औरैया। मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी की दिशा में लगातार नए आयाम गढ़ रहा है। अब मेडिकल कॉलेज में पहली बार छह साल की बच्ची नेहा को एचएलएच (हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस) बीमारी से निजात दिलाई है। एक माह पहले जांच के दौरान बीमारी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद से ही टीम बच्ची को उपचार दे रही थी।बाल एवं शिशु रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. नेहा गुप्ता ने बताया कि करीब एक माह पहले अस्पताल में छह साल की नेहा को लेकर तीमारदार आए थे। बच्ची की हालत गंभीर थी। वह लंबे समय से बुखार से ग्रसित थी। उसका कई जगह इलाज भी हो चुका था फिर भी सेहत में सुधार नहीं हो रहा था। विस्तृत जांच में पता चला कि बच्ची के पेट व फेफड़ों में पानी भर गया था। लिवर की कार्यप्रणाली भी खराब थी। प्लेटलेट्स की संख्या भी बहुत कम हो गई थी।
जांचों के आधार पर डॉक्टरों की टीम ने बच्ची में एचएलएच होने की पुष्टि की। बाल एवं शिशु रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम ने विशेष उपचार प्रोटोकॉल में शुरू किया। एक माह तक चले इलाज के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार हो गया। बच्ची को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश वीर सिंह ने बताया कि बच्ची का इलाज कर एचएलएच बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए विभाग की स्वास्थ्य टीम का कार्य सराहनीय है। डॉक्टरों की टीम में विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. नेहा गुप्ता, मेडिकल ऑफिसर डॉ. रंजीत, डॉ. कर्मदीप सीनियर रेजिडेंट शामिल रहे।
क्या है एचएलएच रोग
विभाग्याध्यक्ष प्रो. डॉ. नेहा गुप्ता ने बताया कि एचएलएच एक दुर्लभ और गंभीर रोग है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली अनियंत्रित हो जाती है। अनियंत्रित होने पर यह प्रणाली शरीर के अपने ही अंगों और रक्त कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके कारण मल्टी-ऑर्गन डैमेज होता है। यदि समय पर इसका उपचार न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकती है।


