औरैया। जिले में उच्च शिक्षा के लिए के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। खासतौर पर तकनीकी शिक्षा के लिए युवाओं को गैरजनपदों की दौड़ लगानी पड़ती है। यही हाल स्वास्थ्य सेवाओं का भी है। मेडिकल कॉलेज मिलने के बाद भी मरीजों का दर्द कम नहीं हुआ है। मेडिकल कॉलेज से लेकर सीएचसी में 150 में से 78 चिकित्सकों की कमी है। इसकी वजह से गंभीर मरीजों को गैर जनपद की परिक्रमा लगानी पड़ती है। साथ ही उद्योग स्थापित करने के आगे भी रॉ मैटेरियल और बाजार की कमी है। औरैया के लोगों ने विकसित उत्तर प्रदेश-2047 को लेकर कुछ ऐसे ही सुझाव दिए हैं।
जिले में अभी तक तीन हजार लोगों ने विकसित उत्तर प्रदेश-2047 को लेकर सुझाव दिए हैं। यह संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इन सुझावों का केंद्र स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार के इर्दगिर्द ही अभी तक देखने को मिला है। खास तौर पर उद्योगों को लेकर जिले में तेजी से कदम बढ़ाए जाने की मांग की गई है। उद्योगों के लिए बुनियादी जरूरतों और रॉ मैटेरियल की उपलब्धता के साथ अच्छा बाजार खड़े करने की मांग की गई है। निर्यात व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की गई है। पोर्टल पर उच्च शिक्षा को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं। जिले में 12 तक की पढ़ाई के लिए अच्छी व्यवस्था है लेकिन उच्च शिक्षा को लेकर कोई बेहतर संस्थान न होने का दर्द छलका है। महज बीए, बीएससी, बीकॉम की शिक्षा तो मिलती है लेकिन तकनीकी शिक्षा पाने के लिए यहां के युवाओं को गैरजनपदों की भागदौड़ करनी पड़ती है।
जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज की कमी युवाओं को पेशेवर बनाने में अखर रही है। वहीं स्वास्थ्य को लेकर बेहतर उपचार न मिलने का दर्द है। सरकारी अस्पताल तो बने हैं। लेकिन यहां पर संसाधनों से लेकर डॉक्टरों की कमी बेहतर इलाज में आड़े आ रही है। स्वास्थ्य विभाग की बात करें तो शहर का जिला अस्पताल इसकी बानगी दे रहा है। यहां 22 विशेषज्ञ डॉक्टरों की जगह महज नौ की तैनाती कर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। गंभीर घायलों की जान बचाने वाले ट्राॅमा सेंटर की बिल्डिंग तो तीन साल पहले बन गई थी लेकिन आज तक वहां पर संचालन शुरू नहीं हो सका है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षकों के 86 पद स्वीकृत हैं। महज 35 की तैनाती है। उधर, स्टाफ नर्स की 250 की जरूरत है लेकिन तैनाती महज 29 की है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी रहती हैं।
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अब गांवों में खुली बैठक कर लिए जाएंगे सुझाव
डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने विकसित उत्तर प्रदेश-2047 को लेकर ग्रामीण क्षेत्र से भी सुझावों को जुटाने की पहल शुरू की है। इसके लिए गांवों में चौपाल लगाकर सुझावों को लिया जाएगा। जिससे अंतिम व्यक्ति की बात भी शासन तक पहुंच सकेगी।
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सुझाव देने के मामले में जिले का प्रदेश में है 33वां स्थान
पांच अक्तूबर तक जिले में 30382 सुझाव पोर्टल के माध्यम से मिले हैं। प्रदेश स्तर पर ये आंकड़ा जिले को 33वें पायदान पर लाया है। जिसमें 26865 लोग ग्रामीण क्षेत्र से हैं। वहीं 3517 लोग शहरी क्षेत्र के हैं। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा सुझाव 31 से 60 वर्ष की आयु के लोगों ने 13637 सुझाव दिए हैं। 31 से कम आयु के युवाओं ने 14901 सुझाव दिए हैं। वहीं 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों ने 1526 सुझाव दिए हैं।