्पित करें। भोग में बूंदी के लड्डू या गुड़-चना चढ़ाएं। ॐ हं हनुमते नम: मंत्र का जाप करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
बड़ा मंगल व्रत के लाभ
संकटों से मुक्ति: हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। बड़ा मंगल का व्रत करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
मंगल दोष का निवारण: जिनकी कुंडली में मंगल भारी है, उनके लिए ये 8 मंगलवार सेवा और दान के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इच्छा पूर्ति: सच्चे मन से सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करने से साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सेवा और दान: इस दिन जगह-जगह भंडारे और पानी पिलाने की व्यवस्था करने की परंपरा है।
केरलम में विजयन सरकार के पतन के साथ ही भारत वामदल सरकार मुक्त हो गया है। 1977 के बाद से यह पहला मौका है जब देश के किसी राज्य में वामपंथी दलों की सरकार नहीं है। एक समय था जब केरलम के अलावा पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में न सिर्फ वामपंथी दलों की सरकारें थी, बल्कि उनका दबदबा भी था। वामपंथी राजनीति का अवसान सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है। रूस, क्यूबा और उत्तर कोरिया जैसे गिने-चुने देशों में ही वामपंथी सरकारें रह गई हैं। कहने को तो चीन में भी कम्युनिस्ट सरकार है, लेकिन वह सिर्फ नाम की कम्युनिस्ट है, काम में पूंजीवादी सरकार है।
केरलम: 1957 में भाकपा ने पहली सरकार बनाई
केरलम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने 1957 में अपनी पहली सरकार बनाई थी। इलमकुलम मनक्कल शंकरन यानी ईएमएस नंबूदरीपाद के नेतृत्व में बनी इस सरकार को मामूली बहुमत ही मिला था, लेकिन यह दुनिया में कहीं भी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई पहली वाम सरकार थी।
केरलम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के बीच सत्ता की अदला-बदली होती रही है। लेकिन पिछले 10 वर्षों से राज्य में एलडीएफ की सरकार थी। उसे तीसरी बार भी सत्ता में लौटने की उम्मीद थी, लेकिन यूडीएफ ने उसके मंसूबों पर पानी फेरते हुए सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। केरलम वामपंथी दलों का आखिरी किला था, जहां उनकी सरकार थी। इससे पहले, 2011 में पश्चिम बंगाल वामदलों के हाथ से निकल गया, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस ने उनके 34 साल की सत्ता को उखाड़ फेंका था। त्रिपुरा में 2018 के विधानसभा चुनाव में वामदलों को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा व आईपीएफटी गठबंधन की जीत के साथ ही राज्य से 25 साल के वामदलों के शासन का अंत हुआ।
प. बंगाल: 1977-2011 तक वामदलों की अटूट सरकार
देश की सियासत में अहम स्थान रखने वाले पश्चिम बंगाल में 1977 में पहली बार वामपंथी दल की सरकार सत्ता में आई थी। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने थे, उसके बाद से 2011 तक राज्य में वामदलों की सरकार रही। मुख्यमंत्री भले ही बसु के स्थान पर बुद्धदेव भट्टाचार्य बन गए थे। दोनों के नेतृत्व में किसी राज्य में वाम दल का सबसे लंबा अटूट शासन रहा। हालांकि, बंगाल में साम्यवाद का लंबा इतिहास रहा है। इसकी शुरुआत एमएन रॉय के समय से हुई, जिन्होंने 1925 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की थी। स्वतंत्रता के बाद, पार्टी ने बंगाल में 1977 की अपनी जीत का श्रेय आंशिक रूप से 1972 में कांग्रेस की ओर से कथित तौर पर चुनाव में धांधली और उसके शासनकाल में आपातकाल (1975-77) की ज्यादतियों को दिया।
भाकपा विभाजन, माकपा का जन्म
1964 में भाकपा का विभाजन हुआ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के रूप में नई पार्टी का जन्म हुआ। तीन दशकों से अधिक सत्ता में रहने के बाद, वामपंथी दल ने 2011 में बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से सत्ता खो दी। 90 के दशक में औद्योगीकरण की नीति और जबरन भूमि अधिग्रहण ने उनके पारंपरिक आधार को उनसे दूर कर दिया और एक विकल्प के उदय का अवसर प्रदान किया।
त्रिपुरा : 1977 में पहली वाम सरकार
त्रिपुरा में भी पहली कम्युनिस्ट सरकार 1977 में सत्ता में आई। उसके बाद पार्टी ने कई चुनावी जीत हासिल कीं। 1998 में माणिक सरकार के नेतृत्व में बनी वाम सरकार सबसे लंबे समय 2018 तक सत्ता में रही। संघ ने महिलाओं, युवाओं और आदिवासियों के बीच काम किया और इसके परिणाम स्वरूप राज्य में 2018 में भाजपा की सरकार बनी। माणिक सरकार के पतन का कारण वेतन आयोग भी बना। जब सातवां वेतन आयोग लागू था, तब त्रिपुरा में चौथे वेतन आयोग से भुगतान हो रहा था, जिससे युवाओं में आक्रोश था।
