कंचौसी। क्षेत्र में खाद को लेकर खासी किल्लत है। सहकारी समिति कंचौसी में खाद आते ही एक ही दिन में खत्म हो गई। इससे कई किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ा। आरोप है कि सीमित खाद आने पर कर्मचारी वितरण में भेदभाव कर रहे हैं।सहकारी समिति में शुक्रवार को यूरिया खाद आने की सूचना पर चार दिन से परेशान किसानों की भीड़ जमा हो गई। किसान प्रताप सिंह, राम सिंह, सर्वेश कुमार, दीपक गौर, कल्लू ठाकुर, नरेंद्र व आशीष कुमार आदि ने बताया कि सबेरे से ही एक बोरी यूरिया को लाइन लगाए बैठे रहे। मगर खाद नहीं मिल सकी। सोसाइटी में कर्मचारियों द्वारा खाद वितरण के दौरान भेदभाव किया जा रहा है। इस कारण चुनिंदा किसानों को खाद मिल रही है।
Auraiya News: शाम को बूंदाबांदी से बढ़ी उमस
बिधूना। शुक्रवार की शाम पांच बजे के बाद बूंदाबांदी होने से उमस बढ़ गई। इससे लोग परेशान रहे। बूंदाबांदी से बाजारों में चहल पहल और त्योहार की खरीदारी पर भी असर पड़ा।शुक्रवार को दिनभर बाजार में भारी भीड़ देखी गई। रक्षाबंधन के त्योहार के लिए बाजार में महिलाओं की खासी भीड़ उमड़ी, लेकिन शाम को हल्की बारिश शुरू हुई तो लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे। दुकानदारों ने बताया कि बारिश के चलते शाम को ग्राहकों की संख्या में गिरावट आई है। इससे बाजार की रौनक फीकी पड़ गई। उमस भी काफी बढ़ गई। उधर, कृषि मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रामपलट सिंह के अनुसार शुक्रवार को 1.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
Kulgam Encounter: अखल मुठभेड़ में दो जवान बलिदान, गोलीबारी में दो अन्य जवान भी घायल; 9वें दिन ऑपरेशन जारी
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम के अखल इलाके में आतंकियों और जवानों के बीच नौवें दिन मुठभेड़ चल रही है। मुठभेड़ में दो जवान बलिदान हो गए। जबकि दो अन्य जवान घायल हैं। घायलों को 92 बेस अस्पताल ले जाया गया है। चिनार कोर ने इसकी पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार, अखल में रात भर धमाके और गोलीबारी होती रही। इस दौरान सेना के दो जवान बलिदान हो गए, जबकि गोलीबारी में दो अन्य जवान घायल भी हुए हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीतपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह बलिदान हुए हैं।
सिरकटा लेकिन कई महीने रहा जिंदा… इस मुर्गे ने दी मौत को मात, 80 साल पुरानी कहानी कर देगी हैरान!
इंटरनेशनल डेस्क। यह कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं लगती। 80 साल पहले अमेरिका के कोलोराडो में एक किसान ने एक मुर्गे का सिर काट दिया लेकिन वह मरा नहीं बल्कि बिना सिर के वह पूरे 18 महीने तक जिंदा रहा। इस मुर्गे को ‘माइक द हेडलेस चिकन’ के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं क्या है इस अनोखी घटना के पीछे का विज्ञान।
कैसे हुई घटना?
