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स्पोर्ट्स डेस्क : पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता Sandeep Patil ने एक लंबे समय से चल रहे विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि MS Dhoni का Yuvraj Singh को भारतीय टीम से बाहर करने के फैसले में कभी कोई हाथ नहीं था। पाटिल ने बताया कि अपने चयनकर्ता कार्यकाल के दौरान उन्होंने कभी भी धोनी को युवराज को ड्रॉप करने की मांग करते नहीं सुना। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब युवराज के पिता लगातार धोनी पर आरोप लगाते रहे हैं।
चयन बैठकों में कभी नहीं उठी ऐसी मांग
संदीप पाटिल ने एक इंटरव्यू में कहा कि चयन समिति की बैठकों, विदेशी दौरों या मैचों के दौरान कभी भी धोनी ने युवराज सिंह को टीम से बाहर करने की बात नहीं कही। उन्होंने कहा कि वह इस बात को पूरी जिम्मेदारी के साथ रिकॉर्ड पर कह सकते हैं कि धोनी ने ऐसा कोई सुझाव या दबाव नहीं बनाया। पाटिल के अनुसार, धोनी का चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का स्वभाव भी नहीं था और वह चयन समिति के फैसलों का सम्मान करते थे।
धोनी को था चयन समिति पर पूरा भरोसा
पाटिल ने आगे कहा कि धोनी हमेशा चयनकर्ताओं के निर्णयों का सम्मान करते थे। उन्होंने बताया कि टीम के कप्तान के तौर पर धोनी को चयन समिति की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा था और वह आमतौर पर टीम चयन के मामलों में ज्यादा दखल नहीं देते थे। इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि युवराज सिंह को टीम से बाहर करने का फैसला चयनकर्ताओं की रणनीति और उस समय के प्रदर्शन के आधार पर लिया गया होगा।
योगराज सिंह लगातार लगाते रहे हैं आरोप
दूसरी ओर युवराज सिंह के पिता Yograj Singh कई बार सार्वजनिक रूप से धोनी को अपने बेटे के करियर में गिरावट के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। योगराज ने कई इंटरव्यू में यह कहा कि धोनी के कारण ही युवराज को टीम से बाहर किया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि वह इस मामले में धोनी को कभी माफ नहीं करेंगे।
एक इंटरव्यू में योगराज सिंह ने कहा था कि धोनी ने उनके बेटे के साथ गलत किया और इससे युवराज का करियर प्रभावित हुआ। उन्होंने यहां तक कहा कि युवराज सिंह जैसा खिलाड़ी फिर से देखने को शायद ही मिले और वह चार-पांच साल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल सकते थे। उनके इस बयान ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा पैदा की थी।
पाटिल ने कहा – पिता का भावुक होना स्वाभाविक
संदीप पाटिल ने योगराज सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक पिता का अपने बेटे के लिए भावुक होना बिल्कुल स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में आरोप गलत व्यक्ति पर लगाए जा रहे हैं। पाटिल के अनुसार, चयन प्रक्रिया कई पहलुओं को ध्यान में रखकर होती है और किसी एक व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।
नेशनल डेस्क: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि गांधी को खुद ही नहीं पता कि वह किस दुनिया में रहते हैं। सिंह ने कांग्रेस पर संसद में मुद्दे उठाकर और फिर बहस में भाग न लेकर भ्रम फैलाने और जनता के पैसे की बर्बादी करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ”किसी को नहीं पता कि राहुल गांधी किस दुनिया में रहते हैं; शायद उन्हें खुद भी नहीं पता। लोगों को शायद उनकी तस्वीर किसी मनोवैज्ञानिक को भेजनी पड़े। शायद कोई मनोवैज्ञानिक ही इसका पता लगा सके।” सिंह ने यह टिप्पणी लोकसभा में गांधी की कम उपस्थिति के आरोपों का जिक्र करते हुए की।
मंत्री ने कहा, “ये लोग देश के दुश्मन हैं, ये लोकतंत्र के दुश्मन हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में बहस में भाग न लेकर वे गरीबों के पैसे की बर्बादी करते हैं। लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष के प्रस्ताव का हवाला देते हुये उन्होंने कहा, ”अगर उन्हें कुछ कहना है तो वह सदन चलने दें और वहीं अपने मुद्दे रखें। बुधवार को उन्हें पता था कि यदि मतदान हुआ तो उनकी पोल खुल जाएगी, इसलिए उन्होंने हंगामा किया और सदन से भाग गये।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए थे लेकिन आखिरी समय में उससे पीछे हट गए। उन्होंने कहा, “आपने देखा कि वे हमारे स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए और अंत में नाटक करने के बाद भाग गए। उनके पास अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने या मत विभाजन कराने का साहस नहीं था।
ऐसा लगा कि वे खुद ही बंटे हुए थे और उनके बीच एकता नहीं थी।” उन्होंने यह बात संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही, जिसमें उन्होंने बिरला के खिलाफ विपक्ष की कार्रवाई का जिक्र किया। सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस संसद की कार्यवाही में भाग लेने के बजाय भ्रम फैलाने में समय बिताती है। उन्होंने कहा, “इनका एकमात्र काम देश में भ्रम फैलाना है। अब कांग्रेस पार्टी के पास करने के लिए बस यही काम रह गया है।”