प्रदेश में सोमवार को बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था पूरी तरह से खत्म कर दी गई। जिन उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगे हैं, वे भी पोस्टपेड की तरह ही काम करेंगे।ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतें मिली रही थीं। विद्युत उपभोक्ताओं को स्मार्ट /प्रीपेड मीटर से आ रही तकनीकी दिक्कत के मद्देनजर फैसला लिया गया है कि सभी उपभोक्ताओं का स्मार्ट मीटर सामान्य पोस्ट-पेड मीटर की तरह ही कार्य करेगा।
जैसे ही उपभोक्ता पहले मासिक बिल भरते थे वैसे ही हर माह की एक से 30 तारीख तक का बिल अगले दस दिन में एसएमएस या ह्वाट्सऐप पर भेजा जाएगा। बिल मिलने के बाद दी गई समय सीमा में उपभोक्ता को बिल जमा करना होगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने फोन नंबर नहीं दर्ज कराया है वे तत्काल दर्ज करा लें और बिजली विभाग से आने वाले संदेश संदेश को ध्यान दें। ऊर्जा मंत्री ने कहा विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशआ में माह के अंदर बिजली नहीं काटें। जिन उपभओक्ताओं का पहले से बकाया है, वे 10 किस्तो में भुगतान कर सकेंगे। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने एक्स पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर का फैसला वापस लेने संबंधी जानकारी देते हुए देवो भवः की बात कही और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को नमन किया।
मुख्यमंत्री ने जताई थी नाराजगी
प्रदेश में 3.5 करोड़ उपभोक्ता हैं। करीब 87 लाख के यहां स्मार्ट मीटर लगाए गए, जिसमें 75 लाख के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद प्रदेशभर के उपभोक्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उपभोक्ताओं का आरोप था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर तेज चल रहा है। अचानक बिजली कट जाती है। बिजली कटने पर उपभोक्ता रिचार्ज करते हैं और रिचार्ज करने के बाद भी तत्काल आपूर्ति शुरू नहीं होती है। इतना ही नहीं लोकसभा में केंद्रीय उर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्ट ने भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं होने की जानकारी दी थी। विद्युत नियामक प्राधिकरण ने भी संशोधित अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद भी प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे थे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में तकनीकी कमेटी बनाने और जांच कराने का निर्देश दिया था। चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई, लेकिन 10 दिन में कमेटी रिपोर्ट नहीं आ पाई।
उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लाई, सीएम का आभा
स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगना शुरू होते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विरोध शुरू किया। उन्होंने नियामक आयोग में याचिकाएं लगाईं। आयोग ने पावर कार्पोरेशन से जवाब तलब किया। निरंतर हो रहे विरोध और आयोग की सख्ती को देखते हुए पावर कार्पोरेशन ने अपना फैसला बदला। सोमवार दोपहर बाद ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। इसके बाद फैसला वापस लेने का ऐलान किया गया। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब बड़ा दिल दिखाएं और जिन उपभोक्ताओं पर स्मार्ट विरोध का विरोध करते हुए कानून हाथ में लेने की रिपोर्ट दर्ज हुई है, उसे वापस लिया जाए। क्योंकि आक्रोश में उपभोक्ताओं ने गलत फैसला लिया था। पूरे प्रकरण में मुख्य रूप से गलती पावर कॉरपोरेशन की है। पावर कारपोरेशन ने राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया। पावर कार्पोरेशन के खिलाफ राष्ट्रीय कानून का उलंधन करने का आरोप में कार्रवाई की जाए।
प्रदेश में सोमवार सुबह मौसम अचानक बदल गया, जिससे कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई। कई जिलों में बिजली गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिससे खेतों में काम कर रहे किसान और खुले स्थानों पर मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। कुछ जगहों पर तेज आंधी के कारण पेड़ और दीवारें गिरने से भी जान-माल का नुकसान हुआ। इसके चलते प्रदेश में कुल 23 लोगों की मौत हो गई। इनमें अवध के जिलों के भी सात लोग शामिल हैं। इस दौरान संभल में सर्वाधिक 130 मिमी बारिज दर्ज की गई। वहीं, मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए 21 जिलों में गरज-चमक और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।