10 सितंबर 1945 को किसान लॉयड ऑलसेन अपने फार्म पर मुर्गियां काट रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक मुर्गे का सिर काट दिया लेकिन वह मुर्गा मरा नहीं बल्कि भागने लगा। लॉयड अगली सुबह जब जागे तो हैरान रह गए क्योंकि मुर्गा अब भी जिंदा था।

लॉयड ने इस मुर्गे को एक डिब्बे में रखा और उसका नाम ‘माइक’ रख दिया। जल्द ही पूरे इलाके में इस बिना सिर वाले मुर्गे की कहानी फैल गई। इसके बाद एक साइडशो प्रमोटर होप वेड ने लॉयड से संपर्क किया और माइक को सर्कस में दिखाने का प्रस्ताव दिया। लॉयड और उनकी पत्नी क्लारा ने माइक को लेकर अमेरिका का दौरा किया और इससे खूब पैसे कमाए।
ऐसे जिंदा रहा माइक
➤ भोजन और देखभाल: लॉयड माइक को ड्रॉपर की मदद से तरल भोजन और पानी सीधे उसकी ग्रासनली में देते थे। इसके अलावा वह सिरिंज से उसके गले से बलगम भी साफ करते थे।
➤ मौत: 18 महीने बाद एक रात माइक का दम घुट गया क्योंकि लॉयड अपनी सिरिंज भूल गए थे।
क्या कहता है विज्ञान?
वैज्ञानिकों के लिए भी यह एक रहस्य था। न्यूकैसल विश्वविद्यालय के मुर्गी विशेषज्ञ डॉ. टॉम स्मल्डर्स के अनुसार पक्षियों का अधिकांश मस्तिष्क सिर के आगे नहीं बल्कि रीढ़ की हड्डी के पास होता है।

➤ माइक का मस्तिष्क: जब कुल्हाड़ी से वार किया गया तो माइक की चोंच, आँखें और चेहरा कट गया लेकिन उसके मस्तिष्क का लगभग 80% हिस्सा बच गया। यही हिस्सा उसके हृदय गति, सांस लेने, भूख और पाचन तंत्र को नियंत्रित करता था।
➤ रीढ़ की हड्डी का कमाल: स्मल्डर्स बताते हैं कि मुर्गे के सिर काटने से भले ही मस्तिष्क का ऊपरी हिस्सा अलग हो गया हो लेकिन रीढ़ की हड्डी के सर्किट में बची हुई ऑक्सीजन की वजह से शरीर कुछ समय तक खुद ही काम करता रहा।
यह घटना आज भी विज्ञान और कुदरत की अनूठी मिसाल है जो हमें हैरान करती है।
संजय लीला भंसाली को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय किशोर कुमार पुरस्कार से किया जाएगा सम्मानित
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। संजय लीला भंसाली वास्तव में भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ फिल्म निर्माताओं में से एक हैं। उन्हें राज कपूर, के. आसिफ और गुरुदत्त जैसे दिग्गजों के समकक्ष माना जाता है। अपनी फिल्मों के माध्यम से, उन्होंने भारतीय कहानियों को सबसे प्रामाणिक भारतीय शैली में रचने का एक मानक स्थापित किया है। भारतीय मनोरंजन जगत में उनका एक अलग ही महत्व है, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहुँचाया है। अपनी उल्लेखनीय फिल्मों से भारतीय सिनेमा में अभूतपूर्व योगदान देने के साथ ही, अब उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय किशोर कुमार पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
संजय लीला भंसाली को फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में उनके समग्र योगदान के लिए मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा स्थापित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय किशोर कुमार पुरस्कार, वर्ष 2025 से सम्मानित किया जाएगा। हालाँकि भंसाली पहले ही राष्ट्रीय पुरस्कारों और कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं, यह उनके लिए एक और उपलब्धि है, और अपनी अद्वितीय कहानी कहने की कला के माध्यम से भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए वे इसके सच्चे हकदार हैं।
