हमें बुलंदशहर और आगरा से कुछ सोर्स मिले, जिनकी मदद से हम यूपी से सटे राजस्थान के धौलपुर में बसई नवाब कस्बे में दूध की फैक्ट्री तक पहुंचे। यहां मजदूर सिंथेटिक दूध बना रहे थे। उन्होंने बताया कि वे 15-20 हजार रुपए महीने की सैलरी पर काम करते हैं। हर घंटे 80 से 100 लीटर दूध बना देते हैं। सिंथेटिक दूध बना रहे मजदूर केदार सिंह से हमने दूध बनाने का प्रोसेस समझा।
केदार सिंह: सिंथेटिक दूध बनाने के लिए अलग-अलग चीजें होती हैं। यूरिया भी काम करता है, ग्लूकोज भी काम करता है।
रिपोर्टर: कितना बना देते हैं?
केदार सिंह: 20 लीटर का 80 लीटर बना देते हैं।
रिपोर्टर: बेचते कहां हैं? आपको कितना पैसा मिलता है?
केदार सिंह: पता नहीं कहां बेचते हैं? पैसा तो कुछ नहीं मिलता, हमको तो 15-20 हजार रुपए देते हैं महीने के।
ये तस्वीर मजदूर केदार सिंह की है। केदार ने बताया कि नकली दूध बनाने के लिए उसे हर महीने सैलरी मिलती है।
रिपोर्टर: ये बताओ, 20 लीटर दूध का 80 लीटर कैसे बन जाता है?
केदार सिंह: पहले डालडा और सर्फ को मिलाकर आपस में मलते हैं। उसके बाद चूना डालते हैं। फिर एक लीटर दूध डालते हैं। फिर पानी डाल देते हैं 40-50 लीटर। फिर ग्लूकोज या यूरिया डाल देते हैं। इससे पाउडर की मात्रा बढ़ जाती है। फैट 5% तक आएगा।
रिपोर्टर: ग्लूकोज से दूध मीठा नहीं होता।
केदार सिंह: मीठा होता है तो उसमें एक केमिकल डालते हैं, इससे दूध मीठा नहीं लगता। चूना डालने से केमिकल की लेयर नहीं बनती है।