International Desk: ईरान के साथ जंग के बीच इजरायल के विपक्षी नेता यायर लैपिड का बड़ा बयान सामने आया है। Yair Lapid ने कहा है कि इजरायल एक “न्यायपूर्ण युद्ध” लड़ रहा है ताकि देश के नागरिकों को आतंकवादी संगठनों के हमलों से सुरक्षित रखा जा सके। तेल अवीव में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तरी इजरायल में लगातार खतरा बना हुआ है, क्योंकि Hezbollah और Iran की ओर से ड्रोन और रॉकेट हमले किए जा रहे हैं। लैपिड ने कहा,“अगर अभी सायरन बजे तो आपको तुरंत भागना होगा, वरना 10 सेकंड में मौत हो सकती है।
हिजबुल्लाह इस इलाके पर बमबारी कर रहा है और ईरान यहां ड्रोन व रॉकेट भेज रहा है। इसलिए हम यह युद्ध लड़ रहे हैं ताकि इजरायल के लोग सुरक्षित रह सकें।” वेस्ट एशिया में यह संघर्ष 28 फरवरी से और तेज हो गया, जब United States और Israel ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों के साथ पूर्व सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की भी मौत होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों तथा पश्चिम एशिया के कई इलाकों पर ड्रोन, मिसाइल व रॉकेट हमले किए।
इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले 24 घंटों में 179 घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। हालांकि मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये चोटें सीधे मिसाइल हमलों से हुईं या हमले के दौरान शेल्टर की ओर भागते समय। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद अब तक 2,745 लोगों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इजरायल ने दावा किया कि गुरुवार तड़के ईरान ने चौथी बार बैलिस्टिक मिसाइल हमला करने की कोशिश की।मिसाइल को हवा में ही रोक लिया गया। हमले के बाद Jerusalem, दक्षिणी इलाकों और West Bank में सायरन बजाए गए।
नेशनल डेस्क: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनियाभर में दिख रहा है। भारत में भी एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग और आपूर्ति को लेकर कुछ अव्यवस्था सामने आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नई जानकारी के अनुसार, अब ग्रामीण इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग का समय 25 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग की अवधि अभी भी 25 दिन ही है। ग्रामीण इलाकों में यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि हाल के दिनों में गैस की कमी को लेकर अफवाहें फैल रही थीं। लोग सिलेंडर जल्दी-जल्दी बुक कराने लगे थे, जिससे आपूर्ति में दबाव बढ़ गया।
LPG बुकिंग के नियमों में हालिया बदलाव
इससे पहले केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन करने का फैसला किया था। यह कदम जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, घरेलू ग्राहक पहले 55 दिनों के अंतराल पर सिलेंडर बुक करते थे, लेकिन हाल के दिनों में यह अंतराल घटकर 15 दिन तक आ गया था।
मध्य एशिया में चल रही जंग और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की खबरों के चलते एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया। यही कारण था कि मंत्रालय ने बुकिंग की अवधि बढ़ाने का फैसला किया।
मंत्रालय ने कहा: घबराहट में बुकिंग की जरूरत नहीं
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू रसोई गैस की पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है और लोगों को घबराहट में सिलेंडर बुक करने की कोई जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि घरेलू रिफाइनरी कंपनियों ने एलपीजी उत्पादन को 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आपूर्ति बाधित होने के बाद नए स्रोतों से कच्चा तेल प्राप्त करना भी सुनिश्चित किया है।
सरकार की आपूर्ति नीति
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार का ध्यान घरेलू उपयोगकर्ताओं तक ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, और इसका 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।
इसलिए यदि आपूर्ति बाधित होती है तो घरेलू उपयोग को वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की तुलना में प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को देखते हुए औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को मिलने वाली एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति में कटौती की है, ताकि 33 करोड़ से अधिक घरों तक रसोई गैस की नियमित आपूर्ति बनी रहे।
ग्रामीण और शहरी इलाकों में बुकिंग का अंतर
ग्रामीण इलाकों: अब एलपीजी सिलेंडर बुकिंग 45 दिन में कराई जा सकती है।
शहरी इलाकों: बुकिंग अवधि 25 दिन ही बनी हुई है। मंत्रालय का कहना है कि यह अंतर इसलिए है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अफवाहों के कारण अचानक बुकिंग बढ़ी थी और आपूर्ति पर दबाव पड़ा था।