राष्ट्रीय किशोर कुमार पुरस्कार 13 अक्टूबर को खंडवा में प्रदान किया जाएगा। मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग ने उत्कृष्टता और सृजनात्मकता को सम्मानित करने की अपनी सुस्थापित परंपरा का पालन करते हुए सिनेमा के क्षेत्र में निर्देशन, अभिनय, पटकथा और गीत लेखन के लिए प्रतिवर्ष राष्ट्रीय किशोर कुमार पुरस्कार की शुरुआत की है। यह पुरस्कार उत्कृष्टता, दीर्घकालीन अभ्यास और सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि के आधार पर दिया जाता है।
इसके अलावा, संजय लीला भंसाली की अगली फिल्म “लव एंड वॉर” के लिए भी बेसब्री बढ़ रही है। इस फिल्म में संजय लीला भंसाली और रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल की प्रतिभाशाली तिकड़ी के शानदार सहयोग को बड़े पर्दे पर देखने का बेसब्री से इंतज़ार है। यह फिल्म 20 मार्च, 2026 को रिलीज़ होगी।
रक्षाबंधन से एक दिन पहले बड़ा हादसा, बाराबंकी में रोडवेज बस पर गिरा पेड़, पांच लोगों की मौत
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में लगातार हो रही बारिश के बीच जिला मुख्यालय से नौ किलोमीटर दूर हैदरगढ़ मार्ग पर रोडवेज की अनुबंधित बस पर पेड़ गिर गया। इस हादसे में चार महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई। एक महिला की पहचान शहर के मोहल्ला गुलरिया गार्दा की निवासी शिक्षा मेहरोत्रा (53) के रूप में हुई है। बाकी की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। तीन अन्य महिलाओं की आयु 40 से 45 साल के मध्य बताई जा रही है। बस में करीब 40 लोग सवार थे। पेड़ काटकर लोगों को निकाला गया। हादसे के बाद कई यात्री खिड़की से कूदकर निकले। बारिश के दौरान हुए हादसे के कारण राहत व बचाव कार्य में देर हो रही है।
बाराबंकी से हैदरगढ़ जा रही थी बस
पुलिस सूत्रों के अनुसार रोडवेज बस सवारियां लेकर बाराबंकी से हैदरगढ़ जा रही बस पर करीब साढ़े 10 बजे राजा बाजार के पास पेड़ गिर पड़ा। पेड़ इतनी तेज गिरा कि बस के आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। बारिश के बीच में पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। बस के अंदर फंसे लोगों की चीखपुकार दिल को दहला देने वाली थी। स्थानीय नागरिकों पर पुलिस की सहायता से बस में फंसे लोगों को बाहर निकल गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अवधेश कुमार यादव ने बताया कि हादसे में चार महिला व एक ड्राइवर सहित कुल पांच की मौत हुई है। एक महिला की पहचान हो गई है जबकि अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
बाराबंकी में बस हादसे से योगी दुखी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में हुये सड़क हादसे में जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया ‘‘ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जनपद बाराबंकी में सड़क हादसे में हुई जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं।
सीएम योगी ने अधिकारियों को राहत बचाव के निर्देश
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उनका समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। गौरतलब है कि बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र में आज सुबह रोडवेज की अनुबंधित बस पर पेड़ गिरने से पांच लोगों की मौत हो गयी थी।
घर से भागी दो बहनें…पति-पत्नी बनकर वापस लौटीं, बेटी को दूल्हे के ड्रेस में देखकर घरवालों ने पकड़ लिया माथा
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, यहां पर दो चचेरी बहनें अचानक से लापता हो गई। कुछ दिन बाद खुद ही दोनों वापस लौट आई और थाने पहुंच गई। जहां उन्होंने बताया कि वह दोनों एक साथ रहना चाहती हैं और शादी कर ली है।
मीडिया के अनुसार, एक लड़की के पिता ने IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि बेटी को मुजफ्फरनगर के तितावी गांव में रहने वाला उसका चचेरा भाई बहला-फुसलाकर भगा के ले गया है। उन्हें यह भी शक था उनकी बेटी को कहीं बेच दिया होगा। शिकायत लखनऊ थाने पहुंची तो जांच शुरू हुई, पुलिस ने लापता लड़की से संपर्क कर थाने बुलाया और सुरक्षा का वादा किया।
शादी करने के बाद लौटी युवतियां
शादी करने के बाद दोनों लड़कियां 7 अगस्त को वापस आई और पुलिस स्टेशन पहुंच गई। इस एक दूल्हे के ड्रेस में थी और दूसरी की मांग में सिंदूर लगा हुआ था। उनके साथ वहां पर परिजन भी मौजूद थे। परिजनों और पुलिस के सामने दोनों ने कहा कि हम डेढ़ साल से एक-दूसरे से प्यार करते हैं, रिलेशनशिप में हैं और भविष्य में एकसाथ रहना चाहती हैं। हमने जिंदगी भर साथ रहने का फैसला किया है और मंदिर में शादी कर ली है।
वृंदावन की विधवा माताएँ रक्षाबंधन पर PM मोदी को भेंट करेंगी 1001 हस्तनिर्मित राखियाँ और मिठाई करेंगी भेंट
Mathura News,(मदन सास्वत): वृन्दावन में भक्ति, गरिमा और सामाजिक परिवर्तन की एक मार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, वृंदावन की बुजुर्ग विधवाओं का एक समूह इस रक्षाबंधन पर नई दिल्ली जाएगा, जहाँ वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उन्हें 1001 विशेष रूप से हस्तनिर्मित राखियाँ और मिठाइयाँ भेंट करेंगी।
ये अनोखी राखियाँ वृंदावन के माँ शारदा और अन्य आश्रमों में रहने वाली विधवाओं द्वारा प्रेमपूर्वक तैयार की गई हैं। ये आश्रम सुलभ इंटरनेशनल द्वारा संचालित विधवा कल्याण कार्यक्रम का हिस्सा हैं। प्रत्येक राखी को भगवान राम, भगवान कृष्ण और प्रधानमंत्री की छवियों से सजाया गया है जो आध्यात्मिक जुड़ाव और व्यक्तिगत स्नेह का प्रतीक है। इन आश्रमों की महिलाएँ पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री को राखी बाँध रही हैं।
इस पहल के बारे में सुलभ इंटरनेशनल के अध्यक्ष कुमार दिलीप ने कहा, “हमारी चार माताएँ दिल्ली जाएँगी और प्रधानमंत्री को स्वयं राखियाँ और मिठाइयाँ भेंट करेंगी। यह सुलभ द्वारा पोषित उस भावनात्मक यात्रा का एक और पड़ाव है, जिसमें हमारी विधवा माताएँ गरिमा और आनंद के साथ रक्षाबंधन मनाती हैं।जिसमे हमको आकर और माताओं के साथ त्यौहार मनाने में अत्यंत सुखद अनुभूति हुई है इस पहल की शुरुआत सुलभ आंदोलन के दूरदर्शी संस्थापक, स्वर्गीय डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने की थी, जिनका उद्देश्य विधवाओं को होली, दिवाली और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख हिंदू त्योहारों में सम्मिलित कर सामाजिक बहिष्कार समाप्त करना था।
इस दल में लगभग 70 वर्षीय चाबी शर्मा समेत तीन अन्य महिलाएँ बहुत उत्साहित हैं कि वे प्रधानमंत्री के निवास पर जाएँगी। वहीं 81 वर्षीय मनु घोष, जो पूर्व में प्रधानमंत्री को राखी बाँध चुकी हैं, ने कहा, “भले ही इस बार मैं यात्रा न कर सकूँ, लेकिन मोदी जी के लिए राखियाँ बनाकर मुझे बेहद खुशी और उत्साह मिल रहा है। ये सारी राखियाँ हमारे मोदी भैया के लिए प्रेम से भरी हैं,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
Auraiya News: दो सड़क हादसों में किशोर और युवक की गई जान
फफूंद। कस्बे में गुरुवार को हुए दो सड़क हादसों में एक किशोर समेत दो की जान चली गई। हादसे से दोनों परिवारों में त्योहार की खुशियां गम में बदल गईं। किशोर के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया और शव ले गए।कस्बा के मोहल्ला ऊंचा टीला निवासी जितेंद्र कुमार राठौर का बेटा आशीष (17) गुरुवार रात 10 बजे बाइक से अजीतमल के गांव मुरादगंज जाने की बात कहकर घर से निकला था।औरैया रोड स्थित मोड़ पर पहुंचते ही उसकी बाइक अचानक बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। इससे किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस की पूछताछ के दौरान परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया।
दूसरी घटना वहां से करीब 50 मीटर दूर कूड़ा डंपिंग जोन के पास देर रात करीब साढ़े 10 बजे हुई। यहां कस्बे के मोहल्ला भराव निवासी भगवानदास दिवाकर का बेटा जितेंद्र दिवाकर (20) भोजन करने के बाद सड़क पर टहल रहा था। तभी किसी वाहन ने पीछे से उसे टक्कर मार दी। जिससे वह उछलकर सड़क पर गिर गया।
वहां गश्त करने आ रही पुलिस ने युवक को सीएचसी दिबियापुर में भर्ती कराया। वहां से उसे गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज फिर वहां से सैफई रेफर कर दिया गया। देर रात उपचार के दौरान युवक की मौत हो गई।
थाना प्रभारी निरीक्षक जय प्रकाश पाल ने बताया कि किशोर के परिजनों की तरफ से कोई सूचना नहीं दी गई। युवक का पोस्टमार्टम सैफई में हो रहा है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
चार साल पहले आशीष की बहन की नदी में डूबने से हुई थी मौत
औरैया। आशीष के पिता कस्बे में किराने की दुकान किए हैं। आशीष इसमें हाथ बंटाता था। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। सबसे छोटी बहन चार वर्ष पहले अयाना के फरिया गांव स्थित ननिहाल गई थी। वहां यमुना नदी में नहाने के दौरान डूबने से उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। (संवाद)
भाई के लिए खरीदी थी राखी, जितेंद्र का शव देख चीख पड़ी बहन
औरैया। गुरुवार देर रात सड़क हादसे में जितेंद्र की मौत हो गई थी। वह तीन भाई दो बहनों में चौथे नंबर का था। दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। दोनों भाई बाहर रहकर नौकरी करते हैं। जानकारी के बाद दोनों भाई घर के लिए निकल पड़े। मौत की सूचना पर बहन राखी सैफई अस्पताल पहुंची। वह भाई का शव देख चीख पड़ी। रक्षाबंधन को लेकर उसने भाई के लिए राखी खरीदी थी। मौत के बाद बहन के अरमान धरे के धरे रह गए।
Raksha Bandhan: UP में रोडवेज बसों में यात्रा फ्री, उमड़ी महिलाओं की भीड़; धक्का-मुक्की और झड़प के बीच हुआ सफर
रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में फ्री यात्रा की सुविधा दी गई है। इसके चलते बसों में भयंकर भीड़ उमड़ पड़ी। लखनऊ के आलमबाग, कमता, कैसरबाग, चारबाग बस अड्डों से रवाना होने वाली हर बस फुल रही। यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। बस में प्रवेश के लिए महिलाओं को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी।
शुक्रवार की सुबह से शुरू हुई रोडवेज बसों में फ्री बस यात्रा का लाभ उठाने के लिए महिलाएं पहुंची। रक्षाबंधन से पूर्व महिलाएं सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई, गोरखपुर, बस्ती सहित कई जिलों के लिए रवाना होने लगीं। कमता बस अड्डे की स्थिति यह रही कि बस के आते ही प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्रियों की मशक्कत शुरू हो जाती। बस आई, प्लेटफॉर्म पर लगने से पहले ही फुल हो गई। यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रोडवेजकर्मियों ने मोर्चा संभाला। कमता बस अड्डे की तरह कैसरबाग, आलमबाग व चारबाग बस अड्डों पर भी भीड़ रही। इस बार महिला के साथ पुरुष अटेंडेंट को भी फ्री सुविधा मिलने के कारण ही भीड़ ज्यादा रही। ऐसे में बस में सीट पाने के लिए लोगों को धक्का-मुक्की तक करनी पड़ी। सीट पर कब्जा के लिए यात्रियों में कई बार झड़प भी हुई। आलमबाग बस अड्डा पर दोपहर पौने एक बजे आजमगढ़ जाने के लिए बस के आते ही यात्रियों का रेला उमड़ पड़ा। मिनटों में ही बस फुल हो गई। जिसे सीट नहीं मिली, वह मायूस हो गया। इतना ही नहीं एसी बसों तक में यात्रियों की भीड़ रही।



